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Digital Edition

राजस्थान में कोरोना संक्रमण से एक और मौत, 150 नए मामले, संक्रमितों की संख्या 6377 हुई

कोरोना वायरस से देशभर में सबसे ज्यादा प्रभावित राज्यों में से एक राजस्थान में शुक्रवार को दोपहर दो बजे तक 150 नए मामले सामने आए जिससे राज्य में इस घातक वायरस से संक्रमित लोगों की कुल संख्या 6,377 हो गई है। 

गुरुवार को कोरोना वायरस संक्रमण से मौत के चार मामले सामने आने के बाद शुक्रवार को भी एक मौत का मामला सामने आया जिसके बाद राज्य में इस घातक वायरस से मरने वालों की संख्या 152 हो गई है। इसके साथ ही 77 लोग ठीक हुए है और 72 लोगों को डिस्चार्ज किया गया है। राज्य में कोरोना पॉजिटिव मामलों की कुल संख्या अब 6,377 है। इसमें 152 मौतें, 3,562 ठीक और 3,187 डिस्चार्ज हो चुके मामले शामिल हैं।

अतिरिक्त मुख्य सचिव रोहित कुमार सिंह ने बताया कि शुक्रवार को पाली में एक और संक्रमित की मौत हो गई। इससे राज्य में अब तक कोरोना वायरस संक्रमण से मरने वालों की कुल संख्या 152 हो गई है। केवल जयपुर में कोरोना वायरस संक्रमण से मरने वालों का आंकड़ा 75 हो गया है जबकि जोधपुर में 17 और कोटा में 13 रोगियों की मौत हो चुकी है।

हालांकि अधिकारियों का कहना है कि ज्यादातर मामलों में रोगी किसी न किसी अन्य गंभीर बीमारी से भी पीड़ित थे। इससे पहले राज्य में शुक्रवार सुबह नौ बजे तक कोरोना वायरस संक्रमण के 54 नए मामले दर्ज किए गए थे। इनमें कोटा में 17, डूंगरपुर में 14, जयपुर में 13, झुंझुनू में छह, अजमेर में दो व दौसा में एक नया मामला शामिल है।

राजस्थान में कोरोना वायरस संक्रमण के कुल मामलों में दो इतालवी नागरिकों के साथ- साथ 61 वे लोग भी हैं जिन्हें ईरान से लाकर जोधपुर व जैसलमेर में सेना के आरोग्य केंद्रों में ठहराया गया है। राज्यभर में 22 मार्च से लॉकडाउन है और अनेक थाना क्षेत्रों में कर्फ्यू लगा हुआ है।
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बस विवाद: सचिन पायलट ने योगी सरकार पर साधा निशाना, तुच्छ राजनीति का लगाया आरोप

राजस्थान प्रदेश कांग्रेस के अध्यक्ष और उप मुख्यमंत्री सचिन पायलट ने प्रवासी श्रमिकों को घर तक छोड़ने के लिए पार्टी द्वारा लगाई गयी बसों को अनुमति नहीं दिए जाने को लेकर शुक्रवार को उत्तर प्रदेश की भारतीय जनता पार्टी सरकार पर निशाना साधा और उसपर तुच्छ राजनीति करने का आरोप लगाया।

पायलट ने यहां संवाददाताओं से कहा, ‘इस मामले में उत्तर प्रदेश सरकार का जो रवैया रहा, उसे पूरे देश व दुनिया ने देखा है। हम उसकी भर्त्सना करते हैं।’ उन्होंने कहा, ‘इस समय सभी को एकजुटता के साथ लाखों करोड़ों मजदूरों की मदद का काम करना चाहिए था जिसकी पहल (कांग्रेस महासचिव) प्रियंका गांधी ने की लेकिन दुर्भाग्यवश उन्हें नकारा गया, उसपर राजनीति की गई और हम पर आरोप लगाए गए।’

उप मुख्यमंत्री ने कहा, मैंने पहली बार देखा है कि सत्तापक्ष की ओर से विपक्ष पर ऐसा आरोप लगाया जा रहा है और आरोप क्या है.. लोगों की मदद करने का आरोप। लोगों की मदद करना मानवीयता का काम है। चुनाव में हम सब लोग जनता की सेवा के लिए राजनीति में आते हैं सिर्फ विधायक या सांसद बनने के लिए नहीं।

