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पंचायत चुनाव: खुद स्कूटी चलाकर मतदान करने पहुंचे 102 साल के रुमेल

हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा जिले के विकास खंड फतेहपुर की पंचायत लाड़थ के वरोह गांव के 102 वर्षीय सेवानिवृत्त कैप्टन रुमेल सिंह पठानिया खुद स्कूटी चलाकर म...

22 जनवरी 2021

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Digital Edition

जिला परिषद नतीजों से भाजपा को मिली कड़े परिश्रम की सीख

जिला परिषद के नतीजों से हिमाचल भाजपा को कड़े परिश्रम की सीख मिली है। इससे तय है कि मिशन रिपीट के लिए जयराम सरकार को दो साल कड़ी मशक्कत करनी होगी। बेशक ज्यादातर जिलों में भाजपा आगे हैं, पर अगर ढील रही तो आगे राह आसान नहीं होगी। दो साल पहले लोकसभा चुनाव में प्रचंड मोदी लहर से सभी विधानसभा हलकों में भाजपा ने कांग्रेस को चारों खाने चित कर दिया था। पर जिला परिषद चुनाव में भाजपा का वही ग्राफ बना नहीं रह पाया है।

भाजपा सबसे बुरी तरह से कांग्रेस के दिग्गज नेता वीरभद्र सिंह के गृह जिला शिमला में हारी है। सोलन, सिरमौर आदि जिलों में भी कांग्रेस ने इसे कांटे की टक्कर दी है। इस हिसाब से शिमला संसदीय क्षेत्र ने भाजपा को चिंता दे दी है। खास बात यह है कि इसी संसदीय क्षेत्र के सिरमौर जिला से भाजपा के प्रदेशाध्यक्ष सुरेश कश्यप हैं जो अपने हलके पच्छाद में जिला परिषद की दोनों सीटें नहीं बचा पाए हैं। यह भी पार्टी के लिए अच्छा संदेश नहीं है।

मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर के गृह जिला मंडी में भाजपा सांसद रामस्वरूप शर्मा के क्षेत्र में भी भाजपा को मुंह की खानी पड़ी है। भाजपा प्रदेशाध्यक्ष सुरेश कश्यप हालांकि जिला परिषद के 239 में से 156 वार्डों में भाजपा की जीत की दावा कर रहे हैं, जिनमें संभवतया वह अपने बागियों और निर्दलीयों की भी गिनती कर रहे हैं। पर शनिवार देर शाम तक भाजपा समर्थित 104 उम्मीदवारों पर ही स्थिति साफ हो पाई थी । भाजपा समर्थित उम्मीदवारों के खिलाफ खड़े हुए भाजपा के दस बागी भी चुनाव जीते तो सत्तारूढ़ दल की विचारधारा के विजेताओं का स्पष्ट आंकड़ा 114 बन रहा था।

कांग्रेस 67 और निर्दलीय 48 सीटों पर विजयी हुए, जबकि माकपा भी आधा दर्जन से ज्यादा सीटों पर चुनाव जीत चुकी थी जो तीसरे मोर्चा बनने का फिर प्रयास कर रही है। इससे साफ होता है कि प्रदेश विधानसभा चुनाव से ठीक दो साल पहले हुए इन चुनावों ने भाजपा को आत्मचिंतन के लिए विवश कर दिया है। विपक्ष के मजबूत गढ़ों पर ही नहीं, बल्कि अपने दिग्गजों के हलकों में भी भाजपा के लिए अब नई चुनौती खड़ी है।
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भाजपा भाजपा

हिमाचल: प्रदेश अध्यक्ष के गृह क्षेत्र पच्छाद में भाजपा ने हारे जिप के दोनों वार्ड

हिमाचल प्रदेश भाजपा अध्यक्ष एवं लोकसभा सांसद सुरेश कश्यप के गृह क्षेत्र पच्छाद में 15 वार्ड सदस्यों वाली पंचायत समिति में भाजपा ने सबसे अधिक सीटें जीतने का दावा किया है। लेकिन, जिला परिषद के दो वार्डों में भाजपा बुरी तरह से पिछड़ गई। एक वार्ड में कांग्रेस ने परचम लहराया, जबकि दूसरे में निर्दलीय ने बाजी मारी। सुरेश कश्यप के अपने वार्ड बागपशोग में भाजपा समर्थित उम्मीदवार तीसरे स्थान पर रही। पच्छाद क्षेत्र की 34 पंचायतों की बागपशोग व नारग जिला परिषद सीटों पर भाजपा समर्थितों का सूपड़ा साफ हो गया है। बागपशोग जिला परिषद से तीन प्रत्याशी चुनाव मैदान में थे। ललिता शर्मा भाजपा, पूनम ठाकुर कांग्रेस व नीलम शर्मा निर्दलीय के रूप में चुनाव मैदान में उतरीं थीं। नीलम शर्मा को 6,058, पूनम ठाकुर को 5,986 व ललिता शर्मा को 4,991 वोट मिले। इसमें नजदीकी मुकाबले में नीलम शर्मा ने पूनम ठाकुर को 72 वोटों से हराया। 

