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राजस्थान

बुधवार, 8 अप्रैल 2020

राजस्थान: लॉकडाउन के बीच डूंगरपुर पहुंचे बाप बेटे, निकले कोरोना पॉजिटिव

कोरोना वायरस की चेन तोड़ने के लिए देश में सरकार ने लॉकडाउन किया हुआ है। ऐसे में मजदूर महानगरों से अपने-अपने गांव पहुंच रहे हैं। इसी बीच इंदौर में काम करने वाले दो मजदूर मोटरसाइकिल के जरिए राजस्थान के डूंगरपुर जिले में स्थित अपने गांव पहुंच गए। जहां उनकी तबीयत खराब होने पर जब टेस्ट कराया गया तो वे दोनों कोरोना पॉजिटिव निकले।

राजस्थान के दक्षिणी आदिवासी जिले डूंगरपुर में बाप-बेटे की कोरोना परीक्षण रिपोर्ट पॉजिटिव आई है। वहीं डूंगरपुर में कोरोना मरीज मिलने की सूचना मिलने के बाद से पूरे जिले में हड़कंप मच गया है। यहां बड़ी संख्या में देशभर से मजदूर वापस पहुंचे हैं। इससे जिला-प्रशासन के हाथ-पांव फूल गए हैं।

25 मार्च को पहुंचे थे गांव
जिलाधिकारी कानाराम ने बताया कि बाप-बेटे मध्यप्रदेश के इंदौर शहर में रहते थे और देशबंदी के दौरान बाइक से 25 मार्च को अपने गांव पहुंचे थे। गांव और घर में 24 घंटे रहने के बाद 48 साल के पिता और 14 साल के बेटे दोनों की तबियत खराब हो गई। जिसके बाद उन्हें सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र ले जाया गया। 

जहां डॉक्टरों को दोनों में कोरोना वायरस के लक्षण मिले और उन्हें एंबुलेंस के जरिए जिला अस्पताल भेजा गया। जिलाधिकारी ने बताया कि जिला अस्पताल में दोनों के नमूने लेने के बाद उन्हें आइसोलेशन वार्ड में भर्ती किया गया है। उदयपुर से आई जांच रिपोर्ट में दोनों कोरोना पॉजिटिव मिले हैं। 

वहीं उनके पॉजिटिव मिलने के बाद जिला प्रशासन ने हरकत में आते हुए उनके घर से एक किलोमीटर के दायरे में कर्फ्यू लगा दिया है। इसके अलावा मरीजों के संपर्क में आने वाले परिजनों और अन्य लोगों को चिन्हित कर उन्हें क्वारांटाइन (एकांतवास) वार्ड में लाने का काम शुरू कर दिया है।

अभी तक डूंगरपुर जिले से 34 संदिग्धों के नमूने भेजे गए थे जिसमें से 27 की रिपोर्ट नेगेटिव और दो की पॉजिटिव आई है। इसके अलावा पांच की रिपोर्ट आना बाकी है। वहीं राजस्थान में संक्रमित मरीजों की संख्या 52 हो गई है।
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राजस्थान सरकार की कर्मचारियों को सौगात, महंगाई भत्ते में पांच फीसदी की वृद्धि की

Coronavirus : राजस्थान में 60 वर्षीय बुजुर्ग की मौत, कोरोना पॉजिटिव पाया गया था, संख्या 45 हुई

राजस्थान में कोरोना पॉजिटिव पाए गए एक 60 वर्षीय बुजुर्ग की भीलवाड़ा में गुरुवार रात मौत हो गई। वहीं प्रदेश में संक्रमित मरीजों की कुल संख्या बढ़कर 45 हो गई है। बता दें कि बुजुर्ग की मौत को राज्य में कोरोना वायरस के कारण हुई दूसरी मौत माना जा रहा है। 


जानकारी के अनुसार, राजस्थान के भीलवाड़ा में कोविड-19 पॉजिटिव और अन्य बीमारियों से पीड़ित 60 वर्षीय एक व्यक्ति की मौत हो गई है।  स्वास्थ्य विभाग के एक अधिकारी ने बताया कि मरीज की मौत के साथ ही उसके दो नजदीकी रिश्तेदार भी कोविड-19 से पॉजिटिव पाए गए हैं। इसके साथ ही राज्य में पॉजिटिव मरीजों की संख्या 45 पहुंच गई है।

