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ढाई साल बाद शनि बदलेंगे अपनी राशि , कुदृष्टि से बचने के लिए शनि शिंगणापुर मंदिर में कराएं तेल अभिषेक : 14-दिसंबर-2019
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अनोखा विरोध: कलक्ट्रेट के बाहर 25 रुपये प्रति किलो बेचा प्याज, खरीदारों की उमड़ी भीड़

वरिष्ठ कांग्रेसजन संघर्ष समिति के लोगों ने कलक्ट्रेट के गेट पर महंगाई के विरोध प्याज की सेल लगाई।

10 दिसंबर 2019

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मेरठ

मंगलवार, 10 दिसंबर 2019

धर्म परिवर्तन कर युवती ने प्रेमी से की शादी, पंचायत में मिली हत्या की धमकी, अब इस बात का डर 

यूपी: घोषित गन्ना मूल्य से नाराज किसानों ने जलाई गन्ने की होली, बागपत में फूंका यूपी सरकार का पुतला

पेराई सत्र 2019-20 में गन्ने का दाम बढ़ने की उम्मीद लगाए बैठे किसानों को दूसरे साल भी मायूसी हाथ लगी है। प्रदेश सरकार ने गन्ने के राज्य समर्थित मूल्य में दूसरे साल भी कोई बढ़ोतरी नहीं करते हुए इसे यथावत रखा है। 

गन्ने का दाम नहीं बढ़ने पर किसान संगठनों के अलावा विपक्षी दलों में उबाल आ गया है। किसान संगठनों और विपक्षी दलों ने आंदोलन का एलान कर दिया है। वहीं बागपत में दिल्ली सहारनपुर हाईवे पर इसे लेकर किसानों का गुस्सा फूटा। यहां मलकपुर शुगर मिल पर लगभग बड़ौत के बड़ौली गॉव में राष्ट्रीय राजमार्ग 709-बी पर किसानों ने यूपी सरकार का पुतला फूंका। 

घोषित गन्ना मूल्य से नाराज किसानों ने हाईवे पर जमकर नारेबाजी करते हुए जाम लगाया। किसानों ने यूपी सरकार का पुतले को भगवा रंग पहनाकर फूंका। इस दौरान सैकड़ों किसानों ने उत्तरप्रदेश सरकार मुर्दाबाद के नारे लगाए। बता दें कि 315 रुपये प्रति कुंतल घोषित मूल्य से किसान नाराज हैं। 
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दुष्कर्म व हत्या के मामले में दो गिरफ्तार, दरिंदगी के बाद बेरहमी से किशोरी को उतारा था मौत के घाट

ऑनर किलिंग: इकलौते बेटे को खोने वाली मां ने उसकी प्रेमिका को दी नई जिंदगी, दिल छू लेगी ये प्रेमकहानी

वारदात के बाद इस हालत में मिली थी कार वारदात के बाद इस हालत में मिली थी कार

अग्निकांड: चंद सेकेंड दूर थी मौत, दम घुटने से पहले मुशर्रफ ने जिगरी दोस्त को सौंपी थी ये जिम्मेदारी

दिल्ली के अनाज मंडी इलाके में रविवार सुबह लगी भीषण आग ने 43 जिंदगियों को एक ही झटके में खत्म कर डाला। आसपास के राज्यों से आकर मजदूरी करने वाले लोगों की मौत के बाद परिवारों में चूल्हे तक नहीं जले। क्योंकि उनके अपने तो इस भीषण आग में राख हो गए। जो निकल सका वो बच गया अन्यथा जो जहां था, वहीं निढाल होकर अकाल मौत के मुंह में समा गया। 

