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ट्रक-कार की टक्कर में एक की मौत दो घायल, लखनऊ-बांगरमऊ मार्ग पर हादसा

बांगरमऊ-लखनऊ मार्ग पर ग्राम अतरधनी के पास ट्रक व इनोवा कार की आमने-सामने भिड़ंत हो गई। हादसे में कार सवार एक युवक की मौत हो गई जबकि 2 गंभीर रूप से घायल हो गए। घायलों को सीएचसी से गंभीर हालत में जिला अस्पताल रेफर किया गया है।

कन्नौज के शरीफापुर निवासी विपनेश पाल की ससुराल आसीवन के बारी थाना गांव में रघुवीर के घर है। विपनेश की पत्नी कुछ दिन पहले मायके आई थी।  विपनेश गांव के अखिलेश (30) पुत्र रामआसरे  व एक अन्य के साथ शुक्रवार रात लगभग 10 बजे इनोवा कार से ससुराल बारीथाना जा रहा था। 

बांगरमऊ कोतवाली क्षेत्र के ग्राम अतरधनी के पास विपरीत दिशा से आ रहे ट्रक की कार से आमने सामने टक्कर हो गई। हादसे में कार चालक की मौत हो गई जबकि विपनेश व अखिलेश गंभीर रूप से घायल हो गए।  विपनेश को जिला अस्पताल रेफर किया गया है। 

दोनों घायल मृतक चालक का नाम नहीं बता सके। पुलिस चालक की पहचान कराने की कोशिश कर रही है। वहीं हादसे की सूचना पर पिता रघुवीर के साथ विपनेश की पत्नी सोनी सीएचसी बांगरमऊ पहुंची है।
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बांग्लादेशी युवती का सौदा 15 हजार टका में, पेशी पर आए अयाज ने किया खुलासा, नाव से पार कराई सीमा

बांग्लादेशी युवती को बिना पासपोर्ट-वीजा के बांग्लादेश से भारत लाने के लिए आरोपी अयाज ने रज्जाक से 15 हजार टका लिए थे। रुपये मिलने पर वह नाव से युवती को सीमा पार कराकर भारत ले आया। इस बात का खुलासा कोर्ट में पेशी पर आए अयाज ने किया।

बांग्लादेशी युवती को बेचने दिल्ली ले जा रहे दो रोहिंग्या मुसलमानों के मामले की सुनवाई शुक्रवार को अपर जिला जज सप्तम अभिषेक उपाध्याय की अदालत में हुई। कोर्ट में वादी मुकदमा जीआरपी इंस्पेक्टर राममोहन राय और एफआईआर लेखक विनोद पांडे के बयान दर्ज किए गए।

मामले में अगली सुनवाई 25 जनवरी को होगी। जीआरपी इंस्पेक्टर ने गवाही के दौरान बताया कि गिरफ्तारी के समय अयाज के पास से जो मोबाइल मिला था उसमें लगा सिम रज्जाक ने कोलकाता के फर्जी नाम व पते से निकलवाकर अयाज को दिया था।

अयाज के पास से भारतीय और बांग्लादेशी करेंसी भी बरामद हुई थी। वहीं रज्जाक के पास से पांच मोबाइल और कई सिम कार्ड मिले थे। रज्जाक भारत और बांग्लादेश दोनों के सिम इस्तेमाल करता था। दोनों देशों की करेंसी भी मिली थी।
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सर्दी का सितमः यूपी में बर्फीली हवाओं ने बढ़ाई गलन, मौसम विभाग ने जारी की चेतावनी

बिकरू कांड: गलत आपराधिक इतिहास देने में विवेचक तलब, जय की जमानत अर्जी पर सुनवाई अब 29 जनवरी को

जय बाजपेई जय बाजपेई

सिख विरोधी दंगा:  पिता और भाई को पीटकर दंगाइयों ने जिंदा जला दिया था, पीड़िता ने एसआईटी को दर्ज कराए बयान

सिख विरोधी दंगों की जांच कर रही एसआईटी ने एक और पीड़ित परिवार को खोज निकाला। दिल्ली में पीड़ित परिवार की महिला के बयान दर्ज किए। महिला ने बताया कि उनके सामने पिता और भाई को दंगाइयों ने पीट-पीटकर मरणासन्न कर दिया था।

इसके बाद दोनों को जिंदा जला दिया। वह और घर के अन्य लोग किसी तरह वहां से जान बचाकर भाग निकले। एसआईटी के मुताबिक दबौली निवासी जगजीत सिंह पत्नी बलजीत कौर, बेटी परमजीत कौर, बेटे हरचरन सिंह समेत अन्य बच्चों के साथ रहते थे।