उन्होंने कहा कि 60 वर्षीय मृतक पहले से ही दिल और किडनी संबंधी बीमारियों से पीड़ित था और उसे भीलवाड़ा के उस निजी अस्पताल में ले जाया गया, जहां के एक चिकित्सक और नर्सिंग कर्मी कोविड-19 पॉजिटिव पाए गए थे।

अतिरिक्त मुख्य सचिव (स्वास्थ्य) रोहित कुमार सिंह ने शुक्रवार को बताया कि मरीज की मौत गुरुवार रात को हुई थी। चिकित्कसकों का मानना है कि मरीज की मौत अन्य बीमारियों के कारण हुई है।

गुरुवार रात को 60 वर्षीय व्यक्ति की मौत के साथ राज्य में अब तक कोविड-19 पॉजिटिव और अन्य बीमारियों से पीड़ित दो लोगों की मौत हो चुकी है। राज्य में अब तक 45 कोविड-19 पॉजिटिव मरीज पाए गए हैं। राज्यभर में 22 मार्च से लॉकडाउन है।

अधिकारियों ने दावा किया कि दोनों मरीज की मौत अन्य बीमारियों के कारण हुई है। इससे पहले इटली के एक पर्यटक की वायरस से उबरने के बाद दिल और फेफड़े की समस्याओं के चलते राजधानी के एक निजी अस्पताल में दिल का दौरा पड़ने से मौत हो गई थी।

भीलवाड़ा के जिला कलेक्टर ने जिले में कोरोना वायरस मरीजों के लिए आइसोलेशन की सुविधा बढ़ाने के लिए पांच निजी अस्पतालों को नियंत्रण में लिया है।

कलेक्टर राजेंद्र भट्ट ने बताया कि जिला प्रशासन की रिपोर्ट के अनुसार 6445 लोगों को घर में ही पृथक करके रखा गया है। जिले में मरीजों के लिए अस्पतालों के अलावा होटल/रिसोर्ट/हॉस्टल को भी नियंत्रण में लिया गया है।

यहां 1511 क्वारेंटाइन बैड और 12,900 बैड डोरमेटरी और हॉल का प्रबंध किया गया है। जिला अस्पताल में 200 बैड के पृथक वार्ड के अलावा 35 बैड वाला आइसोलेशन वार्ड एक निजी अस्पताल में खोला गया है।
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Coronavirus: रामगंज में भीलवाड़ा मॉडल से काबू कर लेंगे हालात - अशोक गहलोत

राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत कोरोना के हॉटस्पॉट बने जयपुर के रामगंज मुहल्ले के हालात पर भी भीलवाड़ा मॉडल से जल्दी ही काबू पा लेने के लिए आश्वस्त हैं। भीलवाड़ा मॉडल का नाम लेते हुए गहलोत के चेहरे पर विजयी भाव उभर आते हैं क्योंकि इसे तमाम अन्य सीएम तथा केन्द्र भी सराह रहे हैं।

कहते हैं, 3 मार्च को इटली के पर्यटकों का कोविड-19 का पहला मामला जानकारी में आया था, उसके बाद ही मैं सतर्क हो गया था। राहुल गांधी को श्रेय देते हुए गहलोत कहते हैं कि कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष कोविड-19 को लेकर 12 फरवरी से चेता रहे थे। केन्द्र सरकार ने 22 मार्च से लॉकडाऊन की ओर बढ़ना शुरू किया था लेकिन हम 18 मार्च से राजस्थान में कोविड-19 से लडऩे के लिए इसे अपना रहे हैं।

40 स्थानों पर है कर्फ्यू, जयपुर के रामगंज को भी ठीक कर लेंगे

वीडियो वार्ता और फिर अमर उजाला से अलग से बातचीत में मुख्यमंत्री गहलोत ने कहा कि राजस्थान अभी कोविड-19 के खतरे से मुक्त नहीं हुआ है। 40 स्थानों पर अभी भी कर्फ्यू लगाया गया है। तीन स्तर पर टीमें बनाकर मानिटरिंग की जा रही है। लॉकडाऊन को लेकर पूर्व केन्द्रीय वित्त सचिव की अध्यक्षता में एक टास्क फोर्स बनी है। एक टास्कफोर्स और बनी है।

राज्य सरकार हालात पर नजर रखकर लोगों की जान बचाने में सक्रिय है। उप मुख्यमंत्री सचिन पायलट भी अपने स्तर से कोऑर्डिनेश के काम में लगे हैं। राज्य सरकार की रणनीति है कि हॉटस्पॉट बने रामगंज मोहल्ले में भी भीलवाड़ा की तरह रैंडम टेस्टिंग करके लोगों की पहचान कर इलाज किया जाएगा।

