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Coronavirus in Uttar Pradesh Live Updates: यूपी में एक दिन में 14 नए मरीज, अब तक 65 लोग कोरोना संक्रमित

यूपी में कोरोना संक्रमित लोगों की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है। शनिवार को एक ही दिन 14 नए मरीज सामने आने के साथ ही प्रदेश में संक्रमितों की संख्या 65 हो गई है।

28 मार्च 2020

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Sp baghpat said

28 मार्च 2020

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अलीगढ़

रविवार, 29 मार्च 2020

 कोरोनाः डीएम साहब! कुलियों के सामने भी है रोजी-रोटी का संकट

कोरोना वायरस की रोकथाम के लिए किए गए रेलवे ने सवारी ट्रेनों को बंद कर दिया है। अब इससे रेल के अभिन्न अंग कुलियों के सामने रोजी-रोटी का संकट आ गया है। आलम यह है कि कुली व उनके परिवार भूखे पेट सोने को मजबूर हो रहे हैं। कुलियों का कहना है कि यदि रेलवे या जिला प्रशासन ने जल्द उनके लिए कोई विचार नहीं किया तो वह कोरोना से पहले भूख से दम तोड़ देंगे।

लाल वर्दी कुली एसोसिएशन की अलीगढ़ शाखा के सदस्य नगेंद्र कुमार ने बताया कि कुलियों की हालत पहले से ही खराब है। रेलवे ने यात्री सुविधाओं में इतना इजाफा कर दिया है कि अब उनको घर चलाने भर के पैसे नहीं मिल पाते। अब कोरोना के चलते ट्रेनें बंद कर दी गई हैं। 

पिछले 21 मार्च के बाद से हर दिन उनके लिए काल के समान हो गया है। घरों में आटा, दाल, चावल तक नहीं हैं। बच्चों को खाना खिलाने के चलते खुद एक समय या कभी-कभी भूखे पेट ही सोने को मजबूर हैं। जल्द ही रेल या जिला प्रशासन को इसकी सुध लेनी चाहिए। डीएम साहब से अपील है कि कम से कम राशन की व्यवस्था ही करा दी जाए। 
 
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लॉकडाउन का पांचवा दिन : घरों और चूने के गोलों में सिमटी जिंदगी

शुक्रवार को लॉकडाउन के पांचवें दिन जिले की सीमाओं से लेकर शहर के चौराहे और गलियों तक हर जगह पुलिस की जबरदस्त चौकसी जारी रही। बेवजह घरों से बाहर निकलने वालों पर सख्ती बढ़ रही है। दुकानों के बाहर दुकानदार, पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी सोशल डिस्टेंस बनाए रखने के लिए चूना डाल कर गोले बनवा रहे हैं।
लोगों को इन्हीं गोलों में खड़ा कर एक दूसरे से दूर रखा जा रहा है। मेडिकल स्टोर, बैंक, किराना की दुकानों में इसी तरह से लोगों को एक दूसरे से दूर रहने की सीख दी जा रही है। दुकानदार भी काउंटर के बाहर कम से कम दो और तीन फुट आगे एक रस्सी बांध कर लोगों को खुद से दूर रखने का प्रयास कर रहे हैं, जो ग्राहक नहीं मान रहे हैं, उनको सामान नहीं है, कह कर भगाया भी जा रहा है। इससे किसी भी तरह से संक्रमण से दूर रखा जा सके।
पूरे दिन पुलिस लाउडस्पीकर से उद्घोषणा करती रही कि लोग घरों से बाहर नहीं निकले। एक दूसरे से दूरी बनाए रखें। जिला प्रशासन ने आटा किल्लत दूर करने के लिए फ्लोर मिल मालिकों को गेहूं उपलब्ध कराना शुरू कर दिया है, ताकि आटा मिल सके। लेकिन अभी तक मोहल्लों और गलियों की किराना की दुकानाें में आटा किल्लत बनी हुई है। शुक्रवार को शहर की ऐसी दर्जनों दुकानों में आटा नहीं मिला। जिससे आम लोगों में आटे को लेकर चिंता बढ़ने लगी है। गली मोहल्लों की आटा चक्कियों को बंद कराने, थोक बाजार से आटा अधिक बिकने, चक्की आटा की सप्लाई नहीं होने के कारण ये संकट पैदा हुआ है।
इधर, स्वास्थ्य महकमे में आइसोलेशन वार्ड अपडेट रखने के साथ मरीजों की जांच पड़ताल जारी है। बुखार, खांसी, जुकाम सहित अन्य बीमारियों के मरीजों को उपचार दिया जा रहा है। नगर निगम को शेल्टर होम सैनिटाइज किए जा रहे हैं। शहर के अन्य हिस्सों में भी ऐसी साफ-सफाई हो रही है। पुलिस प्रशासन और जिला प्रशासन हर स्थिति की समीक्षा कर रहा है। इसको लेकर लगातार बैठकें हो रही है।
एटीएम में नगदी संकट न हो
कोरोना के कारण हुए लॉकडाउन में एटीएम में नगदी का संकट न हो। इसके लिए लीड बैंक मैनेजर रविंद्र प्रसाद ने कहा कि हर बैंक को अपने संबंधित एटीएम में नगदी की उपलब्धता करनी होगी। जिससे लोगों को एटीएम से नगदी निकालने के लिए अनावश्यक रूप से नहीं घूमना पड़े। वह अपने निकटवर्ती एटीएम से ही पैसा निकाल सकें। सभी बैंकों के जिलास्तरीय अधिकारियों को इसका निर्देश दिया गया है।
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छह फ्लोर मिलों में टनों आटा बनना शुरू

