विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
नवरात्र में कराएं कामाख्या बगलामुखी कवच का पाठ व हवन, पाएं कर्ज मुक्ति एवं शत्रुओं से छुटकारा
Astrology Services

नवरात्र में कराएं कामाख्या बगलामुखी कवच का पाठ व हवन, पाएं कर्ज मुक्ति एवं शत्रुओं से छुटकारा

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

From nearby cities

Coronavirus in UP Live Updates: संक्रमितों की संख्या 100 से ज्यादा, दौरे स्थगित कर लखनऊ रवाना हुए मुख्यमंत्री योगी

देश भर में कोरोना वायरस के बढ़ते प्रकोप के बीच उत्तर प्रदेश के कुछ क्षेत्रों से अच्छी और कहीं से बुरी खबरें आ रही हैं। मंगलवार सुबह बरेली में पांच नए मरीज मिले हैं जिनके बाद सूबे में संक्रमितों की संख्या बढ़कर 102 हो गई है।

31 मार्च 2020

विज्ञापन
विज्ञापन

महोबा

मंगलवार, 31 मार्च 2020

फरीदाबाद से ट्रैक्टर से आए 25 मजदूरों को गांव में नहीं घुसने दिया

महोबा। फरीदाबाद से ट्रैक्टर से रात में घर लौटे 25 मजदूरों को ग्रामीणों ने गांव में नहीं घुसने दिया। ग्रामीणों ने पुलिस को सूचना दी। आनन-फानन में रात में ही मौके पर पहुंचे प्रशासनिक अधिकारियों ने स्वास्थ्य विभाग की टीम से सभी की जांच कराई। इसके बाद मजदूरों को गांव में प्रवेश करने दिया।
बुुंदेलखंड में पिछले साल सूखा पड़ने से फसल की पैदावार नहीं हुई थी। इससे जिले के तमाम ग्रामीण महानगरों में मजदूरी करने चले गए। अचानक लॉकडाउन हो जाने से मजदूर फंस गए। लॉकडाउन के चलते वाहनों को आवागमन ठप हो गया। गाजियाबाद में फंसे 25 मजदूर भाड़े पर ट्रैक्टर लेकर महोबा के लिए चल दिए। तीन दिन बाद शुक्रवार की रात कच्चे रास्तों से होते हुए मजदूर पचारा गांव पहुंचे।
पचारा में ग्रामीणों का ट्रैक्टर आते ही गांव वाले निकल पड़े और मजदूरों को गांव में नहीं घुसने दिया। फोन करके अधिकारियों को सूचना दी। अधिकारियों मजदूरों की जांच कराई। स्वास्थ्य विभाग की टीम चार घंटे तक मशक्कत करती रही। घर पहुंचे बच्चों को देख माता-पिता खुश हो गए। पचारा, मुढ़ारी, अकोनी व खैरारी पहुंचने वालों में संतोष, हरिदास, मन्नू, रामप्यारी, लल्लू साहू, नीरज, भुवानीदीन, भज्जू, रामकुमार, हर नारायण सहित अन्य शामिल हैं।
लॉकडाउन के उल्लंघन पर 57 वाहनों के चालान कटा : महोबा। कोरोना को लेकर जिले में लॉकडाउन का कड़ाई से पालन कराया जा रहा है। शनिवार को पुलिस ने लॉकडाउन का उल्लंघन करने वाले 57 वाहनों के चालान कर शमन शुल्क वसूला।
पुलिस अधीक्षक मणिलाल पाटीदार के निर्देश पर पुलिस सड़क से गुजरने वालों को घर में ही रहने की हिदायत दे रही है। लॉकडाउन का उल्लंघन करने पर एक वाहन को सीज और 57 वाहनों का चालान कर 1,800 रुपये शमन शुल्क वसूला गया। तीन वाहनों का न्यायालय चालान किया गया। लोगों से दोबारा ऐसा न करने की चेतावनी दी गई। जरूरी काम से निकलने वालों को आपस में दूरी बनाए रखने की अपील की गई।
... और पढ़ें

भूखे-प्यासे बंजारों को प्रशासन ने कराई खान-पान की व्यवस्था

महोबा। श्रीनगर-बेेलाताल मार्ग में एक माह से डेरा जमाए बंजारों का परिवार भुखमरी की कगार पर पहुंच गया है। इसकी खबर लगते ही पुलिस प्रशासन ने प्रधान बेलाताल के सहयोग से बंजारों को खाद्यान्न की व्यवस्था कर भोजन कराया। एसडीएम कुलपहाड़ ने कोटेदार व ग्राम प्रधान को राशन का इंतजाम करने के निर्देश दिए।
लखनऊ से 20 किमी दूर रहने वाले डेढ़ दर्जन से ज्यादा लोगों ने एक माह पहले बेलाताल में डेरा जमा लिया था। लखनऊ के पास से आए चार परिवार यहां शादी, विवाह में पत्तल उठाने का काम करते हैं। अचानक कोरोना के चलते शादियों पर रोक लग गई और जिला लॉकडाउन कर दिया गया। इससे इन बंजारों का रोजगार छिन गया। पैसा भी खत्म हो गया है।
... और पढ़ें

