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विनायक सिटी सेंटर (पीवीआर) में बम मिलने की सूचना पर खाली कराया गया माल (देखें तस्वीरें)

नाबालिग को जेल भेजने पर हाईकोर्ट नाराज, पुलिस पर सीसीटीवी फुटेज छुपाने और मानवाधिकार हनन का आरोप

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने नाबालिग को अपहरण के आरोप में झूंसी पुलिस द्वारा गिरफ्तार कर जेल भेजे जाने पर गहरी नाराजगी जताई है। कोर्ट झूंसी थाने की पुलिस से दो हफ्ते में विस्तृत जानकारी तलब की है। गिरफ्तारी के खिलाफ नाबालिग की मां ने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की है। याचिका पर न्यायमूर्ति प्रीतिंकर दिवाकर और न्यायमूर्ति दीपक वर्मा की पीठ सुनवाई कर रही है।
 
याची के अधिवक्ता सुनील यादव का कहना था कि 30 अक्तूबर को आवास विकास कालोनी योजना-2 से एक डॉक्टर के बेटे के कथित अपहरण के आरोप में पुलिस ने तीन युवकों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की थी। झूंसी पुलिस ने सरोज विद्याशंकर इंटर कालेज से अपहृत की बरामदगी दिखाते हुए एक मशहूर मिठाई व्यवसायी के बेटे समेत नाबालिग को सेंट्रल जेल नैनी भेज दिया था। अधिवक्ता का कहना था कि अभियोजन की कहानी झूठी, मनगढंत और नाटकीय है। पुलिस ने विधि विरुद्ध तरीके से नाबालिग को जेल भेजा है। 

 दर्ज एफआईआर के मुताबिक जिस कथित का सुबह साढ़े दस बजे अपहरण और पुलिस द्वारा दोपहर सवा तीन बजे सरोज विद्याशंकर इंटर कालेज से बरामदगी बताई गई है, वो अपनी सौतेली मां मुकदमा वादिनी के साथ 12 बजे झूंसी थाने में सशरीर मौजूद था। जिसकी पुष्टि झूंसी थाने में लगे सीसीटीवी की फुटेज से की जा सकती है। जिसको झूंसी पुलिस जानबूझ कर छिपाने और मिटाने का प्रयास कर रही है।

विवेचनाधिकारी ने जानबूझ कर थाने के सीसीटीवी कैमरे के इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य का संकलन नहीं किया, जो माननीय सुप्रीम कोर्ट के आदेशों की स्पष्ट अवमानना और पुलिस रेगुलेशन के चैप्टर-11 पैरा-107 का जानबूझ कर किया गया उल्लंघन है। कोर्ट ने राज्य सरकार के अधिवक्ता को मामले की विस्तृत जानकारी के लिए दो सप्ताह का समय दिया है।
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सीरम इंस्टीट्यूट में लगी आग में पट्टी के दो मजदूरों की भी गई जान

कोरोना रोधी टीका बनाने वाले संस्थान सीरम इंस्टीट्यूट में बृहस्पतिवार को लगी आग से मरने वालों में दो मजदूर पट्टी इलाके के भी शामिल हैं। एक युवक कोतवाली क्षेत्र के बरहुपुर, जबकि दूसरा आसपुर देवसरा के दलापुर गांव का रहने वाला था। 

बरहुपुर गांव निवासी विपिन कुमार सरोज (22) तथा विनय कुमार (20) पुत्र लालबहादुर को महदहा गांव का एक ठेकेदार मजदूरी करने के लिए पुणे ले गया था। दोनों भाई पुणे के सीरम इंस्टीट्यूट में मजदूरी करते थे। बृहस्पतिवार को परिसर में लगी आग में दोनों भाई फंस गए थे। इसमें किसी तरह विनय को बाहर निकाल लिया गया।

