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मौनी अमावस्या पर गया में कराएं तर्पण, हर तरह के ऋण से मिलेगी मुक्ति : 24 जनवरी 2020
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गोरखपुर की हर खबर अब अमर उजाला डिजिटल पर, कल सीएम योगी करेंगे लोकार्पण

अमर उजाला गोरखपुर के हाइपर लोकल ‘डिजिटल संस्करण’ की शुरुआत शनिवार को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ लैपटॉप पर एक क्लिक करके करेंगे।

17 जनवरी 2020

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अम्बेडकरनगर

शुक्रवार, 17 जनवरी 2020

हाईटेंशन लाइन टूटी, एक की मौत, दो झुलसे

अंबेडकरनगर। जर्जर हाईटेंशन लाइन मंगलवार को टांडा कोतवाली क्षेत्र के बसावनपुर गांव में एक परिवार पर कहर बनकर टूट पड़ी। टूटकर गिरे तार की चपेट में आने से पिता 14 वर्षीय पुत्री व 11 वर्षीय पुत्र झुलस गए। घटना से मौके पर अफरा-तफरी मच गई। चीख-पुकार सुनकर आसपास के लोग पहुंचे। तीनों को लेकर जिला अस्पताल पहुुुुंचाया गया, जहां चिकित्सकों ने गृहस्वामी को मृत घोषित कर दिया। दोनों बच्चों का उपचार चल रहा है। उधर, पॉवर कारपोरेशन की लापरवाही को लेकर लोगों में जबरदस्त गुस्सा है। बताया जाता है कि पहले भी दो बार तार टूट चुका है, लेकिन ध्यान नहीं दिया गया।
जानकारी के अनुसार, टांडा कोतवाली क्षेत्र के बसावनपुर गांव निवासी जियालाल घर का निर्माण करा रहे थे। मंगलवार सुबह काम पर आए राजगीर के साथ वह भी जुट गए। परिवारीजन भी वहीं मौजूद थे। उनके घर के ऊपर से ही हाईटेंशन लाइन गुजरती है। दोपहर में अचानक तार टूटकर नीचे गिर पड़ा। इससे छत पर मौजूद जियालाल के अलावा उनकी 14 वर्षीय पुत्री खुश्बू व 11 वर्षीय पुत्र शनि इसकी चपेट में आ गए। आस पास के लोग जब तक कुछ समझ पाते तब तक तीनों बुरी तरह झुलस गए। घटना से मौके पर अफरा-तफरी मच गयी। किसी तरह ग्रामीणों ने साहस दिखाया और तीनों को तार से अलग किया।
बिजली विभाग को घटना की सूचना देने के साथ ही निजी वाहन की व्यवस्था कर तीनों को लेकर ग्रामीण जिला अस्पताल पहुंचे। चिकित्सकों ने जियालाल को मृत घोषित कर दिया जबकि उनकी पुत्री व पुत्र का उपचार चल रहा है। घटना से परिजनों में रोना-पीटना मचा हुआ है। उधर, जानकारी होते ही अकबरपुर कोतवाली पुलिस जिला अस्पताल पहुंची और शव को अभिरक्षा में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। कोतवाल अमित सिंह ने बताया कि मामले में कोई तहरीर नहीं मिली है। शव का पोस्टमार्टम कराया जा रहा है।
ग्रामीणों के मुताबिक, दो बार पहले भी तार टूटकर गिर चुका है। इसकी शिकायत कई बार लिखित व मौखिक रूप से बिजली विभाग के अधिकारियों से दर्ज कराई गई थी। इसके बावजूद किसी ने मामले को गंभीरता से नहीं लिया। बिजली विभाग की उदासीनता ने ही जियालाल की जान ले ली। ग्रामीणों ने कहा कि पहले तार टूटा था तो जानमाल की क्षति नहीं हुई थी। लगातार हादसे की आशंका जताई जा रही थी, लेकिन ध्यान नहीं दिया गया। अधिकारियों ने यदि इस तरफ ध्यान दिया होता तो यह बड़ा हादसा टाला जा सकता था।
मामला गंभीर है। झुलसे लोगों का बेहतर इलाज कराया जा रहा है। मामले की जांच भी कराई जाएगी। लापरवाही सामने आई तो जिम्मेदारी तय कर कार्रवाई की जाएगी।
- राकेश कुमार मिश्र, जिलाधिकारी
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तीन मार्गों का किया जाएगा निर्माण