टिक-टॉक वीडियो बनाते समय फांसी के फंदे पर झूला मासूम

महोबा। बच्चों और युवाओं में टिक-टॉक का खुमार सिर चढ़कर बोल रहा है। इस शौक में लोग अपनी जिंदगी दांव पर लगा रहे हैं। ऐसा ही एक मामला बिच्छू पहाड़िया स्थित कांशीराम कॉलोनी में सामने आया है। टिक-टॉक पर वीडियो बना रहा एक मासूम एक्शन करते समय दुपट्टे से फांसी के फंदे पर झूल गया। अचानक पहुंचे परिजन उसे फंदे से उतारकर जिला अस्पताल लाए। जहां उसकी हालत में सुधार है।
कांशीराम कॉलोनी निवासी महफूज (08) पुत्र मकबूल घर पर मोबाइल फोन से टिक-टॉक पर वीडियो बना रहा था। कमरे में पहुंचे पिता ने उसे डांट दिया और दोबारा वीडियो न बनाने की हिदायत दी। कुछ देर बाद मां मुबीना पड़ोस में चली गई। पिता घर से बाहर निकल गए।
मासूम घर पर दोबारा वीडियो बनाने लगा। फंदे में लटकने का वीडियो बनाते समय वह फंदे में झूल गया। दुपट्टे का फंदा गले में कस गया। अचानक घर पहुंचे परिजनों ने जब मासूूम के गले में फंदा कसा देखा तो उनके होश उड़ गए। उसे फंदे से उतारकर जिला अस्पताल ले गए।
... और पढ़ें

सीमाओं पर सख्ती, गांव पहुंचना मुश्किल, जिले की सरहद में प्रवेश करते ही वाहनों और श्रमिकों को रोक लेती है पुलिस

महोबा। प्रदेशों से पैदल या बसों से आकर अपने गांव पहुंचना अब आसान नहीं है। जिला प्रशासन ने सख्ती बरतते हुए जिले की सरहदों पर पुलिस तैनात कर दिया है। श्रमिकों की बसों और पैदल परदेसियों को आगे जाने से मना किया जा रहा है। सभी को रोककर अस्पतालों में भेजा जा रहा है।
लॉकडाउन के बाद श्रमिकों के पैदल निकलने की होड़ के चलते ग्रामीण रात और तड़के सुबह जिले की सरहद पर आने के बाद अंधेरे का फायदा उठाकर बिना जांच कराए गांव निकल जाते थे। लेकिन अब जिला प्रशासन ने सख्ती शुरू कर दी है और सरहद पर पुलिस की ड्यूटी लगा दी है।
रविवार की रात को बसों और पैदल लौटे श्रमिकों को पुलिस ने जिले की सीमा पर रोक लिया और उन्हें पुलिस की देखरेख में अस्पताल पहुंचाया। सोमवार को एक भी ग्रामीण को बिना जांच के नहीं निकलने दिया। जिससे सीएचसी सहित जिला अस्पताल में भारी भीड़ जुटी रही। रविवार की रात को दिल्ली, मथुरा से वाया हमीरपुर, मुस्करा होते हुए खरेला के समीप जिले की सरहद पर जैसे ही बस आई। पुलिस ने सभी श्रमिकों को रोक लिया और अस्पताल पहुंचाया। कमोबेश यहीं स्थिति जिला मुख्यालय में भी देखने को मिली।
आधा दर्जन सीमाओं पर मजिस्ट्रेट तैनात
महोबा। लॉकडाउन के चलते जिला प्रशासन ने जिले की सीमाओं पर मजिस्ट्रेट तैनात कर दिए हैं। इनके साथ पुलिस कर्मचारियों की भी ड्यूटी लगाई है। यह अधिकारी और पुलिस कर्मचारी 12-12 घंटे ड्यूटी कर रहे हैं। कुम्हड़ौरा सीमा पर वाणिज्य कर अधिकारी बृज किशोर राजपूत, कैमाहा में वाणिज्य कर अधिकारी डॉ. धर्मेंद्र, पहरा-कबरई पर असिस्टेंट कमिश्नर व्यापार कर जयप्रकाश, महोबकंठ में वाणिज्य कर अधिकारी सुनील जायसवाल और नौगांव में डिप्टी कमिश्नर वाणिज्य कर रामप्रकाश पांडेय को लगाया गया है।
आज से खुलेंगे सरकारी कार्यालय
महोबा। जिले में कोरोना के नियंत्रण को लेकर विभागीय अधिकारियों के स्तर से कार्यवाही संचालित कराने के लिए डीएम अवधेश कुमार तिवारी ने सभी सरकारी कार्यालय पूर्व की भांति खोलने के निर्देश दिए हैं। डीएम ने जारी आदेश में कहा है कि कोरोना के नियंत्रण को लेकर तत्कालिक पत्राचार किया जा रहा है। इन महत्वपूर्ण पत्रों को डाक रनर के माध्यम से संबंधित अधिकारियों को भेजा जा रहा है, लेकिन संबंधित कार्यालयों में डाक प्राप्त करने के लिए कोई अधिकारी कर्मचारी उपस्थित नहीं हैं। ऐसे में उन्होंने जिले के सभी अधिकारियों को निर्देश दिए है कि सभी कार्यालय पूर्व की भांति खोलें।
शिक्षामित्रों ने एक दिन का मानदेय दिया
महोबा। देश में कोरोना के बढ़ते संक्रमण को लेकर प्रधानमंत्री की अपील पर मदद को हाथ बढ़ रहे हैं। आदर्श समायोजित शिक्षक व शिक्षामित्र वेलफेयर एसोसिएशन ने प्रांतीय नेतृत्व के सुझाव पर जिले के शिक्षामित्रों ने फरवरी माह में एक दिन का मानदेय मुख्यमंत्री आपदा कोष में जमा करने का पत्र बेसिक शिक्षा अधिकारी को सौंपा है। शिक्षामित्र वेलफेयर एसोसिएशन के जिलाध्यक्ष विमलचंद्र त्रिपाठी, महामंत्री अखिलेश्वर प्रसाद, कोषाध्यक्ष भगतराम, वरिष्ठ उपाध्यक्ष सुधांशु मोहन आदि ने बेसिक शिक्षा अधिकारी महेश प्रताप सिंह को पत्र सौंपा है। उधर बीएसए ने सभी शिक्षक-शिक्षिकाओं से अपील की है कि वह जरूरतमंदों को अपनी इच्छानुसार राशन सामग्री व अन्य आर्थिक सहायता उपलब्ध कराएं।
... और पढ़ें
कैमाहा बॉर्डर पर निर्देश देते एसपी मणिलाल पाटीदार कैमाहा बॉर्डर पर निर्देश देते एसपी मणिलाल पाटीदार