जिले में लॉकडाउन के पांचवें दिन आटा संकट बना रहा। उम्मीद है कि रविवार तक इस गंभीर समस्या का समाधान होने लगेगा। इसके बाद कम से कम आटा को लेकर मारामारी नहीं होगी। इसके लिए जिला प्रशासन ने फ्लोर मिल मालिकों से सहयोग मांगा है। इन मिलों का संचालन भी प्रशासन की निगरानी में हो रहा है, क्योंकि इन मिलों में मैदा और सूजी का उत्पादन ही अधिक होता है।
इसलिए ये आटा उत्पादन में ज्यादा रुचि नहीं दिखाते हैं, लेकिन अब प्रशासनिक दबाव में आटा बनने लगा है। अगर सभी छह फ्लोर मिल वालों ने लगातार उत्पादन किया तो रविवार तक अलीगढ़ में 7200 क्विंटल आटा उपलब्ध हो जाएगा। इसके अलावा छोटी चक्कियों से भी उत्पादन हो रहा है। इस तरह से रविवार तक लगभग दस हजार क्विंटल यानी एक हजार टन आटा बाजार में आ जाएगा। इसके बाद आटे की कालाबाजारी रोकी जा सकेगी। आम आदमी को आसानी से आटा उपलब्ध हो सकेगा। इसकी आपूर्ति पूरे जिले में कराई जाएगी। इतनी खपत होने के बाद लगातार आपूर्ति बनी रहेगी और ये संकट दूर हो जाएगा।
फ्लोर मिल संचालक प्रदीप सिंघल ने बताया कि इस मुश्किल वक्त में सभी मिल संचालक देश के हरेक आदमी के साथ हैं। फायदा हो या नुकसान। हर हाल में आटा उपलब्ध कराया जाएगा। इसके लिए मिलों का सेटअप बदला गया है। जिससे तेज गति से गेहूं से आटा बन सके। मिल परिसर में ही रहने वाले स्टाफ को सैनिटाइज करा कर काम कराया जा रहा है। पूरा परिसर सैनिटाइज किया गया है। हम आम जनता को 25 रुपये किलो के भाव में आटा उपलब्ध कराएंगे। हालांकि खरीद 22.21 रुपये में हो रही है। इसके बाद खर्च मिला कर इस भाव में कुछ नहीं मिल पाएगा।
मिल में ऐसे बनता है आटा
पहले गेहूं छनता है। इसके बाद मिटटी आदि निकाल कर अलग-अलग खांचों में भरा जाता है। इसके बाद सूखा कर इसकी परत निकाली जाती है। परत निकाले जाने के बाद आटा बनाने का काम होता है। चोकर वाला आटा बनाने के लिए इसकी परत नहीं उतारी जाती है। मैदा और सूजी बनाने में अलग प्रक्रिया होती है। मैदा, सूजी और आटा के लिए कुछ उपकरण बदले भी जाते हैं।
फ्लोर मिलों का कारोबार
-जिले में कुल छह रोलर फ्लोर मिल, सभी मैदा और सूजी बनाती हैं।
-आटा बनाने की सबसे बेहतरीन तकनीकी स्विटजरलैंड की है।
-अधिकांश फ्लोर मिल स्विटरजरलैंड की तकनीकी से चल रही हैं।
-हरेक फ्लोर मिल का पूरा सिस्टम 20 करोड़ रुपये में स्थापित होता है।
-एक फ्लोर मिल का सालाना टर्नओवर लगभग 100 करोड़ रुपये से अधिक ।
-आटा बनाने का सेटअप अलग से लगता है, इसलिए नहीं बनाती हैं।
-गर्मी में एक दिन तो सर्दी में दो-तीन दिन में बनता है आटा, सूजी, मैदा।
-एक मिल में सालाना तीन से चार लाख क्विंटल गेहूं की खपत होती है।
-एक मिल एक दिन में 800 से 900 क्विंटल आटा का उत्पादन कर लेती है।
-इलाहाबाद में सबसे बेहतरीन आटा फ्लोर मिल, ये भी 20 करोड़ रुपये का।
-पंजाब का गेहूं सबसे बढ़िया, इसके बाद मध्य प्रदेश का शरबती गेहूं।
-शुक्रवार को फ्लोर मिलों ने 2221 रुपये क्विंटल के भाव में गेहूं खरीदा
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एटा जा रही बस बस में लगी आग

अलीगढ़ । खेरेश्वर मंदिर चौराहे के पास एटा जा रही बस में अचानक आग लग गई । जिससे अफरातफरी मच गई । बस में चढ़ने का प्रयास कर रहे तमाम लोग छिटक कर दूर भाग गए। कुछ लोग बस की खिड़की से कूद गए। इसी बीच पुलिस ने लोगों को दूर किया और उनकी जान बचाई । बस में अचानक से बैटरी में हुई शॉर्ट सर्किट की वजह से आग लगी थी । जो इंजन तक फैल रही थी लेकिन इसी बीच उसको रोक लिया गया । यह घटना शनिवार देर रात लगभग 11:00 बजे की है। मौके पर पुलिस और दूसरे लोगों ने बस में फंसे लोगों को बचाने में मशक्कत की । गौर हो कि कोरोना वायरस चलते दिल्ली एनसीआर पलवल और हरियाणा से हजारों की तादाद में मजदूर और कामगार परिवार सहित अलीगढ़ आ रहे हैं या अलीगढ़ के रास्ते से दूसरे शहरों को जा रहे हैं । इन लोगों की हजारों की भीड़ इस वक्त जीटी रोड हाईवे पर जमा है। इस बस का नंबर यूपी 81 ए ए 9277 है। आग लगने के बाद बस की खिड़की से कूदे अनिल और पति राम निवासी अंबेडकरनगर के पांव में फैक्चर हो गया है जिन को इलाज के लिए जिला अस्पताल भिजवाया गया है। ... और पढ़ें
अलीगढ़ में जीटी रोड हाईवे पर बस में लगी आग। अलीगढ़ में जीटी रोड हाईवे पर बस में लगी आग।

