कूड़ा साबित हो रही फर्स्ट डिवीजन डिग्री

टीम डिजिटल/ अमर उजाला, कानपुर Updated Fri, 16 Sep 2016 08:34 PM IST
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कानपुर शहर के शैक्षिक संंस्थानों से युवाओं का डिग्री हासिल करना बेकार साबित हो रही है। दरअसल यह डिग्री नेशनल और मल्टीनेशनल कंपनियों के मानक पर खरी साबित नहीं हो रही।  
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फर्स्ट डिवीजन की डिग्री तो है लेकिन बेसिक नॉलेज कमजोर है। सरल सवालों का जवाब भी नहीं दे पाते हैं। सवाल सुनते ही कांफिडेंस गिर जाता है, हकलाने लगते हैं। इंटरव्यू के दौरान खुद को प्रस्तुत करने में दिक्कत महसूस करते हैं।
जॉब के लिए सेवायोजन कार्यालय (इंप्लायमेंट एक्सचेंज) में एक लाख 732 युवाओं ने रजिस्ट्रेशन करा रखा है। जनवरी से अब तक (14 सितंबर 2016) 14 जॉब फेयर लग चुके हैं। इसके बावजूद सिर्फ 1800 युवाओं को नौकरी मिल सकी, जबकि यह आंकड़ा बहुत होना चाहिए।
सेवायोजन कार्यालय के अफसर कहते हैं कि जो युवा इंटरव्यू देने आते हैं, उनका कम्युनिकेशन स्किल अच्छा नहीं है। पर्सनैलिटी डेवलपमेंट के लिहाज से कंपनियों के मानक पर खरे नहीं उतरते हैं। जबकि 70 प्रतिशत से ज्यादा अभ्यर्थियों के पास फर्स्ट डिवीजन की डिग्री है।  

 
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