जब मुसलमानों ने ही किया मुस्लिम लीग का विरोध, जानें- ये था पूरा मामला

अखिलेश वाजपेयी, अमर उजाला लखनऊ Updated Tue, 23 Apr 2019 04:31 PM IST
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अंग्रेजों ने 1937 में भारतीयों को अपनी सरकार बनाने पर सहमति दे दी पर, गवर्नरों के जरिए सरकारों के कामकाज में हस्तक्षेप जारी रखा। उधर, मुस्लिमों को पृथक निर्वाचन क्षेत्र का अधिकार देने के बावजूद मुस्लिम लीग को प्रदेश में एक भी सीट पर जीत नहीं मिली थी।
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इससे लीग के नेता अंदर ही अंदर तत्कालीन कांग्रेसी सरकारों के खिलाफ अभियान चलाया करते थे। अंग्रेज भी लीग के अभियान को हवा देतेे थे। कांग्रेसी सरकारों ने विश्वयुद्ध के बाद देश को स्वतंत्र करने की मांग रखी पर अंग्रेजों ने अनसुना कर दिया।
‘क्रांति-आंदोलन’ : कुछ अधखुले पन्ने’ का एक संस्मरण बताता है, कि ‘3 नवंबर 1939 को देश के 11 प्रांतों की कांग्रेसी सरकारों ने त्यागपत्र दे दिया। मुस्लिम लीग के नेताओं ने 22 दिसंबर 1939 को देश भर में ‘मुक्ति दिवस’ मनाने का एलान किया। कई शहरों में दंगे हुए।
लीग ने लखनऊ के अमीरुद्दौला पार्क में एक सभा की लेकिन वहां करीब 500 लोग ही जुटे। पर, चौधरी खलीकुज्जमा जैसे नेता तो आग लगाने पर तुले थे। उन्होंने भाषण दिया, ‘कांग्रेस सरकारों ने मुसलमानों पर काफी अत्याचार किए।
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कई स्थानों पर मुसलमानों ने की सभाएं

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