नारग जिला परिषद वार्ड में 14,438 मतदाताओं ने अपने मत का प्रयोग किया था। आनंद परमार कांग्रेस, नरवीर सिंह निर्दलीय, सुभाष शर्मा भाजपा से व रंगी राम भट्टी निर्दलीय के रूप में चुनाव लड़ रहे थे। आनंद परमार को 7,395 मत व दूसरे स्थान पर रहे सुभाष शर्मा को 4,190 वोट मिले। नरवीर सिंह को 1,832 व रंगी राम भट्टी को 667 मतों से ही संतोष करना पड़ा। इस तरह से जिला परिषद के नारग वार्ड से आनंद परमार 3,205 वोटों के अंतर से विजयी हुए। गौरतलब है कि भाजपा समर्थित उम्मीदवारों को जीताने के लिए प्रदेश भाजपा अध्यक्ष सुरेश कश्यप, स्थानीय विधायक रीना कश्यप और विपणन बोर्ड के अध्यक्ष बलदेव भंडारी स्वयं मैदान में उतरे थे लेकिन तीन नेताओं की रणनीति भी काम नहीं आ सकी। भाजपा से बागी होकर चुनाव लड़ने वाली नीलम शर्मा को पार्टी से भी निष्कासित किया गया है।
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धवाला और पवन राणा की रार में पार्टी को चार में से एक भी जिप सीट नहीं

हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा जिले के विकास खंड देहरा के ज्वालामुखी उपमंडल में चार जिला परिषद सीटों में से भाजपा को एक भी सीट नहीं मिली। कयास लगाए जा रहे हैं कि संगठन मंत्री पवन राणा व विधायक रमेश धवाला की आपसी लड़ाई में भाजपा ने सभी सीटें गंवा दी हैं। इससे पहले ज्वालामुखी नगर परिषद में भाजपा को सिर्फ एक सीट और कांग्रेस को छह सीटें मिली थीं। अब जिला परिषद की चार सीटों के चुनावों के नतीजों में दो सीटें कांग्रेस और दो पर निर्दलीय उम्मीदवारों का कब्जा रहा। यहां भाजपा के चारों दिग्गजों को हार का सामना करना पड़ा है।

मझीण वार्ड से कांग्रेस समर्थित कुलदीप चंद धीमान, सिहोरपाई वार्ड से कांग्रेस समर्थित सीमा देवी, धवाला वार्ड से निर्दलीय मोनिका और टिहरी जिला से निर्दलीय सुदेश कुमारी ने जीत हासिल की है। धवाला की अपने ही गृह क्षेत्र में पकड़ कमजोर होती नजर आ रही है। जनता ने भाजपा को नकार कर कांग्रेस व निर्दलीय प्रत्याशियों के पक्ष में अपना फैसला सुनाया है। विधायक रमेश धवाला व भाजपा संगठन महामंत्री पवन राणा के बीच पिछले कुछ दिनों से चले विवाद से जिला परिषद में भाजपा प्रत्याशियों को हार का सामना करना पड़ा है।
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बिजली बोर्ड और शिक्षा विभाग में जल्द भरे जाएंगे 3000 नए पद

हिमाचल प्रदेश राज्य बिजली बोर्ड और शिक्षा विभाग में जल्द ही तीन हजार नए पद भरे जाएंगे। बिजली बोर्ड इसी महीने 1892 पदों पर जूनियर टीमेट और जूनियर हेल्पर का भर्ती परिणाम घोषित करेगा। चुनाव आचार संहिता के चलते परिणाम जारी नहीं हो रहे थे। उधर, शिक्षा विभाग में जेबीटी की बैच वाइज काउंसलिंग भी अब रफ्तार पकड़ेगी। 1225 पदों पर सरकारी स्कूलों में जेबीटी नियुक्त किए जाने हैं।

प्रदेश के सरकारी स्कूलों में जेबीटी के पद भरने को सरकार ने बैचवाइज काउंसलिंग को बीते माह ही हरी झंडी दी थी। बीएड और डीएलएड के विवाद के बीच जिलों को काउंसलिंग करने के निर्देश भी जारी हो गए हैं। डीएलएड करने वालों को ही बैचवाइज भर्ती में प्राथमिकता देने का फैसला लिया गया है।