जबकि विपिन को बचाने के चक्कर में आसपुर देवसरा के दलापुर गांव निवासी रमाशंकर पुत्र छोटेलाल खुद भी आग में फंस गया और दोनों की मौत हो गई। दलापुर गांव निवासी रमाशंकर (21) पुत्र छोटेलाल परिवार की रोजी-रोटी चलाने के लिए पुणे के सीरम इंस्टीट्यूट में लेबर के तौर पर काम करता था। रमाशंकर की मौत की सूचना से परिजनों में कोहराम मचा है। वह पिछले वर्ष मार्च के महीने में पुणे गया था। उधर, घटना की जानकारी रात में मिलने के बाद शुक्रवार सुबह विपिन के पिता लालबहादुर पुणे के लिए रवाना हो गए।
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संगम पर बढ़ेंगी सुविधाएं, गंगा आरती के लिए बनेगा भव्य मंच

संगम पर स्थायी तौर पर तीर्थाटन सुविधाओं का विकास कराया जाएगा। संगम पर वर्ष पर्यंत आने वाले श्रद्धालुओं की सुविधा को ध्यान में रखकर प्रसाधन निर्माण के अलावा गंगा निर्मलीकरण के लिए नियमित सफाई करने वाली मशीन लगाई जाएगी। साथ ही गंगा आरती के लिए भव्य मंच का निर्माण कराया जाएगा। यह निर्णय प्रयागराज मेला प्राधिकरण की शनिवार को हुई बैठक में लिया गया।

माघ मेला के बाद वर्ष भर संगम स्नान और कर्मकांड के लिए देश-दुनिया से आने वाले श्रद्धालुओं के लिए संगम पर बुनियादी सुविधाएं मुहैया कराई जाएंगी। वर्ष भर में लाखों भक्त संगम पर आते हैं, लेकिन वहां माघ मेले के बाद सुविधाओं के नाम पर वहां कुछ भी नहीं मिल पाता है। लेकिन, अब प्रयागराज मेला प्राधिकरण ने इस दिशा में पहल शुरू कर दी है। शनिवार को प्राधिकरण की 10वीं बोर्ड की बैठक में सुविधाओं के विकास के लिए कई प्रस्तावों पर मुहर लगाई गई। 

इसके तहत 50 स्थायी शौचालय का निर्माण कराने और संगम पर सफाई के लिए सेक्शन मशीन खरीदने का प्रस्ताव रखा गया। साथ ही वर्ष पर्यंत स्नान, दर्शन, आरती, पूजा के लिए आने वाले तीर्थ यात्रियों एवं स्नानार्थियों के सुगम स्नान के लिए वीआईपी फ्लोटिंग जेटी के अलावा स्थायी आरती स्थल की स्थापना का भी प्रस्ताव रखा गया। 

डीएम भानु चंद्र गोस्वामी का कहना था कि मेला क्षेत्र में वर्ष पर्यंत होने वाले आयोजनों में हर बार अस्थाई जेटी और स्टेज का निर्माण कराया जाता है। बाद में जेटी, स्टेज को डिस्मेंटल कर दिया जाता है। बार-बार निर्माण और डिस्मेंटल में अत्यधिक व्यय के साथ ही परिश्रम और समय की भी बर्बादी होती है। ऐसे में संगम पर इस तरह की सुविधाओं का स्थाई तौर पर विकास कराने की जरूरत है। इस मौकेपर एसएसपी सर्वश्रेष्ठ त्रिपाठी, पीडीए उपाध्यक्ष अंकित अग्रवाल, नगर आयुक्त रवि रंजन, कमांडेंट ओडी फोर्ट कर्नल विवेक दबास, सिटी मजिस्ट्रेट रजनीश मिश्रा समेत कई अफसर उपस्थित थे।

मेला क्षेत्र का होगा ड्रोन सर्वे
संगम क्षेत्र का ड्रोन सर्वे भी कराया जाएगा। मेला क्षेत्र की वास्तविक स्थिति जानने के लिए ड्रोन सर्वे केप्रस्ताव पर मुहर लगाई गई। अफसरों का कहना था कि इस सर्वे से मेला एवं आसपास के क्षेत्रों में भविष्य में निर्माण, यातायात नियंत्रण एवं अतिक्रमण हटाने जैसे कार्यों में भी मदद मिलेगी।