अंबेडकरनगर। ढाई सौ से अधिक आबादी वाले गांव को जोड़ने की योजना के तहत तीन नई सड़कों के निर्माण व दो सड़कों के नवीनीकरण को शासन ने मंजूरी प्रदान कर दी है। एक करोड़ रुपये की लागत से निर्मित होने वाली सड़कों के निर्माण का कार्य कार्यदायी संस्था प्रांतीय खंड लोक निर्माण विभाग को सौंपा गया है। जनवरी के अंत में संबंधित सड़कों का निर्माण कार्य प्रारंभ हो जाएगा। साथ ही नवीनीकरण का कार्य भी शुरू कर दिया जाएगा। इससे लगभग 42 हजार की आबादी को सुचारु आवागमन में लाभ मिलेगा।
गौरतलब है कि लोगों को आवागमन में किसी भी प्रकार की मुश्किल न हो, इसके लिए विभिन्न योजनाओं के तहत न सिर्फ नई सड़कों का निर्माण कराया जा रहा है, बल्कि क्षतिग्रस्त सड़कों का नवीनीकरण भी किया जा रहा है। सुचारु आवागमन में लोगों को इसका व्यापक लाभ भी मिल रहा है। इसी क्रम में शासन ने ढाई सौ से अधिक आबादी वाली एक बसावट को दूसरी बसावट से जोड़ने की योजना चला रखी है। इस योजना के तहत प्रदेश में 96 सड़कों के निर्माण व नवीनीकरण की घोषणा की गई थी। इन 96 सड़कों में अंबेडकरनगर जनपद को भी पांच सड़कों का तोहफा मिला था।
जिले में योजना के तहत 1 करोड़ रुपये की लागत से तीन नई सड़कों के निर्माण व दो सड़कों के नवीनीकरण को संस्तुति शासन ने प्रदान की थी। अवर अभियंता प्रांतीय खंड लोक निर्माण विभाग ने बताया कि 22 लाख 99 हजार की लागत से गोपालपुर से दहियावर, 17 लाख 85 हजार रुपये की लागत से मुस्तफाबाद से बिहरोजपुर तक व 16 लाख 66 हजार रुपये की लागत से मुख्य मार्ग से हरिजन बस्ती एकडल्ला तक नई सड़क का निर्माण कराया जाएगा। इसके अलावा 22 लाख 99 हजार की लागत से फूलपुर हरिजन बस्ती व इतनी ही लागत से गंजा संपर्क मार्ग का नवीनीकरण कराया जाएगा। इन सड़कों के निर्माण की जिम्मेदारी कार्यदायी संस्था प्रांतीय खंड लोक निर्माण विभाग को सौंपी गई है। जनवरी के अंत तक निर्माण कार्य प्रारंभ कर दिया जाएगा। इन सड़कों के निर्माण से लगभग 42 हजार की आबादी को सुचारु आवागमन में लाभ मिलेगा।
लगभग एक करोड़ की लागत से तीन नई सड़कों के निर्माण व दो सड़कों के नवीनीकरण की मंजूरी शासन से प्राप्त हुई है। टेंडर प्रक्रिया चल रही है। जनवरी के अंत तक निर्माण कार्य प्रारंभ कर दिया जाएगा।
शंकर्षणलाल, अधिशाषी अभियंता प्रांतीय खण्ड लोग निर्माण विभाग
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जिले में 36 हजार से अधिक बच्चे हैं कुपोषित

अंबेडकरनगर। राष्ट्रीय पोषण मिशन के तहत बीते दिसंबर माह में चले अभियान में 1 लाख 28 हजार 630 बच्चों की जांच की गई। इसमें 8 हजार 506 बच्चे अतिकुपोषित जबकि 27 हजार 721 को कुपोषित की श्रेणी में रखा गया। 19 हजार 448 ऐसे बच्चे सामान्य श्रेणी में पाए गए, जिन्हें नवंबर माह में कुपोषित श्रेणी में रखा गया था। यह हाल तब है जबकि अफसर पोषण मिशन को लेकर तमाम दावे करते हैं।
वहीं, ये आंकड़े सामने आने के बाद स्वास्थ्य विभाग व आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों को निर्देशित किया गया है कि न सिर्फ कुपोषित व अतिकुपोषित बच्चों का पुष्टाहार बढ़ाया जाए बल्कि अतिकुपोषित बच्चों को जिला अस्पताल परिसर में बनाए गए राज्य पोषण पुनर्वास केंद्र में भर्ती कराया जाए ताकि उन्हें अतिकुपोषित की श्रेणी से बाहर लाया जा सके।
देश को कुपोषणमुक्त करने के लिए केंद्र व प्रदेश सरकारों द्वारा विभिन्न प्रकार की योजनाओं का संचालन किया जा रहा है। इसके तहत प्रत्येक माह राष्ट्रीय पोषण मिशन योजना के तहत अभियान चलाकर छह वर्ष तक के बच्चों का न सिर्फ वजन किया जाता है बल्कि विभिन्न प्रकार की जांच भी स्वास्थ्य विभाग व आंगनबाड़ी की संयुक्त टीम द्वारा की जाती है। इसके अलावा कुपोषित बच्चे न पैदा हों, इसके लिए गर्भवती महिलाओं की आंगनबाड़ी व आशा द्वारा गर्भधारण के दौरान ही न सिर्फ बेहतर देखभाल की जाती है बल्कि पास के सरकारी अस्पताल में उनका पंजीकरण कराकर समय समय पर स्वास्थ्य जांच भी कराई जाती है। यदि खून की कमी होती है तो न सिर्फ आयरन की गोलियां दी जाती हैं बल्कि पौष्टिक आहार दिए जाने पर भी जोर दिया जाता है।
तमाम प्रयास के बावजूद जिले में कुपोषित व अतिकुपोषित बच्चों की संख्या जिले में कम नहीं हो रही। जिला कार्यक्रम अधिकारी कार्यालय के सीडीपीओ शेषकुमार वर्मा ने बताया कि गत दिसंबर माह में राष्ट्रीय पोषण स्वास्थ्य मिशन योजना के तहत अभियान चला। 1 लाख 26 हजार 630 बच्चों के स्वास्थ्य का परीक्षण हुआ था। इसमें 8 हजार 506 बच्चे अतिकुपोषित, जबकि 27 हजार 721 बच्चे कुपोषित की श्रेणी में चिंहांकित हुए। वहीं पूर्व माह से कुपोषित श्रेणी में चिह्नित किए गए 19 हजार 484 बच्चे सामान्य श्रेणी में रखे गए। बताया कि स्वास्थ्य विभाग के कर्मचारियों व आंगनबाडिय़ों को निर्देशित किया गया है कि जो बच्चे अतिकुपोषित श्रेणी व कुपोषित श्रेणी में चिंहित किए गए हैं, उनके पुष्टाहार में वृद्धि की जाए। सामान्य बच्चों को प्रतिमाह तीन पैकेट व कुपोषित व अतिकुपोषित बच्चों को 5-5 पैकेट दिए जाने का निर्देश संबंधित क्षेत्र के आंगनबाड़ी केंद्रों को दिया गया है। साथ ही यह भी निर्देश दिया गया है कि अतिकुपोषित श्रेणी के जो बच्चे अति गंभीर हैं, उन्हें जिला अस्पताल परिसर में बने राज्य पोषण पुनर्वास केंद्र में ले जाकर उनका समुचित इलाज कराएं।
सीडीपीओ शेषनाथ वर्मा ने नागरिकों से आह्वान किया कि सिर्फ अभियान चलाने से जिले को कुपोषण मुक्त नहीं किया जा सकता है। इसके लिए सभी को सहयोग करना होगा। लोगों को चाहिए कि वे अपने छह वर्ष तक के बच्चों का समय समय पर जांच कराते रहें। यदि वे कुपोषित की श्रेणी में आते हैं, तो तत्काल उनका इलाज कराएं। अतिकुपोषित बच्चे ज्यादातर जन्म से ही होते हैं। ऐसे में गर्भवती को चाहिए कि वे गर्भधारण के समय संतुलित आहार पर अधिक ध्यान दें। साथ ही आयरन युक्त भोजन ग्रहण करने पर भी जोर दें। कार्ड के अनुसार समय समय पर टीका भी लगवाती रहें।
बीते दिसंबर माह में चले अभियान में 8 हजार 506 अतिकुपोषित बच्चे चिह्नित किए गए हैं। उनके लिए अतिरिक्त पुष्टाहार की व्यवस्था की गई है। राष्ट्रीय पोषण मिशन योजना के तहत प्रत्येक माह अभियान चलाया जाता है। प्रत्येक माह अतिकुपोषित व कुपोषित बच्चों की संख्या में कमी या फिर वृद्धि होती रहती है।
- विनोद कुमार, जिला कार्यक्रम अधिकारी
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विवादों में घिरे जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी निलंबित