परमजीत अब दिल्ली में रहती हैं। उन्होंने बताया कि सैकड़ों दंगाइयों ने घर पर हमला बोला था। दरवाजा तोड़कर भीतर घुस आए और पिता व भाई को मार डाला। इसके बाद वे अन्य घर वालों को लेकर शहर से चली गई थीं। 

मैंने मौत को करीब से देखा 
परमजीत ने बताया कि दंगाइयों ने उन्हें भागते हुए देख लिया था। पीछा कर जलती हुई चादर उनके ऊपर फेंक दी थी। चादर उनके पैर पर गिरी थी। झुलसने का निशान आज भी उनके पैर पर है। चंद सेकेंड और रुकतीं तो वह भी जिंदा न होती।
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यूपी: कलक्ट्रेट से शस्त्र लाइसेंस की 14 हजार फाइलें गायब, बड़ा खुलासा

शस्त्र लाइसेंस के मामले में बड़ा खुलासा हुआ है। कलक्ट्रेट से शस्त्र लाइसेंस की 14 हजार फाइलें गायब हैं। शासन की ओर से आईपीएस देव रंजन वर्मा के नेतृत्व में गठित एसआईटी ने जब जांच शुरू की तब खुलासा हुआ। एसआईटी ने बड़े पैमाने पर जांच शुरू की है।

इसमें कई अफसरों के नपने की संभावना है। जिला प्रशासन के आंकड़ों के मुताबिक शहर में 41 हजार 600 शस्त्र लाइसेंस धारक हैं। बिकरू कांड के बाद विभागीय जांच में खुलासा हुआ था कि विकास दुबे व एक मंत्री समेत 200 लाइसेंस धारकों की फाइलें गायब हैं।

कोतवाली में असलहा विभाग के बाबू के खिलाफ केस भी हुआ था। वहीं डेढ़ साल पहले भी फर्जीवाड़ा हुआ था। इसके बाद शासन ने आईपीएस देव रंजन वर्मा के नेतृत्व में एक एसआईटी गठित कर जांच सौंपी। सूत्रों के मुताबिक कुल शस्त्र लाइसेंसों में 14 हजार लाइसेंस की फाइल ही नहीं मिल रही हैं।

इनका रिकॉर्ड जिला प्रशासन एसआईटी को नहीं दे सका है। एसआईटी ने पुराने रिकॉर्ड खंगालने के साथ सभी असलहा विभाग के कर्मचारियों का ब्योरा भी प्रशासन से मांगा है। माना जा रहा है कि आपराधिक इतिहास होते हुए भी लाइसेंस बने। शायद इसी वजह से फाइलों में हेरफेर किया गया। 

स्वीकृति करने वाले का नाम व हस्ताक्षर भी नहीं 
शस्त्र लाइसेंस व फाइल पर जिलाधिकारी, एडीएम सिटी, सिटी मजिस्ट्रेट समेत अन्य अफसरों के हस्ताक्षर होते हैं। हर चरण में एक-एक दस्तावेज का सत्यापन किया जाता है। सूत्रों के मुताबिक कई सौ शस्त्र लाइसेंस ऐसे हैं, जिन पर स्वीकृति करने वाले अफसरों के नाम व हस्ताक्षर तक नहीं हैं। जो फाइलें गायब हैं वो दशकों पुरानी हैं। इन सभी का सत्यापन करना एसआईटी के लिए बड़ी चुनौती होगी।
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अजीब कारनामा: यहां शांति व्यवस्था कायम रखने के लिए मुर्दों को भी पाबंद करने में जुटी है पुलिस

शांति व्यवस्था कायम रखने के लिए पुलिस मुर्दों को भी पाबंद करने में जुटी है, जिसका जीता जागता उदाहरण शिवराजपुर क्षेत्र के पकरा गांव में देखने को मिला है जहां 10 वर्ष पूर्व एक मृत व्यक्ति को पुलिस ने शांतिभंग में पाबंद कर दिया है।

जानकारी के अनुसर, पकरा गांव में रास्ते के विवाद के बाद गांव निवासी आकाश, मंजू तथा पप्पू को शांतिभंग में पाबंद किया गया। पुलिस द्वारा समन तामील करने पर पूरे मामले की जानकारी हुई।

