अभेद्य सुरक्षा घेरे में भगवा रंग का होगा राममंदिर

Lucknow Bureauलखनऊ ब्यूरो Updated Wed, 18 Mar 2020 10:51 PM IST
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25 मार्च को विराजमान होंगे रामलला।
25 मार्च को विराजमान होंगे रामलला। - फोटो : FAIZABAD

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अयोध्या। श्रीरामजन्मभूमि से करीब ढाई सौ मीटर पूर्व में रामलला के अस्थायी मंदिर का स्वरूप अब निखरने लगा है। दर्शनार्थी थोड़ा सा ध्यान लगाएं तो रामलला के दर्शन करके निकलते वक्त जैसे ही लोहे का जाल पार करेंगे, वैसे ही दाईं तरफ आकार ले रहा अस्थायी राममंदिर के दर्शन होंगे।
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भगवा रंग में सज रहे इस मंदिर का पहला घेरा लोहे के गर्डर में जालीयुक्त है, तो दूसरा लकड़ी का है। आखिर घेरे में भव्य बुलेटप्रूफ फाइबर का मंदिर है, जिसमें रामलला विराजमान होंगे। प्रवेश के लिए सिर्फ पूर्व दिशा से एक मार्ग बन रहा है।
रामलला के अस्थायी मंदिर के आकार लेने के साथ लंबे समय से गोपनीय रखा जा रहा गृह मंत्रालय का सुरक्षा ब्लूप्रिंट अब सामने आने लगा है। हालांकि दिल्ली से आई गृह मंत्रालय की टीम ने सुरक्षा कारणों से न इसका न ब्लूप्रिंट किसी को शेयर किया है न कोई चित्र। प्रशासन व ट्रस्टी तक मंदिर के वास्तविक स्वरूप से अनजान हैं।
अस्थायी मंदिर को सुरक्षा की दृष्टि से अतिसंवेदनशील होने के कारण इसके वास्तविक स्वरूप व प्रयुक्त हो रही सामग्री को केंद्रीय गृह मंत्रालय ने बेहद गोपनीय रखा है। लेकिन बुधवार को मौके पर लगभग 70 फीसदी आकार ले चुके मंदिर का स्वरूप नजर आने लगा है। सबसे पहले करीब 50 फीट ऊंचा और 60 गुणे 60 फीट वर्गाकार में लोहे के मजबूत गर्डर का घेरा बनाया गया है।
इस घेरे को लोहे की मजबूत जाली से ऊपर समेत चारों तरफ से इस कदर वेल्ड किया गया है कि चिड़ियों को घुसना भी मुश्किल हो। इसके भीतर पूरब मुखी मंदिर के चबूतरे का पिछला हिस्सा जाल से सटा है। फिर तीन फीट ऊंचे चबूतरे पर 24 गुणे 17 फीट का विदेशी मजबूत मलेशियन लकड़ी का करीब 25 फीट ऊंचा मंदिर नुमा फाउंडेशन के साथ पूरा ढांचा खड़ा किया गया है।
इसे चारों तरफ से लकड़ी की पट्टी से पैक किया जा रहा है। अंदर जाने का एक मात्र द्वार पूर्व दिशा में है। सूत्रों का कहना है कि राममंदिर को अंतिम टच देने का काम गुरुवार को होगा, जब सबसे अंदर का आखिरी सुरक्षा घेरा वाला मुख्य मंदिर का भव्य स्वरूप बुलेटप्रूफ फाइबर से बनेगा। यह 15 फीट ऊंचा होगा और चारों बनीं लकड़ी की दीवार से सटा हुआ हाईटेक सुरक्षा व सेंसर से भी लैस होगा।
इस मंदिर में एक मात्र पूर्व दिशा की ओर का गेट भी बुलेटप्रूफ होगा। मंदिर में तीन गेट होंगे, दूसरा लकड़ी का और तीसरा मजबूत लोहे का होगा। मंदिर के सामने 20 फीट जगह होगी। इसके बाद भक्त सुरक्षा जाली के बाहर से दर्शन कर सकेंगे। जहां, कम से कम 10 फीट चौड़ी जगह बनाई गई है, ताकि आरती के वक्त लोग आराम से खड़े हो सकें। भक्तों की सुरक्षा व बंदरों से बचाव के लिए दर्शन मार्ग को भी पूरी तरह लोहे के गर्डर में जाली लगाकर पैक किया गया है। लोहे की गर्डर व जाली जहां भगवा रंग से रंगने का काम शुरू हुआ है। वहीं लकड़ी का सामान गृह मंत्रालय की टीम दिल्ली से ही भगवा रंग का ले आई थी।
कोरोना से बचाव का भी होगा प्रबंध
श्रीरामजन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र के ट्रस्टी डॉ. अनिल मिश्र ने कहा कि लोहा, लकड़ी और आखिरी सबसे गोपनीय बूलेटप्रूफ सुरक्षा घेरे वाले रामलला के भव्य मंदिर में भक्तों की सुविधाओं का पूरा ख्याल रखा जा रहा है। मंदिर के ऊपर भगवा ध्वज लहराएगा। कोरोना वायरस से बचाव के लिए भी सेनेटाइजेशन व हाथ धुलने के प्रबंध ट्रस्ट की ओर से किए जाएंगे। रामलला का लाइव दर्शन कराने की योजना जल्द मूर्त रूप ले सकती है।
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