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हमीरपुर की निधि डोगरा बनी योग में सूबे की ब्रांड एंबेसडर

राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला चौरी की निधि डोगरा को एबीबाईएम योग वर्ल्ड बुक के सीईओ राकेश भारद्वाज ने योग का प्रचार प्रसार करने के लिए हिमाचल प्रदेश...

11 जून 2021

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Digital Edition

12वीं कक्षा की परीक्षा का परिणाम तैयार करने में सीबीएसई के फार्मूले में बदलाव करेगा हिमाचल

12वीं कक्षा का परिणाम तैयार करने के लिए को हिमाचल प्रदेश सरकार सीबीएसई के फार्मूले में बदलाव करेगी। 10वीं, 11वीं और 12वीं कक्षा के अंकों के आधार पर ही परिणाम तैयार नहीं किया जाएगा। अप्रैल में हुई 12वीं कक्षा की एक विषय की परीक्षा के अंक भी इसमें शामिल किए जाएंगे। प्री बोर्ड परीक्षाओं और फर्स्ट-सेकेंड टर्म के नंबर भी जोड़ने की तैयारी है। सरकार ने राज्य स्कूल शिक्षा बोर्ड से अंक निर्धारण को लेकर प्रस्ताव तैयार करने को कहा है। मंत्रिमंडल की मंजूरी लेने को छात्रहित में शिक्षा विभाग नया फार्मूला बनाएगा।

सीबीएसई ने गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट बारहवीं कक्षा के अंक तय करने को बनाए फार्मूले की जानकारी दी है। इस फार्मूले से प्रदेश का शिक्षा विभाग पूरी तरह से सहमत नहीं है। 11वीं कक्षा के तीस फीसदी अंकों को 12वीं कक्षा के परिणाम में शामिल करने को लेकर शिक्षकों और अभिभावकों को आपत्ति है। शिक्षकों का तर्क है कि बारहवीं कक्षा में विद्यार्थी अधिक मेहनत करे, इसके लिए ग्यारहवीं कक्षा की परीक्षाओं में विद्यार्थियों की पेपर चैकिंग में बहुत अधिक सख्ती बरती जाती है।

ऐसे में 11वीं में कई विद्यार्थियों के अंक कम हो सकते हैं। इसके अलावा प्रदेश में प्री बोर्ड की परीक्षाएं भी करवाई गई हैं। सीबीएसई ने प्री बोर्ड परीक्षाएं नहीं ली हैं। ऐसे में इस परीक्षा के अंक भी वार्षिक परिणाम में शामिल करना आवश्यक है। हिमाचल में फर्स्ट और सेकेंड टर्म की परीक्षाएं भी हुई हैं। अप्रैल में 12वीं कक्षा का एक पेपर भी हो चुका है। ऐसे में सीबीएसई के फार्मूले पर विचार करते समय प्रदेश की परिस्थितियों को भी ध्यान में रखा जाएगा। आने वाले दिनों में स्कूल शिक्षा बोर्ड की ओर से दिए जाने वाले प्रस्ताव में इन सब बिंदुओं को शामिल किया जाएगा।
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हिमाचल प्रदेश स्कूल शिक्षा बोर्ड धर्मशाला। हिमाचल प्रदेश स्कूल शिक्षा बोर्ड धर्मशाला।

शिमला: डीएनए रिपोर्ट और गुड़िया दांतों के निशान ने चिरानी नीलू को दिलाई सजा

गुड़िया दुष्कर्म और हत्या मामले में विशेष जांच एजेंसी की ओर से नीलू चिरानी के खिलाफ अदालत में पेश साक्ष्य ही अहम रहे। इनके आधार पर ही मामले में गिरफ्तार नीलू को दोषी करार दिया गया। सीबीआई ने डीएनए रिपोर्ट, गुड़िया के शरीर पर दांतों के निशान और नीलू के जबड़े के मिलान की रिपोर्ट पेश की थी। इसके अलावा मौके पर आरोपी की मौजूदगी को लेकर स्थानीय लोगों के दर्ज बयान, आरोपी की ओर से नेपाली के ढारे से शराब की खरीद करने और नशे की हालत में स्थानीय लोगों की ओर से देखा जाना भी अहम रहा। एक और साक्ष्य भी सीबीआई के हाथ लगा था, जिसमें एक नेपाली महिला ने आरोपी को नशे की हालत में उससे छेड़खानी करने का बयान भी दर्ज कराया था।

