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रामलला के नाम पर दान-चंदा नहीं ले सकते अन्य ट्रस्ट, सरकार ने लगाई रोक

धीरेंद्र सिंह, अयोध्या Published by: लखनऊ ब्यूरो Updated Sat, 22 Feb 2020 02:29 AM IST
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विहिप का राममंदिर का मॉडल
विहिप का राममंदिर का मॉडल - फोटो : अमर उजाला

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रामलला के नाम पर मंदिर निर्माण से लेकर किसी भी गतिविधि के लिए अब अधिकृत ट्रस्ट के अलावा कोई अन्य ट्रस्ट/संस्था या व्यक्ति चंदा, दान-अनुदान नहीं ले सकेगा। श्रीरामजन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र बोर्ड की बैठक के बाद यह एडवाइजरी गृह मंत्रालय ने सभी प्रदेशों को जारी की है।
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राममंदिर निर्माण को लेकर 1984 में सबसे पहले श्रीरामजन्मभूमि मुक्ति यज्ञ समिति गोरक्षपीठाश्वर महंत अवैद्यनाथ जी की अध्यक्षता में बनी थी। फिर सालभर बाद ही जगद्गुरु रामानंदाचार्य स्वामी शिवरामाचार्य जी की अध्यक्षता में अक्तूबर 1985 में श्रीरामजन्मभूमि न्यास का गठन हुआ।


स्वामी शिवरामाचार्य जी का 1989 में साकेतवास होने के बाद महंत परमहंस रामचंद्र दास इसके अध्यक्ष बने। इस ट्रस्ट ने करीब 20 करोड़ नकद, अरबों की भूमि-भवन, मंदिर निर्माण की शिलाओं समेत निर्माण सामग्री व कई प्रकल्प स्थापित किए। वर्तमान में इसी ट्रस्ट के अध्यक्ष महंत नृत्यगोपाल दास को ही गठित श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट का भी अध्यक्ष मनोनीत किया गया है।

बाबरी ढांचा ढहने के तत्काल बाद तत्कालीन प्रधानमंत्री पीवी नरसिंहराव के प्रयास से ज्योतिष पीठाधीश्वर व द्वारिकाशारदा पीठाधीश्वर जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती की अगुवाई में 1993 में अयोध्या श्रीराम जन्मभूमि रामालय न्यास का गठन हुआ था।

अयोध्या एक्ट लाकर इसी ट्रस्ट को राममंदिर का काम सौंपने की तैयारी थी। तीसरा ट्रस्ट श्रीरामजन्मभूमि मंदिर निर्माण न्यास है, जिसके सर्वेसर्वा यहां जानकीघाट बड़ा स्थान के महंत जन्मेजय शरण हैं। सभी ट्रस्टों को रामलला का मंदिर बनाने के लिए करोड़ों का चंदा-दान मिला है।

नए ट्रस्ट बनने के बाद भी रामालय ने स्वर्ण-संग्रह-सपर्या अभियान के तहत देश के सात हजार गांवों से एक हजार किलो सोना संग्रह कर भव्य मंदिर बनाने का अभियान 7 फरवरी 2020 से शुरू किया है। इस अभियान के खिलाफ यहां के डीएम अनुज कुमार झा ने भी शासन को रिपोर्ट भेजी थी।

सूत्र बताते हैं कि नई दिल्ली में 19 फरवरी को हुई श्रीराम जन्मभूमि ट्रस्ट की पहली बैठक के बाद अध्यक्ष बने महंत नृत्यगोपाल दास व महासचिव चंपत राय ने खुद अन्य ट्रस्टों की ओर से चंदा-दान वसूली पर आपत्ति जताई थी। इसके बाद केंद्र सरकार ने सख्त कदम उठाने का आश्वासन देते एडवाइजरी जारी कर दी है।
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एडवाइजरी जारी हो गई है: डॉ अनिल

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