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क्या नौकरी में आ रही परेशानियां वर्ष 2021 में हो जाएंगी समाप्त ? जानिए अनुभवी एस्ट्रोलॉजर्स से
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अमेरिका में रिसर्च छोड़कर वापस आए डॉ संदीप, बच्चों को विज्ञान के प्रति कर रहे जागरूक

डॉ. संदीप सिंह अमेरिका में पोस्ट डॉक्टरल रिसर्च छोड़कर वापस अपने देश आ गए हैं और ग्रामीण बच्चों को विज्ञान और तकनीक के प्रति जागरूक कर रहे हैं।

13 अक्टूबर 2020

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Digital Edition

राज्यसभा चुनाव : सपा समर्थित बजाज का नामांकन रद्द, बसपा समेत सभी उम्मीदवारों का निर्विरोध निर्वाचन तय

दिनभर चले नाटकीय घटनाक्रम और सपा-बसपा की तरफ से बुधवार को दिनभर चले तर्क-वितर्क के बाद आखिरकार देर शाम निर्वाचन अधिकारी अशोक कुमार ने सपा समर्थित प्रकाश बजाज का नामांकन रद्द कर दिया। साथ ही बसपा उम्मीदवार रामजी गौतम के नामांकन पर आपत्तियों को खारिज कर दिया। निर्वाचन अधिकारी के निर्णय के बाद राज्यसभा चुनाव में सभी दस सीटों पर निर्विरोध निर्वाचन तय हो गया। 2 नवंबर तक उम्मीदवार नाम वापस ले सकते हैं। नाम वापसी का समय बीतने के बाद सोमवार को निर्विरोध निर्वाचन की औपचारिक घोषणा की जाएगी।

ये चुने जाएंगे निर्विरोध  
भाजपा उम्मीदवार केंद्रीय नागरिक उड्डयन मंत्री हरदीप सिंह पुरी, राष्ट्रीय महामंत्री अरुण सिंह, पूर्व डीजीपी बृजलाल, नीरज शेखर, हरिद्वार दुबे, गीता शाक्य, सीमा द्विवेदी और बीएल वर्मा। सपा से प्रमुख महासचिव रामगोपाल यादव, बसपा से रामजी गौतम।

अपूर्ण होने की वजह से रद्द हुआ प्रकाश बजाज का नामांकन
सपा के समर्थन से राज्यसभा के चुनावी मैदान में उतरे प्रकाश बजाज का नामांकन पत्र अपूर्ण होने की वजह से रद्द कर दिया गया। निर्वाचन अधिकारी अशोक कुमार ने बताया कि निर्दलीय उम्मीदवार प्रकाश बजाज के एक प्रस्तावक का नाम गलत होने के साथ उनका शपथ पत्र भी आधा-अधूरा था। इसी आधार पर प्रकाश का नामांकन निरस्त किया गया। उन्होंने बताया कि जांच में बसपा उम्मीदवार रामजी गौतम का नामांकन पत्र पूरी तरह से वैध पाया गया। उनका कहना था कि एक बार प्रस्तावक बनने के बाद प्रस्तावक अपना प्रस्ताव वापस नहीं ले सकते हैं। इसलिए रामजी गौतम का नामांकन स्वीकार किया गया है। सारी प्रक्रिया नियमानुसार पूरी की गई है।
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सांकेतिक तस्वीर सांकेतिक तस्वीर

यूपी में कोरोना के 2,049 नए मरीज, कोरोना की सेकेंड वेव रोकने के लिए आज से फोकस सैम्पलिंग

प्रदेश में बुधवार को कोरोना के 2,049 नए मरीज मिले हैं। जबकि 2,742 संक्रमितों को स्वस्थ होने पर डिस्चार्ज किया गया। इसके साथ ही वर्तमान में प्रदेश में मरीजों के स्वस्थ होने की दर 93.18 प्रतिशत हो गया है। वहीं, बीते 24 घंटे में 18 मरीजों की मौत हुई। पिछली बार मृतकों की यह संख्या नौ जुलाई को थी। इससे प्रदेश में कोरोना से जान गवांने वालों की संख्या बढ़कर 6,958 हो गई है। अपर मुख्य सचिव चिकित्सा स्वास्थ्य अमित मोहन प्रसाद ने बताया कि प्रदेश में सक्रिय केस की संख्या 25,487 रह गई हैं। यह संख्या 17 सितंबर के पीक से 42,748 केस कम है। यानी अब तक करीब 63 प्रतिशत सक्रिय केस कम हो चुके हैं।

