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धान क्रय केंद्र तय होने के साथ ही बन गया था खेल का खाका

Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Wed, 27 Nov 2019 11:49 PM IST
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पूरनपुर। धान खरीद की घपलेबाजी में माफिया का पूरा सिस्टम रहता है। ऐसा नहीं इसमें सिर्फ राइस मिलर ही शामिल रहे। सभी मिलकर धान खरीद शुरू होने से पहले ही घपलेबाजी का खाका तैयार कर लिया था। बाकायदा सुविधा शुल्क का प्रति क्विंटल निर्धारण होता है। क्रय केंद्रों के ठेकों से लेकर खरीद, चावल उतार में डाला वसूली सुविधा शुल्क की रकम निर्धारित रहती है। खाद्यान्न से जुड़े लोगों की बात मानी जाए तो इस बार धान खरीद पर तीस रुपये प्रति क्विंटल और चावल उतार में डाला वसूली को बीस हजार रुपये लाट (270 क्विंटल चावल) सुविधा शुल्क निर्धारित हुआ। इसमेें सिस्टम की भी पूरी मिलीभगत रही।
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खेत में फसल तैयार होने पर किसान खुश होता है, लेकिन बाजार में फसल पहुंचने पर इसका असली फायदा माफिया उठाते हैं। धान का सीजन तो खाद्यान्न माफिया के लिए सहालग साबित होती है। ऐसा नहीं सरकारी तंत्र के न चाहने पर गड़बड़ी होती हो। इसमें पूरा सिस्टम शामिल रहता है। खरीद केंद्र के ठेकों से मारामारी शुरू होती है। खाद्यान्न व्यापार से जुड़े सूत्रों का कहना है कि पिछले धान के सीजन में हुई खरीद में 24 रुपये प्रति क्विंटल और डाला वसूली साढ़े अट्ठारह हजार लेना निर्धारित हुआ था। इस बार तीस रुपये प्रति क्विंटल सुविधा शुल्क तय किया गया है।

कहने को तो केंद्र प्रभारी खरीदे गए धान को लेकर पूरा जिम्मेदार होता है, लेकिन अधिकांश खरीद केंद्रों पर ठेकेदार हावी रहते हैं। कम रेट पर धान का सौदा कर किसान से धान खरीद के पंजीकरण संबंधी अभिलेख किसान से ले लिए जाते हैं। इसके अलावा क्रय केंद्रों से राइस मिलों को संबंद्ध किया जाता है। उक्त राइस मिलर के खरीदे के धान को खरीद केंद्र पर हुई खरीद में दर्शाया जाता है। इसमें राइस मिलर धान मानक के अनुरूप करने को सुखाना, सफाई करानी आदि भी पड़ती है।
धान खरीद केंद्रों पर खरीदा गया धान राइस मिलर को चावल निकालने को दिया जाता है। राइस मिल से तैयार चावल का भंडारण गोदामों में होता है। चावल उतार के नाम पर यहां डाला वसूली होती है। पिछले साल डाला वसूली साढ़े अट्ठारह हजार रुपये थी। इस बार बीस हजार रुपये तय की गई है। डाला वसूली को कुछ खाद्यान्न माफिया को लगाया जाता है। जो संबंधित राइस मिलर से रकम लेकर एक पर्ची जारी करते हैं। पर्ची चावल उतार के समय दिखानी पड़ती है।

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