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Coronavirus in UP Live Updates: निजामुद्दीन मरकज में शामिल तीन लोग लखनऊ में मिले, अन्य की हो रही तलाश

देश भर में कोरोना वायरस के बढ़ते प्रकोप के बीच उत्तर प्रदेश के कुछ क्षेत्रों से अच्छी और कहीं से बुरी खबरें आ रही हैं। मंगलवार सुबह बरेली में पांच नए मरीज मिले हैं जिनके बाद सूबे में संक्रमितों की संख्या बढ़कर 102 हो गई है।

31 मार्च 2020

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बांदा

मंगलवार, 31 मार्च 2020

फंदे पर झूला युवा किसान

जसपुरा। बटाई पर खेती करने वाले खेतिहर युवा मजदूर ने फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली। जान गंवाने के लिए उसने गांव के बाहर खेत में लगे बबूल के पेड़ का सहारा लिया। उस पर रस्सी बांधकर फंदे से झूल गया। परिजन आत्महत्या की वजह फसल की बर्बादी और आर्थिक तंगी का तनाव बता रहे हैं।
जसपुरा कस्बे में प्रमोद यादव (27) पुत्र बलवीर यादव गांव में ही बटाई पर खेत लेकर किसानी करता था। मजदूरी भी कर लेता था। इसी में उसका परिवार चल रहा था। सोमवार को सुबह वह पत्नी प्रियंका के साथ खेत गया था। कुछ देर बाद प्रियंका घर आ गई। प्रमोद खेत में ही रुक गया। करीब दो बजे पत्नी वापस खेत गई तो वहां बबूल के पेड़ पर प्लास्टिक की रस्सी में प्रमोद का फांसी पर शव टंगा मिला। परिजनों ने थाने में सूचना दी।
थानाध्यक्ष आलोक सिंह फोर्स के साथ मौके पर पहुंचे और शव कब्जे में ले लिया। पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। पिता ने बताया कि प्रमोद उसका इकलौता पुत्र था। परिजनों का कहना है कि फसल की बर्बादी और आर्थिक तंगहाली से परेशान होकर आत्महत्या की। उधर, पैलानी उप जिलाधिकारी रामकुमार ने बताया कि किसान की आत्महत्या की वजह स्थिति आदि के बारे में जांच कराई जा रही है। पैलानी तहसीलदार को जांच के लिए भेजा गया है।
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बिहार और दिल्ली से पैदल पहुंचे 57 मजदूर

बांदा। रेल और बस सेवा बंद होने के बाद महानगरों से सैकड़ों किलोमीटर दूर पैदल चलकर मजदूरों का अपने-अपने घरों में पहुंचना जारी है। शनिवार को भी दिल्ली, बिहार और अलीगढ़ से करीब 57 मजदूर अपने-अपने घरों को पहुंचे। इन सभी का जिला अस्पताल में स्वास्थ्य परीक्षण कराया गया।
कोविड-19 संक्रमण न पाए जाने पर एहतियातन उन्हें होम क्वारंटीन की सलाह देकर गांवों को रवाना किया गया है। दूसरे सूबों से चलकर मजदूर कड़ी मशक्कत के बाद यहां पहुंच रहे हैं। शुक्रवार को 21 मजदूरों को जत्था पहुंचा था। उन्हें भी होम क्वारंटीन में भेजा गया है। शनिवार को बिहार और दिल्ली से मजदूर लौटे। दिल्ली वाले मजदूर कानपुर के रास्ते से आए हैं, जबकि बिहार वाले प्रयागराज होकर यहां पहुंचे।
मजदूरों के चेहरों पर पैदल चलने की थकान साफ नजर आ रही थी। ट्रामा सेंटर में इनको एक-एक मीटर की दूरी पर खड़ा कर पंक्तिबद्ध कर डॉक्टर हृदयेश पटेल और डॉक्टर एसडी त्रिपाठी ने स्वास्थ्य परीक्षण किया।
फौरीतौर पर कोविड-19 जैसा कोई संक्रमण न मिलने पर डाक्टरों ने उन्हें घरों में ही अकेले रहने की हिदायत देकर रवाना कर दिया। संक्रमण न होने की पुष्टि जिला अस्पताल के सीएमएस डॉक्टर एसएन मिश्र ने भी की।
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होम डिलीवरी में 500 रुपये का अड़ंगा