अंबेडकरनगर। लंबे समय से विवादों में घिरे जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी सिंह प्रताप देव को शासन ने निलंबित कर दिया है। उन्हें मदरसों में शिक्षकों की अनियमित नियुक्ति समेत बिना सूचना के मुख्यालय से गायब रहने जैसे कई गंभीर मामलों में दोषी पाते हुए यह निर्णय लिया गया। उधर, अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी के निलंबन पर मदरसा शिक्षकों ने खुशी का इजहार किया है।
गौरतलब है कि जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी सिंह प्रताप देव के विरुद्ध लंबे समय से मदरसा शिक्षकों ने मुहिम छेड़ रखी थी। जिला प्रशासन को आए दिन तरह तरह की शिकायतें मिल रही थीं। बगैर सूचना जिला मुख्यालय छोड़ देने की उनकी आदत से भी जिला प्रशासन के अधिकारी परेशान थे। इन्हीं सबके चलते बीते वर्ष की शुरुआत में तत्कालीन जिलाधिकारी सुरेश कुमार ने शासन को विशेष पत्र लिखकर अविलंब स्थानांतरण व कार्रवाई का अनुरोध किया था। इसमें 16 जनवरी को राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग के दौरे में लापरवाही व उदासीनता बरतने समेत कई तरह की मनमानी व गड़बड़ी का उल्लेख किया गया था। मौजूदा डीएम राकेश कुमार मिश्र ने भी बीते दिनों पूर्व जिलाधिकारी के पत्र का हवाला देते हुए नए सिरे से पत्र भेजा था।
इसमें 10 अलग अलग शिकायतों का उल्लेख करते हुए कहा गया कि इनकी जांच में न तो कोई जवाब दिया जा रहा है और न ही कोई तथ्य प्रस्तुत किए जा रहे। दोनों पत्रों में मदरसों में शिक्षकों की नियुक्ति में गड़बड़ी करने, वेतन आदि की धनराशि का दुरुपयोग करने, बगैर सूचना गायब रहने का जिक्र किया गया। मदरसा शिक्षकों के संगठनों ने भी शासन में शिकायतें दर्ज कराईं। इसी क्रम में प्रदेश सरकार ने जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया।
विभागीय प्रमुख मनोज सिंह ने निलंबन आदेश जारी करते हुए कहा कि उन्हें तत्काल प्रभाव से निदेशक अल्पसंख्यक कल्याण विभाग से संबद्ध किया जाता है। उधर, मदरसा शिक्षकों ने सरकार के इस निर्णय का स्वागत किया। माडर्न मदरसा आधुनिकीकरण शिक्षक एसोसिएशन अध्यक्ष मोहम्मद जमाल अंसारी ने कहा कि शासन का निर्णय सराहनीय है। इससे जिले में मदरसा शिक्षकों का शोषण रुकेगा।
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सेफ्टी वैन ने लिए 68 दुकानों से नमूने

