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शादी का झांसा देकर सिपाही ने महिला कांस्टेबल से आठ माह तक किया दुष्कर्म और फिर...

बागपत जनपद के एक थाने में तैनात कांस्टेबल ने शादी का झांसा देकर अपनी साथी महिला कांस्टेबल के साथ करीब आठ माह तक दुष्कर्म किया। पीड़िता ने सिपाही पर शादी के लिए दबाव बनाया तो उसने शादी से इनकार कर दिया। इस दौरान पीड़िता ने जहर खाकर जान देने की कोशिश की। एसपी के आदेश पर महिला थाने में मुकदमा दर्ज कर पुलिस ने आरोपी सिपाही को हिरासत में लिया है।

अमरोहा के धनौरा मंडी निवासी सिपाही अतुल जिले के एक थाने में तैनात हैं। इसी थाने में तैनात एक महिला सिपाही के साथ उसकी वर्ष 2019 में जान पहचान हो गई। पीड़िता ने पुलिस को बताया फरवरी 2020 में उसके सामने शादी का प्रस्ताव रखा। महिला सिपाही किराये के एक मकान में अकेली रहती है। आरोप है कि मई 2020 में एक दिन रात की ड्यूटी समाप्त करने के बाद महिला सिपाही अपने कमरे में थी और आरोपी उसके कमरे में पहुंच गया।

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आरोप है कि विरोध के बाद भी उसने उसके साथ दुष्कर्म किया। आरोपी के झांसे में आकर उसने अपने पति से भी तलाक ले लिया। आरोपी शादी का झांसा देकर उसके साथ आठ माह तक दुष्कर्म करता रहा।

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शादी करने के बहाने उसे हरिद्वार ले गया और वहां दो दिन एक होटल में दुष्कर्म किया। इसके बाद बिना शादी किए ही थाने ले आया। थाने में ड्यूटी पर आने के बाद 10 जनवरी को पीड़िता को पता चला कि आरोपी की दूसरी लकड़ी से शादी हो रही है। महिला कांस्टेबल ने 12 जनवरी को जहर खाकर आत्महत्या का प्रयास किया। पीड़िता ने एसपी से आरोपी की शिकायत की। एसपी के आदेश पर रविवार को सिपाही के खिलाफ महिला थाने में दुष्कर्म की धारा में मुकदमा दर्ज हुआ। पुलिस ने आरोपी सिपाही को हिरासत में लिया। महिला थाने की एसओ साक्षी चौहान ने बताया मुकदमा दर्ज कर पुलिस ने आरोपी को हिरासत में लिया है।

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खौफनाक वारदात: चाकू घोंपकर महिला की हत्या, घर में पड़ी मिली लाश, गांव में फैली सनसनी

उत्तर प्रदेश में मेरठ जनपद के कलंजरी गांव में बुधवार सुबह एक सनसनीखेज वारदात हो गई। महिला की चाकू घोंपकर हत्या कर दी गई। घटना की जानकारी लगने पर पुलिस पहुंची और मामले की जांच शुरू कर दी है।

जानी थाना क्षेत्र के गांव कलंजरी में राजू का परिवार रहता है। राजू राजस्थान में ठेकेदारी का काम करता है। बुधवार सुबह उसकी पत्नी कुमुद (45 वर्ष) घर पर अकेली थी। उसके दो बच्चे शैली और आशु सुबह नौ बजे स्कूल चले गए। करीब 11 बजे कुमुद का देवर दीपक किसी काम से घर आया। घर का दरवाजा बाहर से बंद था। दीपक दरवाजा खोलकर घर में घुसा तो बरामदे में कुमुद खून से लथपथ मृत पड़ी थी। इसके अलावा घर के कमरे में रखी सेफ का सामान फर्श पर फैला पड़ा था। कुमुद के गले पर चाकू के गहरे निशान मिले हैं। भाभी को इस हालत में देख दीपक के पैरों तले जमीन खिसक गई। इसके बाद पुलिस को घटना की जानकारी दी गई। पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भिजवा दिया है।