बांदा। लॉकडाउन में प्रशासन ने शहर की सभी छोटी बड़ी किराना दुकानों को बंद करा दिया है। दावा किया जा रहा है कि लोगों को घर बैठे होम डिलीवरी के लिए कुछ दुकानों व गाड़ियों को अधिकृत किया गया है। ठठराही के होम डिलीवरी करने वाले दुकानदार का कहना है कि वह 500 रुपये से कम की होम डिलीवरी नहीं करेगा।
दुकानदार की इस शर्त से वे गरीब होम डिलीवरी से वंचित हो जाएंगे, जो रोजाना किलो-दो किलो आटा आदि खरीदते हैं। हालांकि व्यापारी नेता अमित सेठ भोलू का कहना है कि मोहल्ले-मोहल्ले जाने वाली किराना वैन में ऐसी कोई शर्त नहीं है। होम डिलीवरी करने वाले दुकानदारों को समझाया जाएगा। इस बारे में जिला पूर्ति अधिकारी राजीव तिवारी का जवाब अजब रहा। गरीबों की अनदेखी और दुकानदारों की वकालत करते हुए वह बोले- दो रुपये का सामान थोड़ी किसी के घर देने जाएगा।
मजदूरों को लेने कानपुर और सतना गईं 13 बसें
बांदा। लॉकडाउन में दिल्ली और एमपी सीमा में फंसे बांदा और चित्रकूट के मजदूरों को लाने के लिए यहां की 13 रोडवेज बसें कानपुर और सतना भेजी गई हैं। फैक्ट्रियां बंद होने के बाद ये लोग पैदल सीमा तक आ गए। रोडवेज के सहायक क्षेत्रीय प्रबंधक परमानंद ने बताया कि शासन के निर्देश पर इन मजदूरों को कानपुर तक लाने के लिए लगाई गई बसों में 10 बसें बांदा डिपो की भी हैं।
शनिवार को इन बसों को कानपुर के लिए रवाना कर दिया गया। उधर, सतना में फंसे सौ से अधिक छात्र-छात्राओं को लेने के लिए डीएम के निर्देश पर 3 बसों को सतना (एमपी) भेजा गया है। उधर, सीएमओ डा.संतोष कुमार के निर्देश पर कानपुर से आने वाले यात्रियों को पहले जिला अस्पताल भेजा जाएगा। वहां उनकी जांच होगी। इसके बाद ही चिकित्साधिकारियों की सलाह पर उन्हें घरों को भेजा जाएगा।
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जीवन रक्षक दवाओं की आपूर्ति ठप, मरीजों की आफत