अंबेडकरनगर। फूड सेफ्टी ऑन व्हील वैन ने दूसरे दिन भी जिले के विभिन्न क्षेत्रों में भ्रमण कर दुकानों से 68 नमूने लेकर मौके पर ही जांच की। इनमें से कुछ में कमियां पाई गईं तो संबंधित दुकानदार को सुधार के निर्देश दिए गए। साथ ही खाद्य सामग्रियों के व्यापारियों को फास्ट टैक का प्रशिक्षण दिया गया।
बुधवार को लखनऊ से फूड सेफ्टी ऑन व्हील वैन जिले में पहुंची थी। डीएम ने इसे रवाना किया था। खाद्य संरक्षण एवं औषधि प्रशासन के अभिहित अधिकारी राजवंश श्रीवास्तव के नेतृत्व में टीम ने वैन के साथ गुरुवार को इल्तिफातगंज, विद्युतनगर व एनटीपीसी क्षेत्र में भ्रमण कर दो दर्जन से अधिक दुकानों पर पहुंचकर 68 नमूने लिए। वैन में ही मौजूद अत्याधुनिक मशीनों से नमूनों की जांच की गई। कुछ नमूनों में मामूली गड़बड़ी पाई गई तो संबंधित दुकानदार को इसमें सुधार किए जाने का निर्देश दिया।
साथ ही चेतावनी दी कि यदि दोबारा जांच में किसी भी प्रकार की गड़बड़ी पाई गई, तो कार्रवाई की जाएगी। मुख्य खाद्य सुरक्षा अधिकारी केके उपाध्याय ने बताया कि नमूनों की जांच में कुछ कमियां मिलीं। इसे लेकर चेताया गया है। साथ ही भ्रमण के दौरान 37 दुकानदारों को फास्ट टैक का प्रशिक्षण दिया गया। इसके तहत खाद्य सामग्रियों को बनाने, रखने व उसे परोसने के तौर तरीके के बारे में जानकारी दी गई।
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हस्ताक्षर सत्यापन के अभाव में ठप पड़ा 21 ग्राम पंचायतों में विकास

अंबेडकरनगर। ग्राम प्रधानों के हस्ताक्षर का ऑनलाइन सत्यापन न होने से जिले की 21 ग्राम पंचायतों में पिछले पांच माह से विकास कार्य पूरी तरह ठप हैं। इनमें चार ग्राम पंचायतों में बीते दिनों ही शासन ने नया खाता खोले जाने व उनके सत्यापन का निर्देश दिया था। यह कार्य भी अब तक नहीं हो सका है। ऐसे में संबंधित ग्राम पंचायतों के ग्रामीण विभिन्न प्रकार की मूलभूत समस्याओं से जूझ रहे हैं।
गौरतलब है कि ग्राम पंचायतों में विकास कार्यों की गुणवत्ता बनाए रखने व कार्यों में पारदर्शिता लाने के लिए अगस्त माह में शासन ने विकास कार्यों के लिए चेक व नगद राशि भुगतान पर रोक लगा दिया था। साथ ही भुगतान ई-पेमेंट प्रक्रिया से किये जाने के लिए निर्देशित किया था। इसके लिए ग्राम पंचायत प्रतिनिधि के हस्ताक्षर को ऑनलाइन सत्यापन कराना होता है। बताते चलें कि जिले में कुल 927 ग्राम पंचायतें हैं। शासन के दिशा-निर्देश पर ग्राम प्रधानों ने हस्ताक्षर ऑनलाइन सत्यापन कराना प्रारंभ कर दिया। शुरुआत में ऑनलाइन हस्ताक्षर सत्यापन में विभिन्न प्रकार की मुश्किलें हुई, लेकिन बाद में यह समस्याएं हल हो गईं।
लेकिन अब भी 21 ग्राम पंचायतें ऐसी हैं, जहां ग्राम प्रधान के हस्ताक्षर का सत्यापन ऑनलाइन नहीं हो सका है। नतीजा यह है कि इन ग्राम पंचायतों में विगत पांच माह से विकास कार्य पूरी तरह ठप पड़े हैं। डीपीआरओ कार्यालय के जिला परियोजना प्रबंधक एस पटेल ने बताया कि जिन 21 ग्राम पंचायतों के प्रधानों का हस्ताक्षर ऑनलाइन सत्यापन नहीं हो सका है, उनमें से चार ऐसी ग्राम पंचायतें फुलवारी, रतना, बबुरा व बजदहां हैं। जहां पर नया खाता खोले जाने व जरूरी फीडिंग के बाद प्रधान के हस्ताक्षर का सत्यापन ऑनलाइन कराने का निर्देश बीते दिनों शासन ने दिया था। इन ग्राम पंचायतों में भी तमाम दिशा-निर्देशों के बावजूद भी अब तक नया खाता नहीं खुलवाया जा सका है। उधर हस्ताक्षर के ऑनलाइन सत्यापन न होने से संबंधित गावों में विकास कार्य पूरी तरह ठप हैं। इससे संबंधित ग्राम पंचायतों के ग्रामीणों को विभिन्न प्रकार की मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है।
ग्राम पंचायतों में प्रतिनिधियों के हस्ताक्षर के ऑनलाइन सत्यापन का कार्य चल रहा है। 21 ग्राम पंचायतों के ऑनलाइन फीडिंग का कार्य अब तक नहीं हुआ है। ऐसा तकनीकी वजहों से हो रहा है, लेकिन उम्मीद है कि जल्द ही सत्यापन हो जाएगी। हमारे स्तर से कोताही नहीं बरती जा रही है। - रामअशीष चौधरी, डीपीआरओ
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दर्जा मेडिकल कॉलेज का, दवा जुकाम व बुखार तक की नहीं

