Good Friday 2020: क्यों मनाया जाता है गुड फ्राइडे और जानिए इससे जुड़ी कुछ मान्यताएं

धर्म डेस्क, अमर उजाला Updated Fri, 10 Apr 2020 07:30 AM IST
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गुड फ्राइडे 2020
गुड फ्राइडे 2020
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10 अप्रैल, शुक्रवार को ईसाई धर्म का प्रमुख त्योहार गुड फ्राइडे है। ईसाई समुदाय के लोग गुड फ्राइडे को एक काले दिन के रूप में मनाते हैं। गुड फाइडे को होली फ्राइडे, ब्लैक फ्राइडे और ग्रेट फ्राइडे के नाम से भी जाना जाता है। गुड फ्राइडे पर प्रभु ईसा मसीहा को सूली पर चढ़ाया गया था।
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गुड फ्राइडे क्यों मनाया जाता है।
गुड फ्राइडे के दिन ईसा मसीह का बलिदान हुआ था। इस दिन प्रभु यीशु ने कई तरह की यातनाओं को सहते हुए अपने प्राण त्यागे थे। प्रभु ईसा ने धरती पर हो रहे अत्याचारों का विरोध और प्रेम, क्षमा का संदेश देते हुए सूली पर चढ़ गए थे। इसलिए इस दिन को लोग गुड फ्राइडे, ब्लैक फ्राइडे, ग्रेट फ्राइडे या ईस्टर फ्राइडे भी कहते हैं। 
प्रभु ईसा मसीह की याद में इस दिन ईसाई समुदाय के लोग गिरजाघरों में प्रार्थनाएं करते हैं। साथ ही इस दिन प्रभु ईसा के दिए गए उपदेशो और शिक्षाओं को याद करते हैं। सूली पर लटकाए जाने के दौरान उन्होंने अंतिम संदेश दिया था कि किसी को क्षमा करना सबसे बड़ी शक्ति होती है। अपने प्राणों को त्यागने के पहले उनके आखिरी शब्द थे- ' हे ईश्वर इन्हें माफ कर दें, क्योंकि ये नहीं जानते कि ये क्या कर रहे हैं'। 

गुड फ्राइडे से जुड़ी कुछ रस्में और मान्यताएं

- गुड फ्राइडे के दिन ईसाई समुदाय के लोग गिरजाघरों में प्रार्थना करते हैं और प्रसाद में गर्म मीठी रोटियां भी खाते हैं।

- ब्रिटेन समेत कई पश्चिमी देशों में इस दिन कोई भी घुड़दौड़ नहीं की जाती।

- गुड फ्राइडे के दिन लोग चर्च में घंटे नहीं बजाते है बल्कि इस दिन विशेष प्रार्थना की जाती है और लकड़ी के खटखटे से आवाज की जाती है।

- ईसाई समुदाय के कई लोग बलिदान के लिए ईसा मसीह की कृतज्ञता व्यक्त करते हुए 40 दिन पहले से उपवास भी रखते हैं। जो 'लेंट' कहलाता है।

- इस दिन चर्च और घरों से सजावट की वस्तुएं हटा ली जाती हैं या उन्हें कपडे़ से ढक दिया जाता है। 

- गुड फ्राइडे के तीसरे दिन यानी उसके अगले संडे को ईसा मसीह दोबारा जीवित हो गए थे, इसकी खुशी में लोग ईस्टर संडे मनाते हैं।

प्रभु यीशु को दी गई थी तमाम यातनाएं
गुड फ्राइडे के ही दिन प्रभु ईसा को सूली पर लटकाए जाने से पहले उन्हें तमाम तरह की यातनाएं दी। उनके सिर पर कांटो का ताज पहनाया गया। फिर सूली को कंधों पर उठाकर ले जाने को कहा गया। इस दौरान उन पर लगातार चाबुक बरसाए गए। फिर बेरहमी से कीलों की सहायता से उनको सूली पर लटका दिया गया। कहते है कि करीब 6 घंटे वह सूली पर लटके रहे। बाइबिल के अनुसार जब प्रभु ईसा अपने प्राण त्याग रहे थे तो उन्होंने ईश्वर को पुकारकर कहा कि हे पिता मैं अपनी आत्मा को तुम्हारे हाथों को सौंपता हूं। फिर उन्होंने अपने प्राण त्याग दिए। इस दिन गिरजाघरों में ईसाई धर्म को मनाने वाले लोग सभी को ईसा मसीह की तरह इंसान से प्रेम और उनके अपराधों को माफ करने का संदेश देते हैं। 
 
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