गांव लौटे श्रमिक अस्पताल के काट रहे चक्कर, जागरूक लोगों के खौफ से घरों में नहीं घुस पा रहे

खरेला (महोबा)। कोरोना के कारण गांव लौटे सैकड़ों श्रमिक जांच के लिए परेशान हैं। प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र और थाने के चक्कर लगा रहे हैं। पीएचसी स्तर पर जांच की सुविधा न होने से मुख्यालय जाने के लिए लॉकडाउन की समस्या आड़े आ रही है। वहीं जागरूक लोगों के खौफ से घरों में नहीं घुस पा रहे हैं।
खरेला में कस्बा और 22 गांव के करीब तीन सौ से अधिक श्रमिक गांव की सीमा तक आ गए हैं, लेकिन जांच के पचड़े में फंसकर घरों में नहीं घुस पा रहे है। सीमा पर तैनात पुलिस ने रविवार को उनकी सूची बनाकर सोमवार को जांच कराने की बात कहकर जाने को कहा।
ग्राम बारी, पड़ोरा, कुआं, खरेला आदि गांवों के श्रमिकों के पहुंचते ही जागरूक लोगों ने रोक लिया और गांव के बाहर ही उनके रुकने की व्यवस्था कराई। सोमवार की सुबह प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र खरेला पहुंचे श्रमिकों को जांच की कोई व्यवस्था नहीं मिली। तब उन्हें जिला अस्पताल जाने की बात कही गई। वाहन न मिलने से श्रमिक जांच के लिए इधर उधर भटकते रहे।
अस्पताल में लगी 200 मीटर लंबी लाइन
महोबा। महानगरों से लौटे श्रमिकों को जांच कराने के लिए भारी दिक्कत हो रही है। जिला अस्पताल में जांच के लिए सुबह से ही लंबी कतार लग रही है। एक एक मीटर के फासले में खड़े श्रमिकों की लाइन रोडवेज बस स्टैंड तक लगी रही। घंटों इंतजार के बाद श्रमिकों का जांच के लिए नंबर आ सका। इस दौरान कुछ समाजसेवियों ने भूखे प्यासे जांच के लिए लगे लोगों को लंच पैकेट व पानी की व्यवस्था कराई। तीखी धूप के बीच लोग जांच कराने के लिए अपनी बारी का इंतजार करते रहे।
सपने में नहीं सोचा था इतना मुश्किल होगा लौटना
महोबा। पूरे देश में चल रहे लॉकडाउन और वाहन न मिलने पर घरों के लिए पैदल निकले लोगों से बात करने पर वह नाराज हो जाते हैं। पांच-पांच दिन से भूखे पैदल चल रहे श्रमिकों ने कभी सपने में भी नहीं सोचा था कि जहां वह दो वक्त की रोटी कमाने के लिए जा रहे हैं। वहां से लौटना इतना कठिन होगा। कुछ ऐसी ही दुश्वारियों के बीच दिल्ली से पैदल चलकर घर लौटे बालेंद्र ने दास्तां बताई तो उसकी आंखें भर आईं।
कालीपहाड़ी गांव निवासी बालेंद्र कुमार मेहनत-मजदूरी की तलाश में दिल्ली गया था। तीन माह तक काम किया। 10 दिन पहले कोरोना के संक्रमण को लेकर लॉकडाउन हुआ। घर से दिन में कई बार फोन आते रहे कि देश में महामारी फैल रही है जल्दी घर आओ लेकिन कोई साधन नहीं मिला। जब कुछ लोगों को पैदल जाते देखा तो खुद भी पैदल चलने की ठानी। जीवन में पहली बार कभी इतना पैदल चला। 100 किमी तक पैदल चलने के बाद कुछ भी नहीं खाया। रास्ते में किसी ने जलपान तो किसी ने पैकेट मुहैया कराया तो शरीर में कुछ ऊर्जा आई। फिर आगे के लिए चल दिए। सात दिन तक सोया नहीं। बस आंखों के सामने घर कब पहुंचेंगे, यही चिंता रही। महोबा आकर सुकून मिला, अब एक कदम रखना भी भारी पड़ रहा है।
रिवाई गांव निवासी भुवानीदीन छह माह पहले दिल्ली मजदूरी करने गया था। लॉकडाउन होने के बाद कामधाम न मिलने पर वह घर आने के लिए परेशान हो गया। कोई वाहन न मिलने पर दिल्ली से कुछ साथियों के साथ पैदल निकल पड़ा। एक सप्ताह तक लगातार पैदल चलने के बाद वह पूरी तरह थक गया। पैर लाल पड़ गए। भूखे-प्यासे दिनरात चलने के बाद थोड़ा बहुत उसे रास्ते में लंच पैकेट मिला। इसके बाद फिर रफ्तार बढ़ाई। महोबा के नजदीक आने के बाद कुछ भी पूछने पर झल्ला उठे। काफी कुरेदने के बाद बोला 550 किमी चलने के बाद पूरा शरीर जवाब दे गया है। नाराजगी के कारण भकुवानीदीन के साथ आ रहे किसी भी लोगों ने भोजन नहीं किया। उनका कहना है कि छोटे-छोटे बच्चों का रोना और चीखना-चिल्लाना बर्दाश्त नहीं हुआ, लेकिन किसी को रहम नहीं आया।
... और पढ़ें