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पुलिस पूछताछ में सामने आया कि सुबह 10 बजे के करीब एक मांगने वाला युवक घर में गया था। उसी युवक पर हत्या किए जाने का शक किया जा रहा है। वहीं ग्रामीणों का भी यही कहना है कि एक मांगने वाला युवक सुबह घर में घुसा था।

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उधर, घटना की जानकारी लगने पर एसपी देहात केशव कुमार भी पुलिस के साथ मौके पर पहुंचे। एसपी देहात ने पुलिस को कार्रवाई के निर्देश दिए हैं।

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बड़ी लापरवाही: मंत्री के सामने हुआ राष्ट्रीय ध्वज का अपमान, एसएसपी ने दिए कार्रवाई के निर्देश

उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर में पुलिस लाइन में गणतंत्र दिवस पर ध्वजारोहण के दौरान पुलिसकर्मियों की लापरवाही के कारण राष्ट्रीय ध्वज का अपमान हुआ। गणतंत्र दिवस समारोह के मुख्य अतिथि प्रदेश के कौशल विकास राज्य मंत्री कपिल देव अग्रवाल के सामने ही ऐसा हुआ। 

बताया गया कि मुख्य अतिथि कपिल देव अग्रवाल ने जब ध्वजारोहण करने के लिए रस्सी पकड़ी तो तभी अचानक ध्वज बिना खुले ही नीचे गिर गया। इस दौरान सभी अधिकारी भी मौजूद थे। राज्यमंत्री ने इस पर नाराजगी जताते हुए एसएसपी से जांच कराने को कहा। पुलिसकर्मियों ने दोबारा से ध्वज को लगाया। इसके बाद राज्य मंत्री ने ध्वजारोहण किया। 

मंत्री कपिल देव अग्रवाल ने बताया कि यह ध्वज लगाने वाले पुलिसकर्मी की लापरवाही है। अधिकारियों को भी ध्वजारोहण से पहले उसे चेक करना चाहिए था। इस संबंध में एसएसपी को जांच कराने को कहा है। 

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उधर, एसएसपी अभिषेक यादव ने बताया कि यह लापरवाही हुई है, इसकी जांच एक राजपत्रित अधिकारी को सौंपी गई है, जो भी दोषी पाया जाएगा कार्रवाई की जाएगी। एसएससी ने बताया कि एसपी सिटी अर्पित विजय वर्गी को इसकी जांच सौंपी गई है।

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दिल्ली में हिंसा के बाद मेरठ जोन में हाई अलर्ट, पुलिस अधिकारियों को दिए सख्त निर्देश

किसान आंदोलन के दौरान दिल्ली में हुई हिंसक घटनाओं के बाद मेरठ जोन में हाई अलर्ट जारी कर दिया गया है। गाजीपुर बॉर्डर पर आंदोलन कर रहे किसानों का धरना खत्म कराने की जिम्मेदारी पुलिस को दी गई है। इसके मद्देनजर एडीजी राजीव सभरवाल और आईजी प्रवीण कुमार ने गाजीपुर बॉर्डर पर डेरा डाल दिया है। दोनों अधिकारी किसान नेताओं और किसानों से लगातार बातचीत कर रहे हैं।

इस बीच पश्चिमी यूपी में इसके मद्देनजर अप्रिय घटनाएं रोकने के लिए सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है। पुलिस ने किसानों को सकुशल घर पहुंचाने की जिम्मेदारी भी ली है। जोन के सभी जिलों की पुलिस को निर्देश दिए गए हैं कि स्थानीय लोगों से बातचीत कर कानून-व्यवस्था को कायम रखा जाए। सभी जिले के कप्तान गाजीपुर बॉर्डर पर बैठे किसानों के बारे में अपडेट भी ले रहे हैं।

जिलों से मांगी जा रही जानकारी
पुलिस का दावा है कि मेरठ, मुजफ्फरनगर, बिजनौर, सहारनपुर, बागपत और शामली से किसान आंदोलन में शामिल होने वाले किसानों की वीडियोग्राफी कराई गई थी। अब किस जनपद से कितने किसान दिल्ली पहुंचे हैं, इसकी जानकारी मांगी जा रही है।