इसके साथ ही पायलट ने दावा किया कि कांग्रेस ने मजदूरों को उनके घर तक छोड़ने के लिए जो 1,000 बसें जुटाईं थीं, वे सरकारी बसें नहीं थीं। उन्होंने कहा, ‘ये सरकारी बसें नहीं थीं। उत्तर प्रदेश के बहुत सारे नेता जनता को भ्रमित कर रहे हैं। ये निजी तौर पर एआईसीसी व पीसीसी, प्रियंका गांधी व कांग्रेस पार्टी के कार्यकर्ताओं ने निजी स्तर पर इकट्ठा की थीं।

पायलट ने कहा कि राज्य सरकारें हजारों बसें वैसे ही चला रही हैं लेकिन ये 1,032 बसें प्रदेश कांग्रेस कमेटी व अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी ने मिलकर जुटाई थीं। इसमें राज्य सरकार का कोई लेना-देना नहीं और यह रिकार्ड है। उत्तर प्रदेश के प्रवासियों को उनके घर भेजने के लिए कांग्रेस द्वारा भेजी गई बसों को उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा प्रवेश नहीं दिए जाने पर पायलट ने कहा कि किसी की मदद लेने से कोई छोटा नहीं बन जाता है।

उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार प्रवासी श्रमिकों के आवागमन के लिए कोई ठोस नीति अब तक पेश नहीं कर पाई है। इस अवसर पर राज्य के परिवहन मंत्री प्रताप सिंह खाचरियावास ने उन बसों का ब्यौरा भी रखा।

सड़क हादसे में एक ही परिवार के चार सदस्यों की मौत
राजस्थान के भरतपुर जिले में शुक्रवार सुबह हुए सड़क हादसे में एक दंपती सहित चार लोगों की मौत हो गई। यह हादसा लखनपुर थाना क्षेत्र में उस समय हुआ जब कार की अज्ञात वाहन से भिड़ंत हो गई।

थानाधिकारी पुरूषोत्तम लाल ने बताया कि नदबई तहसील के लुलहारा गांव के पास आगरा से जयपुर की ओर आ रही तेज गति की कार की अज्ञात वाहन से टक्कर हो गई जिससे कार में सवार अब्दुल गनी (50), उनकी पत्नी शकीला (45), पुत्र शहजाद (30) और एक अन्य रिश्तेदार सलमा (47) की मौके पर ही मौत हो गई।

उन्होंने बताया कि कार में सवार चारों लोग जयपुर के झोटवाड़ा के रहने वाले थे और सुबह आगरा से अपने घर आ रहे थे। इस संबंध में अज्ञात वाहन के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है।
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बस विवाद में आया नया मोड़, राजस्थान ने यूपी सरकार को भेजा 36 लाख का बिल

भाजपा और कांग्रेस के बीच बसों को लेकर हो रही राजनीति बढ़ती ही जा रही है। दोनों पक्षों की तरफ से आरोप-प्रत्यारोप का दौर जारी है। कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी द्वारा उत्तर प्रदेश सरकार को एक हजार बसें देने वाले प्रस्ताव को लेकर शुरू हुई राजनीति खत्म होने का नाम नहीं ले रही है। 

अब इस राजनीति में राजस्थान सरकार भी कूद पड़ी है। दरअसल, राजस्थान सरकार ने उत्तर प्रदेश सरकार को 36.36 लाख रुपये का बिल भेजा है। यह बिल कोटा से यूपी लाए गए बच्चों के लिए 70 बसें उपलब्ध करवाने का है। भाजपा राजस्थान सरकार की इस हरकत के बाद कांग्रेस को लेकर और अधिक हमलावर हो गई है। 


राजस्थान सरकार ने ये बिल उन छात्रों के नाम से भेजा है, जिन्हें राजस्थान परिवहन की बसों से कोटा से उत्तर प्रदेश भेजा गया था। दरअसल, यूपी सरकार ने कोटा में फंसे राज्य के छात्रों को लाने के लिए बसें भेजी थी, लेकिन छात्रों की संख्या अधिक होने की वजह से राजस्थान सरकार ने अपनी कुछ बसों से छात्रों को घर पहुंचाया। इसके लिए राजस्थान सरकार ने उत्तर प्रदेश सरकार को कुल 36,36,664 रुपये का बिल भेजा है। 

