पास होने के बावजूद दोबारा दे रहे परीक्षा

आफताब अजमत Updated Tue, 13 Aug 2013 10:46 AM IST
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utu carelessness creates problem for students

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उत्तराखंड तकनीकी विवि की एक बड़ी लापरवाही के चलते प्रदेश के सैकड़ों छात्रों को पास होने के बावजूद डिग्री लेने के लिए दोबारा परीक्षा देनी पड़ रही है। विवि को जब नियमों की याद आई, तब तक यह छात्र पासआउट हो चुके थे। डिग्री लेने आए तो उन्हें परीक्षा देने के लिए कहा गया। अब नौकरी से छुट्टी लेकर छात्र परीक्षा दे रहे हैं।
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परिवर्तन किए बिना ही यूटीयू ने परीक्षा करा दी
गढ़वाल विवि के केंद्रीय विवि बनने के बाद उसके सभी प्रोफेशनल पाठ्यक्रम वर्ष 2010 में उत्तराखंड तकनीकी विवि से संबद्ध कर दिए गए थे। इन पाठ्यक्रमों की परीक्षा नियमावली में तकनीकी विवि की नियमावली के तहत परिवर्तन किए बिना ही यूटीयू ने परीक्षा करा दी।
जिन छात्रों को एक्सट्रनल परीक्षा में 10 और इंटरनल परीक्षा में 30 अंक मिले थे, उन्हें भी उत्तीर्ण दिखा दिया गया। विवि की मानें तो केवल प्रथम वर्ष में ऐसा हुआ था और बाद में यूटीयू की परीक्षा नियमावली के तहत परीक्षाएं कराई गई।

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यह बात अलग है कि पूरे कोर्स के दौरान प्रथम वर्ष की इस गलती पर विवि प्रशासन की ओर से कोई संज्ञान नहीं लिया गया। 2012 में कोर्स पूरा करने के बाद जब छात्र उत्तीर्ण मार्कशीट के साथ नौकरी पर चले गए और उन्हें डिग्री की जरूरत पड़ी तो विवि को अपनी गलती की याद आई। जिन छात्रों के अंक एक्सट्रनल परीक्षा में कम थे उन्हें दोबारा उस विषय की परीक्षा देने का आदेश दिया गया। अब परेशान छात्र डिग्री पाने के लिए दोबारा परीक्षा दे रहे हैं।

यह है यूटीयू का नियम
उत्तराखंड तकनीकी विवि की परीक्षा नियमावली के तहत पास होने के लिए छात्र को एक्स्ट्रनल परीक्षा में निर्धारित अंक लाने आवश्यक हैं। मसलन, अंडर ग्रेजुएट प्रोफेशनल कोर्स में 30 प्रतिशत अंक और पोस्ट ग्रेजुएट प्रोफेशनल कोर्स में 40 प्रतिशत अंक अनिवार्य हैं।

यानी 70 अंकों की एक्स्ट्रनल परीक्षा में अंडर ग्रेजुएट के लिए छात्रों को कम से कम 21 अंक और पोस्ट ग्रेजुएट कोर्स के लिए छात्रों को कम से कम 28 अंक लाने अनिवार्य हैं।

2010 में तत्कालीन जिम्मेदार अधिकारियों के समय में यह गलती हुई थी। जब पकड़ में आई तो हमने छात्रों को दोबारा परीक्षा के लिए बोला है। वैसे भी, इससे छात्रों को ही लाभ होगा, क्योंकि उन्हें विवि परीक्षा का एक मौका और दे रहा है।
- डा. विजय जुयाल, परीक्षा नियंत्रक, प्रोफेशनल कोर्स
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