घरों में रहने को कहा तो पुलिस को पीटा, वर्दी फाड़ी, पिस्टल छीनने की कोशिश

संवाद न्यूज एजेंसी, अकराबाद (अलीगढ़)।
शनिवार की शाम करीब चार बजे कौड़ियागंज कस्बा स्थित उमेश चंद्र इंटर कॉलेज के पास 20-25 की संख्या में बैठकर ताश खेल रहे लोगों को घरों में रहने के लिए समझाना पुलिस के लिए महंगा पड़ गया। इससे भड़के लोगों ने पुलिस कर्मियों से मारपीट शुरू कर दी। वर्दी फाड़ते हुए दरोगा की सरकारी पिस्टल छीनने की भी कोशिश की। सूचना पर फोर्स के साथ सीओ बरला मौके पर पहुंच गए। मामले में तीन लोगों को हिरासत में लिया गया है। 12 नामजद समेत 25 अज्ञात पर दरोगा की ओर से रिपोर्ट दर्ज करवाई गई है।
जानकारी के अनुसार थाना कस्बा कौड़ियागंज पुलिस चौकी इंचार्ज लालबहादुर सिंह दो हमराह सिपाही सुभाष चंद्र व रविराज के साथ शाम चार बजे गश्त कर रहे थे। तभी उमेश चंद्र इंटर कालेज के पास कस्बे के 20-25 लोगों को एक साथ बैठकर ताश खेलते देख वहां पहुंच गए। लॉकडाउन की बात कहते हुए उन्होंने लोगों से अपने घरों के अंदर रहने की सलाह दी। आरोप है कि इसी बीच कुछ लोग पुलिस वालों से भिड़ गए और गाली-गलौज करने लगे। परिवार की महिलाओं को बुलाकर पुलिस वालों पर हमलावर हो गए। वर्दी फाड़ते हुए पुलिस वालों से मारपीट की। पिस्टल बचाने की कोशिश में चौकी इंचार्ज लाल बहादुर के साथ ही सिपाही रविराज मामूली रूप से चुटहिल हो गए। चौकी इंचार्ज ने एसओ को सूचना दी जिस पर एसओ सुनील कुमार के साथ ही सीओ बरला कर्मवीर सिंह फोर्स लेकर पहुंच गए। फोर्स को देखकर आरोपी भागने लगे। मौके से पुलिस ने तीन लोगों को हिरासत में ले लिया है। एसओ सुनील कुमार के अनुसार पुलिस से बदसलूकी, दरोगा से पिस्टल छीनने की कोशिश आदि में 12 नामजद सहित करीब 25 अज्ञात पर रिपोर्ट दर्ज की गई है।
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नोएडा से आ रहे युवक की बाइक से गिरकर मौत

- किसी ने शव को हाथ नहीं लगाया, फोन करने के बाद भी नहीं आई एंबुलेंस
- पुलिस ने शव को सीएचसी तक पहुंचाया, 15 हजार में निजी गाड़ी कर ले गए परिवार वाले
संवाद न्यूज एजेंसी, सिकंदराराऊ (हाथरस)।
शनिवार को नोएडा से सिद्धार्थ नगर के लिए निकले युवक की मोटरसाइकिल से गिरकर मौत हो गई। घटना के बाद आसपास के लोगों में युवक के कोरोना संक्रमित होने की अफवाह फैल गई। शव के नजदीक कोई भी नहीं गया। परिवार वाले 15 हजार रुपये में निजी गाड़ी कर शव ले गए।
सिद्धार्थ नगर निवासी विनोद तिवारी (29) पुत्र राममिलन तिवारी परिवार व भाइयों के साथ नोएडा में रहकर काम कर रहे थे। उन्हें मुंह का कैंसर था, जिसका इलाज हुआ था। पूरे देश मेें लॉकडाउन होने के बाद पूरा परिवार तीन बाइकों से नोएडा से सिद्धार्थ नगर के लिए चला था। शनिवार को सुबह 10 बजे सिकंदराराऊ में बस स्टैंड के निकट आते ही विनोद अचानक गिर गए। और उनकी मौत हो गई। इस घटना के बाद वहां इकट्ठे लोगों में अफवाह फैल गई कि युवक कोरोना संक्रमित था। इसके बाद कोई भी उसके शव के पास नहीं गया। इस दौरान लोगों ने एंबुलेंस को लगातार फोन किया लेकिन एंबुलेंस नहीं आई।
कोतवाल प्रवेश राणा को मृतक की पत्नी ने बताया कि इन्हें कैंसर था। यह बात कोतवाल ने लोगों को बताई। कोतवाल ने सिपाही की मदद से शव को उठा कर वाहन में रख सीएचसी पहुंचाया। सीएचसी पर मृतक के भाई ने एसडीएम विजय शर्मा, सीओ डॉ. राजीव सिंह को बीमारी के विषय में पूरी जानकारी दी। यहां से 15 हजार रुपये में निजी वाहन कर शव को परिवार सिद्धार्थ नगर ले गए।
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कोरोना का डर: सैनिक सरहद पर, परिवार वाले घरों में चिंतित