हर तरफ आग की लपटें, धुआं और अंधेरा था। कोई करता भी तो क्या, सांस लेना तक मुश्किल था। कई ऐसे भी थे कि उन्हें अपनी मौत सामने दिख रही थी। इन्हीं में बिजनौर निवासी मुशर्रफ भी था। आग की लपटों में घिरे मुशर्रफ ने अंतिम घड़ी में अपने जिगरी दोस्त को फोन कर चंद सेकेंड्स में आने वाली मौत और इस खौफनाक हादसे की जानकारी दी। जिसके बाद वह फूट-फूटकर रो पड़ा। आगे जानें कैसे दो लाचार दोस्त सब कुछ जानते हुए भी कुछ कर पाने में असमर्थ थे : -
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मेरठ: सुबह स्कूल जा रही दो बहनों को बेकाबू ट्रक ने रौंदा, दर्दनाक हादसा देख निकली लोगों की चीखें

एसपी ट्रैफिक संजीव वाजपेई बाएं व गिरफ्तार मुन्नाभाई लाल घेरे में

रणजी का रण: भामाशाह मैदान पर यूपी व रेलवे टीम का रोमांचक मुकाबला, इन खिलाड़ियों पर दारोमदार

छह साल बाद मेरठ में यूूपी और रेलवे के बीच 2019-20 सीजन का रणजी ट्राफी मैच आज से शुरू हो गया है। सोमवार को मेरठ समेत अलग-अलग राज्यों में 18 मुकाबले खेले जाने हैं। यूपी और रेलवे का मैच भामाशाह मैदान की सेंट्रल पिच पर खेला जा रहा है।

यहां रेलेवे ने पहले बैटिंग करने का फैसला कर आठ ओवर में 12 रन पर 2 विकेट गंवाएं। जबकि पंद्रह ओवर के खेल तक रेलवे ने 2 विकेट पर 35 रन बनाए। रेलवे टीम की ओर से बल्लेबाज अरिंदम घोष और नितिन भिल्ले क्रीज पर डटे हुए हैं। विशेषज्ञों की माने तो पिच पर हल्की घास बल्लेबाजों को परेशान कर सकती। पहले गेंदबाजी मुफीद हो सकती है।

2013 से लेकर 2017 तक रणजी ट्रॉफी में दोनों टीमें ने पांच मुकाबले खेले। इसमें दोनों बराबरी पर रहीं। दो मैच यूपी ने तो दो मैच रेलवे ने जीते। एक मैच ड्रा रहा, हालांकि पहली पारी में लीड के आधार पर यूपी ने ज्यादा अंक हासिल किये थे। 2018 सीजन में दोनों टीमों के बीच मुकाबला नहीं खेला गया। भामाशाह पार्क में खेल शुरू होने से पहले पिच पर करीब 5 एमएम घास है, जो कि पहले दिन पेसरों को खूब मदद देगी। कोच अतहर अली ने बताया कि भामाशाह पार्क की पिच बल्लेबाजों के लिये बेहतरीन है।

फिलहाल पिच पर घास है तो पहले बल्लेबाजी करने वाली टीमों को सोचना होगा। 90 ओवर फेंके जाने के बाद उसका मिजाज बदल जाएगा। इसके बाद बल्लेबाजों को आसानी होगी। ऐसे में यूपी के कप्तान ने अंकित राजपूत टॉस जीतकर पहले गेंदबाजी करने का फैसला किया। जिससे तेज गेंदबाज अंकित राजपूत, मोहसिन खान, शिवम मावी, यश दयाल लाभ उठा सकें। वहीं ऑफिशियल के तौर पर रेफरी प्रशांत कुमार मोहपात्रा, विनीत कुलकर्णी, एस रवि, ऑनलाइन स्कोरर एपी सिंह, मैनुअल स्कोरर शैलेंद्र कुमार, वीडियो एनालिस्ट एससी अवस्थी हैं।
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भाकियू कार्यकर्ताओं ने बिजनौर प्रदूषण कार्यालय में भरी पराली, अफसर की मेज भी नहीं छोड़ी, दिया धरना

