Nirjala Ekadashi Vrat 2020: समस्त एकादशियों के बराबर पुण्य प्रदान करती है निर्जला एकादशी

अनीता जैन, वास्तुविद Updated Tue, 02 Jun 2020 07:48 AM IST
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Nirjala Ekadashi 2020:निर्जला एकादशी के इस महान व्रत को 'देवव्रत' भी कहा जाता है
Nirjala Ekadashi 2020:निर्जला एकादशी के इस महान व्रत को 'देवव्रत' भी कहा जाता है

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ज्येष्ठ माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी को निर्जला एकादशी, भीम एकादशी या पांडव एकादशी के नाम से जाना जाता है। पदम पुराण के अनुसार इस एकादशी को निर्जल व्रत रखते हुए भगवान विष्णु की पूजा,व्रत समस्त पाप एवं तापों से मुक्त कर देती है। मान्यता है कि इस दिन व्रत रखने से वर्षभर की एकादशी का पुण्य प्राप्त हो जाता है। एकादशी तिथि के महत्व को बताते हुए भगवान श्री कृष्ण ने गीता में कहा है-''मैं वृक्षों में पीपल एवं तिथियों में एकादशी हूँ''। एकादशी की महिमा के विषय में शास्त्र कहते हैं कि विवेक के समान कोई बंधु नहीं और एकादशी के समान कोई व्रत नहीं। पांच ज्ञानेन्द्रियाँ, पांच कर्म इन्द्रियाँ और एक मन इन ग्यारहों को जो साध ले,वह प्राणी एकादशी के समान पवित्र और दिव्य हो जाता है। 
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निर्जला एकादशी के इस महान व्रत को 'देवव्रत' भी कहा जाता है क्योंकि सभी देवता, दानव, नाग, यक्ष,गन्धर्व,किन्नर,नवग्रह आदि अपनी रक्षा और जगत के पालनहार श्री हरि की कृपा प्राप्त करने के लिए एकादशी का व्रत करते हैं। सबसे कठिन ज्येष्ठ मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी होती है क्योंकि इसमें निर्जल व्रत करने का विधान है।
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