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प्रेम की स्थापना कर राम के आदर्शों पर चले समाज

Kanpur	 Bureauकानपुर ब्यूरो Updated Wed, 26 Feb 2020 12:00 AM IST
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फोटो- 5- चित्रकूट में राष्ट्रीय रामायण मेला में धनुष भंग के बाद भगवान श्रीराम व सीता का विवाह कराते
फोटो- 5- चित्रकूट में राष्ट्रीय रामायण मेला में धनुष भंग के बाद भगवान श्रीराम व सीता का विवाह कराते - फोटो : CHITRAKUTT
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चित्रकूट। राष्ट्रीय रामायण मेले के 47वें समारोह के पांचवे और अंतिम दिन मंगलवार को प्रथम सत्र में रामकथा के प्रख्यात विद्वानों ने रामायण व रामकथा के विभिन्न प्रसंगों पर चर्चा करते हुए कहा कि विश्व शांति के लिए राम के आदर्शों को अपनाना होगा। अध्यक्षता करते हुए कामदगिरि प्रमुख द्वार के संत मदन गोपाल दास महाराज ने कहा कि भगवान श्रीराम ने चित्रकूट में 11 वर्ष 6 माह 6 दिन रहने के उपरांत यहां से रामराज्य की परिकल्पना प्रारंभ होती है। साथ ही माता सीता को शांति का प्रतीक बताया। रामराज्य में शांति की स्थापना हो।
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मंगलवार को प्रद्युम्न कुमार दुबे ‘लालू’ ने कहा कि राष्ट्रीय रामायण मेला की समाप्ति नहीं बल्कि स्वर्ण जयंती मनाने की तैयारियों की शुरुआत है। राज्य सरकार से पुरस्कृत शिवशंकर गुप्त ने कहा कि रामकथा मंदाकिनी सतत रुप से राष्ट्रीय रामायण मेला चित्रकूट से प्रवाहित होती रहेगी। साहित्यकार डॉ. सीताराम सिंह ‘विश्वबंधु’ ने कहा कि विश्व शांति एवं समृद्धि में बहुत घातक है। झांसी चिरगांव की मानस मंदाकिनी पाण्डेय व संत तीरथदीन पटेल ने राम नाम की महिमा का बखान करते हुए कहा कि बिना अनुराग के राम नाम की प्राप्ति सुलभ नहीं है। महाराष्ट्र मुंबई के पं वीरेंद्र प्रसाद शास्त्री ने जीवन में शांति कैसे प्राप्ति की जाए के संबंध में बताया कि हम सभी का जीवन उत्तरोतर मृत्यु की ओर जा रहा है लेकिन संपूर्ण जीवन अशांति से भरा रहा और जीवन में शांति की अनुभूति नहीं कर पाए।
द्वितीय सत्र के विद्वत गोष्ठी में हिन्दी साहित्य के प्रख्यात साहित्यकार डॉ चंद्रिका प्रसाद दीक्षित ‘ललित’ ने कहा कि चित्रकूट सृष्टि का आदिम केंद्र है। बताया कि चित्रकूट विश्व का एक ऐसा विलक्षण तीर्थ है जो सभ्यता, संस्कृति की दृष्टि से सबसे प्राचीनतम सिद्ध हेाता है। बिहार रांची के डॉ. जंगबहादुर पांडेय ने बताया कि मानस का सर्वाधिक महत्वपूर्ण कांड अयोध्या है। इसकी सर्वाधिक महत्वपूर्ण घटना चित्रकूट की सभा है।
इसके पूर्व रामायण मेले में दिल्ली, आसाम, प्रयागराज व मणिपुर के कलाकारों ने सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत किए।
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