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राइस मिलर्स की धान खरीद का मंडी के पास नहीं कोई हिसाब-किताब

Bareily Bureauबरेली ब्यूरो Updated Tue, 05 Nov 2019 02:05 AM IST
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लखीमपुर खीरी। सरकारी धान खरीद आगे नहीं बढ़ पा रही है। इसका एक प्रमुख कारण यह है कि आढ़त का लाइसेंस बनवाकर उसकी आढ़ में राइस मिलर किसानों से औने-पौने दामों में धान खरीदकर उसे सीधे अपने यहां मंगा ले रहे हैं। मंडियों में बनी इन आढ़त पर चूंकि वह धान पहुंचा ही नहीं रहा, इसलिए मंडी शुल्क भी जमा नहीं हो रहा। मंडी शुल्क का आंकड़ा नीचे आने से मंडी के अधिकारियों के बीच हलचल मच गई है, क्योंकि इससे आढ़त के आड़ में हो रहा खेल खुलने लगा है। इसका एहसास होते ही मंडी सचिव रामबाबू शर्मा ने सोमवार को मंडी निरीक्षक और उनके सहायकों से राइस मिलों की खरीद का ब्योरा मांगा तो उनमें से किसी ने जवाब नहीं दिया। इस पर सचिव ने सबका स्पष्टीकरण मांग लिया है।
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राजापुर मंडी में खोले गए क्रय केंद्रों पर किसानों से धान खरीद नहीं हो रही है। मंडी में आढ़तिए और राइस मिलर औने-पौने दामों में धान खरीद रहे हैं। कई राइस मिलर के पास मंडी में धान खरीद करने के लिए लाइसेंस है, लेकिन वह मंडी परिसर में धान नहीं खरीद रहे हैैं। बल्कि किसानों को सीधे राइस मिल पर बुलाकर अपने मन मुताबिक रेट पर धान खरीद रहे हैं, जो लाइसेंस की शर्तों का खुला उल्लंघन है। इसकी जानकारी होने पर भी मंडी के जिम्मेदार अधिकारियों ने चुप्पी साधे रखी, जिससे उनकी भी संलिप्तता के कयास लगाए जा रहे हैं। इस बीच सोमवार को मंडी सचिव रामबाबू शर्मा ने मंडी क्षेत्र की 20 राइस मिलों में अब तक हुई धान खरीद का ब्योरा मंडी निरीक्षक से मांगा तो निरीक्षक राइस मिलर्स की खरीद का हिसाब-किताब नहीं बता पाए। जबकि राइस मिल में धान की आवक का प्रतिदिन का ब्योरा मंडी निरीक्षक के पास होना चाहिए, जिसे 44अ रजिस्टर में दर्ज किया जाता है। मंडी निरीक्षक के पास एक माह के दौरान एक दिन की खरीद का रिकॉर्ड नहीं होने पर सचिव रामबाबू शर्मा ने मंडी निरीक्षक समेत अन्य कर्मचारियों को फटकार लगाई है। उन्होंने कहा है कि राइस मिल पर प्रतिदिन होने वाली धान की आवक का रिकार्ड रजिस्टर में दर्ज किया जाए। कोई राइस मिलर सूचना देने में आनाकानी करें तो उसकी तुरंत लिखित रूप से सूचना दी जाए।
लखीमपुर की राजापुर मंडी में अब तक दो लाख आठ हजार 382 क्विंटल धान की आवक हो चुकी है। जबकि अन्य मंडियों मोहम्मदी, गोला, पलिया और तिकुनियां को मिलाकर कुल चार लाख क्विंटल से अधिक आवक हो चुकी है। वहीं सरकारी धान खरीद का लक्ष्य एक लाख 93 हजार मीट्रिक टन है, लेकिन अभी तक क्रय केंद्रों पर 8423 मीट्रिक टन (84230 क्विंटल) धान खरीदा गया है। सूत्र बताते हैं कि जो राइस मिलें सीधे किसानों से औने-पौने दामों पर धान खरीद रही हैं, उनके पास ही सरकारी क्रय केंद्रों के धान की कुटाई करके सीएमआर (कस्टम चावल) तैयार करने की जिम्मेदारी है। सूत्रों की माने तो राइस मिलर्स, केंद्र प्रभारी समेत कुछ बड़े अधिकारियों की सांठगांठ से किसानों से सस्ते रेट पर खरीदे गए धान को सरकारी खरीद में तब्दील करने का खेल किया जा रहा है। अभी क्रय केंद्रों पर एक-दो किसानों से धान खरीदा गया है, लेकिन मौका पाकर खरीद की मात्रा को एकाएक बढ़ा दिया जाएगा।
जिन राइस मिलर्स के पास आढ़त के लाइसेंस हैं, वह मंडी परिसर में ही धान खरीद सकते हैं। सीधे मिल पर किसानों का धान खरीदना लाइसेंस की शर्तों का उल्लघंन है। राइस मिलर्स को प्रतिदिन होने वाली धान आवक/खरीद की सूचना मंडी को उपलब्ध करानी चाहिए, लेकिन ऐसा नहीं किया जा रहा है। राइस मिलर्स की खरीद की जांच कराई जाएगी। मंडी निरीक्षक से सूचना के साथ स्पष्टीकरण मांगा है। -रामबाबू शर्मा, मंडी सचिव
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