बांदा। लॉकडाउन की बंदिशों ने जीवनरक्षक दवाओं का भी संकट खड़ा कर दिया है। चित्रकूटधाम मंडल मुख्यालय में गंभीर मरीजों को जानलेवा मर्जों की दवाएं अब ढूंढें नहीं मिल रहीं। 25 मार्च के बाद दवा की कोई खेप यहां नहीं आई। दवा व्यापारियों के लाखों रुपये के आर्डर रुके हुए हैं। ये स्थिति तब है जबकि शासन ने दवाओं के ट्रांसपोर्टेशन/परिवहन को लॉकडाउन से छूट दे रखने का आदेश जारी कर रखा है।
बांदा के दवा व्यवसायी बताते हैं कि दवाओं की आवक होली से ही बाधित हो गई थी। होली पर भी वाहन नहीं चलते। कानपुर में 8 दिन होली का असर रहता है। इससे दवाओं का परिवहन काफी हद तक बाधित रहा। अब लॉकडाउन ने परिवहन पर रोक लगा दी है। यहां दवाओं की आपूर्ति लखनऊ और कानपुर से होती है। अधिकांश दवाएं लखनऊ से ही आती हैं। 25 मार्च से कोई वाहन इन दोनों महानगरों से दवा लेकर नहीं आया। यहां के प्रमुख थोक दवा विक्रेताओं का कहना है कि पुलिस वाहन नहीं चलने दे रही है।
केमिस्ट एंड ड्रगिस्ट एसोसिएशन अध्यक्ष शांतनु ओमर ने बताया कि ट्रांसपोर्ट कंपनियों का कहना है कि उनके वाहनों को अनुमति नहीं मिली। दवा व्यापारियों को परेशान किया जा रहा है। ओमर ने कहा कि हाल ही में मुख्यमंत्री की वीडियो कांफ्रेंसिंग हुई थी। इसमें वह खुद भी मौजूद थे। मुख्यमंत्री ने दवाओं के वाहनों को बाधित न करने के निर्देश दिए थे। उधर, इस बारे में मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. संतोष कुमार का कहना है कि दवा के वाहनों की परमीशन सिटी मजिस्ट्रेट को देनी है। इस बारे में जिलाधिकारी से अनुरोध करेंगे।
सीएमओ और ड्रग इंसपेक्टर के पाले में डाल दी गेंद
केमिस्ट एंड ड्रगिस्ट एसोसिएशन अध्यक्ष ने बताया कि लखनऊ से दवा मंगाने वाली स्थानीय कंपनी ने यहां प्रशासन से वाहन के लिए अनुमति मांगी थी। सिटी मजिस्ट्रेट ने मुख्य चिकित्सा अधिकारी और ड्रग इंसपेक्टर से अनुमोदन लाने की शर्त रख दी है। एसोसिएशन पदाधिकारी भी तीन दिन पूर्व सिटी मजिस्ट्रेट से मिले थे। तब उन्होंने कोई व्यवस्था का भरोसा दिलाया था।
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बांदा शहर में मेडिकल स्टोर में लगी भीड़। बांदा शहर में मेडिकल स्टोर में लगी भीड़।

उम्रकैद की सजा काट रहे कैदी की मौत

बांदा। जेल से जिला अस्पताल में भर्ती कराए गए कैदी की सोमवार को दोपहर मौत हो गई। वह कैंसर रोगी बताया गया है। हत्या के मामले में उम्रकैद की सजा काट रहा था।
हमीरपुर जनपद के सरगांव गांव निवासी राघवेंद्र सिंह (45) पुत्र गीरेंद्र सिंह की रविवार की रात जेल में हालत बिगड़ गई।
उसे जिला अस्पताल पहुंचाया गया। यहां इलाज के दौरान उसने दम तोड़ दिया। प्रभारी कारागार अधीक्षक आरके सिंह ने बताया कि हत्या के जुर्म में उम्र कैद की सजा काट रहे राघवेंद्र को पिछले वर्ष 2 अक्तूबर को हमीरपुर जेल से प्रशासनिक आधार पर यहां भेजा गया था। वह कैंसर पीड़ित था।
पहली मार्च को उसे जेके अस्पताल कानपुर भेजा गया। वहां से उसे 28 मार्च को छुट्टी दे दी गई। रात करीब 12 बजे वापस उसे जेल में दाखिल किया गया। 29 मार्च की रात हालत बिगडने पर उसे जिला अस्पताल पहुंचाया गया। सोमवार को दोपहर उसकी मौत हो गई। शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया है।
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मुरझाए चेहरे और सूखे होंठ लिए पैदल आए युवा मजदूर