10 लाख रैपिड टेस्टिंग किट का आर्डर

गहलोत कहते हैं, राजस्थान की आबादी 7.5 करोड़ है और राज्य सरकार कम से कम पांच करोड़ लोगों की स्क्रीनिंग करना चाहती है। इसके लिए एक लाख बेड की व्यवस्था की जा रही है और 10 लाख रैपिड टेस्ट किट का आर्डर किया है। रैंडम टेस्टिंग के  जरिए इस लक्ष्य को पाने का संकल्प है।

इसके लिए चिकित्सकों, नर्सों अन्य स्टाफ के लिए मास्क, पीपीई किट आदि का भी इंतजाम किया गया है। अशोक गहलोत ने बताया कि वह केन्द्र सरकार के दिशानिर्देशों का पालन करते हुए कोविड-19 से लड़ने के लिए कृतसंकल्प हैं।

भारत से निर्यात समझ में नहीं आया

मुख्यमंत्री ने केन्द्र सरकार की निर्यात की नीति पर भी सवाल उठाया। उन्होंने राष्ट्रपति ट्रंप के हाइड्रोक्सी क्लोरोक्वीन के भारत से आयात पर जुड़े सवाल को लेकर कहा कि अपने लोगों की जान बचाना पहली प्राथमिकता होनी चाहिए। भारत को कोविड-19 से लडऩे के लिए संसाधनों की काफी जरूरत है।

ऐसे समय में केन्द्र सरकार द्वारा विदेशों को चिकित्सा से जुड़े उपकरणों या दवाओं के निर्यात की छूट देना समझ से परे है। 

क्या है भीलवाड़ा मॉडल?

अशोक गहलोत से इस मॉडल का नाम लेते ही उनके चेहरे पर विजयी भाव उभर आते हैं। बताते हैं, कई राज्य अब इसे अपना रहे हैं। केन्द्र सरकार को भी भीलवाड़ा मॉडल अच्छा लगा है। भीलवाड़ा के बांगड़ में एक अस्पताल के एक चिकित्सक कोविड-19 से संक्रमित हुए। उनसे यह संक्रमण 19 लोगों में फैला।

इसके बाद भीड़वाड़ा प्रशासन, राज्य सरकार, चिकित्सा विभाग ने कड़ा फैसला लिया। भीलवाड़ा से लगती गांवों, जिलों की सभी सीमाएं सील कर दी गईं। पूरे क्षेत्र में कर्फ्यू लगा दिया गया। जिलाधिकारी, पुलिस अधीक्षक, मुख्य चिकित्सा अधिकारी, जिला परिषद सब इस काम में लग गए।

3000 हजार टीमों का गटन किया गया। पूरे भीलवाड़ा को क्वारंटीन करके चीन और दक्षिण कोरिया की तर्ज पर घर-घर जाकर लोगों की स्क्रीनिंग की गई। फिर 10  दिन में 18 लाख लोगों की स्क्रीनिंग का काम हुआ। सर्दी, जुकाम, बुखार के कोविड-19 जैसी आशंका वाले संक्रमितों को आइसोलेट करके क्वारंटीन किया गया। गंभीर रूप से संक्रमितों का इलाज किया गया।

करीब छह लाख परिवारों के 30 लाख लोगों की स्क्रीनिंग के बाद भीलवाड़ा में कोविड-19 के संक्रमण पर काबू पा लिया गया। लोगों को क्वारंटीन करने के लिए सभी होटल, रेस्ट हाउस समेत अन्य रिसोर्स का इस्तेमाल किया गया। हास्टल आदि में बेड, आइसोलेशन की व्यवस्था की गई।

25-25 बेड के चार अस्पतालों में कोविड-19 के संक्रमित लोगों को रखा गया। साथ ही 7.2 लाख लोगों की निगरानी की गई। अब केवल 7 पॉजिटिव संक्रमण वाले मरीज रह गए हैं और मुख्यमंत्री गहलोत को भरोसा है कि जल्द ही ठीक करके घर भेज दिए जाएंगे।
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CM Ashok Gehlot CM Ashok Gehlot

कोरोना से अलग : राजस्थान हाईकोर्ट ने रद्द की ट्विटर के सीईओ डॉर्सी के खिलाफ एफआईआर

