कोरोना के हमले से कराह रहे निजी अस्पताल

Allahabad Bureauइलाहाबाद ब्यूरो Updated Tue, 23 Jun 2020 01:40 AM IST
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कोरोना के हमलों से शहर के निजी अस्पताल भी घायल हो रहे हैं। महीने भर में शहर के दर्जन भर से अधिक निजी अस्पतालों में संक्रमण के डेढ़ दर्जन से अधिक मामले सामने आ चुके हैं। निजी अस्पतालों में गर्भवती महिलाएं, ऑपरेशन कराने या ब्लड प्रेशर, शुगर लेवल बढ़ने के मरीज भर्ती हुए। उनकी वहां कोरोना जांच कराई गई तो पॉजिटिव निकले। सभी को फिर एसआरएन में भर्ती कर उपचार कराया गया। वर्तमान में इन मरीजों में कुछ तो अभी हैं और कुछ की छुट्टी हो चुकी है।
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निजी अस्पताल में कोरोना का सबसे पहला केस 25 अप्रैल को सिविल लाइंस स्थित शकुंतला हॉस्पिटल में आया था। रेलवे कर्मचारी की पत्नी प्रसव कराने गई थी। प्रसव के बाद उसकी रिपोर्ट पॉजिटिव आ गई थी। दो दिन बाद ही उसकी दूसरी जांच में रिपोर्ट निगेटिव भी आ गई थी। उसी दिन मेजा के एक 56 वर्षीय व्यक्ति की भी रिपोर्ट पॉजिटिव आई थी।
हालांकि, यह व्यक्ति मुंबई से लौटा था, जबकि रेलवे कर्मचारी की पत्नी के सोर्स का पता नहीं चला। उसके बाद नाजरेथ सिविल लाइंस स्थित नाजरेथ हॉस्पिटल, कचहरी स्थित आनंद हॉस्पिटल, टैगोर टाउन स्थित फिनिक्स हॉस्पिटल, जीवन ज्योति हॉस्पिटल, कमला नेहरू, यूनाइटेड मेडिकेयर, दारागंज स्थित हॉस्पिटल में बहरिया की महिला, मयंक नर्सिंग होम, मेडिकल चौराहा स्थित हर्ष हॉस्पिटल में केस पाए गए।
खास बात यह रही कि इन अस्पतालों ने रिस्क लेते हुए गंभीर मरीजों को भर्ती कर मरीजों का उपचार किया। हालांकि, कुछ हॉस्पिटलों में मरीजों से अधिक वसूली की भी शिकायत रही, लेकिन उन्होंने मरीजों को भर्ती कर उनका उपचार शुरू किया। बाद में मरीजों की रिपोर्ट पॉजिटिव आ गई तो वे मेडिकल कॉलेज रेफर कर दिए गए।

इलाहाबाद मेडिकल एसोसिएशन की अध्यक्ष डॉ. राधारानी घोष के मुताबिक महामारी के दौर में निजी हॉस्पिटल इससे अछूते नहीं रह सकते हैं। डॉक्टर सहित अन्य स्वास्थ्य कर्मी भी फ्रंटलाइन वॉरियर होने के नाते रिस्क पर हैं।

सरकार की गाइडलाइन के मुताबिक हॉस्पिटल में आने वाले सभी गंभीर मरीजों को रिपोर्ट न आने तक कोविड मानकर ही रखा जाता है और उपचार अलग रूम में पूरे चिकित्सकीय सुरक्षा उपकरण जैसे-पीपीई किट, गल्ब्स, मॉस्क के साथ किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि सरकार ने जैसे जिला अस्पतालों में ट्र्नॉट जांच की अनुमति दे दी है, वैसे ही इस जांच को प्राइवेट लैबों में भी जांच की अनुमति दे देनी चाहिए। जिससे कि जांच जल्दी हो सके और उसके मुताबिक सर्जरी या अन्य उपचार हो सके। इससे मरीजों को बहुत राहत मिलेगी।
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