बांदा। मुरझाए चेहरे, सूखे होंठ। सिर के बालों पर धूल की मोटी परत। कपड़े मैले-कुचैले। पीठ पर सामान का बैग। कुछ ऐसी ही हुलिया वाले 10 युवक सोमवार की दोपहर यहां पश्चिम सीमा से शहर में दाखिल हुए। स्वतंत्रता स्मारक अशोक लाट पर कुछ देर थकान मिटाने के लिए पड़ाव डाले इन मजदूरों ने जो आपबीती बताई वह किसी भी संवेदनशील व्यक्ति की आंखें नम कर देने के लिए काफी हैं।
बबेरू क्षेत्र के एक गांव निवासी 10 युवक (सभी अविवाहित) कई वर्षों से 11 हजार रुपये पगार पर भिवाड़ी (हरियाणा) की ग्लूकोज फैक्ट्री में काम करते थे। वहां दो हजार रुपये किराए पर मकान लिए थे। होली मनाने आए थे।
17 मार्च को फिर वापस पहुंच गए। ये बताते हैं कि 25 मार्च की शाम फैक्ट्री मालिक ने तालाबंदी घोषित कर उन्हें दो-दो हजार रुपये थमाकर अपने घरों को वापस जाने का फरमान सुना दिया। कोई वाहन न मिलने से इन युवा मजदूरों का जत्था अगले ही दिन पैदल चल पड़ा। 45 किलोमीटर का सफर तय करके पलवल (हरियाणा) आया। यहां से बस से आगरा जाते समय 20 किलोमीटर पहले ही पुलिस ने उतार लिया।
आगरा तक पैदल आए इन मजदूरों को दूसरी बस ने झांसी पहुंचा दिया। 29 की रात 8 बजे ये झांसी पहुंचे। वहां से एक ट्रक में मऊरानीपुर तक आए। सोमवार को तड़के मऊरानीपुर से बांदा ट्रक पर आते समय पुलिस ने बांदा से 18 किलोमीटर पूर्व मटौंध के पास उतार दिया। वहां से सब कड़ी धूप में पैदल चलकर बांदा मुख्यालय पहुंच गए। मजदूर बताते हैं कि किसी बस या ट्रक वाले ने उन पर कोई रियायत नहीं बरती। सभी ने किराया लिया।
18 से 25 वर्ष उम्र के इन मजदूरों ने यह बताया कि टुकड़े-टुकड़े की इस यात्रा में बांदा तक उनके 1800 रुपये खर्च हो गए। मात्र 200 रुपये ही बचे हैं। वह भी तब जब पैसे से कुछ खाना-पानी नहीं खरीदा। युवाओं ने बताया कि झांसी तक कई स्थानों पर उन्हें पुलिस और स्वयंसेवियों ने लंच पैकेट और पानी इत्यादि दिया, लेकिन झांसी के बाद बांदा तक किसी ने नहीं पूछा। मजदूरों ने बताया कि फैक्ट्री मालिक ने यह भरोसा दिलाया है कि जून तक शायद फैक्ट्री चालू हो। यह भी कहा है कि उनकी बकाया पगार उनके खातों में भेजेगा।
बीए करने के पांच वर्ष बाद भी जॉब नहीं मिला तो भिवाड़ी (हरियाणा) में ग्लूकोज की फैक्ट्री में काम तलाश लिया। घरवालों ने दो माह बाद 27 जून को शादी तय कर दी। मात्र 11 हजार रुपये मासिक पर नौकरी करता रहा रंजीत फैक्ट्री बंद हो जाने से तीन दिन की अति कष्टदाई यात्रा के बाद सोमवार को अपने गांव (बबेरू क्षेत्र) लौट आया। शादी तो दरकिनार फिलहाल घर खर्च के लाले हैं। शादी अब तभी कर पाएगा जब फैक्ट्री चलेगी और उसे जॉब मिल जाएगी।
बबेरू क्षेत्र के ही एक गांव के युवक की शादी 2 मई को तय हो चुकी है। घर में तीन भाइयों के बीच मात्र चार बीघा जमीन के भरोसे शादी का खर्च मुमकिन नहीं। घर और शादी का खर्च जुटाने के लिए लवलेश हरियाणा की एक फैक्ट्री में काम कर रहा था। 25 मार्च को फैक्ट्री में तालाबंदी के बाद वह अपने अन्य साथियों के साथ तीन दिन का कष्टदाई सफर तय करके गांव लौट आया है। फैक्ट्री मालिक ने पगार भी नहीं दी। अब शादी कैसे होगी?
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ड्राइवरों और गार्डों को बायोमीट्रिक हाजिरी से छूट