महिला की ओर से अदालत में आरोपी की फोटो से पहचान करने जैसे साक्ष्य नीलू के खिलाफ गए। इसी के आधार पर नीलू को अदालत ने दोषी करार देकर सजा का एलान किया। वहीं, बचाव पक्ष की ओर से दी गई दलीलों में नीलू को बेगुनाह साबित करने के लिए सीबीआई की चार्जशीट को सिर्फ पारिस्थितिक साक्ष्य पर आधारित बताकर यह दलील दी गई कि दोषी की अपराध करने की कोई योजना नहीं थी। दोषी नशे में था। दोषी के खिलाफ घटनास्थल पर ऐसा कोई भी साक्ष्य नहीं मिला, जिससे उसकी मौजूदगी जंगल में शव के पास साबित हो। दोषी लंबे समय से उक्त स्थान पर काम कर रहा था, मगर उसकी किसी से दुर्व्यवहार करने जैसी कोई शिकायत नहीं थी। 

जांच एजेंसी ने सीबीआई से की थी दोषी को फांसी की सजा की मांग 
 विशेष अदालत में 15 जून को दोषी करार नीलू की सजा पर सुनवाई हुई थी। इसमें जांच एजेंसी सीबीआई ने अपराध को जघन्य अपराध की श्रेणी का बताया था। जिसमें एक नाबालिग के साथ दुष्कर्म और बाद में उसकी हत्या हुई है। मृतका के शरीर पर पाए गए जख्मों को देखते हुए दोषी को पेश किए साक्ष्यों के आधार पर मौत की सजा की पैरवी की थी। दोषी का समाज के लिए कोई योगदान नहीं है। उसका परिवार के लिए भी कोई सहयोग नहीं रहा है। परिवार का कोई भी सदस्य सालों से इससे नहीं मिला है। वहीं, सीबीआई ने दोषी की पृष्ठभूमि को देखते हुए दोषी को मौत की सजा देने की मांग की थी। वहीं, बचाव पक्ष ने दोषी को कम से कम सजा दिए जाने की पैरवी की थी। 
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गुड़िया के माता-पिता बोले, नीलू ही अकेला दोषी नहीं, असली गुनहगार आज भी आजाद

 हिमाचल प्रदेश के शिमला जिले के बहुचर्चित गुड़िया दुष्कर्म और हत्या मामले में दोषी चिरानी अनिल कुमार उर्फ नीलू को  जिला एवं सत्र न्यायालय परिसर चक्कर में विशेष अदालत ने आजीवन कारावास की सजा सुनाई। वहीं, गुड़िया के माता-पिता कोर्ट के इस फैसले से नाखुश हैं। उन्होंने सीबीआई जांच पर सवालिया निशान लगाते हुए कहा कि यह अकेले चिरानी नीलू का काम नहीं हो सकता है। असली गुनहगार आज भी आजाद घूम रहे हैं। इस कृत्य के लिए तो फांसी की सजा भी कम है।