प्रदेश में कोरोना संक्रमण की सेकेंड वेव को रोकने के लिए 29 अक्तूबर से फोकस सैम्पलिंग का विशेष अभियान चलेगा। 16 दिन तक चलने वाले इस अभियान में दुकानों, रेस्टोरेंट, ब्यूटी पार्लर, धर्म स्थलों के लोगों के नमूने लिए जाएंगे। इसके लिए सभी जिलाधिकारियों को वीडियो कांफ्रेंसिंग से दिशा-निर्देश जारी कर दिए गए हैं। इसी तरह का एक अभियान जून में भी स्वास्थ्य विभाग ने चलाया था।

अपर मुख्य सचिव चिकित्सा स्वास्थ्य अमित मोहन प्रसाद ने बताया कि बृहस्पतिवार से शुरू होने वाले इस अभियान में ऐसे लोगों के नमूने लेने का लक्ष्य बनाया गया है, जो लोगों के ज्यादा संपर्क में आते हैं। इसका उद्देश्य यह है कि इन लोगों में कोरोना संक्रमण हो तो पता चल जाए और उसे अन्य लोगों में फैलने से रोका जा सके। फोकस सैम्पलिंग से संक्रमित लोगों को बाजार से हटाया जा सकेगा। उन्होंने बताया कि पड़ोस के राज्यों व कई देशों में कोरोन संक्रमण दोबारा फैल रहा है। वहां मरीजों की संख्या तेजी से बढ़ रही है। यूपी में कोरोना के केस ज्यादा न बढ़े, इसलिए ऐसे लोग जो लोगों से ज्यादा मिलते जुलते हैं, विशेष रणनीति बनाकर उनके जांच करने का फैसला किया गया है। उन्होंने बताया कि जून माह में भी इसी तरह समाज के अलग-अलग कामगार वर्ग के नमूने लेकर संक्रमण के फैलने के बारे में पता लगाया गया था।
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विश्वविद्यालय और डिग्री कॉलेजों में लागू होगा समान पाठ्यक्रम, कमेटी गठित   

प्रदेश के राज्य विश्वविद्यालयों और डिग्री कॉलेजों में शैक्षिक सत्र 2021-22 से समान पाठ्यक्रम लागू किया जाएगा। विश्वविद्यालयों और डिग्री कॉलेजों के लिए न्यूनतम समान पाठ्यक्रम लागू करने के लिए उच्च शिक्षा विभाग की अपर मुख्य सचिव मोनिका एस.गर्ग की अध्यक्षता में कमेटी गठित की गई है। 

प्रदेश के 16 राज्य विश्वविद्यालयों में अभी अलग-अलग पाठ्यक्रम संचालित है। न्यूनतम समान पाठ्यक्रम तैयार करने के लिए गठित समिति में लखनऊ विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. आलोक राय, बुंदेलखंड विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. जेवी वैशंपायन, चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय मेरठ के कुलपति प्रो. एनके. तनेजा और सिद्धार्थ विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. सुरेंद्र दुबे को सदस्य बनाया है। प्रत्येक संकाय के लिए पांच सदस्यीय सुपरवाइजरी कमेटी भी गठित की गई है। 
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बहुमूल्य किताबों का डिजिटलाइजेशन कर वेबसाइट पर करें अपलोड : आनंदीबेन

राज्यपाल आनंदीबेन पटेल इलाहाबाद संग्रहालय की सभी बहुमूल्य किताबों का डिजिटलाइजेशन कराकर उसे वेबसाइट पर अपलोड करने को कहा है। जिससे कोई भी इन पुस्तकों को आसानी से पढ़ सकें। उन्होंने संग्रहालय में निर्माणाधीन आजाद वीथिका के शेष कार्यों को जल्द पूरा कराने पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि तीन महीने बाद वह स्वयं इसका निरीक्षण करेंगी। राज्यपाल ने ये बातें बुधवार को राजभवन में प्रयागराज स्थित इलाहाबाद संग्रहालय की कार्यकारिणी समिति की बैठक की अध्यक्षता करते हुए कही। उन्होंनेे संग्रहालय के संचालन के लिए छह माह के भीतर कार्यालय मैनुअल बनाने के निर्देश भी दिए हैं।

