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सिंधिया के 'सड़क पर उतरेंगे' बयान के पीछे प्रियंका की राज्यसभा सीट! पढ़ें इनसाइड स्टोरी

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल Updated Mon, 17 Feb 2020 09:26 PM IST
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सीएम कमलनाथ, प्रियंका गांधी और ज्योतिरादित्य सिंधिया
सीएम कमलनाथ, प्रियंका गांधी और ज्योतिरादित्य सिंधिया - फोटो : Social Media
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मध्यप्रदेश में मुख्यमंत्री कमलनाथ और ज्योतिरादित्य सिंधिया के बीच जारी शीतयुद्ध में अब 10 जनपथ का भी प्रवेश हो चुका है। इस साल मध्यप्रदेश के कोटे से खाली हो रही राज्यसभा की दो सीटों पर पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह के अलावा प्रियंका गांधी के नाम की चर्चा तेज है। माना जा रहा है कि सिंधिया की जगह पर पार्टी प्रियंका गांधी को राज्यसभा भेज सकती है।
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अपने इस दांव से सीएम कमलनाथ ने ज्योतिरादित्य सिंधिया को न केवल मात दी है बल्कि उनके राज्यसभा जाने के अरमानों पर भी पानी फेर दिया है। कमलनाथ प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष पद पर भी अपने खास की नियुक्ति के लिए लगातार दिल्ली का दौरा कर रहे हैं।

सरकार के खिलाफ पीछे हटने को राजी नहीं सिंधिया
वहीं, सिंधिया घोषणापत्र के बहाने कमलनाथ सरकार पर लगातार हमला कर रहे हैं। उन्होंने सोमवार को ग्वालियर में कहा कि मैं जनता का सेवक हूं, जनता के मुद्दों के लिए लड़ना मेरा धर्म है। हमें सब्र रखना है और अगर जिन मुद्दों को हमने अपने वचनपत्र में रखा है उनको हमें पूरा करना ही होगा। अगर नहीं होगा तो हमें सड़क पर उतरना होगा। 

मंत्री इमरती बोलीं- सिंधिया सड़कों पर उतरे तो उनके साथ पूरे हिंदुस्तान की कांग्रेस उतरेगी
सिंधिया खेमे की मंत्री इमरती देवी ने समर्थन करते हुए कहा कि वचन-पत्र में वादे अकेले सिंधिया ने नहीं, राहुल गांधी, दिग्विजय सिंह, कमलनाथ और हम सबने किए हैं। सिंधिया सड़कों पर उतरे तो उनके साथ पूरे हिंदुस्तान की कांग्रेस उतरेगी। हालांकि बाद में उन्होंने खुद को संभालते हुए कहा कि हम वचनपत्र के काम पूरे कर रहे हैं और सड़क पर उतरने की जरूरत नहीं है।

कमलनाथ बोले- सिंधिया को सड़कों पर उतरना है तो उतरें
मुख्यमंत्री कमलनाथ ने सिंधिया के बयान पर कहा कि ‘उतरना है तो वो उतरें।’ कमलनाथ ने एक दिन पहले भी सिंधिया के बयान पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा था कि वचन-पत्र में जो वादे किए गए हैं वे पांच साल के लिए है, न कि पांच महीने के लिए। 

मध्यप्रदेश कांग्रेस में गुटबाजी हावी
मध्यप्रदेश कांग्रेस में मुख्यत तीन गुट सक्रिय हैं जिसमें एक गुट का नेतृत्व  मुख्यमंत्री कमलनाथ करते हैं, जबकि दूसरे का ज्योतिरादित्य सिंधिया। तीसरे गुट का नेतृत्व पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह करते हैं। राज्य में अंदरुनी खींचतान इस कदर हावी है कि तीनों गुट एक दूसरे के खुले तौर पर भी विरोध करते दिख जाते हैं।

प्रियंका के बहाने कमलनाथ ने सिंधिया को दी मात!
मध्यप्रदेश से राज्यसभा के लिए खाली हो रही दो सीटों को लेकर जारी खींचतान के बीच एक सीट पर दिग्विजय सिंह की ताजपोशी तय मानी जा रही है। लोकसभा चुनाव हार चुके ज्योतिरादित्य भी मुख्यमंत्री पद न मिलने के बाद राज्यसभा के जरिए अपनी राजनीति को आगे बढ़ाने की कोशिश में लगे थे। लेकिन, कमलनाथ ने प्रियंका गांधी की राज्यसभा के लिए दावेदारी जताकर सिंधिया को घेरने का फुलप्रूफ प्लान तैयार कर रखा है।

दिग्विजय का जलवा बरकरार
कमलनाथ और सिंधिया गुट में आपसी खींचतान का सीधा फायदा पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह को मिल रहा है। भोपाल से लोकसभा चुनाव हारने के बाद भी उनका राज्यसभा में जाना तय माना जा रहा है। दिग्विजय खुलकर मुख्यमंत्री कमलनाथ के समर्थन में हैं जिसका फायदा उन्हें भोपाल से लेकर दिल्ली तक मिल रहा है।

कांग्रेसप्रदेश अध्यक्ष पद को लेकर भी विवाद
कमलनाथ के मुख्यमंत्री बनने के बाद से ही यह कयास लगाए जा रहे थे कि वे प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष का पद छोड़ देंगे और सीएम के पद पर नंबर दो के दावेदार सिंधिया की ताजपोशी हो जाएगी। इसके अलावा सिंधिया गुट के विधायकों और नेताओं को सरकार-संगठन में बड़ा पद मिलने के आसार जताए जा रहे थे। लेकिन, कमलनाथ ने ऐसा होने नहीं दिया।

10 जनपथ नहीं दे पा रहा कोई समाधान
केंद्रीय नेतृत्व भी कमलनाथ और सिंधिया के बीच जारी खींचतान को खत्म नहीं कर सका है। जब भी राज्य में गुटबाजी तेज होती है तब सीएम कमलनाथ और सिंधिया को दिल्ली बुलाकर समझाया जाता है। हालांकि कुछ दिन बाद पार्टी में फिर कलह शुरू हो जाती है। 

 
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