जेबीटी के 1225 पद भरने के लिए सरकार ने बीते दिनों कानूनी राय ली थी। एनसीटीई ने बीएड को भी जेबीटी भर्ती के लिए पात्र माना है। प्रदेश के आरएंडपी नियमों के तहत जेबीटी करने वालों को भर्ती में शामिल किया जाता है। ऐसे में इस भर्ती को लेकर दुविधा में फंसी सरकार ने कानूनी राय लेने के बाद डीएलएड को प्राथमिकता देने का फैसला लिया है।

इसके तहत जेबीटी के वर्तमान भर्ती एवं पदोन्नति नियमों के अनुसार 467 पदों को भरने के लिए हिमाचल प्रदेश कर्मचारी चयन आयोग हमीरपुर को पत्र भेजा गया। शेष 758 पदों को भरने के लिए सभी जिला उपनिदेशकों को वर्तमान भर्ती एवं पदोन्नति नियमों के अनुसार बैच वाइज आधार पर काउंसलिंग करने के निर्देश दे दिए गए हैं।

सभी जिलों को इस बाबत शेड्यूल तैयार करने को कह दिया गया है। उधर, बिजली बोर्ड प्रबंधन ने बीते दिनों जूनियर टीमेट और जूनियर हेल्पर के 1892 पदों को भरने के लिए प्रक्रिया पूरी कर ली है। दस्तावेजों का मूल्यांकन भी हो चुका है। अब भर्ती परिणाम घोषित करने की अंतिम औपचारिकताएं पूरी की जा रही हैं।
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हिमाचल में स्वास्थ्य कर्मचारियों को अब नहीं मिलेगा सेवाविस्तार

नौकरी-सांकेतिक
हिमाचल प्रदेश में अब स्वास्थ्य कर्मचारियों को सेवाविस्तार नहीं दिया जाएगा। प्रदेश में कोरोना की स्थिति में काफी हद तक सुधार हो गया है। इसके चलते सरकार ने यह फैसला लिया है। प्रदेश में जिन स्वास्थ्य कर्मचारियों और डॉक्टरों को सेवाविस्तार दिया गया था। इस महीने के अंत में वे रिटायर कर दिए जाएंगे। कोरोना के चलते जिन स्वास्थ्य विभाग के कर्मचारियों को फील्ड में ड्यूटी करने के लिए भेजा गया था। उन्हें भी वापस बुलाना शुरू कर दिया है। प्रदेश सरकार ने अस्पतालों में ओपीडी और ऑपरेशन करने शुरू कर दिए हैं। ऐसे के कर्मचारियों की आवश्यकता अस्पतालों में पड़ेगी। स्वास्थ्य विभाग का दावा है कि कर्मचारियों को एक साथ नहीं, बल्कि धीरे धीरे बुलाया जा रहा है। 

प्रदेश में 500 से कम रह गए एक्टिव मामले 
 प्रदेश में दिन-प्रतिदिन कोरोना के एक्टिव मामलों की संख्या घट गई है। अब अस्पतालों और घरों में आइसोलेट कोरोना पॉजिटिव मरीजों की संख्या 500 से कम हो गई है। प्रतिदिन 40 से कम कोरोना मामले रिकॉर्ड किए जा रहे हैं। डेथ रेट में भी काफी सुधार आया है। इस समय डेथ रेट 0.2 फीसदी है। 98 फीसदी के हिसाब से मरीज ठीक हो रहे हैं। स्वास्थ्य सचिव अमिताभ अवस्थी ने बताया कि कोरोना पर काफी हद तक काबू पा लिया गया है।
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100 करोड़ के बैंक फ्रॉड में चार के खिलाफ चार्जशीट

जालसाजी और धोखाधड़ी के एक मामले में पंचकूला की एक निजी कंपनी के चार प्रमोटरों के खिलाफ सीबीआई ने सीजेएम कोर्ट शिमला में चार्जशीट दाखिल की है। जिनके खिलाफ चार्जशीट दाखिल की गई है, उनमें मेसर्स सैंसंस पल्प एंड पेपर लिमिटेड और मेसर्स एग्जीक्यूटिव इंफ्राबिल्ड प्राइवेट लिमिटेड के एमडी और प्रमोटर रमेश कुमार सैनी के अलावा शशि बाला सैनी, रणधीर सिंह सैनी और रविंद्र कुमार गुप्ता शामिल हैं।

जानकारी के अनुसार स्टेट बैंक आफ इंडिया (एसबीआई) की चंडीगढ़ मुख्य शाखा के डिप्टी जनरल मैनेजर की शिकायत में आरोप लगाया कि कंपनी ने ऊना में अपने एक प्रोजेक्ट के लिए एसबीआई से 50 करोड़ का लोन लिया। इसे बाद में 2009 में बढ़ाकर 80 करोड़, 2010 में 95 करोड़ और 2011 में 105 करोड़ किया गया। इसके बदले बैंक ने पर्याप्त गारंटी भी ली थी, लेकिन उपरोक्त कंपनी बैंक की डिफाल्टर लिस्ट में आ गई। 2018 में जब कंपनी की ऑडिट रिपोर्ट बैंक के पास आई तो पता चला कि कंपनी ने धोखाधड़ी कर स्टॉक इधर-उधर कर दिया है और बैंक के पैसे का भी दुरुपयोग किया है। इस पर बैंक ने 2019 में सीबीआई में शिकायत की थी। 2020 में सीबीआई ने आईपीसी की धारा 120बी और 420 के तहत आरोपियों के खिलाफ केस दर्ज किया था।
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परीक्षा परिणाम के आधार पर अगली कक्षा में जाएंगे पांचवीं और आठवीं के विद्यार्थी