इस मौके पर राज्यपाल ने इलाहाबाद संग्रहालय की आर्ट गैलरी का ऑनलाइन उद्घाटन किया। साथ ही संग्रहालय द्वारा प्रकाशित पुस्तक प्रयागराज दैट वाज इलाहाबाद का विमोचन किया। राज्यपाल ने 2018-19 और 2019-2020 की वार्षिक रिपोर्ट को भी स्वीकृति प्रदान की। बैठक में राज्यपाल के अपर मुख्य सचिव महेश कुमार गुप्ता, इलाहाबाद संग्रहालय के निदेशक सुनील गुप्ता, लखनऊ विश्वविद्यालय के प्राचीन इतिहास एवं पुरातत्व विभाग के अध्यक्ष प्रो. एसके जायसवाल मौजूद थे। जबकि केंद्र सरकार के संस्कृति मंत्रालय की संयुक्त सचिव निरूपमा कोतरू, डॉ. बीवी खरबड़े आदि ऑनलाइन जुड़े हुए थे।
 
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दिवाली की भीड़ से कोरोना संक्रमण फैलने का खतरा

राज्यपाल आनंदीबेन पटेल
अगले माह दीपावली की खरीदारी के लिए बाजारों में उमड़ने वाली भीड़ से कोरोना संक्रमण फैलने का खतरा है। इस आशंका को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग ने बाजारों से रैंडम कोविड सैंपल लेने की योजना बनाई है। 29 अक्तूबर से 12 नवंबर तक स्ट्रीट वेंडर, मिठाई की दुकान, सब्जी मंडी समेत अन्य जगह पर लोगों की एंटीजन व आरटीपीसीआर जांच कराई जाएगी।

स्वास्थ्य विभाग के अफसरों का कहना है कि दीपावली व उससे पूर्व बाजारों में भारी भीड़ जुटेगी। ऐसे में संक्रमण की रफ्तार और तेज होने की आशंका है। इसे रोकने के लिए विभाग की विशेष टीम सैंपलिंग अभियान चलाएगी। अभियान प्रतिदिन एक-एक करके हर इलाके में चलाया जाएगा। टीमें मुख्य रूप से रिक्शा चालक, स्ट्रीट वेंडर, रिक्शा चालक, ब्यूटी पार्लर, मंदिर, मॉल, बिजली की दुकान व मूर्ति बेचने वाली दुकानों पर जांच करेंगी। इस जांच के लिए विभाग ने मेडिकल कॉलेज से भी मैन पावर की मदद मांगी है। 

70 विशेष टीमें करेंगी जांच 
सीएमओ डॉ. संजय भटनागर ने बताया कि विशेष अभियान में 70 टीम लगाई गई हैं। टीम में एक लैब टैक्नीशियन, एक फार्मासिस्ट और एक स्टाफ नर्स होंगी। प्रतिदिन टीम को जांच का लक्ष्य दिया जाएगा। रोजाना 2100 तक लोगों की जांच की जाएगी।
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राज्यसभा चुनाव : सबसे बुरे दौर में बसपा, झटके पर झटका, लगातार साथ छोड़ रहे पार्टी विधायक

2017 के विधानसभा के चुनाव में सबसे निराशाजनक प्रदर्शन के बावजूद बसपा कोई सबक लेती नजर नहीं आ रही है। अलग-अलग मौकों पर अब तक आठ विधायक खुले तौर पर बगावती तेवर दिखा चुके हैं। विधानसभा की सात सीटों के लिए हो रहे उपचुनाव के बीच राज्यसभा चुनाव में पार्टी के ‘बहुजन समाज’ की छाप वाले चेहरों के मोहभंग के संदेश ने भविष्य की चुनौती और भी बढ़ा दी है। इससे 2022 का विधानसभा चुनाव बसपा के लिए और भी चुनौतीपूर्ण बन सकता है।

