अनुष्ठान बंद, खाली बैठे अयोध्या के तीर्थ पुरोहित

Lucknow Bureauलखनऊ ब्यूरो Updated Wed, 27 May 2020 09:03 PM IST
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अयोध्या-सरयू घाट पर पसरा सन्नाटा।
अयोध्या-सरयू घाट पर पसरा सन्नाटा। - फोटो : FAIZABAD

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अयोध्या। धार्मिक अनुष्ठान के लिए दूर-दूर तक विख्यात अयोध्या के तीर्थ पुरोहित, आचार्य, पंडित भी इन दिनों परेशान हैं। कोरोना के कारण अनुष्ठान बंद होने से रामनगरी के पंडे, पुजारी और कर्मकांडी ब्राह्मण खाली बैठे हैं। दक्षिणा पर आश्रित पुरोहितों के लिए अब आजीविका चलाना भी कठिन होने लगा है।
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कोरोना के कारण देवालयों के कपाट बंद चल रहे हैं। चूंकि लॉकडाउन के कारण तीर्थयात्री नहीं आ रहे हैं, लिहाजा सरयू के घाट भी सूने पड़े हैं। ऐसे में न तो मंदिरों में और न ही घरों में अनुष्ठान हो रहे हैं।
दो महीने से पूजा, पाठ और कर्मकांड भी नहीं हो रहे हैं। अधिकांश शादियों को भी नवंबर और दिसंबर तक के लिए टाल दिया गया है। अयोध्या से ब्राह्मण, पुजारी और बटुक दूर-दूर तक विविध अनुष्ठान के लिए जाते थे, लेकिन कोरोना महामारी के कारण इस पर भी रोक लगी हुई है। ऐसे में दक्षिणा के सहारे आजीविका चलाने वालों के सामने संकट खड़ा हो गया है।
अयोध्या से पूजा, पाठ, महायज्ञ और विवाह आदि के लिए आचार्य, शास्त्री, ब्राह्मण, अर्चक देश के अलग-अलग राज्यों में भी जाते हैं। देश में मुंबई, दिल्ली, बिहार, मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़, राजस्थान, पंजाब आदि प्रांतों में अयोध्या के वेद पंडितों को बुलाया जाता है, लेकिन कोरोना ने धर्म-कर्म पर भी बंधन लगा दिया है।
कोरोना के चलते स्थगित किए सात अनुष्ठान
तीर्थ पुरोहित वीरेंद्र शास्त्री कहते हैं कि लंबे अर्से से तीर्थ पुरोहित का कार्य कर रहा हूं। लॉकडाउन के चलते विभिन्न प्रदेशों में प्रस्तावित सात अनुष्ठानों को स्थगित करना पड़ा है। लॉकडाउन हुआ तो इतने बुरे दिन आ गए हैं कि भूखे रहने को नौबत आ गई है। कहा कि जीवन में कभी भी ऐसा दिन नहीं आया। झारखंड में चार, राजस्थान में दो व मुंगेर में एक अनुष्ठान प्रस्तावित था, सारे कार्य बंद हैं, कोई मदद को भी आगे नहीं आ रहा।
यज्ञ, हवन, अनुष्ठान सब बंद
पंडित पवन दास कहते हैं कि दो महीने से सारा यज्ञ, हवन, अनुष्ठान बंद है। इस लॉकडाउन में एकदम से बैठ गए हैँ। मध्यम वर्ग की मदद कोई नहीं कर रहा है, शासन-प्रशासन को मध्यम वर्ग की भी सहायता की ओर ध्यान देना चाहिए। बताया कि लॉकडाउन में उनके बिहार, राजस्थान और पंजाब में अनुष्ठान प्रस्तावित थे, लेकिन कोरोना के कहर के चलते सब कैंसल हो गए हैं, किसी से मांग भी नहीं सकते, रोजी-रोटी पर बड़ा संकट है।
किसी के सामने हाथ नहीं फैला सकते
आचार्य नीरज शास्त्री का कहना है कि दो माह से सभी धार्मिक आयोजन बंद हैं। इस काल में करीब दस कार्यक्रम सुनिश्चित था, लेकिन सभी कार्यक्रम स्थगित कर दिए गए हैं। यजमान भी परेेशान हैं, इसलिए हम लोगों के सामने भी संकट उत्पन्न हो गया है। ब्राह्मण तो किसी के सामने हाथ भी नहीं फैला सकता। अब बस भगवान का ही सहारा है कि वह इस संकट से जल्द निजात दिलाएं, शासन-प्रशासन तो कुछ सोच नहीं रहा।
घाट की जजमानी पर कोरोना की बुुरी नजर
ओमप्रकाश पंडा कहते हैं कि घाट की जजमानी पर कोरोना की बुुरी नजर लग गई है। पिंडदान, अस्थि कलश विसर्जन, कथा, पूजन, मुंडन संस्कार, गो पूजन सभी कुछ बंद है। पहले एक दिन में चार से पांच सौ रुपये आसानी से मिल जाते थे। जीवन बेहतर था। रोजमर्रा का खर्च आराम से निपट जाता था। अब मुश्किलें बढ़ गईं हैं। समझ में नहीं आ रहा है कि कितने दिन तक जमा पूंजी से खाएंगे। अब तो वह भी खत्म होने को हैं।
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