खुफिया विभाग ने नहीं दिया था इनपुट
दिल्ली में हुए बवाल का अंदेशा पहले से था। हालांकि खुफिया विभाग ने इसका कोई इनपुट नहीं दिया था। हिंसा के बाद अब खुफिया विभाग भी सतर्क हो गया है। पुलिस के साथ-साथ खुफिया विभाग भी रोजाना जिले के गांव तक भी नजर लगाए हुए हैं। बताया जाता है कि आंदोलन से निपटने के बाद इसके लिए जिम्मेदार अधिकारियों और कर्मचारियों पर इस लापरवाही की गाज गिर सकती है।

वापस आ रहे ट्रैक्टर नहीं रोके गए
गणतंत्र दिवस पर दिल्ली में ट्रैक्टर रैली में शामिल होने के बाद पश्चिमी यूपी के किसान नेताओं और किसानों की वापसी बुधवार को भी जारी रही। बड़ी संख्या में किसान मंगलवार देर रात तक ही लौट आए थे।

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ट्रैक्टर पर जाते किसान ट्रैक्टर पर जाते किसान

यूपी: कोहरे का कहर, दो बसों में भीषण भिड़ंत, मची चीख-पुकार, दो दर्जन से ज्यादा लोग घायल

मेरठ के सरूरपुर में मेरठ-बड़ौत रोड पर खिवाई पुलिस चौकी के पास घने कोहरे के कारण गुरुवार सुबह दो रोडवेज बसों की आमने-सामने की भीषण भिड़ंत हो गई। इस दौरान दोनों बसों में चीख-पुकार मच गई। हादसे में दोनों बसों के लगभग दो दर्जन से अधिक यात्री जख्मी घायल हो गए हैं। इनमें कई यात्रियों की हालत गंभीर बताई जा रही है। इसके अलावा दोनों बस क्षतिग्रस्त हो गई है। 

बताया गया कि मेरठ-बड़ौत रोड पर खिवाई पुलिस चौकी के पास आज सुबह करीब 10 बजे रोडवेज की अनुबंधित बसों में भिड़ंत हो गई। भिड़ंत इतनी भीषण थी कि दोनों बसों के आगे से परखच्चे उड़ गए और सीटें उखड़ कर एक दूसरे के ऊपर जा गिरी। दोनों बसों के अंदर खून फैला हुआ था। इससे ही अंदाजा लगाया जा सकता है कि हादसा कितना भयानक था। यह सड़क हादसा घने कोहरे के कारण दिखाई न देने के चलते हुआ है। 

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घटना की जानकारी लगने पर पुलिस पहुंची। पुलिस ने घायलों को अस्पताल में भर्ती कराया है। पुलिस के अनुसार एक रोडवेज बस के चालक कपिल निवासी भदौड़ा सहित कई लोगों की हालत नाजुक बताई गई है। घायलों को अस्पताल में भर्ती कराया गया है। वहीं हादसे के बाद काफी देर तक जाम भी लगा रहा। इसके बाद पुलिस ने जाम खुलवाकर वाहनों का आवागमन कराया।

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मेरठ: युवक पर लाठी-डंडों से हमला, फायरिंग और जमकर पथराव, दो लोग घायल

मेरठ में खरखौदा थाना क्षेत्र के गांव गाजीपुर में बुधवार रात को दो पक्षों के बीच संघर्ष हो गया। इसमें एक पक्ष के दो लोग घायल हो गए हैं। घायलों को उपचार के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया है।

बताया गया कि सलमान फारुख पुत्र मोहम्मद फारुख के अनुसार बुधवार देर रात वह अपने घर आए मेहमानों को छोड़ने आया था। तभी गांव का ही एक युवक नशे की हालत में पहुंचा और गाली-गलौज करने लगा। सलमान ने उसका विरोध किया तो उनके बीच कहासुनी हो गई। 

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इसके बाद आरोपी अपने कई साथियों के साथ पहुंचा और सलमान पर अंधाधुंध फायरिंग कर दी। इस दौरान आरोपियों ने लाठी-डंडों से भी हमला किया। जिसमें सलमान व उसका भाई खाली दोनों लोग घायल हो गए। आरोप है कि बाद में आरोपी पक्ष ने जमकर पथराव भी किया।

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मेरठ: आज 49 बूथों पर 6125 का होगा टीकाकरण, सुभारती समेत 33 स्थानों पर लगेंगे बूथ