बसपा ने 2017 के विधानसभा चुनाव में 19 सीटें जीती थीं, लेकिन उसे पहला झटका तब लगा, जब मार्च 2018 के राज्यसभा चुनाव में उन्नाव से बसपा विधायक अनिल सिंह ने पार्टी लाइन से हटकर भाजपा प्रत्याशी के पक्ष में मतदान कर दिया। दूसरा झटका अंबेडकरनगर की जलालपुर विधानसभा सीट के उपचुनाव में लगा। पार्टी ने जलालपुर के विधायक रितेश पांडेय को 2019 के लोकसभा चुनाव में प्रत्याशी बना दिया। रितेश जीत गए, पर जब जलालपुर विधानसभा क्षेत्र का उपचुनाव हुआ तो सपा ने यह सीट बसपा से छीन ली।
 
पश्चिमी यूपी में पूर्व मंत्री रामवीर उपाध्याय बसपा के ब्राह्मण चेहरा माने जाते रहे हैं। लोकसभा चुनाव में टिकट को लेकर अनबन हुई और बसपा ने आगे चलकर उपाध्याय को पार्टी से निलंबित कर दिया। उपाध्याय सादाबाद से बसपा विधायक हैं। उनका बेटा भाजपा की सदस्यता ले चुका है। इन झटकों के बावजूद बसपा नेतृत्व का सत्ताधारी दल भाजपा के प्रति काफी समय से नरम रुख नजर आ रहा था। इससे पार्टी के मुस्लिम विधायकों में असहजता नजर आने लगी थी। श्रावस्ती से बसपा विधायक असलम राइनी पिछले वर्ष पार्टी लाइन से हटकर विधानसभा के विशेष सत्र में शामिल हुए। उन्होंने सत्र में शामिल न होने के लिए बसपा पर सवाल भी उठाए। राइनी ने कई बार मुख्यमंत्री योगी के कई निर्णयों की तारीफ  भी की। पर, पार्टी राइनी के खिलाफ  चुप रही। बसपा नेतृत्व के निर्णय को यह खुली चुनौती थी। पार्टी ने तब भी विधायकों के मिजाज का नोटिस लेने की जरूरत नहीं समझी।

बसपा के कई विधायकों को लग रहा था कि भाजपा राज्यसभा चुनाव में नौवां प्रत्याशी जरूर उतारेगी। बसपा विपक्षी दलों से कोई आंतरिक समझ बनाकर संख्या बल में कमजोर होने के बावजूद प्रत्याशी उतार रही है और चुनाव होगा। ऐसे में असंतुष्ट नजर आने वाले कई बसपा विधायक भी पार्टी प्रत्याशी के पक्ष में आ गए थे, मगर जब भाजपा ने सर्वाधिक अतिरिक्त वोट होने के बावजूद नौवां प्रत्याशी नहीं उतारा तो भाजपा विरोधी वोटों से सीट निकालने वाले विधायकों को अपना सियासी भविष्य संकट में नजर आने लगा। उन्हें अंदाजा हो गया कि पार्टी का आंतरिक पैक्ट विपक्षी दलों से न होकर सत्ताधारी दल से हो गया है और जनता में इस मैसेज के बाद उनकी चुनौती बढ़ सकती है। ऐसे में बसपा के आधा दर्जन विधायक खुलकर बगावती तेवर में आ गए। बसपा के लिए यह सबसे बड़ा झटका है।
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राज्यसभा चुनाव : भाजपा के सियासी दांव से विपक्ष चित, रणनीति बदलकर उलझाया 

सामान्य तौर पर राज्यसभा चुनाव की चौसर पर सपा हारकर भी सियासी बाजी जीती हुई दिखती है। ऐसा लगता है कि वह भाजपा और बसपा में सांठगांठ का संदेश देने  में सफल रही है । कुछ हद तक इसे सही भी मान लिया जाए तो भी गहराई से विश्लेषण करने पर पता चलता है कि सपा से ज्यादा भाजपा अपनी रणनीति में सफल रही। भाजपा के रणनीतिकारों के हाथों विपक्ष एक बार फिर सियासी अखाड़े में चारों खाने चित हुआ है। भाजपा के इस दांव ने 2022 के चुनाव में  विपक्षी एकता की रही सही संभावनाओं के लिए भी संकट खड़ा कर दिया।