जल पुलिस चौकी खुलेगी, तीर्थपुरोहितों के सजेंगे तख्त
गंगा-यमुना में डुबकी लगाने के लिए आने वाले श्रद्धालुओं की सुरक्षा के लिए जल पुलिस चौकी की स्थापना होगी। पर्यटकों को संगम क्षेत्र की सुंदरता की अनुभूति कराने के लिए अलग-अलग स्थानों पर परंपरागत रूप से तीर्थ पुरोहितों की ओर से रखे गए तख्तों का सुंदरीकरण भी कराया जाएगा। साथ ही अगले वित्तीय वर्ष से स्थाई दुकानों की संख्या में वृद्धि करने का भी प्रस्ताव रखा गया। आईजी केपी सिंह ने जल पुलिस चौकी की स्थापना के प्रस्ताव को सराहा।

जल्द बनेगी मेला प्राधिकरण की वेबसाइट
मेला प्राधिकरण की वेबसाइट बनाने का भी प्रस्ताव रखा गया। ताकि, इसके माध्यम से प्राधिकरण के कार्यों एवं मेले से संबंधित सूचनाओं को निरंतर अपलोड किया जा सके। इससे पहले बैठक की शुरुआत नौवीं बोर्ड की बैठक में लिए गए निर्णयों की अनुपालन आख्या प्रस्तुत करने के साथ हुई।

पौष पूर्णिमा स्नान पर्व पर कोविड प्रोटोकॉल का कराएं पालन: मंडलायुक्त
मंडलायुक्त आर रमेश कुमार ने शासन की मंशा के अनुरूप भविष्य में होने वाले मेलों को और भव्य बनाने हेतु किए जा रहे इन प्रयासों की सराहना की। उन्होंने माघ मेले के दूसरे सबसे बड़े स्नान पर्व की तैयारियां समय रहते पूरी करने का निर्देश दिया। मेले के दूसरे स्नान पर्व पौष पूर्णिमा पर कोविड-19 प्रोटोकॉल्स का अनुपालन कराने के लिए उन्होंन अफसरों को निर्देश दिया।
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माघ मेले की तैयारियों में जगमगाती संगम नगरी... माघ मेले की तैयारियों में जगमगाती संगम नगरी...

डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य ने अयोध्या में श्रीराम मंदिर निर्माण के लिए सौंपा अपना 30 माह का वेतन 11 लाख

गंगा-यमुना प्रदूषण मामला :  हाईकोर्ट ने पूछा- गंगा जल पीने लायक है या नहीं

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड से पूछा है कि गंगा का जल पीने लायक है अथवा नहीं। यदि पीने लायक नहीं है तो इसे शुद्ध बनाने के लिए आवश्यक कदम उठाए जाएं। कोर्ट ने प्रदूषण बोर्ड को प्रयागराज  माघ मेला क्षेत्र में तीन अलग स्थानों से गंगा -यमुना का जल लेकर जांच कराकर रिपोर्ट पेश करने का निर्देश दिया है। कोर्ट ने गंगा यमुना मे लगातार पानी का बहाव बरकरार रखने का निर्देश दिया है। 

कोर्ट ने राज्य सरकार से मेला क्षेत्र के दो किमी क्षेत्र में पॉलिथिन/प्लास्टिक प्रयोग पर प्रतिबंध लगाने की जारी अधिसूचना पेश करने को कहा है। जिलाधिकारी प्रयागराज से  सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट की स्थिति पर रिपोर्ट मांगी है। साथ ही जल प्रवाह बनाए रखते हुए डाटा पेश करे। कोर्ट ने नगर आयुक्त से गंगा यमुना में सीधे गिरने वाले नालों की  रिपोर्ट व्यक्तिगत हलफनामा दाखिल कर प्रस्तुत करने के लिए कहा है। याचिका की अगली सुनवाई 28जनवरी को होगी।

यह आदेश न्यायमूर्ति एम के गुप्ता, न्यायमूर्ति सिद्धार्थ वर्मा तथा न्यायमूर्ति अजित कुमार की पूर्णपीठ ने गंगा प्रदूषण मामले की सुनवाई करते हुए दिया है। 
याचिका पर अधिवक्ता विजय चंद्र श्रीवास्तव, सुनीता शर्मा, शैलेश सिंह,भारत सरकार के अधिवक्ता राजेश त्रिपाठी, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के वरिष्ठ अधिवक्ता एच एन सिंह ,तृप्ति वर्मा, विभु राय,मनु घिल्डियाल आदि अधिवक्ताओं ने पक्ष रखा।