साठ साल से ऊपर तो कोरोना से बचें, पोस्टर और बैनरों से स्वास्थ्य विभाग लोगों को कर रहा जागरूक

महोबा। कोरोना वायरस का खतरा साठ साल के ऊपर के बुजुर्गों पर ज्यादा है, क्योंकि उनकी रोग प्रतिरोधक क्षमता अन्य लोगों की अपेक्षा कमजोर होती है। इसी को ध्यान में रखते हुए जागरूक करने के लिए हर स्तर पर प्रयास किए जा रहे हैं। डाक्टर भी बराबर इस बारे में बता रहे और परिवार के सदस्य भी अपने बड़े-बुजुर्गों को इसका हवाला देकर बाहर निकलने से रोक रहे हैं।
जिला सर्विलांस अधिकारी और अपर मुख्य चिकित्साधिकारी डा. सुरेंद्र प्रसाद का कहना है कि स्वास्थ्य विभाग इस बारे में पोस्टर, बैनर और पंफ्लेट के सहारे बुजुर्गों को जागरूक करने के साथ ही जरूरी हिदायत बरतने की सलाह देने में जुटा है। पोस्टर में स्पष्ट उल्लेख है कि वृद्ध नोवल कोरोना का शिकार आसानी से हो सकते हैं, ऐसे में सतर्कता ही असली बचाव है।
घर से न निकलें, बाहर भीड़भाड़ वाले स्थानों, धार्मिक स्थलों या आयोजनों पर जाने से कोरोना वायरस चपेट में ले सकता है, इसलिए ऐसे स्थानों पर जाने से बचें और डाक्टर के संपर्क में रहें। उच्च रक्तचाप, डायबिटीज, हृदय या फेफड़ों से संबंधित बीमारी है तो नियमित उपचार जारी रखें। इन परिस्थितियों में भी चिकित्सक की सलाह पर ही अस्पताल जाएं।
संक्रमण से बचने को ये रखें ख्याल
खांसते या छींकते समय हाथों की बजाय कोहनी या टिश्यू पेपर का इस्तेमाल करें और इस्तेमाल के बाद टिश्यू पेपर को कूड़ेदान में डालें। हाथों को बार-बार साबुन और साफ पानी से धोएं। बुखार, खांसी या सांस लेने में दिक्कत होने पर डाक्टर से संपर्क करें। कोरोना की जानकारी को हेल्पलाइन नंबर-1800-180-5145, 011- 23978046 व टोल फ्री नंबर-1075 पर संपर्क किया जा सकता है।
डीएम ने खाद्य पदार्थों की कीमतें तय की
महोबा। लॉकडाउन के चलते किराना व्यापारियों की मनमानी पर जिला प्रशासन ने नकेल कस दी है। साथ ही किराना और सब्जियों के रेट निर्धारित कर दिए हैं। इससे अधिक कीमत पर सामान बेचने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। कोरोना के चलते हुए लॉकडाउन के बाद किराना दुकानदारों ने जरूरी वस्तुओं की कीमतें डेढ़ गुना तक बढ़ा दी हैं, जिससे लोगों को मजबूरी में महंगे दामों पर खाद्य सामग्री खरीदनी पड़ रही है। शिकायत पर जिला प्रशासन ने इसे गंभीरता से लेते हुए कीमतें निर्धारित कर दी, जिससे अब दुकानदार महंगी दरों पर सामग्री नहीं बेच सकेंगे। जिला प्रशासन की कार्रवाई से दुकानदारों में खलबली मची है।
खाद्य पदार्थों की तय कीमतें---
सामग्री का नाम मूल्य (प्रति किलो)
आटा 25 रुपये
मसूरी चावल 30 रुपये
रामभोग चावल 40 रुपये
अरहर दाल 90 रुपये
मूंग दाल 95 रुपये
चीनी 38 रुपये
नमक 10 रुपये (प्रति पैकेट)
रिफाइंड फॉर्च्यून 110 रुपये
सरसों का तेल 110 रुपये
आलू 20 रुपये
प्याज 20 रुपये
आज से घर बैठे लें डॉक्टर सलाह
महोबा। कोरोना वायरस के चलते जारी लॉकडाउन को देखते हुए जिलेवासी स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं पर घर बैठे डॉक्टरों से परामर्श ले सकेंगे। इसके लिए डॉक्टरों ने सुबह से शाम तक किसी भी समय मोबाइल फोन पर स्वास्थ्य संबंधी जानकारी लेने के लिए सहमति दे दी है। प्राइवेट डॉक्टर एसोसिएशन महोबा की ओर टेलीमेडिसिन की सुविधा मंगलवार से शुरू की जा रही है। स्वास्थ्य संबंधी सुविधा पाने को इन डाक्टरों और उनके मोबाइल नंबर पर संपर्क कर सकते हैं।
डॉ. ज्ञानेश अवस्थी-9839219908 (किसी भी समय)
डॉ. प्रज्ञा अवस्थी स्त्रीरोग विशेषज्ञ-9721262200 (सुबह आठ से रात आठ बजे तक)
डॉ. सीपी सेठ-9889688533 (सुबह दस से रात आठ बजे तक)
डॉ. डीके पुरवार-7355305930 (सुबह दस से रात आठ बजे तक)
डॉ. निजाम उद्दीन-8299168218 (सुबह आठ बजे से रात दस बजे तक)
... और पढ़ें