अंबेडकरनगर। दर्जा राजकीय मेडिकल कॉलेज का, लेकिन दवा सर्दी-जुकाम, बुखार तक की दवा नहीं है। ये हाल है राजकीय मेडिकल कॉलेज सद्दरपुर का। यहां बीते करीब सप्ताह भर से पैरासिटामॉल, कैल्शियम, आयरन, सर्दी, जुकाम, बुखार आदि की दवाओं का टोटा है। ऐसे में सस्ते व बेहतर इलाज की उम्मीद लगाकर राजकीय मेडिकल कॉलेज पहुंचने वाले मरीजों व उनके तीमारदारों को झटका लग रहा है। उन्हें बाहर से दवा लेने को मजबूर होना पड़ रहा है। इससे उन्हें आर्थिक चपत भी लग रही है। इसकी शिकायत कई बार मरीजों व उनके तीमारदारों ने जिम्मेदार अधिकारियों से की, लेकिन कोई नतीजा नहीं निकल पा रहा है।
मरीजों को सस्ते व बेहतर इलाज के लिए इधर-उधर न भटकना पड़े, इसके लिए करीब एक दशक पूर्व टांडा तहसील क्षेत्र के सद्दरपुर में राजकीय मेडिकल कॉलेज की स्थापना की गई थी। इसके संचालन से न सिर्फ अंबेडकरनगर बल्कि आसपास के जिलों के मरीजों को भी उम्मीद बंधी कि उन्हें बेहतर इलाज के लिए लखनऊ, वाराणसी आदि बड़े शहरों तक की दौड़ नहीं लगानी पड़ेगी। हालांकि, समय बीतने के साथ ही उनकी उम्मीदों को झटका लगना शुरू हो गया। न तो सभी प्रकार की जांच की सुविधा अस्पताल में मरीजों को मिल पा रही है और न ही दवाएं सुचारु रूप से मिलती हैं।
मरीजों के हितों को लेकर मेडिकल कॉलेज प्रशासन कितना गंभीर है, इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि बीते करीब एक सप्ताह से पैरासिटामॉल, कैल्शियम, आयरन सहित कई दवाएं नदारद हैं। मौजूदा समय में सिर्फ गैस, शुगर व कफ सीरप आदि की दवाएं ही मेडिकल कॉलेज में उपलब्ध है। नतीजा यह है कि मरीजों व उनके तीमारदारों को बाहर से दवाएं लेने को मजबूर होना पड़ रहा है। इसमें उन्हें आर्थिक चपत भी लग रही है। जरूरी दवाएं उपलब्ध कराने के लिए मरीजों व उनके तीमारदारों ने कई बार जिम्मेदार अधिकारियों से शिकायत की, लेकिन कोई गंभीरता नहीं दिखाई जा रही है। नतीजा यह है कि इसका खामियाजा मरीजों व उनके तीमारदारों को भुगतना पड़ रहा है।
मालीपुर की रामरती ने बताया कि ठंड लगने की वजह से उन्हें सर्दी-जुकाम व बुखार की समस्या हो गई है। घर पर दवा लेने के बावजूद कोई फायदा नहीं हुआ तो वह बेटे के साथ मेडिकल कॉलेज आईं। उम्मीद थी कि यहां बेहतर इलाज मिल जाएगा। यहां डॉक्टर को दिखाया। उन्होंने परामर्श भी दिया, लेकिन दवाएं नहीं मिल पाईं। मजबूरी में बाहर से दवा खरीदनी पड़ी।
पड़ोसी जिले बस्ती से आए हरीराम ने बताया कि बीते कई दिनों से उसे काफी तेज बुखार है। स्थानीय डॉक्टरों को दिखाया, लेकिन कोई फायदा नहीं हुआ। इसके बाद परिचितों ने मेडिकल कॉलेज में दिखाने की सलाह दी। इतनी दूर से काफी उम्मीद लेकर यहां आए थे। सोचा था कि बेहतर इलाज मिलेगा, लेकिन यहां आने पर डॉक्टर से परामर्श तो मिल गया पर दवाएं बाहर से ही लेनी पड़ीं। ऐसे में उसे मजबूर होकर बाहर से दवा लेने को मजबूर होना पड़ा। मालीपुर की रामरती,
रॉयपुर टांडा के मोहम्मद अब्दुल्ला ने नाराजगी जताते हुए कहा कि बड़ी उम्मीद के साथ इलाज के लिए यहां आए थे, लेकिन उन्हें बाहर से दवा लेने को मजबूर होना पड़ा। इससे उन्हें आर्थिक चपत लग रही है। इसकी शिकायत उन्होंने की, लेकिन कोई संतोषजनक जवाब नहीं दिया गया।
यह बात सही है कि करीब एक सप्ताह से कई दवाएं अस्पताल में नहीं हैं। समय से दवाएं न आ पाने की वजह से ऐसा हुआ है। दवाओं की सूची निदेशालय को भेज दी गई है। उम्मीद है कि जल्द ही दवाएं उपलब्ध हो जाएंगी।
डा. मुकेश राना सीएमएस राजकीय मेडिकल कॉलेज
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धूमधाम से मना मायावती का जन्मदिन, कार्यकर्ताओं ने उन्हें फिर सीएम बनाने का लिया संकल्प, तस्वीरें

