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Kumbh 2019: सबरीमला मुद्दे पर होगा अयोध्या जैसा आंदोलन, विहिप के धर्म संसद में प्रस्ताव पर लगी मुहर

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, प्रयागराज Updated Thu, 31 Jan 2019 08:55 PM IST
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Kumbh 2019: Sabarimala issue Raised like Ayodhya movement, Proposal Passed in VHP Dharma Sansad
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केरल के सबरीमाला मंदिर विवाद को लेकर शुरू आंदोलन की आंच अब पूरे देश में पहुंचती दिखाई दे रही है। कुंभ मेला क्षेत्र में विश्व हिंदू परिषद की ओर से आयोजित धर्म संसद में पहले दिन इसे हिंदुओं की आस्था पर चोट करार देते हुए अयोध्या जैसे आंदोलन की घोषणा की गई। स्वामी वासुदेवानंद की अध्यक्षता तथा राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के सर संघचालक मोहन भागवत, योग गुुरु रामदेव समेत अनेक साधु संतों की मौजूदगी में ‘हिंदू समाज के विघटन का षड्यंत्र रोकने’ का प्रस्ताव भी पारित किया गया।
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कुंभ क्षेत्र में राम मंदिर निर्माण का मुद्दा गरमाया हुआ है। ऐसे में बृहस्पतिवार को शुरू दो दिनी सम्मेलन में भी इस पर बडे़ फैसले की उम्मीद की जा रही थी लेकिन पहले दिन इस पर चर्चा नहीं हुई। यह मुद्दा शुक्रवार के एजेंडे में शामिल है। पहले दिन धर्म संसद में विहिप नेताओं और साधु संतों ने हिंदू धर्म पर चौतरफा हमला होने की बात करते हुए चिंता जताई। इसके लिए जनजागरण की आवश्यकता बताई।

उनका कहना था कि इस षड्यंत्र में ईसाई और मुस्लिम देशों के अलावा यहां के कई राजनीतिक दल और सरकारें भी शामिल हैं। उन्होंने न्यायालय के फैसले की समीक्षा की भी आवश्यकता बताई। परिषद के केंद्रीय महामंत्री मिलिंद परांडे ने धर्म संसद के उद्देश्य तथा दोनों प्रस्तावों को संतों के समक्ष रखा। इसी क्रम में केंद्रीय मार्गदर्शक मंडल के वरिष्ठ सदस्य एवं आचार्य सभा के महामंत्री स्वामी परमात्मानंद ने ‘सबरीमाला में परंपरा और आस्था की रक्षा करने का आंदोलन - अयोध्या आंदोलन के समकक्ष’ का प्रस्ताव रखा, जिसका केरल के अयप्पा दास ने अनुमोदन किया।

वहीं स्वामी गोविंद देव गिरि ने ‘हिंदू समाज के विघटन के षड्यंत्र’ का प्रस्ताव रखा तथा अनुमोदन स्वामी जितेंद्रानंद ने किया। दोनों ही प्रस्तावों का मंच पर विराजमान नेताओं और संतों के साथ पंडाल में पहुंचे साधु-संतों ने भी हाथ उठाकर समर्थन किया। संघ प्रमुख मोहन भागवत ने कहा कि सबरीमाला मंदिर सिर्फ केरल के भक्तों का मुद्दा नहीं है। यह पूरे हिंदू समाज के आस्था का विषय है। स्वामी वासुदेवानंद ने भी कहा कि किसी धर्म की पूजा पद्धति में हस्तक्षेप संविधान विरूद्ध है। भावनाओं का निरादर नहीं होना चाहिए।

स्वामी वासुदेवानंद तथा अन्य संतों ने भी प्रस्तावों पर मुहर लगाई। धर्म संसद में जगद्गुरु रामानंदाचार्य नरेंद्राचार्य महाराज, रामानुजाचार्य हंसदेवार्चा महाराज, निर्मल पीठाधीश्वर महंत ज्ञानदेव, सतपाल महाराज, स्वामी वियोगानंद, स्वामी विवेकानंद सरस्वती, आनंद अखाड़ा के आचार्य बालकानंद, निरंजनी अखाड़ा के स्वामी पुण्यानंद गिरि, स्वामी चिदानंद सरस्वती, महंत नृत्यगोपालदास, जयरामदास महाराज, विहिप के अध्यक्ष वीएस कोकजे, डॉ.कृष्ण गोपाल, श्वांत रंजन आदि शामिल रहे।
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