हीरा कारोबारी देसाई पर बैंकों की फिर दरियादिली, दे दी मोहलत

माई सिटी रिपोर्टर, कानपुर Updated Fri, 20 Dec 2019 03:46 AM IST
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बैंक ऑफ इंडिया
बैंक ऑफ इंडिया - फोटो : Social Media
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शहर के 14 बैंकों के 3635 करोड़ रुपये के कर्जदार विकासनगर निवासी हीरा कारोबारी उदय देसाई पर बैंकों ने एक बार फिर दरियादिली दिखाई है। पूरे कर्ज के बदले 1500 करोड़ में समझौते का प्रस्ताव एक बार ठुकराने के बाद बैंकों ने इसे स्वीकार कर लिया है। हालांकि देसाई अपने इस प्रस्ताव पर भी खरे नहीं उतरे। समझौते की रकम का 10 फीसदी हिस्सा बतौर टोकन मनी उन्होंने अभी तक जमा नहीं किया है। 
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सूत्र के अनुसार देसाई ने 3536 करोड़ के कर्ज के बदले सितंबर में 1200 करोड़ में समझौते का प्रस्ताव दिया था। इसे कंसोर्टियम लीडर बैंक ने नकार दिया था। मामला सीबीआई तक पहुंचा तो देसाई ने समझौते की रकम बढ़ाकर 1500 करोड़ रुपये कर दी। इस पर बैंक ऑफ इंडिया ने देसाई के डूबे ऋणों के बदले यह प्रस्ताव स्वीकार कर लिया। 
बैंकों ने समझौते को आगे बढ़ाने के लिए 10 फीसदी रकम यानी 150 करोड़ रुपये तत्काल जमा करने की बात कही, लेकिन यह शर्त अभी तक पूरी नहीं हो सकी। बैंक अभी भी टोकन मनी के इंतजार में हैं। समझौते की आस में बैंकों ने देसाई की संपत्तियों की नीलामी भी दो बार टाली है। हालांकि बताया जा रहा है कि नीलामी के दौरान संपत्तियों के खरीदार नहीं मिले।
सीबीआई के शिकंजे के बाद हुए सचेत
सीबीआई ने उदय देसाई और उनकी कंपनी फ्रॉस्ट इंटरनेशनल के खिलाफ केस दर्ज करते हुए प्रकरण की जांच शुरू कर दी है। कंपनी के निदेशकों से कई बार पूछताछ हो चुकी है। सीबीआई बीते दो माह से उदय देसाई प्रकरण के सबूत जुटा रही है। सीबीआई का शिकंजा कसता देख उदय देसाई ने एकमुश्त समझौते का दांव खेला है। 

हालांकि बैंकों के सूत्र बताते हैं कि इस स्थिति में केस आने के बाद समझौते का प्रस्ताव स्वीकार करना समझ से परे है। उधर, कंसोर्टियम लीडर बैंक का पक्ष है कि डूबे ऋण की वसूली करना प्राथमिकता में है। वह चाहे संपत्तियों की नीलामी के जरिये हो या समझौते के जरिये। बता दें बैंकों ने मुंबई, कानपुर और गुड़गांव स्थित तमाम संपत्तियों को कब्जे में ले लिया है। कई संपत्तियां जब्त होने की स्थिति में हैं।
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