राजस्थान हाईकोर्ट ने मंगलवार को ट्विटर के सीईओ को पोस्टर विवाद में राहत देते हुए उनके खिलाफ दायर एक एफआईआर को रद्द कर दिया और उनकी गिरफ्तारी की मांग करने वाली एक याचिका को भी खारिज कर दिया। याचिका में उनकी गिरफ्तारी की मांग करते हुए डोरसे पर सोशल मीडिया पर एक आपत्तिजनक तस्वीर पोस्ट कर ब्राह्मण समुदाय की भावनाओं को आहत करने का आरोप लगाया गया था। 

अदालत ने इस मामले की सुनवाई पिछले महीने ही पूरी कर ली थी और फैसला सुरक्षित रख लिया था। आज इस मामले का फैसला सुनाते हुए जस्टिस संदीप मेहता ने कहा कि साल 2018 में जोधपुर के बासनी पुलिस थाने में दर्ज एफआईआर और व इसके आधार पर हुई अन्य प्रक्रिया को खारिज किया जाता है। 

बता दें कि पिछले साल विप्र फाउंडेशन के युवा मोर्चा के उपाध्यक्ष राजकुमार शर्मा ने ब्राह्मण विरोधी पोस्ट शेयर कर ब्राह्मणों की भावनाएं आहत करने का आरोप लगाए हुए याचिका दायर की थी। अधीनस्थ अदालत ने तब डोरसे के खिलाफ मामला दर्ज करने का आदेश दिया था। डॉर्सी ने इस फैसले को राजस्थान हाईकोर्ट में चुनौती दी थी। डॉर्सी की ओर से पैरवी प्रसिद्ध अधिवक्ता महेश जेठमलानी ने की। 

यह है पूरा मामला

साल 2018 में डॉर्सी एक पोस्टर को लेकर विवादों में फंस गए थे। अपनी भारत यात्रा के दौरान उन्होंने इस पोस्टर का विमोचन किया था। इस पोस्टर को जाति विशेष को लिए अपमानजनक और भावनाएं आहत करने वाला बताया गया था। ब्राह्मण समुदाय ने खासतौर पर इसे लेकर डॉर्सी की आलोचना की थी। 
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देशभर में लागू हो सकता है भीलवाड़ा मॉडल, इस तरह जिले में दी गई कोरोना को मात

राजस्थान का भीलवाड़ा जिला पिछले महीने कोरोना वायरस संक्रमण का हॉटस्पॉट बनकर उभरा था। यहां के एक निजी अस्पताल में डॉक्टर के कोरोना पॉजिटिव पाए जाने के बाद उस अस्पताल के कई स्वास्थ्यकर्मी भी पॉजिटिव हो गए थे लेकिन समय रहते सरकार ने इसे काबू में कर लिया।



कोरोना के बढ़ते मामलों को देखते हुए राज्य सरकार ने तुरंत एक्शन लिया और पूरे शहर में कर्फ्यू लगाकर बॉर्डर सील कर दिया गया। जिले की सीमाएं सील करते हुए 14 एंट्री पॉइंट्स पर चेक पोस्ट बनाईं, ताकि कोई भी शहर से न बाहर जा सके और न अंदर आ सके।  भीलवाड़ा में कोरोना के आंकड़ों को 27 पर ही रोक दिया गया। 16 हजार स्वास्थ्य कर्मियों की टीम को एक साथ भीलवाड़ा भेजा गया गया। स्वास्थ्य कर्मियों ने घर-घर जाकर स्क्रीनिंग शुरू कर दी।  इस दौरान करीब 18 हजार लोगों में सर्दी-जुकाम के लक्षण पाए गए। 

कोरोना संक्रमण के बाद देश में पहली बार भीलवाड़ा में इस तरह का काम शुरू किया गया और ये कारगर साबित हुआ। भीलवाड़ा में सरकार ने समय रहते तो जरूरी कदम उठाए हैं, वह सराहनीय है। अब भीलवाड़ा मॉडल को देशभर में लागू करने की बात कही जा रही है। कैबिनेट सचिव राजीव गौबा ने प्रदेश के मुख्य सचिव के साथ वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए भीलवाड़ा में किए गए उपायों की तारीफ करते हुए इस मॉडल को देशभर में लागू करने के संकेत दिए।

भीलवाड़ा 26 संक्रमितों और दो मरीजों की मौत के साथ राज्य का सबसे अधिक प्रभावित जिला था, लेकिन यहां 30 मार्च से एक भी कोविड-19 का नया मामला सामने नहीं आया है। वहीं देशभर में अब तक कोरोना के 4067 मामले सामने आ चुके हैं। मौत का आंकड़ा 109 पहुंच गया है। इस महामारी से दुनिया में 1,225,057 से ज्यादा लोग संक्रमित हैं। 
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कोरोना वायरस: राजस्थान में एक और व्यक्ति की मौत, संक्रमित मरीजों की संख्या 274 हुई