घर-घर जाकर दे रहे राशन सामग्री, डीएम ने झंडी दिखाकर 12 मोहल्लों के लिए रवाना किया राशन का वाहन

महोबा। लॉकडाउन के चलते लोगों को घर-घर जाकर सब्जी व राशन मुहैया कराने के लिए रविवार को करीब एक दर्जन वाहनों को रवाना किया गया। सब्जी व राशन सामग्री से भरे वाहनों को डीएम अवधेश कुमार तिवारी ने झंडी दिखाकर रवाना किया।
लॉकडाउन के कारण जिले में पांच दिन से बाजार बंद हैं। सब्जी की भी दुकानें नहीं खुल रही हैं। ऐसी स्थिति में जिला प्रशासन ने लोगों को राहत पहुंचाने के लिए घरों तक सामग्री पहुंचने की व्यवस्था की है। सुबह से आलू, टमाटर, करेला, लौकी, दूध, फल, चावल, आटा आदि सामग्री से लदे वाहन मोहल्लों में घूमने लगे हैं।
जहां पर लोगों ने घरों बैठे जरूरत की सामग्री मिल रही है। खास बात यह है कि सामग्री बाजार के रेट पर मिल रही है। वाहनों को रवाना करने के बाद जिलाधिकारी ने कहा लॉकडाउन का मतलब है लोग घरों से बाहर न निकले। मोहल्लों में भी भीड़ एकत्र न करें। उन्हें घर पर ही सारी जरूरत की चीजें मिलेंगी। इस मौके पर डीएसओ एसपी शाक्य, डिप्टी आरएमओ आरके पांडेय, एआरओ देवी सिंह विश्वकर्मा, पूर्ति निरीक्षक आलोक पटैरिया रहे।
कौन कहां भेजेगा राशन सामग्री
अजहर - मोहल्ला भटीपुरा
मोहम्मद अहमद - मोहल्ला विजयनगर कॉलोनी
दिलशाद - मोहल्ला गांधीनगर
दिलशाद, इरशाद - हमीरपुर चुंगी
इसराइल - डाकबंगला, कांशीराम कॉलोनी
ईशान - राठ चुंगी कॉलोनी
नूर मोहम्मद - जिकरिया पीर
रानू - रामनगर, चांदो
शाहिद - बजरिया, करहरा
मोहम्मद इमरान - तकियापुरा
... और पढ़ें

श्रमिकों की मदद को आगे आए लोग, गरीबों को राशन सामग्री दी और कराया भोजन

सब्जी व खाद्यान्न सामग्री से भरे वाहन को हरी झंडी दिखाते डीएम अवधेश कुमार तिवारी
महोबा/कुलपहाड़। लॉकडाउन के चलते गरीबों व महानगरों से लौट रहे लोगों को खाने-पीने की परेशानी को देखते हुए पुलिस प्रशासन के साथ जागरूक लोग मदद के लिए आगे आए हैं।
शहर में पुलिस ने महानगरों से लौटे सैकड़ों श्रमिकों को जिला अस्पताल में जांच के लिए लंबी कतार में लगा देखा। भूखे-प्यासे श्रमिकों को पुलिस ने एक-एक मीटर की दूरी बनाकर लंच पैकेट वितरित किए। लाइन में लगे लोगों ने लंच खाकर राहत महसूस की।
कस्बा कुलपहाड़ में शोभित सोनी, राहुल अग्रवाल आदि ने उपजिलाधिकारी मोहम्मद उवैस व तहसीलदार सुबोध मणि शर्मा की मौजूदगी में लॉकडाउन से परेशान गरीब लोगों को उनके घर जाकर जरूरत की राशन सामग्री उपलब्ध कराई। रेलवे स्टेशन कुलपहाड़ में दिल्ली से पटरी के रास्ते पैदल चलकर आए मुसाफिरों को भोजन का इंतजाम किया गया।
खरेला प्रतिनिधि के अनुसार नगर पंचायत खरेला और पुलिस ने बंदी से परेशान गरीबों को लंच पैकेट वितरित कर मदद की। रविवार को थाना प्रभारी राजू सिंह, नगर पंचायत के लिपिक महेंद्र श्रीवास्तव ने अन्य कर्मियों के साथ दलित बस्ती और रोजमर्रा प्रभावित गरीब वर्ग के घर-घर जाकर उनको परिवार और बच्चों की संख्या के अनुसार लंच पैकेट वितरित किए।
... और पढ़ें

नातिन को गोद में लिए पैदल चलकर शोभा पहुंचीं गांव, दिल्ली से महोबा लौटी शोभा ने बताया 560 किमी चलीं हैं पैदल

