ज्योतिरादित्य का सामना करने के लिए प्रशांत किशोर का सहारा ले सकते हैं कमलनाथ

शशिधर पाठक, नई दिल्ली Updated Sun, 24 May 2020 01:15 PM IST
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सीएम कमलनाथ
सीएम कमलनाथ - फोटो : एएनआई

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कुर्सी जाने की टीस कोई चाहे तो मध्यप्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ से पूछ ले। उनके दिमाग में बस भाजपाई बने ज्योतिरादित्य सिंधिया से राजनीतिक बदला लेने का भूत सवार है। कमलनाथ भाजपा और सिंधिया से उपचुनाव में ही इस हिसाब-किताब को पूरा कर लेना चाहते हैं। इसके लिए टीम कमलनाथ सभी विकल्पों पर विचार कर रही है। यहां तक कि चुनाव प्रचार अभियान के प्रमुख रणनीतिकार प्रशांत किशोर से भी मदद ले सकते हैं। सूत्र बताते हैं कि इसके लिए प्रशांत किशोर और कमलनाथ की बातचीत अंतिम दौर में हैं।
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मध्यप्रदेश में कुल 24 सीटों पर उपचुनाव होना है। एक सीट कांग्रेस और एक सीट भाजपा विधायक की मृत्यु से खाली हुई है। 22 सीट कांग्रेस विधायकों के बागी हो जाने के बाद खाली हुई है। इसमें से 16 सीटें ज्योतिरादित्य सिंधिया के प्रभाव वाले ग्वालियर चंबल संभाग से है। ग्वालियर चंबल संभाग में कांग्रेस पार्टी ने भाजपा और ज्योतिरादित्य सिंधिया को धोबी पछाड़ शिकस्त देने की रणनीति पर काम शुरू किया है। ज्योतिरादित्य की टीम इसे समझ रही है। उसने भी क्षेत्र के विकास के लिए सैकड़ो करोड़ रुपये के  परियोजनाओं की घोषणा समेत अन्य का खाका तैयार किया है। वरिष्ठ नेता गोविंद सिंह, केपी सिंह, पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह के लिए उप चुनाव नाक का सवाल है।

चुनाव की तारीख घोषित नहीं ...लेकिन तैयारी तेज


कांग्रेस से भाजपा में गए आदिवासी नेता प्रेमचंद गुड्डू वहां बागी हो चुके हैं। गुड्डू कांग्रेस पार्टी में शामिल होकर उपचुनाव में भाजपा की नाव डुबोने की तैयारी कर रहे हैं। भाजपा के कुछ और नेताओं ने मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान और भाजपा अध्यक्ष वीडी शर्मा का रक्तचाप बढ़ाना शुरू कर दिया है। ज्योतिरादित्य समर्थक ग्वालियर चंबल संभाग के विधायक टिकट को लेकर आश्वस्त हैं, लेकिन क्षेत्र में जीत सुनिश्चित करने के लिए जमीनी स्तर पर लॉकडाऊन के दौरान भी सक्रिय हैं। सभी 22 विधायकों को टिकट मिलने का भरोसा है। वहीं सभी उपचुनाव की 24 सीटों पर कांग्रेस के लिए चुनौती बनने वाले भाजपा नेताओं की पेशानी पर इसको लेकर बल है। कांग्रेस को लग रहा है कि यही स्थितियां उसके लिए नफे वाली साबित हो सकती है।

प्रशांत किशोर क्या कर लेंगे?

कमलनाथ की टीम के एक नेता ने प्रशांत किशोर की सहायता लिए जाने से इनकार नहीं किया है। हालांकि सूत्र का कहना है कि अभी इसमे समय लगेगा। माना जा रहा है कि प्रशांत किशोर चुनाव प्रचार की तैयारियों को जमीनी आधार दे देंगे। इससे पार्टी को जनता से कनेक्ट होने में काफी मदद मिलेगी। हालांकि कांग्रेस के नेता मानकर चल रहे हैं कि विधानसभा का उपचुनाव कोविड-19 संक्रमण की संभावना को देखकर टल भी सकता है। नियम के मुताबिक यह उपचुनाव सितंबर से पहले हो जाना चाहिए। लेकिन विशेषज्ञ अगस्त तक के समय को कोविड-19 के संक्रमण का पीक मानकर चल रहे हैं। इन सबके बावजूद कांग्रेस और भाजपा दोनों तैयारियों में कोर कसर नहीं छोड़ना चाहती।
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