यूपी बड़ौत में चल रहे धरने पर आधी रात पहुंची पुलिस, बल प्रयोग कर किसानों को दौड़ाया

टीकाकरण
उत्तर प्रदेश के बड़ौत में कृषि कानूनों के विरोध में चल रहे धरने को समाप्त कराने के लिए पुलिस-प्रशासन के अधिकारियों ने किसान प्रतिनिधिमंडल से करीब ढाई घंटे तक बातचीत की। बातचीत बेनतीजा रही। वहीं बुधवार देर रात पहुंची पुलिस ने हल्का बल प्रयोग करते हुए धरने पर बैठे किसानों को दौड़ा दिया। इस दौरान कुछ किसान अपनी साइकिल उठाकर वहां से निकल गए तो कुछ किसान अपनी रजाई समेटते हुए पैदल ही भागते दिखाई दिए।

किसानों ने आरोप लगाया कि पुलिस-प्रशासन लाल किले के प्रकरण का हवाला लेकर उन्हें दबाने और डराने की कोशिश कर रहा है। इसके विरोध में 31 जनवरी को महापंचायत बुलाई जाएगी। किसानों को बदनाम करने की कोशिश सफल नहीं होने देंगे। 

बुधवार को तहसील बड़ौत के एसडीएम कक्ष मेें एडीएम अमित कुमार, एएसपी मनीष कुमार मिश्र, एसडीएम दुर्गेश मिश्र, सीओ आलोक सिंह ने किसानों के प्रतिनिधि थांबेदार ब्रजपाल सिंह, चौबासी खाप चौधरी सुभाष सिंह, आचार्य बलजोर सिंह आर्य, विक्रम आर्य और विश्वास चौधरी से बातचीत की।

पुलिस-प्रशासन का कहना था कि धरना समाप्त कर दें। किसानों का आरोप है कि पुलिस-प्रशासन ने यह भी दबाव बनाया कि दिल्ली में यहां के किसानों ने भी हंगामा किया है, जिन्हें चिह्नित किया जा रहा है।
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भाजपा प्रदेश अध्यक्ष स्वतंत्र देव बोले- दिल्ली में हिंसा के पीछे कम्युनिस्ट पार्टी का हाथ

भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष स्वतंत्र देव सिंह ने कहा कि दिल्ली में किसानों द्वारा की गई हिंसा के पीछे कम्युनिस्ट पार्टी का हाथ है। आंदोलन में किसी भी प्रकार की हिंसा नहीं होनी चाहिए। 

मुजफ्फरनगर में रामपुर तिराहे पर कार्यक्रम में भाग लेने आए भाजपा प्रदेश अध्यक्ष स्वतंत्र देव सिंह ने पत्रकारों से वार्ता में कहा कि सभी विपक्षी दल भाजपा सरकारों को बदनाम करने के लिए विभिन्न प्रकार की साजिश रच रहे हैं। किसान आंदोलन भी इसी साजिश का एक हिस्सा है।

उन्होंने आगे कहा कि कम्युनिस्ट पार्टी पूरे देश में लगभग समाप्त हो चुकी है। बंगाल में वह खत्म होने के कगार पर है। कम्युनिस्ट पार्टी किसी न किसी तरह से देश में हिंसा चाहती है। माओवाद और नक्सलवाद को बढ़ावा देने में भी इसी का हाथ है। अब दिल्ली में किसानों को भड़काने का काम कर रहे हैं। विपक्षी दलों के पास कोई मुद्दा नहीं है। केंद्र सरकार को किस तरह बदनाम करे इसके लिए षड्यंत्र रच रहे हैं। किसी भी आंदोलन में हिंसा गलत है।

केंद्र सरकार किसानों की बात लगातार सुन रही है, केंद्रीय कृषि मंत्री लगातार बात कर रहे हैं। इसके बाद भी तोड़फोड़ और हिंसा किया जाना गलत है। उन्होंने कहा कि जो लोग हिंसा में शामिल हैं, निश्चित रूप से उन पर कार्रवाई होगी।






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सहारनपुर जिला कारागार में बंदी की मौत, मचा हड़कंप, पुलिस अधिकारियों ने कही ये बात