ठिठुरन जारी, स्कूल दो दिन बंद

अंबेडकरनगर। बादल व सर्द हवाओं के बीच ठंड का सितम लगातार जारी है। बुधवार को लगभग पूरे दिन बादल छाए रहे। सर्द हवाएं भी चलती रहीं। छिटपुट बारिश भी होती रही। नतीजा यह रहा कि ठंड से ठिठुरते लोग घरों से बाहर निकलने की हिम्मत नहीं जुटा सके। उधर, ठंड को देखते हुए डीएम ने कक्षा आठ तक के सभी माध्यम के स्कूलों में 16 व 17 जनवरी का अवकाश घोषित कर दिया है।
घने बादलों के बीच कुछ देर के लिए धूप निकली, लेकिन कुछ ही देर में फिर बादल छा गए। दोपहर बाद जिले के कुछ क्षेत्रों में बूंदाबांदी भी हुई। दुकानदार विक्रम सोनी, अजय गुप्ता व सौरभ तिवारी ने कहा कि बीते एक माह से अधिक समय से मौसम खराब है। इसका प्रतिकूल प्रभाव व्यवसाय पर पड़ रहा है। दुकानदारों का कहना है कि यदि इसी प्रकार का मौसम आगे भी रहा तो काफी बुरा असर पड़ेगा।
उधर, किसानों के लिए दलहनी व तिलहनी फसलों को बचाए रखने की चुनौती बढ़ गई है। फसलों को इससे अधिक नुकसान न हो, इसके लिए वे लगातार कृषि वैज्ञानिकों से सलाह ले रहे हैं। किसान रामजनम तिवारी व घनश्याम ने कहा कि जिस प्रकार का मौसम है, उससे ऐसा लग रहा कि ज्यादा बारिश होगी। ऐसा होता है तो इससे दलहनी व तिलहनी फसलों को नुकसान हो सकता है। वह लगातार कृषि वैज्ञानिकों से सलाह ले रहे हैं। किसान दीपक कुमार व जगदंबा सिंह ने कहा कि जल्द ही मौसम साफ नहीं हुआ तो फसलों को नुकसान होना तय है। कहा कि फसल को पाले से बचाने के लिए कृषि वैज्ञानिकों की सलाह के अनुसार, खेतों में राख का छिड़काव कराया है।
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पशु आहार न चूनी, पशुओं को दिया जा रहा सिर्फ भूसा

टांडा (अंबेडकरनगर)। विकास खंड टांडा के पशु आश्रय स्थल भड़सारी में बीते तीन चार दिनों से पशुओं को मात्र भूसा ही खिलाया जा रहा है। पशुआहार व चूनी खत्म हो गई है। इससे पशुओं को काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है। शिकायत मिलने के बाद बुुधवार को एसडीएम महेंद्रपाल सिंह ने पशुआश्रय स्थल का औचक निरीक्षण किया। निरीक्षण में मिली कमियों की रिपोर्ट एसडीएम ने डीएम को भेज दी है।
एसडीएम ने बुधवार को टांडा विकास खण्ड द्वारा संचालित पशु आश्रय स्थल भड़सारी का आकस्मिक निरीक्षण किया। निरीक्षण में कुल 145 पशु मौजूद मिले। इसमें एक पशु बीमारी हालत में मिला। इसका इलाज चल रहा है। बाकी स्वस्थ मिले। मौके पर पशुओं की देखभाल करने के लिए 11 सफाईकर्मी मौजूद मिले। आश्रय स्थल में अभी हाल ही में बनवाया गया शौचालय का दरवाजा टूटा मिला। इसे ठीक कराने का निर्देश दिया। आश्रय स्थल पर पशुओं की देखरेख करने वाले कर्मचारियों की रात्रि निवास व विश्राम के लिए कमरे के निर्माण व कम्बल आदि की वयवस्था नही पायी गई। इसके लिए कमरे के निर्माण व कम्बल आदि की व्यवस्था की बात कही है।
निरीक्षण में बिजली की समस्या प्राय: बनी रहने का मामला भी सामने आया। इसका मुख्य कारण लगभग 700 मीटर तार बांस बल्ली के सहारे खींच कर बिजली आश्रय स्थल तक पहुंचाई गई है, जो आए दिन खराब हो जाती है। इसके लिए विद्युत पोल लगाए जाने की आवश्यकता है। मौके पर कुल 40 कुंतल भूसा मिला। चार दिनों से पशुआहार व चूनी उपलब्ध नही है। बिना पशु आहार व चूनी चोकर के ही पशुओं को चारा खाने की विवशता है। एसडीएम ने जांच रिपोर्ट डीएम को प्रेषित कर दिया है। साथ ही मुख्य विकास अधिकारी, मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी, बीडीओ टांडा व एसडीओ विद्युत को भी पत्र भेजकर समस्याओं को दूर कराने को कहा है।
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पर्याप्त स्टाफ न होने से शुरु नहीं हो पा रहे तीन अस्पताल