तुम कैसी हो, बच्चे कैसे हैं, अलीगढ़ में अभी तक कोरोना के कितने मरीज मिले हैं। बच्चों को ट्यूशन या बाहर खेलने मत जाने देना, अभी उनको घर में ही रखो, तुम भी बाजार जानेे की बजाय होम डिलीवरी से जरूरत का सामान घर पर ही मंगवा लो। रुको-रुको में तो ठीक हूं, तुम मेरी और बच्चों की चिंता मत करो। तुम देश की चाइना से लगी अरुणाचल प्रदेश की सीमा पर तैनात हो। यह कोरोना वायरस भी चीन से ही आया है। तुम बस अपना ख्याल रखना, मास्क और सैनिटाइजर का इस्तेमाल करना। मुझे तुम्हारे जज्बे और कंधों पर भरोसा है। तुम देश में किसी भी आतंकी को नहीं घुसने दोगे। मगर, अब दिल घबरा रहा है, क्योंकि अब देश की लड़ाई किसी मानव जैसे दिखने वाले आतंकी से नहीं है। बल्कि एक अनदेखे और अनजान से वायरस से है।
यह बातचीत रामबाग कालोनी गली नंबर तीन में रहने वाली बिंदु चौहान व उनके पति राजेश चौहान की फोन पर हुई। राजेश चौहान आर्मी में हवालदार के पद पर तैनात हैं। वह इस समय अरुणाचल प्रदेश में तेंगा बॉर्डर (चीन और भारत की सीमा) पर तैनात हैं। न सिर्फ बिंदु बल्कि देश की सरहदों पर तैनात हर सैनिक के परिवार की यही कहानी है। अलीगढ़ के भी करीब 300 परिवारों के लाल देश की सुरक्षा में तैनात हैं। इन सभी को कोरोना वायरस की चिंता सताने लगी है। बिंदु चौहान ने बताया कि पति से हर दिन फोन पर बात हो रही है। परिवार में दो बच्चे हैं। पति को अपनी जान से ज्यादा हमारी चिंता सता रही है। वह फोन पर रुंधे गले से बात करते हैं तो मन फफक उठता है।
चार माह बाद पति को मिली थी छुट्टी, लॉकडाउन के चलते नहीं आ सके घर
रामबाग कॉलोनी में ही रहने वाली गीता बघेल के पति रामनिवास असम रायफल में तैनात हैं। वह असम सीमा पर ड्यूटी दे रहे हैं। पत्नी गीता ने बताया कि पति नवंबर में घर आए थे। चार माह बाद उनको फिर से छुट्टी मिली थी। मगर, लॉकडाउन की घोषणा होने से वह घर नहीं आ पा रहे हैं। गीता ने बताया कि घर में दो छोटे बच्चे हैं। ससुराल में बूढ़े सास-ससुर हैं। घर का राशन भी खत्म हो रहा है। गैस सिलिंडर भी खत्म हो गया है। पति जब भी छुट्टी पर घर आते हैं तो इकट्ठा राशन भरवाकर जाते हैं। अब उनके न आने से घर में खाने तक के लाले पड़ जाएंगे। इधर, उनसे जब भी फोन पर बात होती है तो वह बच्चों की चिंता में परेशान हो उठते हैं। गीता ने बताया कि यह बहुत मुश्किल वक्त है।
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नायक बनकर पहुंच रहा पुलिस-प्रशासन, मददगार भी खूब आ रहे आगे

