गन्ने की फसल में पोका बोईंग रोग का प्रकोप, कृषि विशेषज्ञों ने किसान को ये दवा अपनाने की दी सलाह

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मेरठ Updated Tue, 23 Jun 2020 12:46 AM IST
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sugar cane - फोटो : amar ujala

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पश्चिमी यूपी में गन्ना किसानों ने खेतों में गन्ने की अगेती प्रजाति उगाई हुई है। ऐसे में इस प्रजाति में टाप बोरर के साथ ही पोका बोइंग रोग भी गन्ने की फसल के लिए चिंत का विषय बन रहा है। किसान इसे लेकर काफी परेशान है। इस स्थिति में कृषि विशेषज्ञों ने इससे बचाव के लिए किसानों को खास सावधानी बरतने की सलाह दी है। 
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गन्ने की अगेती प्रजाति में टाप बोरर के साथ ही पोका बोइंग रोग लगने के चलते किसान परेशान हैं। एग्री फोर्ट टेकनॉलाजी के कृषि विशेषज्ञ मुकेश सिंह ने बताया कि पश्चिमी उत्तर प्रदेश के मेरठ, मुजफ्फरनगर, शामली, बड़ौत को गन्ना बेल्ट माना जाता है। यहां के किसानों ने गन्ने की अगेती प्रजाति 0238 की बुआई की है।
उन्होंने बताया कि यह रोग होने पर गन्ने के ऊपरी चोटी पर पत्ती में छेद दिखने लगते हैं पत्तियां पीले रंग की हो जाती हैं। यह रोग देखने में टाप बोरर की भांति दिखाई देता है। लेकिन यह फफूंदी से फैलने वाली बीमारी है। जिससे ऊपर की बनने वाली तीन या चार पोरियों में गलन हो जाती है। गन्न सूखने लगता है।
इसकी रोकथाम के लिए कॉपर आक्सीक्लोराईड 500 ग्राम, रोको 500 ग्राम, दवा को 200 लीटर पानी में मिलाकर प्रति एकड़ छिड़काव करें। थायोफिनाईट मिथाइल 500 ग्राम प्रति एकड़ या इन दवाओं की दुगनी मात्रा को मिट्टी में मिलाकर खेत में डाल सकते हैं।
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