मृतक की पत्नी मंजू ने बताया कि 10 वर्ष पूर्व उनके पति पप्पू का निधन हो चुका है, इसके बाद भी पुलिस उन्हें अनावश्यक रूप से परेशान कर रही है। वहीं एसडीएम मीनू राणा ने बताया कि पुलिस की इस लापरवाही की जांच कराई जाएगी, बिना जमीनी हकीकत जाने इस तरह की कार्रवाई करना गलत है।
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जालौन: फेसबुक पर सम्प्रदाय विशेष के धार्मिक स्थल पर आपत्तिजनक पोस्ट करने का विरोध, रिपोर्ट दर्ज

यूपी पुलिस

Subhash Chandra Bose Jayanti:  यूपी के इस जिले में तीन दिन रुके थे नेताजी, फारवर्ड ब्लॉक की स्थापना की थी 

तुम मुझे खून दो, मैं तुम्हे आजादी दूंगा का नारा देने वाले महान क्रांतिकारी नेताजी सुभाषचंद्र बोस का मकूर गांव से गहरा नाता रहा है। इसी गांव के मजरे मार्क्स नगर में नेताजी ने फारवर्ड ब्लाक की स्थापना की थी। 17 मई 1938 को नेताजी सुभाषचंद्र बोस मकूर गांव आए थे।

गांव निवासी राधेलाल के अमलिहा बाग में उन्होंने एक बैठक की थी। नेता जी के सहयोगी रहे राधेलाल के बेटे और पुरवा के पूर्व विधायक चंद्रभूषण बताते हैं कि उनके पिताजी, नेता जी से जुड़े किस्से और आजादी के लिए किए गए संघर्ष की कहानी अक्सर सुनाते थे।

पिता बताते थे कि नेताजी अंग्रेजों से बचते हुए यहां पहुंचे थे। लगातार तीन दिन बैठक की और मजरे का नाम मार्क्स नगर रखा था। उन्होंने तीन दिन प्रवास के दौरान आसपास के ग्रामीणों को एकत्र करके उनमें क्रांति की अलख जगाकर फारवर्ड ब्लाक की स्थापना की थी। बैठक की जानकारी जब अंग्रेजों को हुई तो उन्होंने यहां दबिश दी थी।

हालांकि तब तक नेताजी यहां से जा चुके थे। नेताजी के न मिलने से खिसियाये अंग्रेजों ने ग्रामीणों पर अत्याचार किए थे। इसके बावजूद ग्रामीणों का स्वतंत्रता आंदोलन में भाग लेना जारी रहा था। मकूर गांव कभी कम्यूनिस्ट पार्टी का गढ़ माना जाता था।

बनवाया था चबूतरा
नेताजी के तीन दिन तक प्रवास करने के बाद शासन और प्रशासन ने चबूतरे का निर्माण कराया था। यह गांव आज भी उपेक्षा का शिकार है। मकूर इस समय जिले के सबसे ज्यादा फ्लोराइड प्रभावित गांवों में पहले नंबर पर है। यहां के लोगों को शुद्ध पानी भी उपलब्ध नहीं हो पा रहा है।
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Subhash Chandra Bose Jayanti:  यहां 21 साल से मालखाने में कैद है नेताजी सुभाष चंद्र बोस की प्रतिमा

देश को अंग्रेजी हुकूमत से आजाद कराने के लिए आजाद हिंद फौज का गठन करने वाले नेताजी सुभाष चंद्र बोस को कभी भी यह इल्म नहीं रहा होगा कि आजाद भारत में उनकी प्रतिमा तक स्थापित करना कठिन हो जाएगा।

सरकार ने भले ही नेताजी सुभाष चंद्र बोस की जयंती पराक्रम दिवस के रूप में मनाने का एलान किया हो, लेकिन हरदोई में नेताजी की एक प्रतिमा 21 साल से मालखाने में कैद है। नेताजी सुभाष चंद्र बोस की एकमात्र प्रतिमा पुलिस क्लब में लगी हुई है।

वर्ष 2000 में शिवसेना के तत्कालीन जिला प्रमुख रामवीर द्विवेदी ने शहर में मौनी बाबा मंदिर तिराहा के निकट स्थित नगर पालिका परिषद की भूमि पर नेताजी सुभाष चंद्र बोस की प्रतिमा स्थापित करने की कवायद शुरू की थी। 23 जनवरी 2000 को नगर पालिका की भूमि पर फाउंडेशन बनवाकर सुभाष चंद्र बोस की प्रतिमा स्थापित कर दी गई थी।

