ऐसे योगी की आवश्यकता नहीं जो गुफा में बैठकर तपस्या करे- मोरारी बापू

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, गोरखपुर Updated Sun, 06 Oct 2019 06:16 PM IST
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मोरारी बापू
मोरारी बापू - फोटो : Amar Ujala

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गोरखपुर के चंपा देवी पार्क में दूसरे दिन भी मोरारी बापू की रामकथा जा रही। उन्होंने कथा को विस्तार देते हुए कहा कि आज विश्व को एक ऐसे योगी की आवश्यकता है जो गुफाओं-कंदराओं में बैठकर तपस्या करते न हो, बल्कि ऐसे योगी की जरूरत है, जो सदाशिव हो और सदैव विश्व का कल्याण करता हो।
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बापू ने इस वृतांत को गोरक्ष परंपरा से जोड़ते हुए कहा कि जिस प्रकार शिव, हनुमान, भरत और स्वयं राम एक हैं, उसी प्रकार गोरक्ष परंपरा में मत्स्येन्द्रनाथ, गोरक्षनाथ, सिद्ध और नाथ नाम चार हैं, परन्तु तत्व एक ही है। पूरी नाथ परंपरा का मूल तत्व भगवान महादेव है
बापू ने कहा कि यदि परम तत्व से कुछ मांगना है तो भक्ति मांगो ताकि समस्त संसार में भक्ति बांट सको। गुरू अपने शिष्य को ऐसी दृष्टि प्रदान करता है। जिसे शिष्य अपना मार्ग स्वयं चुन सके। 
उन्होंने कहा कि ईश्वर निराकार और साकार दोनों है। हरिनाम एक गोरखधन्धा है। गोरखधंधा का अर्थ है- ईश्वर निराकार भी है, साकार भी है। आपकी साधना अगम-अगोचर है।

वहीं चंपा देवी पार्क में रामकथा के दूसरे दिन लगभग 50000 श्रद्धालुओं ने मोरारी बापू के मुखारविंद से बरस रही राम कथा का रसपान किया। लगभग 7000 हजार श्रद्धालुओं ने इस अवसर पर प्रसाद ग्रहण किया। इस अवसर पर गोरखनाथ मंदिर और काशी विश्वनाथ वाराणसी के लगभग 250 कार्यकर्ता व्यवस्था में लगे हुए थे।

पहले दिन बापू ने क्या कहा?

गोरखपुर के चंपा देवी पार्क में चल रही मोरारी बापू की रामकथा में राम नाम का बखान सुन श्रद्धालु भाव विभोर हो उठे। पूरे पंडाल के अंदर जय श्री राम और जय सियाराम का जयघोष गूंज उठा। रामकथा के पहले दिन बापू ने कहा कि राम नाम जपने से जन्म सिद्ध और शुद्ध हो जाता है। 

रामचरितमानस में रामकथा भी राम, राम का नाम भी राम और भरत भी राम हैं। रविवार के दिन कथा की शुरुआत सुबह 9:30 बजे से हुई। छुट्टी का दिन होने के कारण भारी संख्या में श्रद्धालु रेला कथा सुनने आयोजन स्थल पर पहुंचे।

इस दौरान मोरारी बापू ने कहा कि बंगाल की दीदी भी राम का नाम ले रही हैं, भले ही वो जय श्री राम न बोलकर जय सियाराम का नारा लगाती हैं। कम से कम नाम तो ले रही हैं, भगवान का आशीष उन्हें भी मिलेगा।
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