जलालपुर। करीब चार करोड़ की लागत से जलालपुर तहसील क्षेत्र के तीन स्थानों पर बने प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र करीब 70 हजार की आबादी के लिए छलावा साबित हो रहे हैं। वर्ष 2013-14 में इन अस्पतालों का निर्माण शुरू हुआ। करीब पांच साल में इन अस्पतालों का निर्माण कार्य पूरा हुआ। अब तक सम्मनपुर अस्पताल में सिर्फ एक चिकित्सक व रसूलपुर बाकरगंज व नेवादा में एक-एक फार्मासिस्ट की तैनाती हो सकी। दिक्कत यह है कि पर्याप्त स्टाफ न होने से लोगों को चिकित्सा सुविधाएं बेहतर ढंग से नहीं मिल पाएंगी।
बताते चलें कि करीब छह साल पहले जलालपुर तहसील क्षेत्रवासियों को प्रदेश सरकार ने बड़ी सौगात दी थी। ग्रामीणों को दूरदराज के क्षेत्रों में प्राथमिक चिकित्सा के लिए चक्कर न लगाना पड़े इसके लिए वर्ष 2013-14 में सरकार ने तीन प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों के निर्माण की सौगात दी। इसमें सम्मनपुर, रसूलपुर बाकरगंज व नेवादा शामिल है। सरकार की घोषणा के बाद संबंधित क्षेत्र के दर्जनों गांवों में खुशी का माहौल छा गया। ग्रामीणों को उम्मीद जगी कि उनके गांव के पास अस्पताल का निर्माण हो जाने से प्राथमिक चिकित्सा की सेवा लेने में आसानी होगी। सरकार ने रसूलपुर बाकरगंज के लिए 1 करोड़ 30 लाख, सम्मनपुर के लिए डेढ़ करोड़ व नेवादा अस्पताल भवन निर्माण के लिए 1 करोड़ 20 लाख रुपए की स्वीकृति दी। तमाम उतार चढ़ाव के बीच वर्ष 2019 की शुरुआत में निर्माण कार्य पूरा हुआ।
कार्यदायी संस्था ने स्वास्थ्य विभाग को तीनों भवन हैंडओवर कर दिया। इसके बाद स्वास्थ्य विभाग ने आवश्यक पहल शुरू किया। लंबे समय से सम्मनपुर में डॉ. संजीव कुमार की तैनाती की गई है। इसके अलावा रसूलपुर बाकरगंज में फार्मासिस्ट वाल्मीकि द्विवेदी व नेवादा में फार्मासिस्ट के रूप में महेंद्र कुमार की तैनाती कर दी गई। इसके बाद से स्वास्थ्य विभाग अस्पतालों का संचालन शुरू करने को लेकर गंभीर नही हो सका है।
लंबा समय बीत गया, स्वास्थ्य विभाग इससे आगे नहीं बढ़ पा रहा है। इसके चलते करीब 70 हजार की आबादी को तगड़ा झटका लग रहा है। बताया जाता है कि सम्मनपुर अस्पताल में तैनात चिकित्सक डॉ. संजीव कुमार सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र नगपुर में सेवा दे रहे हैं, जबकि रसूलपुर बाकरगंज में तैनात फार्मासिस्ट वाल्मीकि द्विवेदी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र बड़ेपुर व फार्मासिस्ट महेंद्र कुमार सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र रफीगंज से संबद्ध हैं। स्थानीय राजेश कुमार, दिलीप कुमार, गौरव, प्रदीप कुमार आदि नागरिकों ने शासन प्रशासन से अविलंब अस्पताल का संचालन शुरु कराए जाने की मांग की है। कहा कि सरकार दावे तो तमाम करती है, लेकिन उस पर अमल गंभीरता से नहीं करती। यदि अस्पताल का संचालन शुरु हो जाता तो नागरिकों को काफी लाभ मिलेगा।
रसूलपुर बाकरगंज अस्पताल शुरु होने पर हजपुरा, कजपुरा, ताजूपुर, कटघरमूसा, अमरतल, कांदीपुर, कालेपुर महुअल, चित्तौना कला सहित दो दर्जन गांव के लोग प्राथमिक चिकित्सा का लाभ उठा सकेंगे। सम्मनपुर प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र के शुरु होने से सम्मनपुर, सरदिलपुर, नसीरपुर, दाउदपुर, कटघर, मछलीगांव, बलुआ बहादुरपुर, कल्याणपुर सहित दो दर्जन व नेवादा प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र शुरु होने पर भीखपुर, परकोली, जैतपुर, बेगीकोल, ढाका, मेदनीपुर, शिवपाल, शाहपुर, भुजगी, गोपरी चांदपुर, रामगढ़, तिघरा आदि गांव के नागरिक सीधे पर तौर इसका लाभ उठा सकेंगे। उन्हें प्राथमिक चिकित्सा के लिए ज्यादा दूर के अस्पतालों का चक्कर नहीं लगाना पड़ेगा।
अस्पतालों के संचालन को लेकर प्रक्रिया चल रही है। पर्याप्त स्टॉफ की उपलब्धता के लिए शासन के साथ ही निदेशालय को भी पत्र लिखा गया है। उम्मीद है जल्द ही इस पर आवश्यक निर्णय लिया जाएगा।
- डॉ. अशोक कुमार, सीएमओ
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फूड सेफ्टी वैन को डीएम ने हरी झंडी दिखाकर किया रवाना