कोरोना वायरस से राजस्थान के कोटा शहर में संक्रमित एक व्यक्ति की रविवार देर रात मौत हो गई। इस व्यक्ति ने हाल में कोई यात्रा नहीं की थी। इस बीच, राज्य में कोरोना वायरस संक्रमण के आठ नए मामले सामने आने के साथ ही राज्य में संक्रमित लोगों की कुल संख्या बढ़कर 274 हो गई है।

अतिरिक्त मुख्य सचिव (स्वास्थ्य) रोहित कुमार सिंह ने बताया कि कोटा के एमबीएस अस्पताल में 60 वर्षीय एक व्यक्ति को निमोनिया, बुखार एवं खांसी की शिकायत के साथ भर्ती करवाया गया था। वह व्यक्ति कोरोना वायरस से संक्रमित पाया गया और रात 11 बजे उसकी मौत हो गई। सिंह ने बताया कि इस व्यक्ति ने हाल में कोई यात्रा नहीं की थी। हालांकि मरीज के इलाके से ही तब्लीगी जमात कार्यक्रम में शिरकत करने वाले कुछ लोग मिले हैं जो संक्रमित नहीं पाए गए हैं। अधिकारी पड़ताल कर रहे हैं।

चिकित्सकों, नर्सिंगकर्मियों सहित 50 से अधिक लोगों को क्वारंटीन किया गया  
जिले के सरकारी पीबीएम अस्पताल में एक महिला की मृत्यु के बाद चिकित्सकों, नर्सिंगकर्मियों सहित 50 से अधिक लोगों को आइसोलेशन केंद्र में भेजा गया है। अस्पताल में महिला की मौत के बाद कर्मचारियों में दहशत है। उनका कहना है कि जिस महिला का शव परिजनों को सौंपा गया था वह कोरोना वायरस से संक्रमित थी।

बीकानेर के पीबीएम अस्पताल प्रशासन ने 60 वर्षीय महिला की मौत के बाद कोरोना वायरस जांच की रिपोर्ट आए बिना ही शव शुक्रवार शाम को उसके परिजनों को सौंप दिया था। परिजनों ने शव का अंतिम संस्कार भी कर दिया।

इस संबंध में प्रशासन ने विभागीय जांच के आदेश दिए हैं। त्वरित प्रतिक्रिया बल ने मौके पर पहुंच कर महिला के अंतिम संस्कार में शामिल परिजनों को क्वारंटीन केन्द्र भेजा। बीकानेर के जिला कलेक्टर कुमार पाल गौतम ने बताया कि मामला प्रकाश में आने के बाद पीबीएम मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य और अस्पताल अधीक्षक से रिपोर्ट मांगी गई है।

बीकानेर के मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. बीएल मीणा ने बताया कि मृतक महिला के परिवार के 20 सदस्यों, 15 पड़ोसियों और करीब 15 अस्पताल कर्मियों को आइसोलेशन केन्द्र में भेजा गया है। उन्होंने बताया कि पीबीएम अस्पताल में रेफर की गई महिला एक निजी अस्पताल में भर्ती थी। निजी अस्पताल के छह कर्मियों को भी आइसोलेशन वार्ड में भेजा गया है। गुप्ता ने बताया कि इस मामले में लापरवाही हुई है लेकिन शव परिजनों को सभी आवश्यक दिशानिर्देशों के तहत सुपुर्द किया गया था।
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राजस्थान: एंबुलेंस में जन्मे नवजात की मौत, पिता ने अस्पताल पर लगाए गंभीर आरोप

कोरोना वायरस
राजस्थान के भरतपुर जिले के सरकारी अस्पताल के डॉक्टरों ने एक मरीज को इसलिए भर्ती करने से इनकार कर दिया क्योंकि वह मुस्लिम है और उन्हें जयपुर रेफर कर दिया गया। यह आरोप एक नवजात बच्चे के पिता का है। उन्होंने कहा कि मेरी पत्नी ने जयपुर जाते वक्त रास्ते में बच्चे को जन्म दिया, लेकिन नवजात की मौत हो गई।

