रिसर्च : देर रात तक जागने वालों को नींद पूरी करने के लिए करना पड़ रहा संघर्ष

अमर उजाला, रिसर्च टीम Updated Thu, 08 Aug 2019 05:21 AM IST
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Research: people struggling to get sleep

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सार

  • इन लोगों को का शरीर प्राकृतिक रूप से आठ बजे नींद के आगोश में जाने के लिए तैयार हो जाता है।
  • वे दिन भर सक्रिय बने रहते हैं।
  • पूरे दिन में केवल एक ही नींद काफी होती है।

विस्तार

जल्दी सोने और जगने वालों को सुबह बिस्तर छोड़ते समय 5-10 मिनट की अतिरिक्त नींद संतुष्ट करती है, बाकियों को ऐसी संतुष्टि पाने के लिए 30 से 38 मिनट की अतिरिक्त नींद लेनी पड़ती है। कैलिफोर्निया यूनिवर्सिटी की एक टीम ने नींद से जुड़ी समस्याओं से जूझ रहे 2422 मरीजों पर नौ वर्षीय शोध के आधार पर यह दावा किया है। रिसर्च को स्लीप जर्नल में प्रकाशित किया गया है।
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इसके अनुसार देर रात तक जागने वाले और सुबह होते-होते सोने वालों की संख्या जहां लगातार बढ़ रही है, ऐसे लोगों को नींद से संबंधित बीमारियां होने की भी बड़ी संभावना होती है। काम या स्कूल-कॉलेज जाने के लिए बिस्तर छोड़ना जहां मुश्किल होता जा रहा है, वहीं पर्याप्त नींद ले पाना भी एक संघर्ष बन रहा है। ऐसे लोगों को कई बार नींद न आने की समस्या से भी जूझना पड़ता है। 

जल्दी सोने-जागने वाले 300 में एक

इन करीब 2400 मरीजों में से केवल 12 ने ही बताया कि वे ‘एडवांस स्लीपर’ यानी रात आठ बजे सोने वाले और सुबह चार या पांच बजे जगते हैं। अध्ययन के दौरान आठ लोगों के ऐसा नियमित रूप से करने की पुष्टि हुई। अध्ययनकर्ताओं के अनुसार सामान्य आबादी में यह संख्या कुछ अधिक हो सकती है, पूरी संभावना है कि कई एडवांस स्लीपर नींद की समस्या नहीं होने से अस्पताल भी नहीं पहुंचे हों।

फायदे बहुत हैं

  • एडवांस स्लीप वाले लोगों में मेलाटोनिन जैसे नींद से संबंधित होर्मोन का स्राव जल्दी होता है, शरीर का तापमान भी जल्द नियंत्रण में आता है।
  • इन लोगों को का शरीर प्राकृतिक रूप से आठ बजे नींद के आगोश में जाने के लिए तैयार हो जाता है।
  • वे दिन भर सक्रिय बने रहते हैं।
  • पूरे दिन में केवल एक ही नींद काफी होती है।


एक नुकसान भी

हालांकि इन लोगों का सामाजिक जीवन कुछ हद तक प्रभावित हो सकता है, क्योंकि अब ज्यादातर सामाजिक गतिविधियां शाम और रात को ही अंजाम दी जाने लगी हैं। 
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