पत्ती जलाने के नाम पर किसानों के शोषण का आरोप लगाते हुए भाकियू ने प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के कार्यालय में गन्ने की पत्ती भर दी। किसान छोईया नदी का पानी भी साथ लेकर आए थे। उन्होंने एलान किया कि प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के कार्यालय को पत्ती का गोदाम बना दिया गया है। किसान अपने खेत से पत्ती लाकर यहां भर दें। किसानों ने फैक्टरियों आदि के प्रदूषण से जिले के मुक्त होने के बाद ही आंदोलन खत्म करने की चेतावनी दी।

सोमवार को किसान ट्रैक्टर ट्राली से प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड कार्यालय पहुंचे और सभी कमरों में पत्ती भर दी। क्षेत्रीय अधिकारी जेपी मौर्य की मेज पर भी पत्ती रख दी। वे उस समय कार्यालय में नहीं थे। इसके बाद किसान कार्यालय में धरना देकर बैठ गए। कुछ देर बाद छोईया नदी का पानी भी बोतल में भरकर ले आए।
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कैंट बोर्ड ने आंख मूंदकर बनाया शुल्क वसूली का प्लान, चौतरफा विरोध के उठ रहे स्वर, जनता जाम से परेशान

कैंट बोर्ड द्वारा आधी अधूरी तैयारियों के बीच शहर के 11 स्थानों पर प्रवेश शुल्क वसूली से रविवार को भी भीषण जाम से हालात बिगड़े रहे। शहर के लोगों ने यह फरमान लागू करने वालों को कोसते हुए तीखी प्रतिक्रिया दी।

सवाल किए कि क्या हाईवे पर कहीं भी ऐसे ही बैरियर लगा दिए जाते हैं? तेजी से आ रही गाड़ी को अचानक रोक लिया जाता है? इससे तो न सिर्फ बड़ा हादसा हो सकता है बल्कि यह जाम का सबब भी बन रहा है। लेकिन कैंट में वाहन प्रवेश शुल्क वसूलने के लिए सारा प्लान मानों आंखें मूंदकर ही बना लिया गया। यही वजह है कि रुड़की और मवाना रोड के हाईवे होने के बावजूद यहां पर इस तरह की लापरवाही की जा रही हैं।

कैंट बोर्ड जहां अपना राजस्व वसूलने में लगा है वहीं, शहर हलकान है। रविवार को भी वसूली प्वाइंटों से गुजरने वाले लोगों को जाम में फंसना पड़ा। कोई बाइक सवार अचानक आगे चल रहे वाहन के रुकने पर फिसलकर गिर गया तो कोई कार चालक बस के अचानक से ब्रेक लगाने पर टकराते बचा। जो जाम में फंसा वो अफसरों को कोसते हुए बस यही बोलता रहा कि पहले से ही शहर में जाम की कोई कमी थी क्या? 
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मुज़फ्फरनगरः वैवाहिक कार्यक्रम में हर्ष फायरिंग, महिला की मौत

कस्बा सिसौली में रविवार शाम शादी समारोह के दौरान चल रही जयमाला रस्म के दौरान युवक द्वारा तमंचे से चलाई गई गोली स्टेज के पास मौजूद महिला के सिर में जा धंसी। घायल महिला को शामली हॉस्पिटल ले जाया गया, जहां चिकित्सकों ने महिला को मृत घोषित कर दिया गया। पुलिस ने शव को मोर्चरी भेज दिया है। पीड़ित परिजनों ने अभी तक इस मामले की रिपोर्ट दर्ज नहीं कराई है। 

भौराकलां क्षेत्र के कस्बा सिसौली निवासी बीरम चौधरी की बेटी की रविवार को शादी थी। तितावी क्षेत्र के गांव साल्हाखेड़ी से बरात सिसौली गई थी। सभी वैवाहिक रस्मों के संपन्न होने के बाद शाम के समय जयमाला कार्यक्रम चल रहा था। इसी दौरान जयमाला होते ही कस्बे के ही एक युवक ने स्टेज के पास पहुंचकर तमंचे से फायरिंग कर दी।