कोर्ट में कहा गया कि गंगा यमुना मे गंदे नाले बिना शोधित गिर रहे हैं। जिससे पानी पीना तो दूर नहाने लायक भी  नहीं है। गंगा के पानी में कालापन है। माघ मेले के दौरान कल्पवासी व साधु संत गंगा स्नान करते हैं तथा पीने व खाना बनाने के लिए भी गंगा जल ही उपयोग करते हैं।  उन्हें आरओ का पानी पीना पड रहा है।

यह भी कहा गया कि एसटीपी ठीक से काम नहीं कर रही ।बिना शोधित पानी गंगा यमुना में जा रहा है।साथ ही मेले में पालीथीन से फैल रहे प्रदूषण की तरफ कोर्ट का ध्यान खींचा गया। बताया गया कि 2010 में कोर्ट ने गंगा किनारे स्थित सभी शहरों में दो किमी तक पालीथीन उपयोग पर प्रतिबंध लगाने का आदेश दिया है। जिसका अधिकारी पालन नहीं कर रहे है।
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जून के बाद भी डीए फ्रीज करने के संकेत, कर्मचारी नेताओं ने कैबिनेट सेक्रेटरी से की बात

इलाहाबाद हाईकोर्ट

हाईकोर्ट ने तहसीलदार को दी एक माह की मोहलत, आदेश का पालन न होने पर होना पड़ेगा हाजिर

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने जौनपुर ,शाहगंज के तहसीलदार को तीसरी बार दाखिल अवमानना याचिका पर फिर से आदेश पालन का एक माह का समय दिया है और कहा है कि यदि अनुपालन नहीं किया गया तो कोर्ट तहसीलदार को तलब कर अवमानना आरोप निर्मित करेगी।

इससे पहले भी दो बार दाखिल अवमानना याचिका को आदेश पालन का निर्देश देते हुए कोर्ट ने निस्तारित कर दिया था।आदेश की लगातार अवहेलना जारी रहने पर तहसीलदार को दंडित करने की तीसरी बार हाईकोर्ट से गुहार  लगाई गई है। 

कोर्ट ने अभिषेक कुमार राय तहसीलदार को अवमानना का नोटिस जारी किया है। और एक माह में जवाब मांगा है। कोर्टने कहा है कि यदि आदेश का पालन कर हलफनामा दाखिल नही किया गया तो तहसीलदार अगली सुनवाई की तिथि पर कोर्ट में हाजिर हो। यह आदेश न्यायमूर्ति सुनीत कुमार ने अर्विन्द कुमार यादव की अवमानना याचिका पर दिया है। 

याची का कहना है कि खेतासराय के डोभी गांव में तालाब पोखरी का अतिक्रमण कर दबंगों ने अवैध निर्माण करा लिया गया है।2017 में हाईकोर्ट ने जनहित याचिका पर तीन माह में  कार्रवाई करने का निर्देश दिया था। जिसका पालन न करने पर दाखिल अवमानना याचिका पर कोर्ट दो बार समय दे चुकी है। अब तीसरी बार दाखिल अवमानना याचिका पर कोर्ट ने सख्त रुख अपनाते हुए आदेश पालन न करने पर तलब किया है।
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अवर अभियंता को 17 साल से पेंशन भुगतान न करने पर हाईकोर्ट सख्त

बिजली विभाग के सेवानिवृत्त कनिष्ठ अभियंता को 17 वर्षों से पेंशन का भुगतान न करने और दौड़ाने पर हाईकोर्ट ने गहरी नाराजगी नाराजगी जताई है। कोर्ट ने बिजली विभाग के अधिकारियों से पूछा है क्यों न जिम्मेदार अफसरों की जवाब देही तय की जाए। कोर्ट ने बिजली विभाग के अधिवक्ता बालेश्वर चतुर्वेदी से 18 फरवरी तक जानकारी मांगी है। 