छात्रों की संख्या अधिक होने पर राजस्थान सरकार ने 70 बसों का इंतजाम किया था
कोरोना के प्रसार को रोकने के लिए सरकार ने लॉकडाउन लागू किया, जिस कारण राजस्थान के कोचिंग हब कोटा में करीब 12 हजार छात्र फंस गए थे। इनकी घर वापसी के लिए उत्तर प्रदेश सरकार ने  560 बसें भेजी थीं। रिपोर्ट्स के अनुसार, छात्रों की संख्या अधिक होने के कारण राजस्थान ने अपनी तरफ से 70 बसों का इंतजाम किया था। अब राजस्थान सरकार इन्हीं बसों का किराया मांग रही है। 

आधी रात दफ्तर खुलवाकर लिए 19 लाख रुपये
वहीं, बस विवाद पर भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता संबित पात्रा ने ट्वीट कर कांग्रेस को निशाने पर लिया है। पात्रा ने दावा किया है कि यूपी सरकार पहले ही 19 लाख रुपये डीजल के बिल के रूप में चुका चुकी है। 

पात्रा ने ट्वीट किया, 'कोटा से उत्तर प्रदेश के छात्रों को वापिस लाते समय यूपी के कुछ बसों को डीजल की आवश्यकता पड़ गई ..दया छोड़िए ..आधी रात को दफ्तर खुलवाकर प्रियंका वाड्रा की राजस्थान सरकार ने यूपी सरकार से पहले 19 लाख रुपए लिए और उसके बाद बसों को रवाना होने दिया, वाह रे मदद।'
 


 
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किसानों, उद्योगों एवं घरेलू उपभोक्ताओं को बिजली बिलों के भुगतान में अब 30 जून तक राहत

राजस्थान सरकार ने किसानों, उद्योगों एवं घरेलू उपभोक्ताओं को बिजली बिलों के भुगतान से दी गई राहत को अब 30 जून तक बढ़ाने का निर्णय किया है। पूर्व में यह राहत 31 मई तक के लिए दी गई थी। इससे पहले राज्य सरकार ने दो अप्रैल को किसानों, उद्योगों एवं घरेलू उपभोक्ताओं को बिजली बिल के भुगतान में 31 मई तक के लिए राहत देने की घोषणा की थी।
राज्य सरकार ने 150 यूनिट प्रतिमाह तक उपभोग करने वाले उपभोक्ताओं के मार्च एवं अप्रैल माह के उपभोग के बिलों के भुगतान को 31 मई तक स्थगित करने का निर्णय किया था जिसे अब 30 जून तक बढ़ाने का निर्णय किया है। बिजली बिलों का भुगतान नहीं होने पर बिजली का कोई भी कनेक्शन 31 मई तक नहीं काटे जाने के निर्देश दिए गए थे।


एक सरकारी बयान के अनुसार सरकार ने औद्योगिक प्रतिष्ठानों के बिजली कनेक्शन के मार्च एवं अप्रैल माह के उपभोग के बिल जो अप्रैल एवं मई में जारी होंगे, उनमें फिक्स्ड चार्ज (स्थाई शुल्क) को लॉकडाउन की अवधि के अनुसार 31 मई, 2020 तक स्थगित (डेफर) किया था।
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राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत (फाइल फोटो) राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत (फाइल फोटो)

राजस्थान में 31 के बाद भी जारी रहेगा ‘नाइट कर्फ्यू’, इन जगहों पर दिन में रहेगी छूट

राजस्थान सरकार ने 31 मई के बाद भी नाइट कर्फ्यू जारी रखने का फैसला किया है। सीएम अशोक गहलोत ने सभी अधिकारियों को यह सुनिश्चित करने का निर्देश दिया कि नाइट कर्फ्यू में किसी तरह की छूट न दी जाए।मुख्यमंत्री ने सभी अधिकारियों को सक्रिय संक्रमित मरीजों की संख्या के अनुसार निषिद्ध क्षेत्र को पुनर्निर्धारित करने का निर्देश दिया, ताकि प्रभावित क्षेत्र में केवल कर्फ्यू जारी रह सके।

साथ ही सीएम ने निर्देश दिया कि स्वास्थ्य नियमों का सख्ती से पालन किया जाए फिर चाहें वह वीआईपी के लिए ही क्यों न हो। उन्होंने कहा, राजस्थान महामारी अध्यादेश के तहत तय जुर्माना नियमों में भी कोई राहत नहीं दी जानी चाहिए। इसके अलावा उन्होंने निजी अस्पतालों को भी अपनी जिम्मेदारी समझने और कोरोना मरीजों को मुफ्त इलाज मुहैया कराने को कहा।