हिमाचल प्रदेश के सरकारी स्कूलों में पांचवीं और आठवीं कक्षा के विद्यार्थी इस वर्ष परीक्षा परिणाम के आधार पर ही अगली कक्षा में जाएंगे। शिक्षा का अधिकार अधिनियम के तहत दोनों कक्षाओं के विद्यार्थियों को इस बार असेसमेंट आधार पर प्रमोट नहीं किया जाएगा। दोनों कक्षाओं की वार्षिक परीक्षाओं के लिए प्रश्नपत्र स्कूल शिक्षा बोर्ड जारी करेगा। उत्तर पुस्तिकाओं का मूल्यांकन स्कूल स्तर पर होगा। इस वर्ष बोर्ड की ओर से इनकी उत्तर पुस्तिकाएं नहीं जांची जाएंगी।

पहली से चौथी और छठी-सातवीं कक्षा की तर्ज पर ही नौवीं और जमा एक कक्षा की परीक्षाएं भी बीस मार्च तक ली जाएंगी। 31 मार्च को इनका परीक्षा परिणाम निकलेगा। एक अप्रैल 2021 से इन सभी कक्षाओं के विद्यार्थियों के लिए नया शैक्षणिक सत्र शुरू होगा। नौवीं और जमा एक कक्षा की वार्षिक परीक्षाओं को ऑनलाइन लेने की जगह स्कूलों में आयोजित किया जाएगा।

हालांकि, इसको लेकर फरवरी में फैसला लिया जाएगा। शिक्षा विभाग ने सभी जिला उपनिदेशकों को नॉन बोर्ड कक्षाओं की परीक्षाओं की तैयारियां शुरू करने के निर्देश जारी कर दिए हैं। उधर, पहली से चौथी और छठी-सातवीं की वार्षिक परीक्षाएं भी बीस मार्च से पहले पूरी की जाएंगी। इन नॉन बोर्ड कक्षाओं की परीक्षाएं ऑनलाइन ही होंगी।

राइट टू एजूकेशन एक्ट में इन कक्षाओं में किसी भी विद्यार्थी को फेल नहीं किया जाता है। आंतरिक असेसमेंट के आधार पर उन्हें अगली कक्षा में दाखिला दिया जाता है। सरकार ने इन कक्षाओं को अभी खोलने का फैसला नहीं लिया है। ऐसे में बीस मार्च तक इन कक्षाओं की ऑनलाइन परीक्षा करने का फैसला लिया गया है। 
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अब महीने में दो बार यातायात नियमों का पाठ पढ़ेंगे विद्यार्थी

 हिमाचल प्रदेश में अब महीने में दो बार सरकारी स्कूलों में यातायात नियमों की जानकारी देने के लिए कक्षाएं लगेंगी। परिवहन विभाग ने डाइट को सिलेबस तैयार करने का ड्राफ्ट भेज दिया है। हिमाचल में वाहन दुर्घटनाएं रोकने को यह व्यवस्था की जा रही है। परिवहन विभाग अध्यापकों को प्रशिक्षण देगा। इसके बाद शिक्षक विद्यार्थियों को यातायात नियमों का पाठ पढ़ाएंगे। 

जानकारी के अनुसार इस पाठ्यक्रम की एक अलग से पुस्तक होगी। इससे बच्चों को पढ़ाने के साथ चित्रों के माध्यम से समझाया भी जाएगा। परिवहन निदेशालय से मिली जानकारी के अनुसार स्कूलों में यातायात नियमों का पाठ पढ़ाने के लिए शिक्षा बोर्ड धर्मशाला को प्रस्ताव भेजा था। विभाग के इस प्रस्ताव को बोर्ड ने मंजूरी दे दी है। इसके बाद डाइट में पाठ्यक्रम को बनाने का काम भी शुरू कर दिया है। जैसे ही पाठ्यक्रम बनकर तैयार होगा  इसके बाद स्कूलों में बच्चों को यह पाठ्यक्रम लागू कर दिया जाएगा। इसके तहत स्कूल में 8 से 12वीं तक के बच्चों को सड़क सुरक्षा की जानकारी दी जाएगी। हर महीने माह दो कक्षाएं लगेंगी।
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