गुड़िया के माता-पिता ने कहा कि चार साल के बाद भी उनकी बेटी को इंसाफ नहीं मिला है। सीबीआई जांच शुरू होने के बाद उन्हें भरोसा था कि अब इंसाफ होगा। गुनहगार पकड़े जाएंगे, लेकिन सीबीआई ने भी उनका विश्वास तोड़ा है। अब हम मामले को हाईकोर्ट में लेकर जाएंगे। जब तक तक बेटी को इंसाफ नहीं मिलता, वह कानूनी लड़ाई लड़ते रहेंगे। उन्होंने कहा कि सीबीआई ने सारे प्रकरण का गुनहगार चिरानी नीलू को बनाकर अपना पल्लू झाड़ लिया है, जबकि ऐसे जघन्य अपराध को एक व्यक्ति अंजाम नहीं दे सकता है। इस अपराध में एक से अधिक व्यक्ति शामिल थे। मामले की जांच ठीक से हुई होती तो आज असली गुनहगार सलाखों के पीछे होते। इसलिए मामले की फिर से जांच होनी चाहिए। 
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हिमाचल: पौने तीन लाख कर्मियों को होगा छठे वेतन आयोग का लाभ, पंजाब में लागू करने का एलान

हिमाचल प्रदेश सरकार छठे वेतन आयोग को प्रदेश में लागू करेगी। इसका प्रदेश के पौने तीन लाख कर्मियों को बढ़े वेतन का लाभ मिलेगा। हालांकि प्रदेश सरकार इस पर फैसला तभी लेगी, जब पंजाब सरकार छठे वेतन आयोग की रिपोर्ट को लागू करेगी। पंजाब कैबिनेट ने शुक्रवार को इस पर फैसला ले लिया है। अब पंजाब सरकार जुलाई में इसे लागू कर देगी। 
शुक्रवार को पंजाब में मुख्यमंत्री अमरिंदर सिंह की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट की बैठक पर भी हिमाचल सरकार के अफसरों की नजरें गड़ी रहीं।

मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने इस वित्तीय वर्ष के अपने बजट भाषण में पंजाब सरकार की सिफारिशें लागू करने का आश्वासन दिया है। सामने विधानसभा चुनाव देखते हुए तो इस बारे में और भी बाध्यता होगी। इसलिए इसकी तैयारी शुरू कर दी है। वित्त विभाग इस बारे में खूब माथापच्ची कर रहा है कि प्रदेश पर कितना अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ेगा और इसके लिए संसाधन कहां से जुटाए जाएं। राज्य सरकार वेतन देने के मामले में पंजाब के वेतन आयोग का ही अनुसरण करती है, क्योंकि हिमाचल का अपना वेतन आयोग नहीं है। 

अभी पंजाब के वेतन आयोग की रिपोर्ट का अध्ययन किया जा रहा है। रिपोर्ट पढ़ने के बाद ही इस बारे में स्थिति स्पष्ट की जा सकेगी। चूंकि सीएम जयराम ठाकुर बजट घोषणा में भी इसे पंजाब के बाद लागू करने की बात कह चुके हैं। ऐसे में लागू तो करना ही है। इसे कैसे लागू करें, यह रिपोर्ट पढ़कर ही स्पष्ट होगा।- प्रबोध सक्सेना, अतिरिक्त मुख्य सचिव, वित्त

महासंघ ने ये कहा
पंजाब में छठे वेतन आयोग के संशोधित वेतनमान देने की अधिसूचना को लेकर हिमाचल अराजपत्रित कर्मचारी महासंघ के अध्यक्ष विनोद कुमार ने कहा कि सरकार प्रदेश के कर्मचारियों को 15 दिन के भीतर संशोधित वेतनमान जारी करे। प्रदेश के कर्मचारियों को अंतरिम राहत के तौर पर 70 फीसदी लाभ मिल रहा है और शेष तीन फीसदी राशि देने में विलंब न किया जाए। 

महासंघ अध्यक्ष विनोद ने कहा है कि पंजाब के कर्मचारियों को आगामी एक जुलाई से संशोधित वेतनमान दिया जाएगा। प्रदेश के कर्मचारियों को भी वित्तीय लाभ देने की प्रक्रिया आरंभ कर दी जाए। देश के अन्य सभी राज्यों को संशोधित वेतनमान काफी पहले दे दिया है। प्रदेश के पौने दो लाख कर्मचारियों के 21 फीसदी आईआर दिया जा रहा है। इसमें से नौ फीसदी वर्तमान सरकार ने दिया है जबकि अन्य पूर्व कांग्रेस सरकार ने जारी किया था।
 