वहीं राजस्थान सरकार उसके दायरे में आने वाले स्मारकों को एक जून से खोलने की तैयारी कर रही है। इसके तहत कंटेनमेंट जोन और कर्फ्यू वाले इलाकों को छोड़कर अन्य जगहों के स्मारकों को मंगलवार, बृहस्पतिवार, शनिवार और रविवार को पर्यटकों के लिए खोला जाएगा। पहले सप्ताह में ये सुबह 9 बजे से दोपहर 2 बजे तक खुलेंगे और दूसरे हफ्ते में सुबह 9 से दोपहर 1 और दोपहर 3 बजे से शाम 5 बजे तक इन्हें खोला जाएगा।

इसके बाद तीसरे हफ्ते से इन्हें सप्ताह के सब दिन खोला जाएगा। राजस्थान में शनिवार को एक मरीज की मौत हुई और 49 नए मामले सामने आने के बाद कुल संक्रमितों की संख्या 8,414 हो गई।  
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राजस्थान में संक्रमण से दो की मौत, 91 नए मामले, संक्रमितों की संख्या 8158 हुई

कोरोना वायरस से देश में सबसे ज्यादा प्रभावित पांच राज्यों में से एक राजस्थान में कोरोना वायरस से शुक्रवार को दो और लोगों की मौत हो गई जिससे राज्य में इस बीमारी से मरने वालों की संख्या 182 हो गई है। वहीं 91 नए मामले सामने आने के बाद इस घातक वायरस से संक्रमित मरीजों की अब तक की कुल संख्या 8,158 पर पहुंच गई है।

अधिकारियों ने बताया कि राज्य में शुक्रवार को कोरोना वायरस से जयपुर और झुंझुनू में एक-एक मरीज की मौत हुई है। इससे राज्य में मृतकों की कुल संख्या 182 हो गई है। केवल जयपुर में कोविड-19 से मरने वालों का आंकड़ा 86 हो गया है जबकि जोधपुर में 17 और कोटा में 16 रोगियों की मौत हो चुकी है।

अन्य राज्यों के आठ रोगियों की भी यहां मौत हुई है। हालांकि, अधिकारियों का कहना है कि ज्यादातर मामलों में रोगी किसी न किसी अन्य गंभीर बीमारी से भी पीड़ित थे।

वहीं, राज्य में शुक्रवार सुबह 10 बजे तक संक्रमण के 91 नए मामले सामने आए। इनमें झालावाड़ में 42, नागौर तथा जयपुर में 12-12, चूरू में छह और उदयपुर तथा धौलपुर में पांच-पांच नए मामले शामिल हैं। राज्य में अब तक संक्रमितों की कुल संख्या 8,158 हो चुकी है।

राजस्थान में कोरोना वायरस संक्रमण के कुल मामलों में दो इतालवी नागरिकों के साथ 61 वे लोग भी शामिल हैं जिन्हें ईरान से लाकर जोधपुर तथा जैसलमेर में सेना के आरोग्य केंद्रों में ठहराया गया था। राज्यभर में 22 मार्च से लॉकडाउन है और कई थाना क्षेत्रों में कर्फ्यू लगा हुआ है।
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राजस्थानः कोरोना के डर से 14 घंटे तक पड़ा रहा बच्ची का शव, फिर एसडीओ ने किया अंतिम संस्कार

देश की जनता में कोरोना महामारी का खौफ इस तरह बैठ चुका है कि अब परिजन अपनों की मौत के बाद उनसे दूरी बनाने लगे हैं। ऐसा ही एक मामला राजस्थान के भीलवाड़ा जिले में सामने आया है, जहां चार माह की बच्ची की मौत के बाद  गांव के लोग उसके शव के अंतिम संस्कार के लिए तैयार नहीं हो रहे थे। दरअसल कोरोना संक्रमण के डर के कारण परिजन भी बच्ची के शव के पास जाने तक को तैयार नहीं थे। लगभग 14 घंटे तक शव यूंही घर में पड़ा रहा। आखिर में इलाके के एसडीओ महिपाल सिंह ने पहल करते हुए मासूम के शव को उठाया और उसे शमशान घाट ले गए। यहां एसडीओ ने गड्ढे खोदकर अपने हाथों से बच्ची का अंतिम संस्कार किया।