नवजात के पिता का आरोप है कि जब वह एबुलेंस लेकर भरतपुर के आरबीएम जेनाना अस्पताल पहुंचे तो उन्हें दूसरी बार भगा दिया गया। भरतपुर के विधायक और राज्य के मेडिकल शिक्षा मंत्री सुभाष गर्ग ने इस आरोप से इनकार किया है कि परिवार को मुस्लिम होने की वजह से जयपुर भेजा गया था और कहा कि मामले की जांच के आदेश दे दिए गए हैं।

चिकित्सा शिक्षा विभाग के सचिव वैभव गलरिया ने कहा कि मामले में जांच के आदेश दे दिए गए हैं। उन्होंने कहा कि जिला प्रशासन जांच करेगा और यदि आवश्यक हुआ तो उचित कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने आरोपों को पूरी तरह से गलत बताया है। गर्ग ने कहा 'रोगी के एक रिश्तेदार और स्वयं रोगी द्वारा दिए गए बयान आरोपों को प्रतिबिंबित नहीं करते हैं। जांच के आदेश दिए गए हैं और हम रिपोर्ट का इंतजार कर रहे हैं।'

खान का कहना है कि उनकी पत्नी का इलाज कर रहे कर्मचारियों को लगा कि वह तबलीगी से जुड़े हुए हैं। उन्होंने कहा, 'जब हम कल रात सीकरी के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में गए, तो उन्होंने हमें जिला अस्पताल जाने के लिए कहा। हम आज सुबह भरतपुर अस्पताल गए। लेबर रुम में डॉक्टर्स ने मेरा नाम और पता पूछा। मैंने उन्हें अपना नाम बताया और कहा कि मैं नागर से आया हूं। उन्होंने मुझसे पूछा कि क्या मैं मुस्लिम हूं। मैंने कहा हां। इसके बाद डॉक्टरों ने कहा कि यदि तुम मुस्लिम हो तो तुम्हारा यहां इलाज नहीं हो सकता है।'
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राजस्थान में कोरोना वायरस से संक्रमित महिला की मौत, 17 नए मामले आए सामने

राजस्थान में कोरोना वायरस से संक्रमित 60 साल की महिला की शनिवार को मौत हो गई। यह महिला बीकानेर के पीबीएम अस्पताल में भर्ती थी और उसने हाल में कोई यात्रा नहीं की थी। इस बीच, राजस्थान में कोरोना वायरस संक्रमण के 17 नए मामले सामने आने से राज्य में संक्रमित लोगों की कुल संख्या बढ़कर 196 हो गई है।

अतिरिक्त मुख्य सचिव (स्वास्थ्य) रोहित कुमार सिंह ने बताया कि इन नए मामलों में आठ लोग तबलीगी जमात के कार्यक्रम में भाग लेकर लौटे हैं और ये लोग दिल्ली में धार्मिक कार्यक्रम में भाग लेने के बाद राज्य के विभिन्न हिस्सों में गए थे। इनमें से छह झुंझुनू और दो चुरू के लोग हैं।

जोधपुर में संक्रमण के पांच नए मामले सामने आए हैं। उन्होंने कहा, 'बीकानेर के पीबीएम अस्पताल में पिछले चार दिन से भर्ती एक बुजुर्ग महिला (60) की आज मौत हो गयी। उसने हाल में कोई यात्रा नहीं की थी। वह दिव्यांग थीं और वेंटिलेटर पर थी।'

उन्होंने कहा कि तबलीगी जमात से जुड़े मामलों में छह झुंझनू और दो चुरू जिले से हैं। बाकी के नौ में से पांच जोधपुर, तीन बांसवाड़ा और एक भीलवाड़ा से है। भीलवाड़ा में तीन में से दो की शुरुआती रिपोरेट नेगेटिव आई है लेकिन शनिवार को उनकी रिपोर्ट पॉजिटिव आई।

सिंह ने कहा कि भीलवाड़ा में एक निजी अस्पताल में भर्ती ओपीडी रोगी की रिपोर्ट पॉजिटिव आई है। यहां के डॉक्टर और नर्सिंग स्टाफ पहले कोरोना पॉजिटिव पाए गए थे। जोधपुर के ताजा मामलों पर जानकारी साझा करते हुए उन्होंने कहा कि दो एक महिला के करीबी हैं जिनकी रिपोर्ट पॉजिटिव आई है। उनका तबलीगी से कोई संपर्क नहीं है।

