ग्रीष्मकालीन सब्जियां रोकेंगी साठा धान की खेती

Bareily Bureauबरेली ब्यूरो Updated Mon, 02 Mar 2020 12:26 AM IST
विज्ञापन
ख़बर सुनें
पीलीभीत। तराई में भूजल से लेकर खेत की सेहत तक के लिए अभिशाप बने साठा धान की खेती पर जिला प्रशासन पूरी तरह से प्रतिबंध लगा चुका है। कृषि विभाग ने किसानों से साठा धान की जगह तरबूज, खरबूजा, खीरा, ककड़ी समेत अन्य ग्रीष्मकालीन सब्जियों के साथ दलहनी फसलों का उत्पादन करने पर जोर दिया है।
विज्ञापन

सुप्रीम कोर्ट और एनजीटी की ओर पराली जलाने की घटनाओं पर पूर्णतया रोक लगाने के निर्देश हैं। किसानों के नाम ब्लॉकों और तहसीलों में खुला पत्र जारी करते हुए डिप्टी डायरेक्टर कृषि यशराज सिंह ने बताया कि किसान ग्रीष्म कालीन साठा धान की खेती करते हैं। इस वजह से पराली जलाने की घटनाओं में बढ़ोतरी होती है। साठा धान में उर्वरकों, कृषि रक्षा रसायनों, श्रम की अधिकता के साथ हर चौथे-पांचवें दिन सिंचाई के लिए पानी की ज्यादा जरूरी होती है। इससे भू-गर्भ जल का अत्यधिक दोहन होता है। इससे जमीन के अंदर का जल स्तर भी गिर रहा है। पेयजल संकट रोकने के लिए साठा धान की खेती को प्रतिबंधित किया गया है। कोई साठा धान की पैदावार करता मिला तो सख्त कार्रवाई की जाएगी। उनके स्थान किसान ग्रीष्मकालीन सब्जियां उगाएं। उसके लिए कृषि विभाग भी उनकी पूरी मदद करेगा।
सब्जी ओर दलहनी फसलों की करें पैदावार
कृषि उपनिदेशक यशराज सिंह के मुताबिक किसान साठा धान की जगह तरबूज, खरबूजा, खीरा, ककड़ी एवं अन्य ग्रीष्मकालीन सब्जियों के साथ दलहनी फसलें उड़द, हरी खाद, मूंग की खेती कर कम उर्वरक, कम कृषि रक्षा रसायन, कम श्रम, कम सिंचाई तथा कम लगात में करके अधिक मुनाफा कमा सकते हैं। अधिक जानकारी के लिए किसान उनके दफ्तर में भी आकर संपर्क कर सकते हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन

Spotlight

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
Election
  • Downloads

Follow Us