बच्ची का परिवार मुंबई से लौटा था घर 

जानकारी के मुताबिक यह दर्दनाक मामला भीलवाड़ा जिले के करेड़ा उपखंड के चावंडिया गांव का है। यहां बुधवार रात चार माह की एक बच्ची की मौत हो गई थी। बच्ची के पिता कोरोना पॉजिटिव होने के कारण जिला अस्पताल के आइसोलेशन वार्ड में इलाज चल रहा है। अधिक दस्त के कारण जान गंवाने वाली इस बच्ची का परिवार पिछले दिनों मुंबई से अपने घर वापस आया था। यहां आने पर उन्हें करेड़ा के क्वारंटाइन सेंटर में रखकर उनके सैंपल लिए गए थे।

इसमें बालिका के पिता की रिपोर्ट पॉजिटिव आई थी। जबकि बालिका, उसकी मां और बाकी परिजनों की रिपोर्ट नेगेटिव आने पर उन्हें होम क्वारंटाइन के लिए घर भेज दिया था। लेकिन इस दौरान बुधवार रात को बच्ची की तबीयत अचानक खराब हो गई। 

सीएमएचओ डॉ. प्रभाकर ने बताया कि बच्ची की तबीयत खराब होने की जानकारी मिलने पर उन्होंने गाड़ी भेज उसे अस्पताल पहुंचाया था, लेकिन उपचार के दौरान बच्ची की मौत हो गई। अस्पताल से बच्ची के शव को वापस गांव भेज दिया गया। लेकिन बच्ची के परिजन बच्ची का फिर से जांच चाहते थे और उसकी रिपोर्ट निगेटिव आने के बाद ही आगे की प्रक्रिया को तैयार होने की बात कही। इसके चलते बुधवार रात से गुरुवार दोपहर तक बच्ची का शव घर में पड़ा रहा।
  

सूचना मिलने पर पहुंचे एसडीओ महिपाल सिंह 

इसकी सूचना मिलने पर एसडीओ महिपाल सिंह और स्वास्थ्य विभाग के डॉक्टर दो घंटे से अधिक समय तक परिजनों से समझाइश करते रहे, लेकिन वो उसके अंतिम संस्कार के लिए राजी नहीं हुए। इसके बाद एसडीओ बच्ची के घर में प्रवेश कर उसका शव ले आए। और फिर शव को लेकर लेकर शमशान घाट पहुंच गए। यहां उन्होंने खुद गड्ढा खोदकर शव का अंतिम संस्कार किया।

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राजस्थान में दो की मौत, संक्रमण के 109 नए मामले, संक्रमितों की संख्या 7645 हुई

सांकेतिक तस्वीर
कोरोना वायरस से देश में सबसे ज्यादा प्रभावित राज्यों में से एक राजस्थान में कोरोना वायरस संक्रमण से दो और लोगों की बुधवार को मौत हो जाने से राज्य में इस वायरस से मरने वाले लोगों की संख्या बढ़कर 172 हो गई है।

इसके साथ ही राजस्थान में संक्रमण के 109 नए मामले सामने आए, जिससे राज्य में इस घातक वायरस से संक्रमित लोगों की कुल संख्या बढ़कर 7,645 हो गई।

अधिकारियों ने बताया कि जयपुर में दो और संक्रमित मरीजों की मौत हो गई है। इसके बाद राज्य में कोरोना वायरस संक्रमण से मरने वालों की कुल संख्या 172 हो गई है। केवल जयपुर में कोरोना वायरस संक्रमण से 83 लोगों की मौत हो गई है जबकि जोधपुर में 17 और कोटा में 16 रोगियों की मौत हो चुकी है।

हालांकि, अधिकारियों का कहना है कि ज्यादातर मामलों में रोगी किसी न किसी अन्य गंभीर बीमारी से भी पीड़ित थे। राज्य में बुधवार सुबह नौ बजे तक 109 और संक्रमित मरीज सामने आए। इनमें झालावाड़ में 64, कोटा में 16, नागौर में 12, जयपुर एवं भरतपुर में छह-छह, झुंझुनू में दो, बीकानेर, करौली एवं दौसा में एक-एक नया मामला शामिल है।

राजस्थान में कोरोना वायरस संक्रमण के कुल मामलों में दो इतालवी नागरिकों के साथ साथ 61 वे लोग भी शामिल हैं, जिन्हें ईरान से लाकर जोधपुर एवं जैसलमेर में सेना के आरोग्य केंद्रों में ठहराया गया था। राज्यभर में 22 मार्च से लॉकडाउन है और अनेक थाना क्षेत्रों में कर्फ्यू लगा हुआ है।
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सरिस्का बाघ अभयारण्य में दिखे तीन शावक