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गुड़िया केस: नीलू हाथ जोड़ कर बोला- मैं निर्दोष, मुझे सीबीआई ने फंसाया है, जाऊंगा हाईकोर्ट

छठे वेतन आयोग(सांकेतिक)
बहुचर्चित गुड़िया दुष्कर्म और हत्या मामले में आजीवन कारावास की सजा मिलते ही दोषी नीलू के चेहरे का रंग उड़ गया। पुलिस जवानों के साथ अदालत से बाहर निकलते हुए नीलू ने हाथ जोड़कर बोला, मैं निर्दोष हूं। फैसले के खिलाफ हाईकोर्ट में अपील करूंगा। मुझे सीबीआई ने फंसाया है। मैं अपील करूंगा कि मुझे गलत फंसाया गया, मैंने ऐसा कुछ नहीं किया। नीलू ने कहा कि किसने क्या किया मुझे कुछ नहीं पता, मैं उस दिन मौके पर था ही नहीं। 

बचाव पक्ष हाईकोर्ट में करेगा फैसले के खिलाफ अपील
बचाव पक्ष के अधिवक्ता ने अदालत का फैसला आने के बाद कहा कि फैसले के खिलाफ वह उच्च न्यायालय में अपील करेंगे। उनका कहना है कि मामले में अनिल कुमार के खिलाफ जांच एजेंसी ने सिर्फ परिस्थितिजनक साक्ष्यों के आधार सजा सुनाई है, जबकि दोषी के खिलाफ जांच एजेंसी उसके मौका-ए-वारदात पर मौजूदगी को लेकर कोई ठोस साक्ष्य पेश नहीं कर पाई है। 

बता दें शिमला के चक्कर में शुक्रवार को सत्र एवं जिला न्यायाधीश राजीव भारद्वाज की विशेष अदालत ने दोषी करार अनिल कुमार उर्फ नीलू उर्फ कमलेश को नाबालिग से दुष्कर्म और हत्या की धाराओं के तहत आजीवन आजीवन कारावास की सजा सुनाई। गौर हो कि 4 जुलाई, 2017 को दसवीं की छात्रा स्कूल से लौटते समय लापता हो गई थी और दो दिन बाद छात्रा का शव कोटखाई में तांदी के जंगल में नग्न अवस्था में मिला था।

मामले की जांच कर रही सीबीआई की ओर से दायर चार्जशीट के तथ्यों को आधार मानते हुए अदालत ने दोषी को नाबालिग से दुष्कर्म के जुर्म में मरते दम तक आजीवन कारावास और हत्या मामले में आजीवन कारावास सहित दस हजार रुपये जुर्माना लगाया है। जुर्माना न भरने की सूरत में दोषी को एक साल का अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा। दोषी को शुक्रवार को विशेष अदालत में कड़ी सुरक्षा के बीच पेश किया गया। अदालत ने दोपहर करीब दो बजे दोषी को सजा सुनाई। 
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हिमाचल में पांच और कोरोना संक्रमितों की मौत, 330 नए पॉजिटिव, जानें सक्रिय केस

हिमाचल प्रदेश में शुक्रवार को पांच और कोरोना पॉजिटिव मरीजों की मौत हुई है। कांगड़ा जिले में तीन, हमीरपुर और चंबा जिले में एक-एक संक्रमित ने दम तोड़ा। उधर, प्रदेश में कोरोना के 330 नए मामले आए हैं। इनमें से कांगड़ा जिले में कांगड़ा 123, मंडी 49, चंबा 43, हमीरपुर 37, शिमला 18, कुल्लू 19, बिलासपुर 16, सिरमौर 10, ऊना नौ, सोलन छह, किन्नौर चार और लाहौल-स्पीति में तीन नए मामले आए हैं। 

