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कोटा : 34 दिन में 106 बच्चों की मौत, मंत्री के लिए बिछी कालीन, किरकिरी होने पर हटाई

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जयपुर Updated Fri, 03 Jan 2020 10:56 PM IST
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कोटा के अस्पताल में मंत्रीजी के स्वागत के लिए बिछाई गई कारपेट
कोटा के अस्पताल में मंत्रीजी के स्वागत के लिए बिछाई गई कारपेट - फोटो : ani
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राजस्थान की कोचिंग नगरी कोटा के जेके लोन अस्पताल में नवजातों की मौत का सिलसिला जारी है। शुक्रवार को दो और मौत के साथ ही 34 दिन में 106 नवजातों की मौत हो चुकी है। वहीं, प्रशासन ने संवेदनहीनता की हद पार करते हुए अस्पताल पहुंचे स्वास्थ्य मंत्री के स्वागत के लिए कालीन बिछाई, हालांकि किरकिरी होने पर उसे हटाया गया। इस बीच, अस्पताल पहुंचे स्वास्थ्य मंत्री रघु शर्मा का विरोध करने दर्जन भर भाजपा कार्यकर्ताओं को पुलिस ने हिरासत में लिया।
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कोटा में नवजातों की मौत के मामले पर घिरने के बाद शर्मा शुक्रवार को अस्पताल पहुंचे। उनके पहुंचने से पहले रातों-रात अस्पताल का कायाकल्प कर दिया गया। वार्डों की सफाई से लेकर सभी बेड पर नई चादरें बिछा दी गईं। डॉक्टरों ने तत्परता दिखाते हुए सुबह आठ बजे ही अपने-अपने चैंबर में पहुंच गए। मरीजों और उनके तीमारदारों से कहा गया कि वह मंत्री के सामने सब कुछ अच्छा बताएं।

उधर, अपने नौनिहालों की मौत से परेशान परिजनों ने मंत्री के स्वागत के लिए अस्पताल के गेट पर कालीन बिछाने पर एतराज जताया और कहा हमारे बच्चे मर रहे हैं और अस्पताल में मंत्री के लिए कालीन बिछाई जा रही है। जेके लोन अस्पताल कोटा-बूंदी संसदीय क्षेत्र का सबसे बड़ा सरकारी अस्पताल है। लोकसभा स्पीकर ओम बिरला इसी क्षेत्र से सांसद हैं।

स्मृति ईरानी बोलीं, गहलोत की टिप्पणी से आहत हूं 

अस्पताल में बच्चों की मौत को लेकर शुक्रवार को केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी ने कहा कि पिछले साल 900 से अधिक मौत होने के बाद भी राजस्थान सरकार नहीं चेती। महिला एवं बाल विकास मंत्री ने कहा कि यह मामला स्वास्थ्य मंत्रालय से जुड़ा हुआ है और राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग इसकी रिपोर्ट मंत्रालय को सौंपेगा। उन्होंने कहा कि इस मामले में राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत की टिपण्णी से वह आहत हैं।

ईरानी ने कहा कि वर्तमान में राजस्थान के मुख्यमंत्री की ओर से जिस तरह के वाक्य मैं सुन रही हूं, उससे एक मां और भारतीय होने के कारण दुखी हूं। राजस्थान सरकार ने इतनी मौतों के बावजूद कोई कार्रवाई इसलिए नहीं की क्योंकि मरने वाले बच्चे गरीब थे। 

प्रदेश के अस्पतालों के 44 वेंटिलेटर व 1430 वार्मर खराब

आंकड़ों के मुताबिक, राजस्थान में हर साल 28 दिन से कम उम्र के 34 हजार से ज्यादा बच्चे दम तोड़ देते हैं। वहीं एक वर्ष तक के बच्चों की मौत का यह आंकड़ा 41,000 से ज्यादा है। इससे हालात का अंदाजा आसानी से लगाया जा सकता है कि बच्चों के इलाज के लिए 230 में से 44 वेंटिलेटर खराब हैं। वहीं 1430 वार्मर भी खराब हैं। अव्यवस्था का आलम यह है कि अलग-अलग उम्र के 490 से अधिक बच्चे हर सप्ताह दम तोड़ देते हैं।

मौत पर सियासत

जेके लोन अस्पताल में वैसे तो पिछले एक महीने से मौत का सिलसिला जारी है, लेकिन 25 दिसंबर के बाद आंकड़ा तेजी से बढ़ने के बाद प्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री ने महज एक जांच समिति को कोटा भेजकर अपना कर्तव्य पूरा कर दिया। जब उनसे पूछा गया कि इतनी देर से अस्पताल का दौरा क्यों किया, तो उनका कहना था कि जयपुर से ही स्थिति पर नजर रख रहे थे। इस मामले में अशोक गहलोत सरकार चौतरफा विपक्ष के निशाने पर हैं। मुख्यमंत्री गहलोत इस मुद्दे पर सियासत नहीं करने की अपील कर रहे हैं, वहीं भाजपा ने राजस्थान सरकार और कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी को निशाने पर लिया है।

रोज औसतन 180 बच्चे हो रहे रेफर 

राज्य के जिला अस्पतालों में सुविधाओं की कमी के कारण जयपुर, जोधपुर, उदयपुर, कोटा, बीकानेर, अजमेर मेडिकल कॉलेज के अस्पतालों में रोजाना औसतन 180 बच्चे रेफर हो कर पहुंच रहे हैं। सरकारी अस्पताल प्रबंधन मशीनों के खराब होने की जानकारी पोर्टल पर नहीं देते। उन पर निजी लैब संचालकों से सांठगांठ का आरोप है। कई सरकारी अस्पतालों में सुपर स्पेशियलिटी का डॉक्टर नहीं है।

मानवाधिकार आयोग ने गहलोत सरकार से मांगी रिपोर्ट

नई दिल्ली। राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने कोटा में बच्चों की मौत पर राजस्थान सरकार को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। आयोग की ओर से कहा गया है कि इतने बड़े पैमाने पर बच्चों की मौत दुखदायी और चिंता का कारण है। यह राज्य की जिम्मेदारी है कि नागरिकों को बुनियादी जरूरी चिकित्सा सुविधा मुहैया कराए। आयोग ने इस मामले में मीडिया रिपोर्ट पर स्वत: संज्ञान लेते हुए राज्य के मुख्य सचिव को नोटिस जारी कर चार हफ्ते में विस्तृत रिपोर्ट मांगी है।

सीएए के विरोध की जगह बच्चों पर ध्यान दें गहलोत
गहलोत जी, नागरिकता संशोधन कानून का विरोध करने के बजाय पहले कोटा में हर रोज मर रहे बच्चों पर ध्यान केंद्रित करें। थोड़ी चिंता दिखाएं, माताएं आपको कोस रही हैं। - अमित शाह, गृहमंत्री, जोधपुर की रैली मे

गहलोत राजनीतिक बयानबाजी कर रहे हैं, जो बेहद शर्मनाक, गैरजिम्मेदाराना और संवेदनहीन है। गहलोत को तुरंत बर्खास्त किया जाना चाहिए, अन्यथा और महिलाओं को अपने बच्चे गंवाने पड़ेंगे। - मायावती, बसपा अध्यक्ष
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