अरूणाचल प्रदेश में तैनात अलीगढ़ के सैनिक राजेश चौहान की पत्नी बिंदु व बच्चे।
लॉकडाउन के चलते पिछले एक सप्ताह से खाली हाथ बैठे श्रमिकों, गरीबों और राहगीरों के लिए पुलिस प्रशासनिक टीम नायक बनकर दौड़ रही है। चाहे शहर की मलिन बस्ती हो या श्रमिक बस्ती, चाहे सुदूर गांव देहात के गरीब इलाके हों। हर तरफ पुलिस प्रशासन की टीमों ने खाना बांटा। वहीं हाईवे पर दिल्ली से लौट रहे राहगीरों को भी जमकर खाना बांटा गया। इसे लेकर हबीब गार्डन में फूड बैंक की स्थापना कर दी गई। इधर श्रमिक एवं बेसहारा लोगों की मदद के लिए स्वयंसेवियों ने जमकर दान दिया। वहीं जीवनगढ़ इलाके से यूपी पुलिस के ट्विटर एकाउंट पर आटे की दिक्कत की पोस्ट आई तो एसएसपी के निर्देश पर तत्काल वहां क्वार्सी पुलिस पहुंची और मदद की।
लॉकडाउन से जिले में करीब 17 लाख श्रमिक-रोजाना कमाने खाने वाले बेरोजगार हो गए हैं। इनकी मदद के लिए पुलिस प्रशासन ने व्यापक इंतजाम कर दिए हैं। डीएम-एसएसपी ने सात मजिस्ट्रेटों व सर्किल अफसरों की टीम लगाकर सभी को खाने के पैकेट बंटवाएं व 10 किलो आटा, पांच किलो आलू, पांच किलो चावल, एक किलो तेल, एक किलो दाल, एक किलो नमक के पैकेट बंटवाये। हबीब गार्डन में जन सहयोग से फूड बैंक की स्थापना कर दी गई। यहां से आटा, दाल, चावल, तेल, आलू व नमक के पैकेट मलिन बस्तियों भुजपुरा, जमालपुर, जीवनगढ़ देहलीगेट, शाहजमाल समेत अन्य इलाकों में बंटवाए गए।
डीएम चंद्रभूषण सिंह ने बताया कि सारसौल बस अड्डा, खेरेश्वर मंदिर समेत कई अन्य इलाकों में खाने के तीन हजार पैकेट बंटवाए गए हैं। एसीएम द्वितीय रंजीत सिंह एवं सीओ तृतीय अनिल समानियां ने जमालपुर इलाके में आटा बंटवाया। सीओ द्वितीय पंकज श्रीवास्तव ने खेरेश्वर चौराहा, सारसौल चौराहा व पुराना बस स्टैंड पर खाने के 800 पैकेट बंटवाए गए। इस दौरान रेलवे मजिस्ट्रेट पेशकार दिलीप त्रिपाठी, धीरेंद्र सिंह, राजेश वार्ष्णेय, जयदीपक बर्तन भंडार, नीरज माहेश्वरी, अनुपम गोदानी आदि भी सहयोगी रहे।
बेसहारा लोगों की मदद के लिए बढ़े हाथ
लॉकडाउन से बेरोजगार और खाली हाथ लोगों की मदद के लिए स्वयंसेवा आगे आ रहे हैं। अलहमद एग्रो फूड प्रोडक्ट के कर्ताधर्ताओं ने आपदा प्रबंधन मद में 7.50 लाख का चेक दिया। थर्मामीटर एवं अन्य उपकरण बनाने वाली हिक्स कंपनी के हरिप्रकाश गुप्ता ने गरीबों की मदद के लिए 600 क्विंटल आटा दान किया है। वेलफेयर सोसाइटी के अध्यक्ष जितेंद्र सिंह ने इंस्पेक्टर बन्नादेवी को आपदा प्रबंधन मद में 1100 रुपये का चेक दिया। डॉ. विष्णु दत्त पुराना अस्पताल खैर ने प्रधानमंत्री राहत कोष में 21 हजार रुपये के दान का चेक एसडीएम अंजुम बी को सौंपा।
आरपीएफ ने बढ़ाए मदद को हाथ
रेलवे सुरक्षा बल अलीगढ़ पोस्ट पर तैनात सुरक्षाकर्मियों ने भी कोरोना से बचाव और इसकी रोकथाम में सरकार को आर्थिक सहायता देने की घोषणा की है। इसके साथ ही आरपीएफ इंस्पेक्टर चमन सिंह तोमर ने रेलवे स्टेशन के बाहर शनिवार को गरीबों को खाना बंटवाया। इसके साथ उन्होंने बताया कि सरकार को आर्थिक सहायता देने के लिए एनसीआर रेलवे ने 23 करोड़ से अधिक की राशि देने की घोषणा की है, इसमें आरपीएफ के कर्मचारी भी योगदान देंगे।
पंप वालों ने 15 हजार किलो आटा दिया
अलीगढ़ पेट्रोलियम डीलर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष विजय मंगल गुप्ता ने बताया कि एसोसिएशन की ओर से 15000 किलो आटा जिला प्रशासन को उपलब्ध कराया गया है। इसको जिला पूर्ति विभाग के माध्यम से बांटा जाएगा।
रोजाना 600 लोगों को खिलाएंगे खाना
गांधी आई हास्पिटल के प्रबंधक मधुप लहरी, सुरेश गोविल, गिरीश गोविल, राजीव अग्रवाल अनु, पूर्व विधायक खैर प्रमोद गौड़, राजीव मित्तल, राकेश तलूना, डॉ. वाईके द्विवेदी, विजय सोनी, पिंकी भाटिया, आरके खुराना, संजीव सीए आदि ने मिल कर रोजाना 600 लोगों को 14 अप्रैल तक भोजन उपलब्ध कराना शुरू किया है। शनिवार को बरौली विधायक ने इस खाना वितरण वाहनों को हरी झंडी दिखा कर रवाना किया। मधुप लहरी ने बताया कि ये खाना उन राहगीरों में बांटा जाएगा जो कई किमी का सफर तय कर अलीगढ़ से गुजर रहे हैं।
जफर आलम अब दस टन आटा बांटेंगे
लिंक लॉक्स कंपनी के संस्थापक एवं पूर्व नगर विधायक सपा नेता जफर आलम ने रेडक्रास सोसायटी को पांच लाख रुपये दिए हैं। इसके साथ दस टन आटा जरूरतमंदों में बांटने के लिए मंगवाया है। ये आटा उनको शुक्रवार शाम को मिल गया है। इससे पहले लिंक लॉक्स के कर्मचारियों को ऑनलाइन भुगतान करा दिया गया था।
जमालपुर के 22 किराना दुकानदारों को 44 क्विंटल आटा उपलब्ध कराया
लॉकडाउन के दौरान थाना क्वार्सी क्षेत्र के जमालपुर में रहने वाले गरीब तबके के लोगों को आटे की किल्लत का सामना न करना पड़े इसके लिए जिला प्रशासन ने शनिवार को वहां किराना की 22 दुकानों को नामित किया इनके संचालकों को दो-दो क्विंटल आटे की पर्चियां उपलब्ध कराईं। वह पर्ची पर लिखी संबंधित आटा मिल से आटा उठाएंगे और जनता को अधिकतम 27 रुपये प्रति किलो के हिसाब से बेचेंगे। एसीएम द्वितीय ने बताया कि जमालपुर में कुछ ऐसे दैनिक श्रमिकों के होने की जानकारी मिली थी, जिनके पास खाने का कोई साधन नहीं बचा था। जमालपुर चौकी इंचार्ज नितिन राठी को भेज क्षेत्र के 50 घरों में राशन उपलब्ध कराया गया।
जरूरतमंदों के पेट भरने के लिए इन लोगों ने की सेवा
-गैलेक्सी टावर में गैलेक्सी रसोई का शनिवार को शुभारंभ कर 100 खाने के पैकेट बनाए गए। यहां लोगों ने बताया कि प्रतिदिन खाने के पैकेट बनाए जाएंगे। जिसको जरूरत है भोजन लेकर जा सकता है।
- परछाईं फाउंडेशन के अध्यक्ष शोएब अहमद व मरकज के मालिक हाफिज मोहम्मद तय्यब खान के पुत्र मो. असलम खान व उनकी टीम ने जमालपुर, धौर्रा माफी, नई बस्ती आदि क्षेत्रों में बेसहारों को राशन वितरित किया। जिसमें प्रोजेक्ट मैनेजर मोहम्मद फरदीन, शादाब अली, मार्शल मैराज, उबैदुर्रहमान, मोहम्मद आकिल, साकिब खान, लुबना इकबाल, जैनुल खान, सुहेल अहमद, नीलू दीवान का सहयोग रहा।
- जैन समाज ने सासनीगेट एसओ जावेद खान, एसीएम द्वितीय रंजीत सिंह के साथ बनाए हुए खाने के पैकेट वितरित किए।
-दिव्यांग एकता वेलफेयर सोसाइटी अलीगढ़ ने बन्नादेवी इंस्पेक्टर रविंद्र कुमार दुबे को 1100 रुपये का चेक सौंपा।
- कांग्रेस के प्रदेश महासचिव योगेश दीक्षित एवं महानगर अध्यक्ष परवेज अहमद ने विभिन्न स्थानों पर बिस्किट व मास्क का वितरण किया। इसके अलावा कांग्रेस नेताओं ने लोगों को आलू व आटा बांटकर घर से न निकलने की सलाह दी।
- बौद्ध समाज के धम्म भूमि फाउंडेशन ने नगला कलार, सराय लवरिया, नगला मेहता आदि बस्तियों में खाद्य सामग्री का वितरण किया। इस मौके पर सत्यवीर बौद्ध, सुशील गौतम, डीपी सिंह, प्रेमपाल बौद्ध, इंजीनियर बृजेश बौद्ध, सुशील बौद्ध आदि मौजूद रहे।
- समाजवादी मुलायम सिंह यूथ ब्रिगेड ने प्रदेश कार्यकारिणी सदस्य इसरार सोलंकी, पूर्व महानगर उपाध्यक्ष मोहसिन मेवाती, अजीम अब्बासी, फैजान बहादुर ने लखनऊ दिल्ली मार्ग पर भूखे लोगों को राहत सामग्री का वितरण किया।
- समाजवादी युवजन सभा उत्तर प्रदेश के प्रदेश सचिव सलमान साहिद ने शान मोहम्मद, राशिद, गौरव तोमर, हैप्पी सिंह, सोनू कुमार के साथ जरूरतमंदों को राशन सामग्री का वितरण किया।
- वंदे भारत सामाजिक संस्था के बैनरतले अध्यक्ष राजीव अग्रवाल, नीरज प्रजापति, आकाश, हिमांशु गुप्ता, मो. अनीस आदि ने मुसाफिरों को भोजन कराया।
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खाली बैठे श्रमिकों को एक हजार देने की योजना को कैश कराने में जुटे दलाल