बीते 24 घंटों के दौरान प्रदेश में 576 मरीजों ने कोरोना को मात दी। अब प्रदेश में कुल कोरोना संक्रमितों का आंकड़ा 200043 पहुंच गया है। इनमें से अब तक 193418 संक्रमित ठीक हो चुके हैं। सक्रिय कोरोना मामले घटकर 3193 रह गए हैं। प्रदेश में अब तक 3408 संक्रमितों की मौत हुई है। बीते 24 घंटों के दौरान कोरोना की जांच के लिए 23639 लोगों के सैंपल लिए गए। 

किस जिले में कितने सक्रिय मामले
कांगड़ा         796
शिमला       366
सोलन         174
मंडी            362
चंबा            322
सिरमौर       246
ऊना            266
बिलासपुर    108
हमीरपुर       264
कुल्लू          145
किन्नौर        99
लाहौल-स्पीति 45
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अनुपम खेर बोले- बदल गया शिमला, अब नहीं रही शांति, घर-गाड़ियां ज्यादा हुईं

बॉलीवुड के लोकप्रिय अभिनेता अनुपम खेर की नजर में पहाड़ों की रानी शिमला अब काफी बदल गया है। यहां पहले जैसी शांति नहीं रही। गली-मोहल्ले भवनों से पट गए हैं और आबादी तेजी से बढ़ी है। घूमने निकलो तो सड़कों पर वाहन ही नजर आते हैं। हालांकि, देशव्यापी सर्वे में रहने लायक शहरों में शिमला अभी भी आगे है। शिमला प्रवास पर पहुंचे अनुपम खेर पत्रकारों से बातचीत कर रहे थे। इस दौरान उन्होंने अपने बचपन की यादों को भी साझा किया।

अनुपम खेर शुक्रवार को दोस्तों के साथ अपने बचपन के स्कूल लक्कड़ बाजार स्थित डीएवी स्कूल पहुंचे। उन्होंने स्कूल के प्रिंसिपल और स्टाफ से मुलाकात कर बातचीत की। इस दौरान उन्होंने स्कूल के पुराने अध्यापकों के फोटो रोल ऑफ ऑनर के तौर पर लगाने की आवश्यकता भी जताई। उन्होंने कहा कि शिमला मेरा घर है, यहां की खुशबू मेरी आत्मा से जुड़ी है। शिमला में 19 साल की जीवन यात्रा की अनमोल पूंजी मेरे साथ है। उन्होंने कहा कि लोगों का प्यार और यादें उन्हें बार-बार शिमला खींच लाती है। 

अनुपम खेर ने कहा कि अपने बचपन के स्कूल आया हूं। यहीं से भागकर दिलीप कुमार की गोपी फिल्म देखी थी। पुरानी यादों को तरोताजा करते हुए कहा कि उन्होंने हिंदी के अध्यापक मुनि लाल सर से गोपी फिल्म देखने के लिए दो बार डंडे भी खाए थे। अभिनेता दिलीप कुमार भी इस इस रोचक घटनाक्रम से अवगत कराया है। उन्होंने कहा कि उस दौर में बच्चों पर अनुशासन और पढ़ाई की सख्ती ज्यादा थी।

स्कूलों में डंडास परेड परपंरा सी थी। सातवीं कक्षा से आठवीं कक्षा गए तो जयराम सर के डंडों से स्वागत होता था। कहते थे कि ये सोशल स्टडीज का डंडा, एल जेबरा का डंडा और लेट आना का डंडा। रामलाल सर ने मुर्गा भी बनाया। उन्होंने कहा कि स्कूल में जो डंडे अध्यापकों से खाए थे, वो जिंदगी के बड़े सबक बने और अच्छा-बुरे की समझ भी दे गए। पिता की बचपन में मिली नसीहत का भी अनुपम खेर ने जिक्र किया। बोले, नवीं कक्षा में पिता को रिपोर्ट कार्ड दिखाने गया तो उन्होंने कहा कि इवेंट फेल होता है आदमी कभी फेल नहीं होता है। 
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गुड़िया मामला: कोर्ट ने कहा- शर्मसार करने वाला था 4 जुलाई 2017 का दिन