तमंचे से चलाई गई उक्त गोली स्टेज के पास मौजूद महिला पूनम (30) पत्नी सतीश कश्यप, निवासी सिसौली के सिर में जा धंसीं। सिर में गोली लगते ही महिला लहूलुहान होकर वहीं गिर पड़ी, जिससे शादी समारोह में अफरातफरी का आलम हो गया। आनन-फानन में घायल महिला को वाहन से शामली हॉस्पिटल ले जाया गया, लेकिन रास्ते में ही उसकी मौत हो गई। शामली के हॉस्पिटल में डॉक्टरों द्वारा महिला को मृत घोषित कर दिया गया।

इसके बाद शव को सिसौली ले आया गया। घटना की सूचना पर थाना भौराकलां एसओ विरेंद्र कसाना मौके पर पहुंचे और शव को कब्जे में ले लिया। शुरूआत में कुछ लोगों ने दोनों पक्षों के बीच समझौता कराने का भी प्रयास किया, लेकिन पुलिस के पहुंचने पर यह परवान नहीं चढ़ा। पुलिस शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है।

इन्होंने कहा ...
एसओ विरेंद्र कसाना का कहना है कि शादी समारोह के दौरान कस्बे के ही युवक द्वारा चलाई गई गोली से महिला की मौत हुई है। शव को कब्जे में लेकर मोर्चरी भेजा जा रहा है। आरोपी की तलाश की जा रही है। उन्होंने कहा कि पीड़ित परिवार की तरफ से तहरीर मिलने पर आरोपी के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कर सख्त कार्रवाई की जाएगी।
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कभी रेवड़ी तरह बंटती थी पीएचडी की डिग्री, गुणवत्ता बढ़ी तो घटने लगी संख्या

एक समय था जब कॉलेजों में पीएचडी की डिग्री रेवड़ी की तरह बंटती थी। पोस्ट ग्रेजुएशन में 50 फीसदी नंबर पाओ और करा लो पीएचडी में रजिस्ट्रेशन। लेकिन यूजीसी के सख्त नियमों के बाद अब पीएचडी करने वालों की संख्या घटती जा रही है। पहले जहां एक साल में पांच सौ से नौ सौ तक डिग्री अवार्ड होती थीं। वहीं अब इनकी संख्या हर साल सौ के करीब रह गई है। शोध में सख्ती से पढ़ाई की गुणवत्ता में भी सुधार आया है।

सीसीएसयू से संबद्ध एडेड और राजकीय कॉलेजों की संख्या 68 है। मेरठ और सहारनपुर मंडल के इन कॉलेजों में शिक्षकों की संख्या 1000 हजार के करीब है। सन 1985 तक पीएचडी की डिग्री लेना बेहद मुश्किल था। उस समय बहुत कम छात्र-छात्राएं पीएचडी कर पाते थे। डिग्री कॉलेजों में शिक्षक भी इस वक्त तक 20 फीसदी ही पीएचडी होते थे।

1990 के आसपास शिक्षकों को रीडर पद नाम के लिए पीएचडी अनिवार्य हुई। इसके बाद से पीएचडी की संख्या बढ़ने लगी। सबसे ज्यादा पीएचडी 1992 से वर्ष 2007 तक हुई। साल 2009 में यूजीसी ने नियमों में सख्ती की तो इसके बाद से स्थिति बदलने लगी। पिछले चार सालों की बात करें तो पीएचडी की डिग्री करने वालों की संख्या घटी है। इसका कारण यूजीसी के सख्त नियमों का होना है। शोध में चोरी पकड़ा जाना भी है। अब कट पेस्ट शोध नहीं चल सकता है। ऐसे में इससे शोध में गुणवत्ता भी बढ़ रही है।
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