यह आदेश न्यायमूर्ति अश्विनी कुमार मिश्र ने दिया है। याची अधिवक्ता का कहना है कि वह 31 दिसंबर 2004को सेवानिवृत्त हुआ। उसे बकाया वेतन व पेंशन का भुगतान नहीं किया जा रहा है। 2016 में प्रोविजनल पेंशन दी गई किन्तु तीन साल में ही 2019 में बंद कर दी गई। याची तब से  बिजली विभाग के चक्कर लगा रहा है।
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UPPSC : लोअर सबऑर्डिनेट-2015 के कटऑफ अंक जारी

उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग (यूपीपीएससी) ने शनिवार को लोअर सबऑर्डिनेट परीक्षा-2015 से संबंधित सभी अभ्यर्थियों के प्राप्तांक एवं अंतिम रूप से चयनित अभ्यर्थियों के पदवार/श्रेणीवार कट ऑफ अंक जारी कर दिया। परीक्षा का अंतिम परिणाम ढाई साल पहले जारी किया गया था। अभ्यर्थियों को कटऑफ अंक के लिए लंबा इंतजार करना पड़ा। 

आयोग के परीक्षा नियंत्रक अरविंद कुमार मिश्र के अरविंद कुमार मिश्र के अनुसार प्राप्तांक एवं कटऑफ अंक आयोग की वेबसाइट पर 29 जनवरी तक उपलब्ध रहेंगे। अभ्यर्थी अपने अनुक्रमांक एवं जन्मतिथि के आधार पर प्राप्तांक एवं कटऑफ अंक देख या प्राप्त कर सकते हैं। इससे संबंधित कोई भी प्रार्थनापत्र सूचना का अधिकार अधिनियम 2005 के तहत स्वीकार नहीं किया जाएगा। आयोग ने जो कटऑफ अंक जारी किए हैं, उसके अनुसार प्रमुख रूप से उपकारापाल पद के लिए अनारक्षित श्रेणी का अधिकतम/न्यूनतम कटऑफ 308/290, ओबीसी का 288/285, एससी वर्ग का 277/268, महिला वर्ग का 299/276, श्रम प्रवर्तन अधिकारी पद के लिए अनारक्षित का 300/271, ओबीसी का 270/265, एससी वर्ग का 269/256, महिला वर्ग का 278/271 अंक हैं।

वहीं, कर अधिकारी (पंचायती राज विभाग) पद के लिए अनारक्षित श्रेणी का 297/290, ओबीसी का 287/286, एससी वर्ग का 276/268, महिला वर्ग का 285/280, विपणन निरीक्षक पद के लिए अनारक्षित श्रेणी का 309/290, ओबीसी वर्ग का 290/287, एससी वर्ग का 283/269, एसटी वर्ग का 267/267, महिला वर्ग का 290/276, बाल विकास परियोजना अधिकारी पद के लिए अनारक्षित का 298/290, ओबीसी का 286/284, एससी वर्ग का 268/268 अंक है।
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सहायक प्रोफेसर भर्ती की मेरिट लिस्ट हाईकोर्ट में तलब

उच्चतर शिक्षा सेवा आयोग द्वारा जारी विज्ञापन संख्या 47 के तहत आयोजित सहायक प्रोफेसर भर्ती 2016 में चयन सूची बनाने में आरक्षण प्रावधानों की अनदेखी करने पर हाईकोर्ट ने चयन सूची तथा अभ्यर्थियों को प्राप्त अंकों का ब्यौरा तलब कर लिया है। कोर्ट ने आयोग से जवाब मांगा है। इस मामले में याचिका दाखिल कर कहा  गया है कि आयोग ने जिन सामान्य वर्ग की महिला अभ्यर्थियों के अंक पुरुष अभ्यर्थियों से अधिक थे उनको भी सामान्य वर्ग की महिला सूची में रख दिया है। इससे कम अंक पाने वाली महिला अभ्यर्थियों का चयन नहीं हो सका है। मोनिका गुप्ता व अन्य की याचिका पर न्यायमूर्ति एसडी सिंह सुनवाई कर रहे हैं। 