सरकार द्वारा कोरोना के खतरे को देखते हुए किये गए लॉकडाउन के दौरान खाली बैठे श्रमिकों के खातों में एक हजार रुपये डाले जाने की योजना को कुछ दलालों ने कैश कराना शुरू कर दिया है। वे लोगों को फार्म भरवाने एवं पैसा दिलाने के नाम पर 50 से 100 रुपये वसूल रहे हैं। इसकी शिकायत मिलने पर डीएम ने जांच के आदेश जारी कर दिए हैं।
लॉकडाउन के बाद शहरी इलाके में ही लाखों की संख्या में दैनिक श्रमिक, पल्लेदार, ठेल, ढकेल, खोमचे, ई रिक्शा, रिक्शा एवं खोखे वाले घर बैठे हुए हैं। महानगर के जीवनगढ़, जमालपुर, भुजपुरा, देहलीगेट, शाहजमाल, मलिन बस्तियों समेत अन्य इलाकों में तमाम लोग ऐसे हैं, जिनके पास राशन खरीदने तक को पैसा नहीं बचा है। नगर निगम, श्रम विभाग, मनरेगा समेत अन्य योजनाओं के श्रमिकों के खातों में तो पैसा डलने लगा है, लेकिन बड़ी संख्या में मौजूद अपंजीकृत श्रमिकों के पंजीकरण में समय लग रहा है।
ऐसे लोगों को योजना का लाभ दिलाने के लिए दलाल सक्रिय हो गए हैं। यह लोग योजना के फार्म डॉउनलोड कर उन्हें भरवाने एवं पैसा दिलाने के नाम पर वसूली कर रहे हैं। डीएम चंद्रभूषण सिंह ने बताया कि अवैध वसूली की शिकायत मिली हैं। जांच के आदेश दे दिए गए हैं। जो भी ऐसा करता पाया जाएगा, उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
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जो वाहन दिखा उसी पर लटक गए.. बस किसी तरह घर पहुंचें