महोबा। कोरोना के बढ़ते संक्रमण और देश में लॉकडाउन होने से वाहनों का संचालन ठप हो जाने से लोगों को उनका घर खींच रहा है। महानगरों में रहकर मेहनत-मजदूरी करने वाले पैदल घरों को लौट रहे हैं। उनके सफर की कहानी सुनकर लोग परेशान हो रहे हैं। कुछ ऐसी की दुश्वारियों के बीच महोबा लौटी शोभा सात दिन तक भूखे पेट पैदल चली। एक कंधे पर बैग का बोझ व दूसरी ओर गोद में नातिन को लेकर 560 किमी पैदल चलकर मंजिल हासिल की है। कई स्थानों पर पुलिस की रोका तो रात के अंधेरे में सड़क किनारे कुछ देर आराम करने के दौरान जीव-जंतुओं का खतरा भी था।
जिले के ग्राम टिकरिया निवासी शोभा (45) पत्नी रामकिशन दिल्ली में रहकर बेटे रामकृृपाल के साथ मेहनत-मजदूरी का काम करती है। शोभा ने बताया एक सप्ताह पहले कोरोना के बढ़ते संक्रमण को लेकर पूरा दिल्ली लॉकडाउन हो गया। काम बंद होने और घरों के कैद रहने पर परिवार के अन्य सदस्यों के लगातार फोन आ रहे थे। बेटा पहले घर आ गया था वह और उसकी 4 वर्षीय नातिन रिया घर पर अकेली थी। घर में जो सामग्री रखी थी वो खत्म हो गई। तब उसने पैदल ही घर जाने की ठानी। एक कंधे पर बैग का बोझ और दूसरे पर नातिन को लेकर महोबा के लिए पैदल चली। पांच दिन तक भोजन न मिलने से पैर आगे नहीं बढ़ रहे थे। छठवें दिन रास्ते में कुछ लोगों ने लंच पैकेट बांटे। एक लंच पैकेट में नातिन रिया और हमने भोजन किया। जिससे शरीर में ताकत बढ़ गई और सातवें दिन मंजिल पा ली। रास्तें में पानी पिया और फिर आगे के लिए बढ़ गई। हाथों के जवाब दे जाने पर मासूम को भी कुछ दूर तक पैदल चलाया और फिर कंधे में उठा लिया। तेज धूप होने पर पसीना से तर-बतर रहे और जंगलों में सड़क किनारे एक से दो घंटे आराम किया। आंख खुली तो फिर आगे के लिए चल दिया। महोबा आकर सुकून आया कि जिंदा पहुंच गईं।
श्रीनगर के बिलखी निवासी मदन दिल्ली में रहकर राजमिस्त्री का काम करता है। सात दिन पहले वह दिल्ली से पैदल चले थे। फरीदाबाद में एक चप्पल टूट गई। कोई दुकान न खुली होने से एक हाथ में चप्पल लिए कई किमी चले। रास्ते में रस्सी मिलने पर उसे बांध लिया, लेकिन पैर घिसटते चलने पर बिना चप्पल के ही महोबा तक का सफर तय किया। जिससे उसके पैरों में छाले पड़ गए है। अब एक किमी भी चला नहीं जा रहा है। रास्ते में सात दिन में दो जगह खाना खाया। एक जगह बिस्कुट का पैकेट मिला, जिसे बैग में डाल लिया कि जब भूख बर्दास्त नहीं होगी तब खा लेंगे। पूरे रास्ते में सामग्री का बोझ लादे रहने से कंधों ने जवाब दे दिया है। दो स्थानों पर उनकी जांच की गई। अब महोबा आने पर फिर जिला अस्पताल में जांच के लिए भेजा गया।
मदनलाल
मदनलाल- फोटो : MAHOBA
... और पढ़ें

प्रदेशों से लौटे लोगों की रहीं भीड़, दो लोगों के बीच की दूरी का नहीं हो सका पालन, जांच कराकर गांव गए लोग