याचीगण का पक्ष रख रहे अधिवक्ता सीमांत सिंह का कहना था कि आयोग द्वारा 23 अक्तूबर 20 को जारी चयन सूची में सामान्य वर्ग में 28 महिला अभ्यर्थियों का चयन हुआ। इनमें से 23 अभ्यर्थी ऐसी हैं जिनकी कट ऑफ मेरिट अंतिम चयनित पुरुष अभ्यर्थी से अधिक है। नियमानुसार इन महिलाओं को सामान्य मेरिट लिस्ट में स्थान मिलना चाहिए। मगर आयोग ने सभी चयनित महिला अभ्यर्थियों को महिलाओं के लिए आरक्षित सूची में रख दिया। इससे याचीगण को वेटिंग लिस्ट में जाना पड़ा। यदि अधिक अंक पाने वाली महिलाओं को सामान्य मेरिट में रखा जाए तो याचीगण का चयन महिलाओं की मेरिट लिस्ट में हो सकता है। 

अधिवक्ता का कहना था कि चयन प्रक्रिया में दो मेरिट लिस्ट बनाने का नियम है इनमें से एक सामान्य लिस्ट और दूसरी सिर्फ महिलाओं की लिस्ट होगी। अधिक मेरिट वाली महिला अभ्यर्थी भी सामान्य लिस्ट में ही शामिल की जाएंगी। मगर आयोग ने इस नियम की अनदेखी कर सभी महिला अभ्यर्थियों को सिर्फ महिलाओं की मेरिट लिस्ट में डाल दिया है। कोर्ट उच्चतर शिक्षा आयोग को मूल मेरिट लिस्ट और महिलाओं की सूची तथा अभ्यर्थियों को मिले अंकों की सूची चार फरवरी को प्रस्तुत करने का निर्देश दिया है।
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हिस्ट्रीशीटर को बता दिया पाक-साफ, दरोगा निलंबित

शासन की मंशा अपराध व अपराधियों केखिलाफ सख्त कार्रवाई की है। लेकिन कुछ पुलिसकर्मी तमाम आदेशों केबाद भी इसे गंभीरता से नहीं ले रहेहैं। एक ऐसा ही मामला सामने आया है जिसमें जमानत याचिका केसंबंध में जानकारी मांगने पर नवाबगंज थाने केदरोगा ने हिस्ट्रीशीटर का अपराधिक रिकॉर्ड ही नहीं भेजा। जानकारी पर कोर्ट ने कड़ी नाराजगी जताई जिसकेबाद पुलिस अफसरों ने आरोपी दरोगा को निलंबित कर दिया है।

मामला नवाबगंज थाने का है। थाना क्षेत्र स्थित मुबारकपुर उपरहार गांव का रहने वाला सूफियान अपराधी है। उस पर हत्या, हत्या का प्रयास समेत करीब दो दर्जन मुकदमे दर्ज हैं। वह गांव का प्रधान भी रह चुका है और वर्तमान में उसकी पत्नी प्रधान है। कुछ महीनों पहले पुलिस ने उसे आर्म्स एक्ट केमामले में गिरफ्तार कर जेल भेजा था। आरोप है कि वह अपने एक रिश्तेदार का लाइसेंसी राइफल लेकर घूमता मिला था। इस मामले में पुलिस ने उस रिश्तेदार को भी गिरफ्तार कर जेल भेजा था।

सूत्रों के मुताबिक, पिछले दिनों सूफियान की ओर से जमानत याचिका कोर्ट में दाखिल की गई। जिस पर सुनवाई करते हुए पुलिस से आख्या मांगी गई। मामले में नवाबगंज थाना अंतर्गत डंाडी चौकी प्रभारी रामकैलाश की ओर से जो आख्या दी गई, उसकेमुताबिक सूफियान का आपराधिक रिकॉर्ड निल था। इसी दौरान जानकारी मिली कि सूफियान पर दो दर्जन से अधिक मुकदमे दर्ज हैं और चौकी प्रभारी की ओर से गलत आख्या दी गई है। जिस पर कोर्ट ने आला पुलिस अफसरों को तलब कर कड़ी नाराजगी जताई। मामला संज्ञान में आने केबाद आरोपी दरोगा को निलंबित कर दिया गया। कार्रवाई से नवाबगंज थाने केपुलिसकर्मियों में हड़कंप है।
 
  • कार्य में लापरवाही व अनियमितता केआरोप में कार्रवाई की गई है। साथ ही उसकेखिलाफ विभागीय जांच का भी आदेश दिया गया है। -सर्वश्रेष्ठ त्रिपाठी, डीआईजी
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