आमतौर पर आक्रमक राजनीति के लिए पहचानी जाने वाली भाजपा ने इस बार सुरक्षात्मक  सियासी खेल खेला। शुरुआती तौर पर देखने में तो यह भाजपा की रणनीतिक चूक लगी कि उसने क्षमता होते हुए भी राज्यसभा चुनाव के लिए नौ की जगह सिर्फ  आठ उम्मीदवार उतारे। पर,  गहराई से देखने पर अब लगता है कि राज्यसभा की नौ सीटें जीतने की क्षमता होने के बावजूद सिर्फ  आठ उम्मीदवार उतारना उसकी रणनीतिक चाल थी।

विपक्ष के विखराव का संदेश
विपक्ष को एक सीट के जाल में उलझाकर भाजपा ने एक बार फिर यह संदेश दे दिया कि उससे निपटने का एलान करने वालों की प्राथमिकता आपस में ही एक-दूसरे से निपटने और निपटाने की है। वह यह साबित करने में भी सफल रही कि विपक्ष के पास कोई सकारात्मक मुद्दा नहीं है सिवाय विरोध के लिए भाजपा का विरोध करने के। जिस तरह सपा विधायकों के समर्थन से नामांकन की अवधि समाप्त होने से कुछ मिनट पहले प्रकाश बजाज का निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में नामांकन हुआ उससे वह कहीं न कहीं यह संदेश दिलाने में वह कामयाब रही कि अनुसूचित जाति के लोगों को कौन आगे बढ़ने से रोकना चाहता है?

कारण ये भी
बसपा ने सपा पर अनुसूचित जाति के लोगों की तरक्की बर्दाश्त न कर पाने का आरोप लगाकर इसी संदेश को आगे बढ़ाया। देखने में तो यह लगता है  कि राज्यसभा चुनाव के जरिये सपा ने बसपा के विधायकों में तोड़फोड़ कराकर यह साबित कर दिया कि भाजपा से मुकाबले की क्षमता वही रखती है। पर, रामजी गौतम और बजाज के नामांकन को खारिज कराने तथा बचाने की बुधवार को दिन भर चली खींचतान ने कहीं न कहीं न सिर्फ  दोनों दलों  के बीच खाईं को ज्यादा गहरा कर दिया है बल्कि विपक्ष को भी बिखरा दिया है। एक तो इस सियासी चौसर पर सपा की हार को किसी न किसी रूप में बसपा और भाजपा दोनों मुद्दा बनाएंगी और सपा को अनुसूचित जाति विरोधी साबित करने की कोशिश करेंगी तो भगवा टोली यह कोशिश भी करेगी कि बसपा के उम्मीदवार रामजी गौतम की जीत के संदेश का सियासी लाभ उसे भी कुछ न कुछ जरूर मिले।
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सहकारी बैंक भर्ती घोटाले में एफआईआर दर्ज, मुख्यमंत्री योगी ने दिए थे निर्देश 

सपा शासन में राज्य भंडारण निगम और सहकारी ग्राम विकास बैंक में हुई भर्तियों में घोटाले की जांच पूरी करने के बाद एसआईटी ने मुकदमा दर्ज कर लिया है। इनमें उप्र कोऑपरेटिव बैंक लिमिटेड के तत्कालीन प्रबंध निदेशक हीरालाल यादव व रविकांत सिंह शामिल हैं।
 
इनके अलावा प्रदेश सहकारी संस्थागत सेवा मंडल के तत्कालीन अध्यक्ष रामजतन यादव, सचिव राकेश कुमार मिश्रा, सदस्य संतोष कुमार श्रीवास्तव, कंप्यूटर एजेंसी एक्सिस डिजिनेट टेक्नोलॉजी प्राइवेट लिमिटेड के संचालक राम प्रवेश यादव, उप्र सहकारी संस्थागत सेवा, मंडल उप्र कोऑपरेटिव बैंक की प्रबंध समिति व बैंक के अन्य अधिकारियों व कर्मियों पर भी एफआईआर दर्ज की गई है। अब इन सभी पर शिकंजा कसेगा। मुख्यमंत्री योगी ने इस मामले की जांच जल्द पूरी करने के निर्देश दिए थे। 