अधिकारी के अनुसार राज्य में कोरोना संक्रमितों की संख्या 198 हो गई है। पूराजा राज्य 22 मार्च से लॉकडाउन है और संभावित संक्रमित लोगों का पता लगाने के लिए बड़े पैमाने पर सर्वेक्षण और स्क्रीनिंग चल रही है।
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कोरोना: राजस्थान में सरकारी अधिकारियों को सीएम फंड में तीन दिन के बजाय दो दिन का वेतन देना होगा

राजस्थान सरकार ने गुरुवार को दो आदेशों में मामूली संशोधन किए, जिसमें एक आदेश कोविड-19 से निपटने के लिए राज्य कर्मचारियों द्वारा मुख्यमंत्री राहत कोष में योगदान के संबंध में था और दूसरा आदेश मार्च महीने में आंशिक वेतन में कटौती के लिए जारी किया गया था। 

राहत राशि के लिए राज्य कर्मचारियों के योगदान के बारे में 27 मार्च को जारी किए गए अपने आदेश को संशोधित करते हुए, सरकार ने अब निर्णय लिया है कि राज्य के अधीनस्थ सेवाओं के अधिकारी/कर्मचारी जिन्हें वेतन मैट्रिक्स के स्तर 5 से 9 के तहत मिलता है, उन्हें फंड में तीन दिनों के वेतन के बजाय दो दिनों का वेतन देना होगा। वही, इस महीने भुगतान करने के लिए आंशिक वेतन में कटौती के लिए 31 मार्च को जारी आदेश में भी मामूली संशोधन किए गए।

संशोधित आदेश के अनुसार, वेतन मैट्रिक्स के स्तर 1 से 4 के तहत राज्य सरकार के कर्मचारियों को अब वेतन स्थगित करने से छूट दी गई है। इससे पहले, उन्हें सकल वेतन में 30 फीसदी आस्थगित की श्रेणी में शामिल किया गया था।

31 मार्च को राज्य मंत्रिमंडल ने कोरोना वायरस महामारी संकट के मद्देनजर मार्च के लिए चार अलग-अलग श्रेणियों में मुख्यमंत्री से लेकर राज्य कर्मचारियों तक के 75 फीसदी, 60 फीसदी, 50 फीसदी और 30 फीसदी तक सकल वेतन को स्थगित करने का फैसला किया था।  
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कोरोना के 'हॉटस्पॉट' बने भीलवाड़ा में चार दिन में एक भी केस नहीं, 17 संक्रमित हुए ठीक

राजस्थान का भीलवाड़ा जिला पिछले महीने कोरोना वायरस संक्रमण का हॉटस्पॉट बनकर उभरा था। वहां अब 17 संक्रमितों के ठीक होने की खबर है। शुक्रवार को राज्य के अधिकारियों ने बताया कि कोविड-19 से संक्रमित 17 लोग ठीक हुए हैं, उनमें से नौ को अस्पताल से छुट्टी दे दी गई है।

अधिकारियों ने कहा कि भीलवाड़ा 26 संक्रमितों और दो मरीजों की मौत के साथ राज्य का सबसे अधिक प्रभावित जिला था, लेकिन यहां 30 मार्च से एक भी कोविड-19 का नया मामला सामने नहीं आया है।  

अतिरिक्त मुख्य सचिव (स्वास्थ्य), रोहित कुमार सिंह ने मीडिया को बताया कि यह भारी रोकथाम और जिला प्रशासन के साथ मिलकर काम करने के कारण संभव हुआ है। प्रशासन ने कर्फ्यू को सख्ती से लागू किया। 20 लाख से अधिक लोगों का व्यापक सर्वेक्षण किया गया और हमनें इन्फ्लूएंजा जैसे लक्षणों वाले लोगों की पहचान की।



सिंह ने कहा कि ठीक हुए 17 लोगों का इलाज 'हाइड्रोक्सीक्लोरोक्वीन' (एचसीक्यू), टैमीफ्लू और एचआईवी की दावाई के साथ किया गया। भीलवाड़ा के जिला कलेक्टर राजेंद्र भट्ट ने कहा कि जिन 17 लोगों को का इलाज किया गया है, उनमें से नौ का कोविड-19 टेस्ट नेगेटिव आया है। इन्हें अस्पताल से छुट्टी दे दी गई है और 14 दिन तक घर में  क्वारंटीन रहने के लिए कहा गया है।