बांदा। लॉकडाउन में मालगाड़ियों के ड्राइवरों और गार्डों की बायोमीट्रिक उपस्थिति नहीं ली जाएगी। उन्हें ब्रेथ एनालाइजर टेस्ट (नशे का परीक्षण) से भी छूट दी गई है। नशा न करने की वे खुद घोषणा करेंगे। स्टेशन अधीक्षक एसके कुशवाहा ने बताया कि लॉकडाउन में सिर्फ सात मालगाड़ियां रोजाना चल रही हैं। यहां 250 ट्रेन ड्राइवर और 65 गार्ड उपलब्ध हैं। जरूरत के मुताबिक ड्यूटी लगाई जा रही है। चालकों और गार्डों को सामाजिक दूरी बनाए रखने को कहा गया है।
बैंक से पैसे निकालने को उमड़ी भीड़
बांदा। श्रमिकों को सरकार द्वारा घोषित आर्थिक सहायता की रकम निकालने के लिए सोमवार को बैंकों में बड़ी संख्या में मजदूरों का जमघट लग गया। कई स्थानों पर इनके बीच पर्याप्त दूरी के मानक का भी पालन नहीं हुआ। अधिकांश मजदूरों को मायूस लौटना पड़ा। उनके खातों में पैसा नहीं आया।
जिनके खाते में पैसा आया, उन्हें बैंक में बारी-बारी से प्रवेश देकर भुगतान किया गया। उधर, मर्दननाका, खुटला, छोटी बाजार में राशन की दुकानों में अनाज बंटने की अफवाह उड़ते ही दर्जनों महिला-पुरुष हाथ में राशन कार्ड व झोला लिए दुकानों की ओर चल दिए। पुलिस के लाख समझाने के बाद भी नहीं माने। जब राशन की दुकाने बंद मिलीं तो घर लौट आए।
महानगरों से लौटे लोगों के लिए शिक्षक तैनात
बांदा। जिला बेसिक शिक्षाधिकारी हरिश्चंद्रनाथ ने बताया कि पूर्व माध्यमिक विद्यालयों के 40 सहायक अध्यापकों को प्रशिक्षण के बाद हरेक ब्लाक में 4-4 शिक्षक और एक पर्यवेक्षक की तैनाती की गई है। इन्हें निर्देश दिए गए हैं कि 21 मार्च से शहर और गांवों में महानगरों से लौटने वाले लोगों के नाम-पते नोट करें। फोन पर उनसे संपर्क कर उनके स्वास्थ्य की जानकारी लें। यह काम 14 दिन तक करें।
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शादी के दो माह पहले युवती ने आग लगाकर जान दी

मटौंध (बांदा)। शादी से दो माह पहले ही भूमिहीन मजदूर की 18 वर्षीय पुत्री ने घर में खुद को जिंदा जलाकर जान दे दी। परिजन आत्महत्या की वजह नहीं समझ पा रहे हैं। घटना मटौंध नगर के बैबे थोक की है। यहां शोभा प्रजापति की पुत्री बबली ने सोमवार को घर में मुख्य दरवाजा बंद कर अपने ऊपर मिट्टी का तेल डालकर आग लगा ली। आंगन से धुआं उठता देख पड़ोसी दरवाजा खोलकर दाखिल हुए, लेकिन तब तक बबली की जलकर मौत हो चुकी थी।
शव आंगन में चूल्हे के पास औंधे मुंह पड़ा मिला। पिता अपनी तीन अन्य पुत्रियों और एक पुत्र के साथ खेत में था। चारों बच्चे बबली से छोटे थे। पिता ने बताया कि बबली की शादी पड़ोसी जिले हमीरपुर के पराठा गांव में तय कर दी थी। 27 मई को विवाह होना था। मां की 10 साल पहले ही मौत हो गई थी। बबली ने पढ़ाई नहीं की थी।
घर पर ही रहकर चारों छोटे भाई-बहनों और पिता की देखरेख करती थी। पिता भूमिहीन है। खेतों में मजदूरी करके परिवार पाल रहा है। उसने बताया कि कुछ देर पहले ही बबली ने उसे खाना बनाकर परोसा था। वह खाकर चारों बच्चों को लेकर खेत पर चला गया। तब तक बबली पूरी तरह सामान्य और खुश नजर आ रही थी। पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया।
किशोरी ने की जान देने की कोशिश
बांदा। गुटखा खाने पर मां के थप्पड़ जड़ने से क्षुब्ध किशोरी ने फांसी लगाकर आत्महत्या का प्रयास किया। उसे जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया है। मटौंध थाना क्षेत्र के दुरेड़ी गांव में सोनिया (14) पुत्री बाबू ने रविवार को शाम कमरे में साड़ी से फांसी लगा ली। परिजनों ने फंदा काटकर उसे जिला अस्पताल पहुंचाया।
पिता ने बताया गुटखा खाने पर मां ने उसे मार दिया था। उधर, गिरवां थाना क्षेत्र के बहेरी गांव में रामदीन (42) पुत्र स्वामीदीन ने रविवार को रात घर में जहरीला पदार्थ खा लिया। एक अन्य घटना में अतर्रा थाना क्षेत्र के बल्लान गांव में रीना (20) ने जहरीला पदार्थ खाकर खुदकुशी का प्रयास किया। उसे जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया है।
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कैंसर पीड़ित समाजसेवी ने बनाया एलोवेरा सैनिटाइजर

