दारानगर के ऐतिहासिक कुप्पी युद्घ देखने को उमड़े दर्शक

Allahabad Bureauइलाहाबाद ब्यूरो Updated Tue, 27 Oct 2020 12:57 AM IST
विज्ञापन
People visited to daranagar in huge noumber for watching historical kuppi fight
People visited to daranagar in huge noumber for watching historical kuppi fight - फोटो : KAUSHAMBI

पढ़ें अमर उजाला ई-पेपर
कहीं भी, कभी भी।

*Yearly subscription for just ₹299 Limited Period Offer. HURRY UP!

ख़बर सुनें
कड़ा। दारानगर का 241वां कुप्पी युद्घ परंपरागत तरीके से हुआ। दो दिवसीय कुप्पी युद्घ में दोनों दलों की सेनाएं मास्क लगाकर मैदान में उतरीं। पहले दिन यानी रविवार को लक्ष्मण-मेघनाथ और दूसरे दिन सोमवार को राम-रावण के बीच युद्घ हुआ। दो दिन में सात बार हुए रोमांचकारी युद्घ को देखने के लिए कस्बा समेत आसपास गांवों के हजारों लोग मौजूद रहे। मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम द्वारा अहंकारी रावण का वध करते ही समूचा युद्घ मैदान राजारामचंद्र के जयकारों से गूंज उठा।
विज्ञापन

वाराणसी के रामनगर की तर्ज पर कौशाम्बी जिले के दारागनर कस्बे में पिछले 240 वर्षों से 12 दिवसीय रामलीला महोत्सव का आयोजन होता है। इस बार कोविड-19 के चलते भले ही देश के विभिन्न हिस्सों में होने वाली रामलीलाएं प्रभावित हुईं हो, लेकिन दारानगर का 241वां कुप्पी युद्ध अपनी मौलिकता व परंपरागत तरीके से हुआ। युद्ध से पहले आयोजकों ने पूरे मैदान के साथ ही प्लास्टिक की कुप्पियों को सैनिटाइज कराया। इसके बाद राम-रावण दल की सेनाओं के साथ ही आयोजक मंडल के सदस्य और वालिंटियर मास्क लगाकर मैदान में उतरे। कोरोना कॉल में भी परंपरागत तरीके से इस युद्ध में राम-रावण दल की सेनाएं वास्तविक युद्ध करती दिखीं। रविवार को पहले दिन चार युद्घ हुए। चारों लड़ाई में रावण की सेना भारी पड़ी।
दूसरे दिन सोमवार को तीन युद्घ हुए। प्रभु राम द्वारा अहंकारी रावण का वध करते ही हनुमान, सुग्रीव, जामवंत, अंगद, नल-नील सभी ने विजय दशमी का पर्व धूम धाम से मनाया। कमेटी के अध्यक्ष आद्या प्रसाद पांडेय, महामंत्री योग्रेंद्र मिश्रा मूल प्रकाश त्रिपाठी मुन्ना दुबे, चन्द्र नंदन साहू जयमणि तिवारी आदि पदाधिकारी युद्घ का संचालन करने में लगे रहे। कड़ाधाम कोतवाल राकेश तिवारी, सैनी कोतवाल प्रदीप सिंह, कोखराज कोतवाल बलराम सिंह व मोहब्बतपुर पइंसा कोतवाल राधेश्याम अपने हमराह व अन्य पुलिस कर्मियों के साथ व्यवस्था संभालने में जुटे रहे।
सुलोचना की सती लीला देख नम हुईं आंखें
कड़ा। लक्ष्मण-मेघनाथ के बीच रोमांचकारी युद्ध में इंद्रजीत की मृत्यु हो जाती है। मेघनाथ का सिर श्री राम के खेमे में पहुंच जाता है, जिसे लेने के लिए मेघनाथ की पत्नी सुलोचना पहुंचती हैं। अपने पति के सिर को मांग कर वह अंतिम संस्कार करने की इच्छा प्रकट करती हैं। सुलोचना के विनय को स्वीकार करते हुए प्रभु श्री राम ने मेघनाथ का सिर वापस कर दिया। लंका ले जाकर उसका अंतिम संस्कार किया गया। प्रभु श्री राम के साथ सुलोचना के संवाद की लीला देखकर मैदान के चारों ओर उपस्थित दर्शकों की आंखें नम हो गईं।
मीना मेला में महिलाओं ने जमकर की खरीदारी
कड़ा। दारानगर के रामलीला महोत्सव में मीना मेले का भी आयोजन किया गया। कुप्पी युद्ध मैदान के नजदीक बाग में लगे मीना मेले में तरह-तरह की दुकानें सजी रहीं। इन दुकानों में महिलाओं, बच्चों ने जमकर खरीदारी की। मीना मेले के पास ही मैदान में लगे झूला व अन्य मनोरंजन के साधनों का बच्चों व युवाओं ने खूब लुत्फ उठाया।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन

Spotlight

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
Election
  • Downloads

Follow Us

X

प्रिय पाठक

कृपया अमर उजाला प्लस के अनुभव को बेहतर बनाने में हमारी मदद करें।
डेली पॉडकास्ट सुनने के लिए सब्सक्राइब करें

क्लिप सुनें

00:00
00:00
X