पुलिस पहुंचाएगी जरूरत का सामान
प्रशासन किसी भी तरह के मामले को हल्के में नहीं लेना चाहता है। इसलिए जिले में लगे कर्फ्यू को 10 दिन के लिए बढ़ाने का फैसला किया गया है। इस दौरान आवश्यक वस्तुओं की दुकानें भी बंद रहेंगी, लेकिन लोगों के दरवाजे पर जरूरत के सामान मुहैया कराए जाएंगे। जनता को अपनी आवश्यकता हेल्पलाइन नंबर पर पर कॉल कर हमें बताना होगा। इस 10-दिन की अवधि के दौरान केवल दो बार ही सब्जियों की आपूर्ति की जाएगी।

सिंह ने कहा कि हम एक चूक की वजह से काबू में आए हालात को खराब नहीं करना चाहते हैं। यही वजह है कि 10 दिन के लिए कर्फ्यू लगाया गया है क्योंकि यह अवधि महत्वपूर्ण है। जिला कलेक्टर कार्यालय की 26 मार्च की रिपोर्ट के अनुसार पहला कोरोना पॉजिटिव मामला 19 मार्च को एक निजी अस्पताल में पाया गया था। जहां एक डॉक्टर ने मरीज का पॉजिटिव परीक्षण किया था। जल्द ही अस्पताल लगभग 17 लोगों के साथ प्रकोप का केंद्र बन गया, उनमें से सभी अस्पताल के कर्मचारी और मरीज थे, जिनका टेस्ट पॉजिटिव पाया गया था। 

शहर में संक्रमण के अब तक 26 मामले सामने आए हैं। इनमें से इलाज के बाद 17 की कोरोना रिपोर्ट नेगेटिव आई है। इन सभी को आइसोलेशन वार्ड से जनरल वार्ड में शिफ्ट कर दिया है। वहीं दो की मौत हो चुकी है। अब सात पॉजिटिव बचे हैं यह सभी भीलवाड़ा के एमजी हॉस्पिटल में भर्ती हैं।
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बीकानेर: चारे के ढेर में दब कर दो बच्चों की मौत, बेखबर माता-पिता करते रहे फसलों की कटाई

कोरोना वायरस: इंदौर के बाद अब जयपुर में डॉक्टरों के साथ मारपीट, एक आरोपी गिरफ्तार

मध्यप्रदेश के इंदौर के बाद अब राजस्थान के जयपुर से डॉक्टरों के साथ मारपीट का मामला सामने आया है। 31 मार्च की रात को डॉक्टरों की एक टीम जयपुर के रामगंज इलाके में कोरोना वायरस के मरीजों की पहचान के लिए गई थी। जिसके बाद मोहल्ले के लोगों ने डॉक्टरों के साथ मारपीट की।

मेडिकल टीम पर हमला करने के मामले में डॉक्टर अनिल शर्मा ने पुलिस थाना रामगंज में रिपोर्ट दर्ज कराई। पुलिस ने शिकायत के आधार पर रिजवान नाम के एक व्यक्ति को गिरफ्तार किया है। पुलिस ने आरोपी पर धारा आईपीसी 353, 332 और 188 के तहत मामला दर्ज किया है।

इससे पहले मध्यप्रदेश के इंदौर में कोरोना जांच के लिए गए स्वास्थ्य कर्मियों पर हमला हुआ था। इसपर मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान बेहद नाराज हैं। उन्होंने आरोपियों पर कड़ी कार्रवाई का भरोसा जताया है और कहा है कि इस घटना में शामिल किसी भी आरोपी को बख्शा नहीं जाएगा। 

सीएम ने ट्वीट किया, 'कोविड-19 के खिलाफ युद्ध लड़ने वाले मेरे सभी डॉक्टर्स, नर्सें, पैरामेडिकल स्टाफ, एएनएम, आशा कार्यकर्ता, आंगनवाड़ी कार्यकर्ता और नगरीय निकाय कर्मचारी, आप कोरोना के खिलाफ अपनी लड़ाई जारी रखें, आपकी सम्पूर्ण सुरक्षा की जिम्मेदारी मेरी है! मैं आपकी कर्तव्यनिष्ठा को प्रणाम करता हूं!'

उन्होंन ने दूसरे ट्वीट में कहा, 'इंदौर में हुई दुर्भाग्यपूर्ण घटना में शामिल अराजक तत्वों को किसी भी कीमत पर नहीं छोड़ा जाएगा! पीड़ित मानवता को बचाने के आपके कार्य में कोई भी बाधा डालेगा तो उसके खिलाफ सख्त से सख्त कार्रवाई की जाएगी! ये सिर्फ एक ट्वीट नहीं है। ये कड़ी चेतावनी है। मानवाधिकार सिर्फ मानवों के लिए होते हैं।'
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