उत्तर प्रदेश में जिला कारागार सहारनपुर में बुधवार सुबह एक बंदी की संदिग्ध परिस्थिति में मौत हो गई। इससे पुलिस अधिकारियों में हड़कंप मच गया। वहीं जेल प्रशासन का कहना है कि हार्टअटैक आने पर बंदी की मौत हुई है।

बंदी आशीष उर्फ आशु सहारनपुर शहर के मंडी कोतवाली क्षेत्र स्थित शिवेंद्र विहार कॉलोनी का रहने वाला था। उसके खिलाफ हत्या और मारपीट के आरोप में रिपोर्ट दर्ज हुई थी। फरवरी 2019 से वह जिला कारागार में बंद था। 

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पुलिस के अनुसार बुधवार सुबह जेल कर्मियों को वह बेहोशी की हालत में पड़ा मिला। इसके बाद उसको जिला चिकित्सालय पहुंचाया गया, वहां चिकित्सक ने उसको मृत घोषित कर दिया।

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भाकियू के दामन पर हिंसा के दाग, ट्रैक्टर रैली को लेकर धरे रह गए राकेश टिकैत के  दावे

किसान हितों के मुद्दों पर ताकत बनकर उभरी भाकियू के दामन पर हिंसा के छींटे पहले भी पड़ते रहे हैं। दौर चाहे चौधरी महेंद्र सिंह टिकैत का रहा हो या फिर दिल्ली में गणतंत्र दिवस पर ट्रैक्टर रैली के दौरान हुई अराजकता का। आंदोलनों में बवाल का भाकियू का लंबा इतिहास रहा है।

दिल्ली में प्रदर्शनकारी किसानों के ‘तांडव’ से एक बार फिर भारतीय किसान यूनियन के आंदोलन की रणनीति सवालों के कठघरे में खड़ी हो गई है। भाकियू के राष्ट्रीय प्रवक्ता राकेश टिकैत के ट्रैक्टर रैली निकालने से पहले किए गए दावे हिंसा में धराशायी हो गए। भाकियू के आंदोलनों में हिंसा कोई नई बात नहीं है। कई बार शांतिपूर्ण ढंग से संचालित धरने और प्रदर्शन में एकाएक ऐसे घटनाक्रम उपजे हैं, जिनमें किसानों की उग्र भीड़ को काबू करना विफल साबित हो चुका है।

करीब साढ़े तीन दशक पहले भाकियू संस्थापक चौधरी महेंद्र सिंह टिकैत की अगुवाई में किसानों का पहला आंदोलन शामली जिले के करमूखेड़ी बिजलीघर पर हुआ था। विद्युत दरों के खिलाफ एक मार्च, 1987 को शांतिपूर्ण घेराव के लिए हजारों किसान पहुंच गए।
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आंदोलन तोड़ने की साजिश, डरकर मोर्चा नहीं छोड़ेंगे किसान : नरेश टिकैत 

उत्तर प्रदेश के बागपत में भाकियू अध्यक्ष चौधरी नरेश टिकैत ने कहा कि किसानों का शांतिपूर्ण आंदोलन तोड़ने के लिए साजिश रची गई है। लालकिला जैसी एतिहासिक जगह पर इतनी कड़ी सुरक्षा के बीच किसानों के नाम पर सिर्फ कुछ लोग कैसे पहुंच गए। सीधे-सादे किसान तो दिल्ली का रास्ता भी नहीं जानते, उन्हें गुमराह करके और रास्ता भटकाकर ले जाया गया।

दिल्ली में हिंसक झड़पों के बाद सिसौली लौटते हुए भाकियू अध्यक्ष चौधरी नरेश टिकैत ने राष्ट्रवंदना चौक पर पत्रकारों से बातचीत में कहा कि दिल्ली पुलिस और केंद्र सरकार पूरी तरह फेल हो गई है। किसान इन साजिशों से घबराने वाले नहीं हैं, आंदोलन जारी रहेगा।