बांदा। बड़ोखर खुर्द गांव में कैंसर पीड़ित समाजसेवी महिला फूला देवी कोरोना वायरस को लेकर भी सक्रिय हो गई हैं। उन्होंने गांव में लगे ग्वारपाठा (एलोवेरा) की पत्तियों के गूदे से सैनिटाइजर तैयार किया है। गांव के लगभग डेढ़ सौ महिला-पुरुषों और नेशनल हाईवे से गुजर रहे मजदूरों को बोतलों में पैक करके बांटा है।
फूला देवी ने बताया कि एलोवेरा में औषधि गुणों की भरमार है। इससे तैयार किया सैनिटाइजर कीटाणुओं और वायरस से बचाएगा। फूला देवी के पुत्र सत्येंद्र कुमार यादव (पूर्व सचिव सपा) ने बताया कि इच्छुक लोगों को वे सैनिटाइजर उनके घर तक पहुंचाएंगे।
कोरोना संक्रमण के मंडराते खतरे के बीच लॉकडाउन में डाक्टर, नर्स, पुलिस, सफाई कर्मी, मीडिया कर्मी और राहत व बचाव से जुड़े अन्य कर्मचारियों व अधिकारियों के प्रति बच्चों ने अपना आभार और सम्मान खुद के हाथों से तैयार किए गए पोस्टर से जताया है।
एसीडी स्टूडियो के बच्चे आर्या गुप्ता, अभिमान गुप्ता और अमायरा गुप्ता ने अपनी पेंटिंग के जरिये राहत कार्यों में लगे सभी कर्मियों और कार्यकर्ताओं का आभार जताते हुए उन्हें कोरोना योद्धा बताया है।
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निर्धनों के मददगार बने स्वयंसेवी संगठन