महोबा। दिल्ली, नोएडा, आगरा आदि स्थानों से 24 घंटे के अंदर सैकड़ों की संख्या में लोग जिले में आए। कोई बस से तो कोई पैदल ही घर पहुंचा। इस दौरान सभी की जांच जिला अस्पताल में कराई गई। जांच कराने के लिए लोगों की जिला अस्पताल में लंबी कतारें लगी रहीं। एक मीटर की सामाजिक दूरी बनाने का नियम भी काम नहीं आया। एक दूसरे के पीछे सटकर खड़े लोग अपनी बारी का इंतजार करते रहे।
कोरोना के बढ़ते संक्रमण को लेकर महानगरों में परिवार समेत काम करने वाले लोग घरों को लौट रहे हैं। शासन ने कुछ बसों को भी विभिन्न जिलों के लिए रवाना किया। जिससे घरों को लौटने वालों की संख्या में तेजी से इजाफा हुआ है। जिला अस्पताल में अचानक महानगरों से आने वाले लोगों की जांच के लिए संख्या बढ़ गई। तब अस्पताल प्रशासन ने डॉक्टरों की तीन टीमें लगाकर सभी की जांच कराई। सुबह से लेकर शाम तक अस्पताल के बाहर सड़क तक लोगों की कतारें लगी रहीं।
अस्पताल प्रशासन द्वारा सामाजिक दूरी का पालन कराने के लिए एक-एक मीटर की दूरी बनाए गए गोले पर कोई भी व्यक्ति खड़ा नजर नहीं आया। धूप तेज होने के चलते लोग एक दूसरे से सटकर खड़े रहे। जिला अस्पताल के सीएमएस डॉ. आरपी मिश्रा स्वयं व्यवस्थाओं का जायजा लेते रहे। इस दौरान सपा कार्यकर्ताओं ने अस्पताल पहुंच बाहर से लौटे तमाम लोगों को भोजन कराया। श्रमिकों को जांच कराने में पांच से छह घंटे का समय लगा।
श्रमिकों के गांव पहुंचने पर लोग अशंकित
खरेला (महोबा)। खरेला से जुड़े एक दर्जन से अधिक गांवों में महानगरों से श्रमिकों के घर लौटते पर ग्रामीण कोरोना के चलते डरे हैं। ग्राम प्रतिनिधियों की जागरूकता से कई श्रमिकों की जांच हो रही है लेकिन अधिकांश लोग जांच कराए बगैर ही घरों में पहुंच रहे हैं। खरेला के नगर पंचायत की आबादी के अलावा जुड़े 22 गांव में बीते तीन दिन से बाहर रहने वाले लोगों के आने का सिलसिला जारी है।
सरकार की तमाम अपील और बंदी के बावजूद श्रमिकों के गांव पहुंचने से ग्रामीण दहशत में हैं। ग्राम कुड़ार में 15, धवारी में 10, बारी में 12, खरेला देहात में 11, पुन्नियां में 15, कुआं में 9, पड़ोरा में 10, पहरेथा में 8, ऐचाना में 13, बराय में 9 श्रमिकों के गांव में आने की जानकारी प्रधानों द्वारा दी गई है। थाना प्रभारी राजू सिंह ने बताया रोग की भयावह दशा को देखते हुए जानकारी मिलते ही गांव जाकर ग्रामीणों और आने वाले श्रमिकों को जागरूक कर रहे है।
छात्रवृत्ति खर्च कर बांटे साबुन
खरेला। केरोना से बचाने को भले ही समाजसेवा का दम भरने वाले सामने न आ रहे हो, लेकिन शिक्षित युवा पीड़ितों की मदद करने में पीछे नहीं है। ग्राम परथनिया निवासी मोतीलाल अहिरवार की स्नातक कर रही पुत्री पूजा ने संक्रमण से ग्रामीणों को बचाने के लिए खाते में जमा छात्रवृत्ति के पैसों से एक हजार साबुन खरीदें हैं। अब वह घर-घर साबुन वितरित कर महिलाओं, बच्चों और वृद्धों को रोग की भयावहता बताते हुए रोजाना दिन ने पांच बार हाथ धोने की अपील कर रही हैं।
जिला अस्पताल में जांच कराने के लिए कतारों में लगे लोग
जिला अस्पताल में जांच कराने के लिए कतारों में लगे लोग- फोटो : MAHOBA
... और पढ़ें

बीस बसों से लाए गए दो हजार श्रमिक, सुबह से शाम तक यात्रियों की बस अड्डा पर लगी रही भीड़, जांच के बाद घर भेजा गया

महोबा। लॉकडाउन के बाद दिल्ली सहित तमाम महानगरों में फंसे करीब दो हजार श्रमिकों को शनिवार रात को विशेष 20 बसों से महोबा लाया गया। रविवार शाम चार बजे तक बसों का आने का सिलसिला जारी रहा। जिससे महोबा रोडवेज परिसर में भीड़ का रेला जिला प्रशासन के लिए चुनौती बन गया। महानगरों से लौटे श्रमिकों की जांच भी कराई गई।
दिल्ली, नोएडा, आगरा, झांसी, मथुरा से शनिवार की रात को एक के बाद एक करके 20 बसों में करीब दो हजार श्रमिक शहर आए। महोबा आने के बाद यात्रियों को राठ, मुस्करा, कानपुर, बांदा, कर्वी, चित्रकूट के अलावा मध्यप्रदेश के छतरपुर, चंदला, खजुराहो व महाराजपुर के लिए यहां से 17 बसों से भेेजे गए। अकेली 12 बसें कानपुर भेजी गई। जिससे रविवार को सारा दिन रोडवेज में सुबह सात बजे से बसों को कानपुर सहित तमाम स्थानों पर भेजा गया। दिल्ली से महोबा 12 से 13 घंटें में बसें आईं। नोएडा से पांच स्लीपर कोच बसें भेजी गईं।
बाहर से आए सभी यात्रियों की सारा दिन जिला अस्पताल में जांच कराकर उन्हें घर भेजा गया। जांच कराने के बाद गांव पहुंचे ग्रामीणों ने भी कोई भी आपत्ति नहीं की। महानगरों से श्रमिकों का रेला उमड़ने के बाद इनकी जांच और नामों की लिस्ट बनाने में स्वास्थ्य कर्मियों को खासा दुश्वारियों का सामना करना पड़ा। स्वास्थ्य विभाग ने भीड़ को देखते हुए अतिरिक्त टीमें लगा दी है। इसके बाद भी शाम तक जांच का सिलसिला चलता रहा। करीब आठ दिनों के बाद रविवार को रोडवेज बसें चलने की खबर फैलते ही रोडवेज में लोगों का जमावड़ा लग गया। सुबह से शाम तक लोगों को यहां से दूसरे शहरों के लिए भेजा गया।
बच्चों के घर आने की जागी उम्मीद
महोबा। आठ दिन से बंद चल रही बसों के अचानक चलने से परिवार के लोग अपने-अपने बच्चों को लेने के लिए महानगरों की तरफ निकल गए। अब माता-पिता को अपने बच्चों के घर आने की उम्मीद जाग गई है। नोएडा, कानपुर, दिल्ली व लखनऊ में तैयारी कर रहे बच्चे लॉकडाउन के चलते फंसे थे। अब बच्चे जल्द ही मां-बाप से मिल सकेंगे।
पैदल चलकर सात दिन में पहुंचे गांव
खन्ना। लॉकडाउन के चलते परदेस में रह रहे लोगों की आवाजाही तेज है। कई दिन तक वाहनों की व्यवस्था न होने पर फंसे ग्रामीण महानगरों से पैदल ही चल दिए। जगह-जगह पुलिस की पूछताछ के बाद भी डग नहीं रुके। दिल्ली, नोएडा और आगरा से पैदल चलकर छह से सात दिन में आए ग्रामीणों को पहले नवीन प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र खन्ना में जांच के लिए भेजा गया। इसके बाद उन्हें गांव जाने दिया गया। महीनों बाद घर लौटे बेटों और भाइयों को पाकर परिजन खासा खुश हैं। चिचारा निवासी सुनील कुमार, गोविंद, विनय कुमार, लक्ष्मी, बरभौली निवासी मइयादीन, महेश, सिरसीखुर्द निवासी श्याम बाबू, प्रेमिका ने बताया वह दिल्ली और नोएडा में काम करते थे। पैदल चलकर गांव आए हैं।
रोडवेज बस स्टैंड में बस से उतरते श्रमिक
रोडवेज बस स्टैंड में बस से उतरते श्रमिक- फोटो : MAHOBA
... और पढ़ें