अंबेडकरनगर। मिलावटी खाद्य पदार्थों की बिक्री पर अंकुश पाने के लिए बुधवार लखनऊ से जिले में पहुंची प्रदत्त फूड सेफ्टी ऑन व्हील वैन को कलेक्ट्रेट परिसर से जिलाधिकारी राकेश कुमार मिश्र ने रवाना किया। वैन में खाद्य विश्लेषक के साथ मौजूद खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन की टीम ने जिलाधिकारी की मौजूदगी में जिला कारागार में 18 खाद्य सामग्रियों का नमूना लेकर वैन में मौजूद मशीनों द्वारा जांच की। जांच में सभी नमूने सही पाए गए।
जिलाधिकारी ने वैन को हरी झण्डी दिखाकर रवाना करते हुए कहा कि इस वैन के माध्यम से मिलावटी खाद्य पदार्थों की बिक्री पर अंकुश लगाया जा सकता है। दरअसल आधुनिक मशीन से लैस वैन में ही खाद्य सामग्रियों की जांच की जा सकती है। परिणाम तत्काल सामने आने से मिलावटी खाद्य पदार्थों की बिक्री करने वालों पर कार्रवाई की जा सकेगी। अभिहित अधिकारी राजवंश श्रीवास्तव ने बताया कि वैन में मौजूद खाद्य विश्लेषक गौरव के साथ खाद्य निरीक्षकों की टीम ने जिला कारागार पहुंचकर जिलाधिकारी राकेश कुमार मिश्र की मौजूदगी में रसोईघर में पांच व भंडार गृह से 10 तरह की खाद्य सामग्रियों के नमूने लेकर जांच की। सभी नमूने सही पाए गए।
टीम ने इसके बाद फौव्वारा तिराहा स्थित चाट व चाऊमीन के ठेलों पर चटनी की जांच की गई, तो एक ठेले पर चटनी में गड़बड़ी पाई गई। उसे मौके पर ही नष्ट करा दिया गया। साथ ही संबंधित दुकानदार को दोबारा न बेचेे जाने की चेतावनी दी गई। अकबरपुर नगर स्थित आकांक्षा होटल, अमृतभोग मिष्ठान भंडार के अलावा रोडवेज व आसपास स्थित चाट आदि के ठेलों पर भी विभिन्न प्रकार की खाद्य सामग्रियों की जांच की गई। किसी भी सामग्री में कोई गड़बड़ी नहीं पाई गई।
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अमड़ी टोल पर अब भी नकद भुगतान करने वालों की भीड़

अंबेडकरनगर। जिले के एकमात्र अमड़ी टोल प्लाजा पर अब भी कैश भुगतान का जोर है। कारण यह कि हर दिन यहां से गुजरने वाले वाहनों में से करीब तीन चौथाई ऐसे हैं, जिनके चालक नकद भुगतान देकर आगे बढ़ रहे हैं। ऐसे में यहां फास्टैग को बढ़ावा देने की कोशिशें परवान नहीं चढ़ पा रही हैं। हालांकि, फास्टैग बनाने के लिए टोल संचालकों ने शिविर का प्रबंध कर रखा है। इसके बावजूद टोल से होकर गुजरने वाले वाहनों में से ज्यादातर के चालक नकद भुगतान पर ही जोर दे रहे हैं।
नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया ने बीते दिनों सभी टोल प्लाजा पर फास्टैग सुविधा लागू कर दी थी। इसे लागू करने से पहले बाकायदा प्रचार-प्रसार कराया गया। फास्टैग लागू करने की तिथि भी बढ़ाई गई, लेकिन इसका कोई खास असर जिले के अमड़ी टोल प्लाजा पर देखने को नहीं मिल रहा है। टोल से गुजरने वाले वाहनों में से ज्यादातर के चालक नकद भुगतान ही करते हैं। अमर उजाला टीम ने बुधवार को टोल प्लाजा का जायजा लिया तो यहां की आठ लेन में से एक-एक लेन वीआईपी वाहनों व एंबुलेंस आदि के लिए सुरक्षित मिली। इन दोनों लेन से होकर सामान्य आवागमन नहीं था। इसके अतिरिक्त छह अन्य लेन टोल प्लाजा पर हैं। इनमें से तीन आजमगढ़ की तरफ जाने के लिए व तीन आजमगढ़ की तरफ से अकबरपुर आने के लिए हैं। इन छह में से सिर्फ दो लेन कैश भुगतान के लिए निर्धारित की गई है। हालांकि, ज्यादातर वाहन चालक नकद भुगतान करने के बाद ही आगे बढ़ते दिखे।
आजमगढ़ जा रहे दिवाकर वर्मा ने टोल प्लाजा पर एक तरफ का नकद भुगतान करने के बाद बताया कि एक बैंक से फास्टैग के लिए आवेदन कर दिया है। जल्द ही कार्ड मिलने वाला है। वहीं, ठीक पीछे लगे एक अन्य वाहन चालक रवि त्रिपाठी का कहना था कि उन्हें ज्यादा चलना नहीं होता है, इसलिए अब तक कार्ड के लिए आवेदन नहीं किया है। आजमगढ़ की तरफ से आ रहे रामू यादव ने बताया कि उन्होंने अपने मालिक से कहा है कि कार्ड बनवा दिया जाए। वह ही बता पाएंगे कि कार्ड कब तक मिल पाएगा और कैसे। कुछ इसी तरह का मिलता-जुलता हवाला कई अन्य वाहन संचालकों ने दिया।
अमड़ी टोल पर 15 जनवरी की पूर्वान्ह साढ़े 11 बजे तक 233 वाहन पार हुए थे। इनमें से 181 वाहन चालक ऐसे थे, जिन्होंने कैश भुगतान किया जबकि 52 वाहन फास्टैग के माध्यम से गुजरे। मैनेजर राकेश कुमार ने बताया कि एक दिन पहले कुल 1466 वाहन दिनभर में पार हुए थे। इनमें फास्टैग से 355 वाहन गुजरे जबकि कैश भुगतान कर 1111 वाहन अपने गंतव्य को रवाना हुए। राकेश के अनुसार, फास्टैग से करीब 50 हजार रुपए टोल शुल्क का भुगतान हुआ जबकि करीब दो लाख रुपए का नकद भुगतान कर वाहन चालक आगे रवाना हुए।
फास्टैग बनाने के लिए यहां एक शिविर टोल संचालकों की तरफ से लगवाया गया है। टोल मैनेजर राकेश कुमार ने कहा कि निजी संस्था की तरफ से यहां कार्ड बनवाया जा रहा है। ज्यादा से ज्यादा लोग कार्ड बनवाएं, इसके लिए हर दिन प्रेरित किया जाता है।
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