गुड़िया दुष्कर्म और हत्या मामले में अदालत ने भी टिप्पणी की। दोषी अनिल उर्फ नीलू की सजा पर फैसला सुनाने से पहले अदालत ने पूरे घटनाक्रम का हवाला देते हुए कहा कि देवभूमि हिमाचल प्रदेश के लिए चार जुलाई 2017 का दिन शर्मसार करने वाला है। जिला की एक मासूम नाबालिग स्कूली छात्रा के साथ हुई इस दरिंदगी की घटना ने छात्राओं और महिलाओं की सुरक्षा पर भी सवाल खड़ा किया है। वहीं इस आपराधिक घटना में संदिग्ध की पुलिस हिरासत में मौत ने आम आदमी को झकझोर कर रख दिया था। 

 प्रदेश पुलिस की साख को तार-तार कर गया गुडि़या प्रकरण 
 जिला शिमला में गुडि़या दुष्कर्म और हत्या मामले ने प्रदेश पुलिस की साख को तार तार कर रख दिया था। मामले की जांच सबसे पहले प्रदेश पुलिस ने ही संभाली थी।छानबीन के दौरान पुलिस ने छह संदिग्धों को गिरफ्तार किया था। गिरफ्तार आरोपियों से एक नेपाली मूल के  सूरज की हिरासत में मौत हो गई थी। सूरज की हिरासत में मौत की घटना ने पुलिस के आईजी सहित तत्कालीन पुलिस अधीक्षक शिमला डीडब्ल्यू नेगी, डीएसपी ठियोग मनोज जोशी के साथ छह पुलिस कर्मियों को हवालात पहुंचा दिया।

इन सभी पुलिस अधिकारियों और कर्मियों पर निलंबन की गाज भी गिरी। इनमें से एक एसआईटी के हेड रहे आईजी जहूर एच जैदी अभी भी हवालात में हैं, जमानत के लिए हाथ-पांव मार रहे हैं। यह प्रदेश के इतिहास में शायद पहली घटना हो जिसमें पुलिस की इतनी फजीहत हुई। पुलिस के खिलाफ लोगों का गुस्सा इस कदर भड़का था कि गुस्साई भीड़ ने कोटखाई थाना तक जला दिया था। हिरासत में आरोपी की मौत का मामला अभी भी सीबीआई कोर्ट चंडीगढ़ में विचाराधीन है। 
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सीएम जयराम बोले- उपचुनाव कार्यक्रम तय होते ही होगी प्रत्याशियों की घोषणा

मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने कहा कि उपचुनावों के लिए कार्यक्रम तय होते ही पार्टी प्रत्याशियों की घोषणा कर देगी। पार्टी सभी उपचुनावों में अच्छे प्रदर्शन को लेकर आश्वस्त है। मंडी संसदीय क्षेत्र, फतेहपुर और जुब्बल-कोटखाई विधानसभा क्षेत्रों के लिए होने वाले उपचुनावों ने पार्टी को तैयार करने का अवसर प्रदान किया है। तीन दिवसीय बैठक में पार्टी पदाधिकारियों, विधायकों और पार्टी प्रत्याशियों के साथ विस्तार से चर्चा की गई।

यह बैठक 2022 में होने वाले विधानसभा चुनावों के लिए पार्टी का खाका तैयार करने में महत्वपूर्ण साबित हुई है। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य में कोरोना के मामलों में कमी आई है, जो प्रदेश के लोगों के लिए राहत का संकेत है। उन्होंने कहा कि सरकार वर्तमान स्थिति से भली-भांति अवगत है और यह सुनिश्चित कर रही है कि निर्धारित दिशा-निर्देशों का कड़ाई से पालन हो तथा किसी भी स्तर पर कोई लापरवाही न बरती जाए। 
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