निर्धनों की मदद को बढ़े हाथ, बांटे लंच पैकेट

कबरई (महोबा)। लॉकडाउन के दौरान श्रमिकों की भूख मिटाने के लिए अब समाजसेवी आगे आ रहे हैं। शनिवार को समाजसेवियों ने श्रमिकों में खाद्यान्न व लंच पैकेट वितरित किए।
पत्थर व्यवसायी राजेंद्र पालीवाल, अविनाश पालीवाल, रजनी, चंद्रशेखर नामदेव आदि ने विवेक नगर स्थित अपने कार्यालय से मंडी में भुखमरी झेल रहे श्रमिकों को राहत सामग्री पहुंचाई। कल्ली देवी, रामबाई, रजिया, कौशल्या कुशवाहा, प्रेमवती, लल्लू समेत दर्जनों को सामाजिक दूरी का पालन कराते हुए खाद्यान्न के पैकेट दिए गए। प्रत्येक पैकेट में आटा, चावल, दाल, मसाले, चीनी आदि सामग्री थी।
समाजसेवी राजेंद्र पालीवाल ने बताया कि लॉकडाउन के चलते 20 अप्रैल तक यह व्यवस्था चलती रहेगी। जरूरतमंद का फोन आने पर राशन व अन्य सामान उसके बताए पते पर पहुंचा दिया जाएगा। उन्होंने अपने फोन नंबर भी लोगों को दिए। ताकि जरूरतमंद कॉल करके आवश्यकता बता सकें। शहर में भी तमाम समाजसेवियों ने गरीबों व असहायों की मदद के लिए हाथ बढ़ाया है।
... और पढ़ें

बाहर से आए लोगों के घरों में लगाए जा रहे पंपलेट

महोबा। कोरोना से बचाव के लिए जिले में बाहर से आने वालों की स्क्रीनिंग कराई जा रही है। उन्हें होम क्वारंटीन किया जा रहा है। स्वास्थ्य विभाग ऐसे लोगों के घरों के बाहर पंफ्लेट चस्पा किया जा रहा है। पंफ्लेट में संबंधित व्यक्ति का नाम और घर में रहने की तारीख के साथ लोगों को इनके घर न जाने की अपील की जा रही है। सीएमओ डॉ. सुमन ने चिकित्सा अधीक्षकों को दो दिनों में काम पूरा करने के निर्देश दिए हैं।
सीएमओ ने बताया कि जिले में अन्य राज्यों या देशों से आए लोगों के घर के बाहर पंफ्लेट होम क्वारंटीन लिखकर चस्पा किया जा रहा है। इसमें बाहर से आए व्यक्ति का नाम, पता, व्यक्तियों की संख्या और क्वारंटीन की तिथि दर्ज की जा रही है। बाहर से आए व्यक्ति को घर पर भी परिवार से दूर रहने की सलाह दी जा रही है।
अगर परिवार में एक भी कोरोना संक्रमित है तो उस घर के सभी लोगों को यह बीमारी हो सकती है। ऐसे में इस बीमारी से परिवार को बचाने के लिए कम से कम 14 दिन अलग रहें। सीएमओ ने कहा कि सभी चिकित्सा अधीक्षक, चिकित्सा अधिकारियों व प्रभारियों को बाहर से आए लोगों के घरों के दरवाजे पर पंफ्लेट लगाने के लिए दो दिन का समय दिया गया है। रोजाना कोरोना के मरीजों में इजाफा हो रहा है।
... और पढ़ें
अपने शहर की सभी खबर पढ़ने के लिए amarujala.com पर जाएं

Disclaimer


हम डाटा संग्रह टूल्स, जैसे की कुकीज के माध्यम से आपकी जानकारी एकत्र करते हैं ताकि आपको बेहतर और व्यक्तिगत अनुभव प्रदान कर सकें और लक्षित विज्ञापन पेश कर सकें। अगर आप साइन-अप करते हैं, तो हम आपका ईमेल पता, फोन नंबर और अन्य विवरण पूरी तरह सुरक्षित तरीके से स्टोर करते हैं। आप कुकीज नीति पृष्ठ से अपनी कुकीज हटा सकते है और रजिस्टर्ड यूजर अपने प्रोफाइल पेज से अपना व्यक्तिगत डाटा हटा या एक्सपोर्ट कर सकते हैं। हमारी Cookies Policy, Privacy Policy और Terms & Conditions के बारे में पढ़ें और अपनी सहमति देने के लिए Agree पर क्लिक करें।
Agree
Election
  • Downloads

Follow Us