आंदोलन में किसान की मौत हुई है, सरकार का कोई नुकसान नहीं हुआ है। किसानों के ट्रैक्टर तोड़ दिए गए। मृतक किसान के परिवार को एक करोड़ का मुआवजा मिलना चाहिए। किसानों की संपत्ति का जो नुकसान हुआ है, केंद्र सरकार को उसकी भरपाई करनी चाहिए। किसान आंदोलन के खिलाफ पूरी साजिश रची गई है। दिल्ली पुलिस कमजोर क्यों है। किसान मोर्चा छोड़ने वाले नहीं हैं। इस दौरान रविंद्र मुखिया, इंद्रपाल सिंह, वीरेंद्र लाटियान आदि मौजूद रहे।

उपद्रव करने वाले भाकियू से नहीं, चिन्हित कर पुलिस को सौपेंगे 
बुधवार को नागल कस्बे के रेलवे रोड पर भाकियू कार्यकर्ताओं की बैठक हुई। इसमें प्रदेश उपाध्यक्ष चौधरी विनय कुमार ने कहा विगत 62 दिन से कृषि कानून वापस लेने के लिए किसान दिल्ली बॉर्डर पर शांतिपूर्वक आंदोलन कर रहे थे, लेकिन सरकार ने तारीख के अलावा किसानों को कुछ नहीं दिया, बल्कि किसानों का मजाक उड़ आती रही। दिल्ली में हुई घटना का दोषी किसानों को बता रही है और उनके विरुद्ध रिपोर्ट दर्ज कर झूठे फंसाने काम कर रही है, जबकि सरकार को निष्पक्ष जांच कराकर मामले में कदम उठाना चाहिए।

जिलाध्यक्ष चौधरी चरण सिंह ने कहा जिन लोगों ने ट्रैक्टर परेड में उपद्रव मचाया है, वह किसान यूनियन टिकैत के नहीं हो सकते और यूनियन अपने स्तर पर ऐसे लोगों को चिन्हित कर सरकार के हवाले करेगी। यदि सरकार कृषि कानून वापस नहीं लेती तो आने वाले समय में सांसद एवं विधायकों का घेराव होगा।
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दिल्ली हिंसा में घायल पुलिसकर्मी किसानों के बेटे: संजीव बालियान

उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर में केंद्रीय पशुधन राज्यमंत्री डॉक्टर संजीव बालियान ने कहा कि दिल्ली हिंसा में घायल पुलिसकर्मी किसानों के बेटे हैं। सरकार मांगें मान चुकी है, किसान नेता अपनी रोटियां सेकने में लगे है, ये आंदोलन खत्म नहीं करना चाहते। सरकार किसी दोषी को बख्शेगी नहीं, सब पर कार्रवाई होगी। 

रामपुर तिराहे पर कार्यक्रम में शामिल होने आए डॉक्टर संजीव बालियान ने पत्रकारों से कहा कि केंद्र सरकार ने कृषि बिल को लेकर आंदोलनरत किसानों की अधिकतम मांगे मान ली है। कानून फिलहाल लागू भी नहीं हो रहा है। कुछ किसान नेता किसानों को भ्रमित कर रहे हैं।

26 जनवरी को लालकिले पर जो हुआ यह देश को अपमानित करने वाला है। दिल्ली में जिन उपद्रवियों ने पुलिस कर्मियों हमला किया वह सब किसानों के ही तो बेटे है। अधिकतम हरियाणा और पश्चिमी यूपी के ही हैं। भाजपा सरकार में पुलिस किसी किसान पर डंडा नहीं उठाती।

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बावजूद इसके इस तरह का तांडव दुर्भाग्यपूर्ण है। जो किसान नेता भीड़ के बेकाबू होने की बात करते हैं, जब वह भीड़ संभाल नहीं सकते तो बुलाते क्यों हैं। उन्होंने कहा कि इस आंदोलन के पीछे पश्चिम के एक राजनीतिक दल का भी हाथ है।

इस दल ने अपने नेताओं से कहा था कि जो आंदोलन में शामिल होने के फोटो डालेगा टिकट उसी को मिलेगा। सभी लोग जानते हैं कि लालकिले और आईटीओ पर कौन लोग शामिल थे। उन्होंने कहा कि मैं उन सभी किसानों से अपील करता हूं जो दिल्ली बॉर्डर पर हैं अपने घर लौट जाएं।

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