योगी सरकार ने एसआईटी को वर्ष 2017 में सहकारिता विभाग व अधीनस्थ संस्थाओं में एक अप्रैल 2012 से 31 मार्च 2017 के बीच की गई सभी नियुक्तियों की जांच की जिम्मेदारी सौंपी थी। एसआईटी ने उप्र सहकारी भूमि विकास बैंक, उप्र राज्य भंडारण निगम व उप्र कोऑपरेटिव बैंक लिमिटेड में भर्ती के 49 विज्ञापनों के जरिए की गई भर्तियों की पड़ताल की। इनमें नौ विज्ञापनों से जुड़े 81 पदों पर भर्ती प्रक्रिया पूरी नहीं हो सकी थी, जबकि 40 विज्ञापनों से संबंधित 2343 के सापेक्ष 2324 पदों पर भर्ती की गई। छानबीन में पता चला कि सहकारी संस्थागत सेवा मंडल के जरिए कोऑपरेटिव बैंक में चार प्रकार के पदों पर भर्ती पूरी की गई, लेकिन इनमें अनिवार्य शैक्षिक योग्यता में नियमों के विपरीत परिवर्तन किया गया।

इन्हें पूछताछ के लिए बुलाया
एसआईटी ने प्रदेश सहकारी ग्राम विकास बैंक में तैनात रहे अधिकारियों-कर्मचारियों को दो नवंबर से 29 नवंबर के बीच बयान दर्ज कराने के लिए बुलाया है। इनमें तत्कालीन मुख्य प्रबंधक नारद यादव, प्रबंधक सुधीश कुमार, आंकिक आशीष जायसवाल, लेखाकार एस जायसवाल व बृजेश पांडेय और प्रबंधक कोंपल श्रीवास्तव शामिल हैं। 
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राज्यसभा चुनाव : भाजपा ने बसपा को वॉकओवर दिया तो सपा ने बदली रणनीति

राज्यसभा चुनाव में भाजपा ने बसपा को वॉकओवर देने की तैयारी की तो सपा एकाएक सक्रिय हो र्गई। बसपा को भाजपा के पाले में साबित करने के लिए आनन-फानन में निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में आखिरी वक्त में प्रकाश बजाज का नामांकन पत्र दाखिल कराया। उसकी रणनीति बसपा को भाजपा के पाले में खड़ा करने की थी। बसपा के आधा दर्जन विधायकों की बगावत से उसकी रणनीति कुछ हद तक कारगर भी रही। अब प्रदेश में जल्द ही एक और सियासी उठापटक की सुगबुगाहट तेज हो गई है। 

संख्या बल को देखते हुए राज्यसभा चुनाव में सपा ने सिर्फ रामगोपाल यादव को उम्मीदवार बनाया था। ऐसी संभावना थी कि भाजपा 9 प्रत्याशी उतारेगी। नामांकन की आखिरी तिथि 27 अक्तूबर थी। भाजपा ने 26 अक्तूबर की रात को 8 उम्मीदवारों का ऐलान किया। नौवें प्रत्याशी पर सस्पेंस कायम रखा। समाजवादी पार्टी के हल्कों में चर्चा प्रारंभ हो गई थी कि भाजपा नौवां प्रत्याशी नहीं उतारेगी। वह बसपा प्रत्याशी को वॉकओवर देकर राज्यसभा पहुंचाएगी।

भाजपा-बसपा की रणनीति को नाकाम करने केलिए 27 अक्तूबर को आनन-फानन में वाराणसी के अधिवक्ता प्रकाश बजाज का नामांकन निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में कराया गया। रणनीति यह थी कि राज्यसभा चुनाव के लिए मतदान की स्थिति बने। सपा नेताओं का कहना था कि बसपा तभी चुनाव जीत सकती हैं जब भाजपा उसकी मदद करे। यदि चुनाव नहीं हुए तो संदेश जाएगा कि भाजपा ने बसपा को राज्यसभा की एक सीट का तोहफा दे दिया है। इसी रणनीति के तहत 2.50 बजे सपा विधायक इरफान सोलंकी और राजकुमार यादव नाटकीय अंदाज में प्रकाश बजाज को लेकर सेंट्रल हॉल पहुंचे।
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