ड्यूटी ज्वाइन करनी है तो क्वारंटीन और फिटनेस सर्टिफिकेट साथ लाएं

Panchkula bureauपंचकुला ब्‍यूरो Updated Tue, 02 Jun 2020 02:18 AM IST
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मोहाली। डेराबस्सी सब डिवीजन के अधीन आने वाली फैक्टरियों में काम करने वाले लोग इन दिनों नई मुश्किल में आ गए हैं जो लोग बाहरी राज्यों से हैं और ड्यूटी ज्वाइन करने जा रहे हैं। उनसे कंपनी वाले क्वारंटीन टाइम का सर्टिफिकेट मांग रहे हैं। ऐसे ही कई लोग सोमवार को काफी संख्या में डेराबस्सी सिविल अस्पताल में पहुंचे।
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वर्करों का कहना था वे लोग दो महीने बाद कंपनी में दोबारा काम करने के लिए गए थे जहां उन्हें ये कहकर वापस भेज दिया कि वे अपना क्वारंटीन रहने के समय का सर्टिफिकेट और फिटनेस सर्टिफिकेट डेराबस्सी के सिविल अस्पताल की स्टैंप के करवाकर लाए तभी उनको वापस फैक्टरी में लिया जाएगा। वहीं, डेराबस्सी अस्पताल के कर्मचारी ने बताया 18 मई 2020 को कुछ कंपनियों की तरफ से कुछ फैक्टरी वर्कराें की लिस्ट दी गई थी। जिसमें उन लोगों के नाम और पते थे जिन्हें क्वारंटीन होने को बोला गया था। लिस्ट में वे लोग ज्यादा थे जिनका कोई लोकल पता नहीं था।
बीते शुक्रवार से पहले तक अस्पताल कर्मचारी रात रात तक बैठ कर इन वर्करों के लिए काम कर रहे थे। जिनका नाम लिस्ट में था और जिसका नाम लिस्ट में नहीं भी था, उनके लिए भी, शानिवार को जब इन वर्करों की गिनती बढ़ने लगी और अस्पताल के कोरोना वायरस रोधक टीम के सीनियर कर्मचारी ने फैक्टरी वालों से फोन पर बात की तो उनसे कोई जवाब नहीं मिला।
सेल्फ क्वारंटीन रहे पर हमारे पास प्रमाण नहीं
अस्पताल में मौजूद फैक्टरी वर्कर सुरिदंर ने बताया कि वे छह लोग हैं जो 6 मई को यूपी से बाइक पर वापस डेराबस्सी में आए और 7 मई से लेकर 27 मई तक अपने आपको किराए के कमरों में सेल्फ क्वारंटीन किया और 21 दिन पूरे होने के बाद जब वे फैक्टरी में वापस गए तो फैक्टरी वालों ने हमारे क्वारंटीन रहने का सर्टिफिकेट और फिटनस सर्टिफिकेट की मांग की जबकि हमारे पास ऐसा कोई प्रमाण पत्र नहीं था ऐसे में हम कहा जाएं। हालांकि फैक्टरी वालों का का कहना है कि वे सरकार की तरफ से दिए गए नियमों के आधार पर ही वर्करों के सर्टिफिकेट की मांग कर रहें हैं।
क्वारंटीन और फिटनेस सर्टिफिकेट के साथ आएं
अजे दुबे जो 25 मई को बिहार से वापस डेराबस्सी आए -तो उन्होंने कहा कि वे जब वापस ज्वाइनिंग के लिए फैक्टरी में गए तो उन्हें इतना कहा गया कि वे14 दिन के लिए क्वारंटीन रहें और इस के बारे सरकारी अस्पताल को बताकर ही क्वारंटीन हो और उसके घर की दीवार पर क्वारंटीन के बोर्ड और हाथ में लगी स्टैंप जो अस्पताल के कर्मचारी द्वारा लगाई गई हो उसकी फोटो और क्वारंटीन और फिटनेस सर्टिफिकेट के साथ आएं तभी उनको काम पर दोबारा लिया जाएगा और आज अजे दूबे अपना टेस्ट करवाने अस्पताल आए हुए थे।
दो महीने की सैलरी नहीं दी, अब नई समस्या
अस्पताल में मौजूद वर्कर विशाल का कहना है कि हमने सुना है नए लोगों की भर्ती की जा रही है जबकि हमें अप्रैल और मई महीने की सैलरी नहीं दी गई है। हम सब काम करना चाहते हैं तो नए लोगों को क्यों लाया जा रहा है जो इस वक्त फैक्टरी में काम कर रहें है उनको भी अधिक घंटे काम करने के लिए विवश किया गया है और हम बचे बाकि लोगों को फैक्टरी से निकालने के लिए ऐसे कामों में उलझाया जा रहा है यह एक साजिश से जायदा कुछ नहीं है।
कम स्टाफ में कैसे रखे इन लोगों का ब्योरा : टीम
डेराबस्सी कोरोना वायरस के लिए किए जा रहे टेस्ट और ब्योरा रखने वाली टीम का कहना है कि हम लोग पिछले 70 दिनों से अपना काम पूरी ईमानदारी से कर रहे हैं। जब से इन फैक्टरी वालों की समस्या आई है तो हम लोगों ने सुबह के 7 से रात के 10 बजे तक यहां बैठकर काम किया है। ऐसे में ये लोग काफी दिनों से सेल्फ क्वारंटीन रह चुके हैं और ठीक हैं। ऐसे में इन लोगों को दोबारा क्वारंटीन में रखने का क्या फायदा हैं और फैक्टरियों की तरफ से सारी जिम्मेवारी हम लोगों पर डाली जा रही है। ऐसे में कम स्टाफ के साथ हम कैसे इन लोगों का ब्योरा रखें।
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