कोरोना वायरस के कारण हुए लॉकडाउन के चलते पश्चिमी उत्तर प्रदेश के कई शहरों से मजदूरों का पलायन जारी है। हाईवे बाईपास और जीटी रोड के हालात देख नहीं लगता कि यहां कोई लॉकडाउन है। गरमी, भूख प्यास और पैदल चलने की थकान इन मजदूरों को परेशान कर रही है। जिनके साथ छोटे बच्चे हैं उनकी हालात और भी खराब है। कई किमी पैदल चलने के कारण इनके पैरों में छाले पड़ गए हैं तो कई के पैर सूज गए हैं। महिलाओं की स्थिति भी खराब है। इनका सब्र टूट रहा है। अगर, जल्द ही प्रशासन ने इनको वाहन मुहैया नहीं कराए तो सड़कों पर मारामारी की स्थिति हो सकती है। यदि हाईवे पर आगरा व इटावा जाने के लिए कोई वाहन दिखता है तो उनके चेहरे पर चमक आ जाती है, लेकिन पहले से ठसाठस इन वाहनों में लोग जान जोखिम में डालकर सवार हो रहे हैं। हालांकि, पुलिस भी सड़कों पर ट्रक, डंपर, लोडर आदि गाड़ियों को रोक रही है और मुसाफिरों को इन वाहनों में बैठा रही है।
शनिवार दोपहर करीब 12 बजे अमर उजाला टीम को दिल्ली हाईवे स्थित खेरेश्वर चौराहे पर हजारों की संख्या में लोग खड़े मिले। इस दौरान पुलिस वहां से गुजरने वाले वाहनों को रोक रही थी और यात्रियों को बुलाकर उनमें बैठा रही थी। आगरा के एक ट्रक में तो इलाहाबाद, बस्ती, गोंडा के मुसाफिरों को चढ़ाया, जबकि मुरादाबाद, बरेली, बदायूं जाने वाले यात्रियों को कासगंज वाले लोडर में बैठाया। इस दौरान पुलिस लोगों से दूर-दूर रहने की अपील भी करती रही, लेकिन वाहन पकड़ने की जल्दी में लोग सब भूल गए। जैसे ही वाहन आता, वैसे ही चढ़ने के लिए भीड़ लग जाती।
पुलिस नेे डलवाया पेट्रोल
खेरेश्वर चौराहे पर परेशान इटावा के यात्रियों को ले जाने के लिए एक लोडर चालक तैयार हो गया तो पुलिस ने उसकी गाड़ी में पेट्रोल डलवाने की व्यवस्था की। खेरेश्वर चौराहे के पास वाले पेट्रोल पंप पर दोपहर लगभग 12 बजे पेट्रोल दिया जा रहा था। जब अमर उजाला रिपोर्टर ने पूछा कि 11 बजे के बाद पेट्रोल क्यों दे रहे हो। इस पर पेट्रोल पंप संचालक ने बताया कि चौकी इंचार्ज का फोन आया है कि इस गाड़ी को पेट्रोल दे दिया जाए। ताकि इटावा तक सवारियां चली जाएंगी।
रोडवेज ने 65 बसों का इंतजाम किया
पैदल मुसाफिरों को यथासंभव जल्द से जल्द उनके गंतव्य तक पहुंचाने के लिए रोडवेज ने 65 बसों का इंतजाम किया है। इसमें 15 बसें खैर और टप्पल में लगाई गई हैं। ये मुसाफिरों को खेरेश्वर चौराहे पर लेकर आ रही हैं। वहीं 40 बसें लोनी व गाजियाबाद के लिए लगाई गई हैं। यहां से अलीगढ़, एटा, कासगंज के यात्रियों को लाया जा रहा है। 30 बसें अलीगढ़ से एटा, कासगंज छोड़ने के लिए लगाई गई हैं। साथ ही खेरेश्वर चौराहे पर तैनात लोधा पुलिस ने भी लोकल वाहनों का इंतजाम किया है।
जगह-जगह लगे लंगर, शहर वाले दे रहे खाना
जीटी रोड से शहर के अंदर से एटा की ओर जाने वालों को शहर के कई प्रबुद्ध लोगों ने पूड़ी सब्जी, बिस्किट, कचौड़ी के पैकेट और पानी की बोतलें बांटीं। छोटे बच्चों के लिए कुछ लोगों ने दूध का इंतजाम किया। सुबह कई लोगों ने इन मुसाफिरों को चाय भी पिलवाई। मजदूरों के साथ चल रही उनकी पत्नियों ने कहा कि अगर प्रशासन सुबह 7 से 11 बजे तक किराना की दुकानें खुलवा सकता है तो खाने पीने के कुछ होटल भी खोले जा सकते हैं जहां कम से कम बच्चों को दूध मिल सके। कोरोना से पहले ही हजारों लोग भूख से मर जाएंगे। जिनके पास रास्ते में कुछ भी खाने के लिए नहीं है। जो खाना लेकर चले थे, वो एक दिन में ही खत्म हो गया। जो बचा था वो गर्मी के कारण खराब हो गया। अब वो खराब खाना खाएं तो भी बीमार होंगे।
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एएमयू ने तैयार किया अपना सैनिटाइजर अलमा मेटर

अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय (एएमयू) के रसायन शास्त्र विभाग की डा. अनामिका गुप्ता और कम्यूनिटी कॉलेज के डॉ. रिजवान हुसैन ने कोविड-19 (कोरोना वायरस) के संक्रमण के खतरों को ध्यान में रखते हुए सैनिटाइजर और संक्रमण रोधी दवा तैयार की यह दवा विश्व स्वास्थ्य संगठन के मानकों के अनुरूप है।
बाजार में बड़ी कंपनियों द्वारा बेचे जा रहे सैनिटाइजर की उपलब्धता कम होने के चलते यह एक महत्वपूर्ण कदम साबित होगी। इस सैनिटाइजर तथा संक्रमण रोधी पदार्थ का नाम ‘अलमा मेटर कोरोना सैनिटाइजर और अलमा मेटर कोरोना डिस्इंफेक्टेंट’ रखा गया है। डीन स्टूडेंटट वेलफेयर प्रो. मुजाहिद बेग ने कहा कि इस सैनिटाइजर को कुलपति प्रो. तारिक मंसूर को प्रस्तुत किया गया तथा उन्होंने डॉ. गुप्ता एवं डॉ. हुसैन के प्रयासों की सराहना की।
प्रो. मुजाहिद बेग ने बताया कि इस सैनिटाइजर की 60 शीशियां विभिन्न आवासीय हालों तथा विश्वविद्यालय के विभिन्न कार्यालयों में रखी जाएंगी। उन्होंने कहा कि यह संक्रमण रोधी पदार्थ हाथों को तथा घर के कमरों, मेज, कुर्सी तथा लकड़ी व स्टील के बने हुए दरवाजों एवं अन्य निर्जीव चीजों को स्वच्छ करने में मदद करेगा। इस सैनिटाइजर संक्रमण रोधी दवा की तैयारी केमिस्ट्री विभाग की प्रयोगशाला में की गई है।
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अलीगढ़: मंदोदरी बोली दिल में बसी है रामायण

