ताजमहल खुलने के दो माह बाद भी पटरी पर नहीं लौटा हस्तशिल्प उद्योग, अब तक 930 करोड़ का नुकसान

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा Updated Sun, 22 Nov 2020 12:02 AM IST
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हस्तशिल्पी - फोटो : अमर उजाला

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ताजमहल खुलने के दो माह बाद भी हस्तशिल्प उद्योग पटरी पर नहीं लौटा है। कोरोना की दहशत, पर्यटकों की सीमित संख्या के चलते स्टोन और मार्बल हैंडीक्राफ्ट, जरदोजी और कालीन जैसे उद्योग मंदी से उबर नहीं पा रहे हैं। लॉकडाउन से अब तक उद्योग को लगभग 930 करोड़ रुपये का नुकसान हो चुका है।
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कोरोना संक्रमण के चलते ताजमहल छह माह के लिए बंद हो गया था। उद्यमी लगातार इसके खुलने की बाट जोह रहे थे। 21 सितंबर को स्मारक खुला, लेकिन बहुत अधिक फायदा नहीं पहुंचा। उद्यमियों के कहना है कि अंतरराष्ट्रीय उड़ानें रद्द होने से विदेशी पर्यटक नहीं आए, जिनसे सबसे ज्यादा कारोबार मिलता है। 
दूसरी तरफ निर्धारित संख्या में टिकट की व्यवस्था होने से घरेलू पर्यटक भी सीमित हैं। इसके चलते अधिकांश बड़े एम्पोरियम अब तक बंद पड़े हुए हैं। दिल्ली में लगातार बढ़ रहे कोरोना के मामले और ताज में टिकटों के ब्लैक करने की खबर से भी पर्यटकों में नकारात्मकता फैली है। 
यूरोप में लॉकडाउन लगने से निर्यात भी गड़बड़ाने लगा है। इन सबसे उद्यमी वर्ग तो त्रस्त है ही कारीगरों का और बुरा हाल है। 50 फीसदी कारीगरों ने अन्य कामों में हाथ आजमाना शुरू कर दिया है।
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