राजस्थान के अलवर जिले के सरिस्का बाघ अभ्यारण्य में तीन शावक कैमरे में देखे गए हैं। इन तीन शावकों के साथ ही सरिस्का बाघ अभयारण्य में बाघों की संख्या 20 हो गई है। मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने ट्वीट करके कहा है कि कोरोना वायरस चिंताओं के बीच बाघिन एसटी -12 ने अच्छी खबर दी है।

सरिस्का बाघ अभयारण्य में अब 2020 में 20 बाघ हो गए हैं। उन्होंने कहा कि उनकी इच्छा राज्य के इन जंगली जिंदगियों को देखने की है। एक अधिकारी ने बताया कि शावकों को सोमवार को कैमरे ने कैद किया। सरिस्का अभयारण्य में अब 16 वयस्क बाघ है।

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राजस्थान में कोरोना वायरस संक्रमण के 76 नए मामले, कुल संक्रमितों की संख्या 7376 हुई

कोरोना वायरस से देश में सबसे ज्यादा प्रभावित राज्यों में से एक राजस्थान में कोरोना वायरस संक्रमण के 76 नए मामले मंगलवार को सामने आए जिससे राज्य में इस घातक वायरस से अब तक कुल संक्रमितों की संख्या 7,376 हो गई।

अधिकारियों ने बताया कि मंगलवार सुबह नौ बजे तक जयपुर में 16, उदयपुर में 13, झालावाड़ में 12, राजसमंद में 11, झुंझुनू व बीकानेर में पांच-पांच, कोटा में चार, पाली में तीन व धौलपुर में दो नए मामले सामने आए हैं।

राज्य में कोरोना वायरस संक्रमण से मरने वालों की कुल संख्या 167 हो गई है। केवल जयपुर में कोरोना वायरस संक्रमण से मरने वालों का आंकड़ा 79 तक पहुंच गया है जबकि जोधपुर में 17 और कोटा में 16 मरीजों की मौत हो चुकी है। अधिकारियों का कहना है कि ज्यादातर मामलों में रोगी पहले से ही किसी न किसी अन्य गंभीर बीमारियों से भी पीड़ित थे।

राजस्थान में कोरोना वायरस संक्रमण के कुल मामलों में दो इतालवी नागरिकों के साथ साथ 61 वे लोग भी हैं जिन्हें ईरान से लाकर जोधपुर व जैसलमेर में सेना के आरोग्य केंद्रों में ठहराया गया था। राज्यभर में 22 मार्च से लॉकडाउन है और अनेक थाना क्षेत्रों में कर्फ्यू लगा हुआ है।
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राजस्थान : मुख्यमंत्री आवास के पास व्यक्ति ने की आत्महत्या करने की कोशिश

शहर के सिविल लाइंस इलाके में मुख्यमंत्री निवास के पास एक व्यक्ति ने जहर खाकर कथित तौर पर आत्महत्या का प्रयास किया। पुलिस ने उसे एसएमएस अस्पताल में भर्ती करवाया जहां उसका इलाज किया जा रहा है।

पुलिस के अनुसार इस व्यक्ति ने सिविल लाइंस रेलवे क्रॉसिंग व मुख्यमंत्री निवास के बीच कहीं जहर खा लिया। इस बीच कथित तौर पर इस व्यक्ति छेना राम द्वारा लिखा गया एक पत्र सोशल मीडिया पर वायरल हो गया।

इसके अनुसार वह नागौर जिले के एक गांव का रहने वाला है और पुलिस उस पर दबाव डाल रही है जिससे वह मानसिक दबाव में है। उसने आरोप लगाया है कि छह लोगों ने 18 मई को उसके साथ मारपीट की और उसे जान से मारने की धमकी दी लेकिन पुलिस उसकी शिकायत पर सुनवाई नहीं कर रही।

इस बारे में उसने पाडू कलां पुलिस थाने में शिकायत दर्ज करवाई। लेकिन स्थानीय पुलिस व थाना प्रभारी आरोपियों को पकड़ने के बजाय उसे ही मानसिक रूप से प्रताड़ित कर रहे हैं। पत्र के अनुसार वह पुलिस व प्रशासन के अधिकारियों को भी मामले से अवगत करा चुका है।
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पेट दर्द होने पर पता चला कि 17 सप्ताह का है गर्भ, छह के खिलाफ मुकदमा दर्ज