रामायण का संगीत अलीगढ़ के रविंद्र जैन ने दिया था और रावण की पटरानी बनी थी अलीगढ़ की अपराजिता आशीष निगम अलीगढ। रामायण टीवी सीरियल का 33 वर्ष बाद दोबारा प्रसारण होते ही अलीगढ़ से जुड़ी इसकी कई यादें साझा होने लगी हैं। इस धारावाहिक में मंदोदरी की भूमिका से पहचान बनाने वाली भारत भूषण की बेटी अपराजिता भूषण मूल रूप से अलीगढ़ की रहने वाली हैं।

उन्होंने फोन पर बताया कि पिता के समय से वह फिल्मों और टीवी सीरियलों में अपनी पहचान बनाने का प्रयास कर रही थी । लेकिन 32 वर्ष की उम्र तक उनको इसका कोई मौका नहीं मिला। इसके बाद उन्होंने रामायण धारावाहिक से अपनी पहचान बनाई । आज भी रामायण उनके दिल में बसी हुई है । उसकी शूटिंग को अभी तक भुला नहीं पाई है।

उन्होंने बताया कि वर्तमान में वह पुणे में रहती हैं और जब उन्होंने अमर उजाला अलीगढ़ के 28 मार्च के डिजिटल अंक में रामायण टीवी सीरियल से संबंधित खबर पड़ी तो उनकी यादें एक बार फिर से ताजा हो गई हैं। रामायण धारावाहिक में मंदोदरी बनी अपराजिता ने बताया कि वर्ष 1987 में इस धारावाहिक की शूटिंग मुंबई से कुछ दूरी पर उमरगांव में होती थी।
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तीन दशक बाद आ रहे महाभारत की पटकथा एएमयू के राही मासूम रजा ने लिखी थी

दीपक शर्मा अलीगढ़ । तीन दशक बाद छोटे पर्दे पर फिर से प्रसारित होने जा रहे धारावाहिक महाभारत की पटकथा अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय (एएमयू) के उर्दू विभाग के वरिष्ठ शिक्षक डॉ. राही मासूम रजा ने लिखी थी। इस धारावाहिक के टीवी पर फिर से प्रसारित होते ही अब राही मासूम रजा की एक बार फिर से चर्चा भी होने लगी है।

राही मासूम रजा का अलीगढ़ में वह कमरा और मकान अभी भी मौजूद है जहां पर बैठकर उन्होंने महाभारत के कई एपिसोड लिखे। राही मासूम रजा से जुड़े रहे और एएमयू के यूनानी चिकित्सा में प्रोफेसर एफ एस शीरानी कहते हैं कि राही मासूम रजा एएमयू के उर्दू विभाग में 1960 में पढ़ाया करते थे । 

उस समय अलीगढ़ के ही एक फिल्म निर्माता जो कि उस समय बहुत मशहूर थे, आर चंद्रा (भारत भूषण के बड़े भाई ) अपनी फिल्म नई उमर की नई फसल की अलीगढ़ में शूटिंग कर रहे थे। इस दौरान राही मासूम रजा मुंबई के लोगों के संपर्क में आए।

मुंबई के फिल्म जगत के लोगों ने राही मासूम रजा को वहां आने की दावत दी। इसके बाद राही मासूम रजा मुंबई शिफ्ट हो गए । उन्होंने तकरीबन 300 फिल्मों में स्क्रिप्ट लिखने का काम किया।

बीआर चोपड़ा जब अपने मेगा सीरियल महाभारत का निर्माण कर रहे थे तो उसके लिए पटकथा और संवाद लिखने का काम डॉ. राही मासूम रजा को दिया गया। यह काम उनके जीवन में मील का पत्थर बन गया।

प्रोफेसर शीरानी बताते हैं महाभारत का एक दृश्य है, जिसमें एक किरदार गंगा, नदी के तट पर कुछ कंकर चुन रही है। यह उनके पुत्रों की अस्थियां थीं। इस सीन के लिए राही मासूम रजा ने मीर अनीस का मर्सिया मंगवाया और उसको उलट कर यह शोक भरा दृश्य लिख दिया।

महाभारत के एपिसोड लिखते हुए एक वक्त ऐसा भी आया कि जब राही मासूम रजा को मुंबई में मेंटल ब्लॉक हो गया।  वह लिख पाने में अपने आप को असमर्थ सा महसूस करने लगे।

इससे निजात पाने के लिए अलीगढ़ आ गए और यहीं पर शमशाद मार्केट स्थित अपनी कोठी के बगीचे में बैठकर महाभारत के कई सीन लिखे।  प्रोफेसर शीरानी कहते हैं केवल महाभारत ही नहीं उन्होंने नीम का पेड़ और चंद्रकांता जैसे धारावाहिकों की पटकथा भी अलीगढ़ में ही रहते हुए लिखी । वह फरवरी और मार्च के महीने में अलीगढ़ आते थे और यहां पर रुकना उन्हें बेहद पसंद था।
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