इसी बीच शहर कोतवाली की पुलिस मौके पर पहुंची और सब कुछ तहस-नहस कर दिया। सुभाष चंद्र बोस की प्रतिमा को भी पुलिस ने कब्जे में ले लिया। शांतिभंग की आशंका में दो लोगों का चालान कर प्रतिमा को जब्त कर लिया गया। तब से नेताजी की यह प्रतिमा मालखाने में ही कैद है। हर वर्ष सुभाष जयंती पर इस प्रतिमा की चर्चा होती है, लेकिन नतीजा सिफर ही रहता है। 
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यूपी: 3624 लोगों ने फर्जी तरीके से ली किसान सम्मान निधि, 1267 मृतकों के खातों में भी धनराशि भेजी गई, बड़ा खुलासा

प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि का पैसा 3624 लोगों ने गलत तरीके से हड़प लिया है। यह खुलासा कृषि विभाग के कर्मचारियों की सर्वे रिपोर्ट में हुआ है। इनमें नौकरी करने वाले और दूसरे जिलों से शहर में आकर किराये पर रहने वाले लोग हैं।

वहीं, 1267 मृतकों के खातों में भी धनराशि भेजी गई है। विभाग ने इन सभी के खाते सीज कर दिए हैं। धनराशि वसूलने की तैयारी की जा रही है। गरीब किसानों की आर्थिक मदद के लिए केंद्र सरकार 500 रुपये प्रतिमाह के हिसाब से एक वर्ष में तीन बार प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि देती है।

योजना 2016-17 में शुरू हुई थी। कृषि विभाग ने 2 लाख 75 हजार किसानों को पात्र श्रेणी में रखा था। पहली किस्त पहुंचने के बाद कई किसानों ने शिकायत की थी कि कई लोग फर्जी तरीके से सम्मान निधि का पैसा ले रहे हैं।

करीब छह माह पहले विभाग ने सत्यापन कार्य शुरू कराया था। विभाग के कर्मचारियों द्वारा जब रिपोर्ट कृषि उपनिदेशक को दी तो इसमें 638 लोग नौकरी में और 2986 लोग ऐसे मिले जो गैर जिलों से यहां आकर किराये पर रहते हैं।

जिन लोगों की मृत्यु हो चुकी है, उनके खाते सीज कर दिए गए हैं। जो लोग नौकरी कर रहे या बाहरी हैं, उन लोगों से पैसे की वसूली होगी। धनराशि वापस न करने पर कार्रवाई की जाएगी। -धीरेंद्र कुमार, उपनिदेशक कृषि

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शेयर बाजार में उथल-पुथल का दौर, पांच लाख निवेशकों को दो हजार करोड़ की कमाई

गुरुवार को अमेरिकी राष्ट्रपति बाइडन की ताजपोशी और अर्थव्यवस्था में सुधार के लिए भारी भरकम राहत पैकेज की घोषणा के बाद 50 हजार के पार पहुंचे सेंसेक्स ने शहर के निवेशकों की भी बल्ले-बल्ले कर दी। पांच लाख निवेशकों को एक ही दिन में करीब दो हजार करोड़ का फायदा हुआ।

हालांकि शुक्रवार को बाजार में गिरावट देखने को मिली। जानकारों का कहना है कि एक फरवरी को बजट आने तक बाजार में ऐसा ही उथल-पुथल देखने को मिल सकता है। निवेशक लंबे समय की प्लानिंग के साथ ही शेयर बाजार में कूदें। बीएसई और एनएसई ने गुरुवार को लंबी छलांग लगाई थी।

इसके चलते 35 साल बाद सेंसेक्स 50 हजार के ऊपर निकल गया था। सेंसेक्स ने यह आंकड़ा ऐसे समय में छुआ जब कोरोना के चलते अर्थ व्यवस्था की गाड़ी पटरी से उतरी हुई चल रही है। विशेषज्ञ कोराना के टीकाकरण के चलते नये-नये रिकार्ड बनने की संभावना जता रहे हैं।

उनका कहना है कि बड़े शेयरों में गुरुवार को खासी तेजी का रुख रहा। इससे निवेशकों को लाभ भी हुआ लेकिन निवेश संभलकर करने की जरूरत है। निवेश और कंपनी मामलों के जानकार सीएस आदेश टंडन ने बताया कि अंतरराष्ट्रीय बाजार बेहतर हो रहा है। कोरोना का प्रभाव भी कम हो रहा है।

ऐसे में लोग निवेश भी कर रहे हैं। रुपये में भी मजबूती देखने को मिल रही है। निवेश मामलों के जानकार सीएस अंकुर श्रीवास्तव ने बताया कि सेंसेक्स के नई ऊंचाई पर पहुंचने से शहर के करीब पांच लाख निवेशकों को एक ही दिन में अच्छा फायदा हुआ है। बजट आने में कुछ दिन ही शेष हैं। ऐसे में बाजार में एकदम तेजी या गिरावट देखने को मिल सकती है।
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