बांदा। लॉकडाउन में राशन और रोजमर्रा के सामान का संकट झेल रहे गरीब और जरूरतमंदों को लंच पैकेज या राशन सामग्री समाजसेवी और स्वयंसेवी संगठन पहुंचाने का काम तेजी से कर रहे हैं। इसमें कुछ राजनीतिक दल भी शामिल हैं।
रविवार को रफीक नर्सिंग होम, चिराग फाउंडेशन और सेवर्स ऑफ लाइफ ब्लड डोनेशन ग्रुप ने कांशीराम आवास कालोनी (चूना भट्ठी) में 30 परिवारों को राशन किट बांटी। इसमें आटा, दाल, तेल, नमक, आलू आदि शामिल था। फाउंडेशन की डॉ. शबाना ने बताया कि डॉ. मोनिका सक्सेना, डॉ. प्रज्ञा प्रकाश और डॉ. अरमानुल हक ने भी सहयोग किया है। संगठन कार्यकर्ता सलमान खां, नदीम अहमद, सलीम खां ने कालोनी जाकर वितरण किया। उन्होंने बताया कि 10 दिनों के बाद दूसरे चरण का वितरण होगा।
उधर, बुंदेलखंड मनिहार सोसायटी ने खुटला मोहल्ले में जरूरतमंदों को राशन बांटा। सोसायटी प्रबंधक और पूर्व बिजली कर्मी नेता मोहम्मद सुभान सहित यूनुस, नईम माटो, समीर उल्ला, रमजानी, हनीफ आदि शामिल रहे। स्थानीय विधायक प्रकाश द्विवेदी के सिविल लाइन स्थित कार्यालय में खोले गए कंट्रोल रूम में चल रहे लंच पैकेट वितरण में रविवार को शहर की विभिन्न बस्तियों में लगभग एक हजार लंच पैकेट बांटे। विधायक प्रतिनिधि रजत सेठ, पुष्कर द्विवेदी, अनिरुद्ध त्रिपाठी, स्वदेश गोलू शिवहरे आदि शामिल रहे। उधर, खुरहंड गांव में वहां से निकल रहे मजदूरों को विधायक प्रकाश द्विवेदी ने भोजन वितरित किया।
सदर तहसील में तहसीलदार अवधेश कुमार निगम के नेतृत्व में जरूरतमंदों को लंच पैकेट और राशन बंटवाया जा रहा है। तहसील में खुले इस कंट्रोल रूम से मदद के लिए 9454415981 तथा 7652081411 (नेकी की दीवार प्रभारी रामकृष्ण) या 9454415977 (तहसीलदार) पर कॉल की जा सकती है। निरंकारी सत्संग मंडल ने भी गरीबों को राशन वितरण किया। जोनल इंचार्ज डॉ. सुरेश बठीजा के निर्देशन में यह कार्य किया जा रहा है।
मजदूरों को लंच पैकेज बांटते समाजसेवी।
मजदूरों को लंच पैकेज बांटते समाजसेवी।- फोटो : BANDA
कांशीराम कालोनी के जरूरतमंदों को राशन किट वितरित करते कार्यकर्ता।
कांशीराम कालोनी के जरूरतमंदों को राशन किट वितरित करते कार्यकर्ता।- फोटो : BANDA
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ठेकेदार और युवती ने अलग-अलग लगाई फांसी

बांदा। अलग-अलग घटनाओं में घर में शटरिंग ठेकेदार और ससुराल में युवती ने फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली। युवती तीन दिन पहले ही मायके से आई थी। परिजन घटना की वजह नहीं बता सके। पुलिस ने शवों का पोस्टमार्टम कराया है।
कोतवाली देहात क्षेत्र के चहितारा गांव में राजाभइया (42) पुत्र बद्री ने शनिवार को शाम घर में प्लास्टिक की रस्सी से फांसी लगाकर जान दे दी। परिजनों की सूचना पर पुलिस ने दरवाजा तोड़कर शव को नीचे उतारा। पिता ने बताया कि राजाभइया निर्माणाधीन मकानों में शटरिंग का ठेका लेता था। मृतक के तीन बच्चे हैं।
वह आत्महत्या की वजह नहीं बता सके। एक अन्य घटना में कोतवाली नगर क्षेत्र के टिकरी गांव में राजश्री (29) पत्नी कमल पाल ने शनिवार को शाम अटारी में साड़ी से फांसी लगाकर जान दे दी। पुलिस ने शव कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। ससुर कामता ने बताया कि छह साल पूर्व शादी हुई थी। पति कमल सूरत में मजदूरी करने गया है। लॉकडाउन से वहीं फंस गया। यह भी बताया कि तीन दिन पहले ही अपने मायके से आई थी।
कोतवाली प्रभारी निरीक्षक दिनेश सिंह ने बताया कि मायके पक्ष से तहरीर मिलने पर कार्रवाई की जाएगी। उधर, संदिग्ध परिस्थितियों में चार वर्षीय चंदन पुत्र रमेश कुमार निवासी कुलसाढी (फतेहगंज) की शनिवार की रात मौत हो गई। पुलिस ने शव का पोस्टमार्टम कराया है। परिजन मौत की वजह नहीं बता सके। पुलिस ने कीड़ा काटने से मौत की आशंका जता रही है।
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पांचवें दिन एक हजार मजदूर लौटे, तीन मेडिकल कालेज रेफर

