Sawan 2020: 6 जुलाई से भोले भंडारी का प्रिय महीना सावन आरंभ,जानिए खास-खास बातें

धर्म डेस्क, अमर उजाला Updated Tue, 30 Jun 2020 02:53 PM IST
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सावन 2020: 6 जुलाई से सावन का महीना आरंभ होगा और 3 अगस्त को सावन का अंतिम दिन होगा।
सावन 2020: 6 जुलाई से सावन का महीना आरंभ होगा और 3 अगस्त को सावन का अंतिम दिन होगा।

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सावन का महीना शुरू होने में अब कुछ ही दिन बचे हैं। हिंदू कैलेंडर के अनुसार सावन का महीना वर्ष का पांचवा महीना होता है इसे श्रावण भी कहते हैं जो 6 जुलाई से शुरू होगा। सावन का महीना भगवान शिव को बहुत ही प्रिय होता है। सावन के महीने का इंतजार शिव भक्तों को काफी रहता है क्योंकि यह वही महीना होता है जिसमें भगवान शिव सबसे ज्यादा प्रसन्न होते हैं। सावन के महीने में शिवालयों में काफी संख्या में लोग एकत्रित होकर भगवान शिव का जलाभिषेक करते हैं। आइए जानते हैं 6 जुलाई से शुरू हो रहे सावन के महीने का खास-खास बातें...
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- इस बार सावन के महीने में 29 दिन सावन रहेंगे। दरअसल शुक्लपक्ष की अष्टमी तिथि के क्षय होने के कारण ऐसा हो रहा है।
- इस बार सावन के महीने का आरंभ सोमवार के दिन हो रहा है साथ ही सावन का अंतिम दिन भी सोमवार के दिन पड़ेगा।

- सावन के महीने की शुरुआत सोमवार 6 जुलाई को उत्तराषाढ़ा नक्षत्र और वैधृति योग के साथ होगा। चंद्रमा मकर राशि में रहेगा।

- इस बार सावन के महीने में 5 सोमवार आएंगे और सावन के महीने में 25 से ज्यादा शुभ योग बन रहे हैं।

- सावन के महीने में शुभ योगों का बनाना काफी शुभफलदायक रहता है।  इस बार 11 सर्वार्थसिद्धि, 3 अमृतसिद्धि और 12 दिन रवियोग रहेंगे। इस तरह के शुभ योगों में की गई भगवान शिव की पूजा से विशेष फल मिलता है।

सोमवार, 06 जुलाई 2020 पहला सावन सोमवार व्रत
सोमवार, 13 जुलाई 2020 दूसरा सावन सोमवार व्रत
सोमवार, 20 जुलाई 2020 तीसरा सावन सोमवार व्रत
सोमवार, 27 जुलाई 2020 चौथा सावन सोमवार व्रत 
सोमवार, 03 अगस्त 2020 पांचवां सावन सोमवार व्रत

सावन के महीने में भगवान शिव को ऐसे करें प्रसन्न 
सावन सोमवार के दिन जल्दी उठकर स्नान करें। शिव मंदिर में जाकर भगवान शिव का जलाभिषेक करें। साथ ही माता पार्वती और नंदी को भी गंगाजल या दूध चढ़ाएं। पंचामृत से रुद्राभिषेक करें, बिल्व पत्र अर्पित करें। शिवलिंग पर धतूरा, भांग, आलू, चंदन, चावल चढ़ाएं और सभी को तिलक लगाएं। प्रसाद के रूप में भगवान शिव को घी शक्कर का भोग लगाएं। धूप, दीप से गणेश जी की आरती करें। 
अंत में भगवान शिव की आरती करें और प्रसाद का वितरण करें।
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