राजस्थान के भरतपुर जिले में 13 साल की लड़की के साथ सामूहिक दुष्कर्म का सनसनीखेज मामला सामने आया है। कामां थाना क्षेत्र के एक गांव में नाबालिग बालिका से तीन लोग करीब चार माह से सामूहिक दुष्कर्म कर रहे थे। 

बालिका के पेट में दर्द की शिकायत पर चिकित्सक को दिखाया तो पता चला कि उसे 17 सप्ताह का गर्भ है। इस मामले में बालिका के पिता ने छह जनों के खिलाफ सामूहिक दुष्कर्म, आरोपियों के परिजनों द्वारा मामला दर्ज कराने पर जान से मारने ओर गांव से निकाल देने का मामला दर्ज कराया है। 

पीड़िता के पिता ने थाने में मामला दर्ज कराया कि करीब 4 माह पूर्व उसकी पुत्री अपने पुराने मकान से गांव के बाहर बने नए मकान के लिए खेतों में से होकर जा रही थी तो सरसों के खेत के पास सद्दाम पुत्र रशीद, तौफीक पुत्र दीनू, मम्मन पुत्र कल्ला उसे जबरन पकड़ कर सरसों के खेत में ले गए और उसके साथ तीनों ने दुष्कर्म किया। इसके कुछ दिन बाद उसकी लड़की दुकान पर सामान लेने गई तो मम्मन उसे पकड़कर घर ले गया और दुष्कर्म किया।

इसके बाद जब और जहां बालिका मिलती तीनों उसके साथ दुष्कर्म करते। इससे भयभीत होकर बालिका अवसाद में आ गई ओर परेशान रहने लगी। 23 मई को बालिका के पेट में दर्द होने पर जब अस्पताल लेकर गए तथा सोनोग्राफी कराई तो बालिका के 17 सप्ताह के गर्भ का पता चला। 

24 मई को जब बालिका के परिजन जब आरोपियों के परिजनों के पास गए तो शेरू पुत्र रहमान, आजाद पुत्र रशीद, मुल्ला पुत्र शेरू ने जाति सूचक शब्दों से अपमानित कर कानूनी कार्रवाई करने पर जान से मारने और गांव से निकाले की धमकी दी। पिता ने सद्दाम, तौफीक, मम्मन, शेरू, आजाद व मुल्ला को नामजद करते दुष्कर्म का मामला दर्ज कराया है।
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देश के इकलौते क्वारंटीन सेंटर की कहानी, जहां के सकारात्मक माहौल में नहीं है कोरोना का खौफ, मिलती है शांति

पारड़ा चुंडावत क्वारंटीन सेंटर, यहां कोरोना का डर ही नहीं है, बाकी सब कुछ है। सेंटर में रहने वाले लोगों का जीवन बदल गया, दिनचर्या बदल गई। जब लोग यहां पर आए तो उन्हें यकीन नहीं हो रहा था कि क्वारंटीन सेंटर ऐसा भी हो सकता है।

सुबह उठो तो एरोबिक्स है, योगा है और संगीत है। भजन और देशभक्ति के गीतों में मन लगता है तो ठीक है अन्यथा आपकी पसंद से 'लता और किशोर' के गीत सुनाए जाते हैं। आपकी मर्जी है कि आप सुनना क्या चाहते हैं।

समाचार सुन सकते हैं और पढ़ भी सकते हैं। क्वारंटीन सेंटर पर रहने वाले लोग खुद अपना मेन्यू तय करते हैं। भोजन भी उसी के अनुरूप मिलता है। बच्चों के लिए चित्रकारी, अंताक्षरी, स्पेलिंग, पर्यायवाची व शब्द उच्चारण आदि के माध्यम से रोचक माहौल बनाया जाता है। बच्चों को बिल्कुल हॉस्टल सा माहौल मिलता है। 

रोल मॉडल बना डूंगरपुर का यह क्वारंटीन सेंटर

यहां बात हो रही है राजस्थान के डूंगरपुर जिले में स्थित क्वारंटीन सेंटर की। इस सेंटर पर आने वाले लोगों को कोरोना से डर नहीं रहता। संगीत, योग, और एरोबिक्स के जरिए उन्हें कोरोना से लड़ने की ताकत प्रदान की जाती है।

सूचना एवं जनसंपर्क कार्यालय की सहायक निदेशक छाया चौबीसा के अनुसार, वैश्विक महामारी के इस दौर में खासतौर पर क्वारंटीन सेंटर को लेकर भय की काल्पनिक तस्वीर बनी हुई है। डूंगरपुर जिले में स्थित एक क्वारंटीन सेंटर ऐसा भी है, जहां पर भय नहीं, केवल आनंद है।