बांदा। पलायित मजदूरों का महानगरों से घर लौटने का सिलसिला थम नहीं रहा। रविवार को पांचवें दिन करीब 1000 मजदूर यहां आए। पुलिस ने उन्हें जिला अस्पताल ले जाकर जांच कराई। इंफ्रारेड मशीन से उनके शरीर का तापमान नापा गया। इनमें तीन मजदूरों को जुकाम-खांसी और शरीर का तापमान बढ़ा होने पर मेडिकल कालेज भेज दिया गया। ये दिल्ली से लौटे हैं। बीते पांच दिनों में महानगरों से लौटने वाले मजदूरों की संख्या लगभग दो हजार पहुंच गई है।
दिल्ली, गुजरात, महाराष्ट्र और कानपुर से जत्थों में लोग बड़ी संख्या में यहां पहुंचे। पुलिस ने सभी को रोककर जिला अस्पताल में लाइन में खड़ा कर बारी-बारी से जांच कराई। ये तेज धूप में खड़े होकर बारी का इंतजार करते रहे। ट्रामा सेंटर चिकित्साधिकारी डा.विनीत सचान, फिजीशियन डा.एसडी त्रिपाठी व डा.हृदयेश पटेल और सर्जन डा.आरएस दोहरे स्वास्थ्य परीक्षण करते रहे।
डाक्टरों के मुताबिक जुकाम-बुखार से ग्रसित तीन युवकों को कोरोना संक्रमण की आशंका पर मेडिकल कालेज के लिए रेफर किया गया। ये तीनों दिल्ली से आए हैं। मेडिकल कालेज प्रधानाचार्य डा.मुकेश कुमार यादव ने बताया कि तीनों को आइसोलेशन वार्ड में भर्ती किया गया है। फिलहाल अब तक आए मरीजों कोई कोरोना संक्रमित नहीं पाया गया।
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महानगरों से आए मजदूरों को 30 बसों में भेजा

बांदा। महानगरों से पैदल या किसी अन्य जुगाड़ से लौट रहे मजदूरों का रोडवेज बस स्टैंड पर जमावड़ा लग रहा है। रविवार को तो इनकी संख्या हजार का आंकड़ा पार कर गई। परिवहन निगम ने पुलिस के पहरे में विभिन्न रूटों पर 15 बसों से इन यात्रियों को रवाना किया। 24 घंटे के अंदर 30 बसें यात्रियों को लेकर रवाना हो चुकी हैं। लगभग 800 यात्रियों को उनके गंतव्य स्थानों पर रवाना किया गया। अफरा-तफरी में सोशल डिस्टेंस का मानक भी नहीं अपनाया जा सका।
महानगरों से लौटने वालों का सिलसिला रात-दिन जारी है। इनमें बच्चे और महिलाएं भी हैं। सिरों पर सामान की पोटली और युवा पीठ पर बैग टांगे लगातार चल रहे हैं। दिल्ली, सूरत, महाराष्ट्र आदि से लौट रहे हजारों मजदूरों में ज्यादातर जिले के ग्रामीण इलाकों के हैं। रास्ते में इन्हें विभिन्न संगठनों और समाजसेवियों द्वारा पानी और भोजन उपलब्ध कराया जा रहा है।
शनिवार को 15 बसों की खेप इन मजदूरों को लेकर कानपुर और सीमावर्ती मध्य प्रदेश के सतना जनपद गई थीं। अगले दिन रविवार को भी इतनी ही बसों से मजदूरों को प्रयागराज, कानपुर, हमीरपुर, फतेहपुर और मध्य प्रदेश के कटनी भेजा गया। इस दौरान सिटी मजिस्ट्रेट सुरेंद्र सिंह और तहसीलदार अवधेश निगम भी फोर्स के साथ उपस्थित रहे। बांदा डिपो के सहायक क्षेत्रीय प्रबंधक परमानंद ने बताया कि यात्रियों की उपलब्धता पर आगे भी बसें भेजी जा सकती हैं। रविवार को भी पैदल चलकर यहां पहुंचने वाले मजदूरों का सिलसिला जारी है।
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