नित्य नए नवाचारों से यहां मौजूद लोगों को हर पल जीवन को एक नए उत्साह से जीने का तरीका सिखाया जा रहा है। कभी उल्लास भरते गीत हैं तो कभी मन को शांत करने के लिए आध्यात्म का पाठ है।

कभी म्यूजिक थेरेपी से भीतर की सकारात्मक उर्जा को जागृत किया जाता है तो कभी योग और ध्यान से मन को साधने की कला को सिखाया जा रहा है। इन नवाचारों का परिणाम है कि यहां रहने वाले लोगों के मन में कोरोना के लिए डर दूर हो चुका है।

इन अनूठे नवाचारों की बदौलत डूंगरपुर जिले का पारड़ा चुंडावत क्वारंटीन एक रोल मॉडल के रूप में विकसित हुआ है।

संगीत, योगा, एरोबिक्स और मेडिटेशन से बना सकारात्मक माहौल

क्वारंटीन सेंटर पर रहने वालों की नींद अल सुबह 6 बजे मधुर भजनों के साथ खुलती है। दैनिक क्रिया करने के बाद योग की क्लास लगती है। दो टीम योग कराती हैं। कुछ लोग खुले मैदान में योग करते है तो अन्य अपने कमरों में रहते हुए योगाभ्यास करते हैं।

कमरे में मौजूद लोगों में से ही एक व्यक्ति दरवाजे के बीच में खड़ा होता है। वह बाहर मैदान में योग करने वालों को देखकर योग क्रियाएं संपादित करता है। इसे सेंटर के भीतर मौजूद सभी लोग फॉलो करते हैं।

पूर्ण सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करते हुए योग कराया जाता है। इसके बाद म्यूजिक पर एरोबिक्स होता है। उसके बाद पसंद का नाश्ता मिलता है। नहाने के बाद दोपहर का भोजन और आराम की नींद।

सायं 5 बजे पसंद के फिल्मी गाने, जिसमें किशोर कुमार, रफी, लता मंगेशकर आदि अन्य गायकों के गाने सम्मिलित हैं, सुनाए जाते हैं। उसके बाद वे लोग भजन, आरती और देशभक्ति के गानों के साथ भोजन करते हैं।

साइकोलॉजिकल सपोर्ट के लिए काउंसलिंग दी जाती है

क्वारंटीन सेंटर पर आने वालों लोगों के मन में एक अनावश्यक भय होता है कि कहीं कुछ हो न जाए। अब उनके घर-परिवार का क्या होगा। ऐसे कई सवाल उनके दिमाग में आते हैं। शुरू में कई लोग इसके चलते गुमसुम हो जाते हैं।

ऐसे में इन लोगों को साइकोलॉजिकल सपोर्ट देने के लिए काउंसलिंग दी जाती है। सोशल डिस्टेंसिंग का ध्यान रखते हुए शरीर-क्रिया विज्ञान को आध्यात्म से जोड़ते हुए समझाया जाता है।

सेंटर प्रभारी एवं उपखण्ड अधिकारी साबला मनीष फौजदार का कहना है कि शुरुआती दिनों में देखा गया कि यहां पर आने वाले दिनभर गुस्सा करते थे। उनमें चिड़चिड़ापन भी देखा गया। हमनें उनकी इस परेशानी को समझा।

इन लोगों को मानसिक शांति देने का प्रयास शुरू हुआ। दिमाग को डायवर्ट करने के लिए कई गतिविधियां चालू की गईं। म्यूजिक थेरेपी की मदद ली गई। म्यूजिक सिस्टम हॉस्टल में लगाकर इसे यूट्यूब से जोड़ दिया गया।

दिनभर का शेड्यूल भी तैयार किया गया। यानी सुबह भजन, दोपहर को फिल्मी गाने, शाम को भजन, आरती और देशभक्ति फरमाइश गीत लगाने शुरू कर दिए। इसके परिणाम सामने आए। चिड़चिड़ापन गायब हो गया।

जिला कलेक्टर कानाराम का कहना है कि पारडा चुण्डावत क्वारंटीन सेंटर पर किए गए नवाचारों से वहां मौजूद लोगों में डर नहीं वरन, एक सकारात्मकता आई है। निसंदेह यह प्रयास सराहनीय एवं अनुकरणीय है। 
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