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अमर उजाला फाउंडेशनः जारी है जरूरतमंदों की मदद, बस्ती-बस्ती जाकर पहुंचाया भोजन

250 जरूरतमंदों के घर पहुंचाया भोजन, अमर उजाला फाउंडेशन ने समाजसेवी संस्था सेवा के जरिए पहुंचाई मदद

31 मार्च 2020

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शाहजहाँपुर

मंगलवार, 31 मार्च 2020

पलायनः केजरीवाल की घोषणाएं भूख नहीं मिटा पाईं तो छोड़ आए दिल्ली, छलका मजदूरों का दर्द

हाईवे पर काफिलों की भरमार है। थके-मांदे और पसीने से तरबतर लोग लगातार चलते ही जा रहे हैं। एक-एक कदम बढ़ाना भारी पड़ रहा है लेकिन फिर भी सफर लगातार जारी है। चलते-चलते तमाम पैरों में चप्पलें और जूते फट गए हैं जो इस दर्दनाक यात्रा के गवाह के तौर पर हाईवे पर ही जगह-जगह छोड़ दिए गए हैं। सूजे हुए पैरों के खून से रिसते जख्म बता रहे हैं कि जिंदगी बचाने का यह सफर कितना भारी पड़ रहा है।

शनिवार तड़के ऐसे तमाम काफिलों की सेटेलाइट बस स्टैंड के अलावा बड़ा बाईपास पर विलयधाम ओवरब्रिज और इज्जतनगर के परातासपुर इलाके में सड़कों पर भरमार थी। ज्यादातर लोग दिल्ली से आ रहे हैं जिनके एक तरफ कोरोना की चुनौती थी और दूसरी तरफ भूख की। कभी उन्होंने भूख मिटाने के लिए ही दिल्ली का रुख किया था लेकिन लॉक डाउन होने के बाद जब भूख ही जिंदगी लेने पर आमादा हो गई तो दिल्ली छोड़ दी।

कहते हैं, केजरीवाल ने आधार कार्ड पर राशन के साथ सभी जरूरी सुविधाएं घर पर ही मुहैया कराने की घोषणा तो की लेकिन फिर भी जब कई दिन झुग्गियों में भूखे रहना पड़ा तो निकल आए। दिल्ली से आने वालों के अलावा अच्छी-खासी तादाद नोएडा और रुद्रपुर की फैक्टरियों में काम करने वाले मजदूरों की भी है। रुद्रपुर से बेदखल हुए लोगों का सफर अपेक्षाकृत कम लंबा हैं लेकिन चिंताएं वही हैं कि घर लौटकर शायद कोरोना से तो बच जाएं लेकिन परिवार का पेट कैसे भरेंगे।

रेलवे ट्रैक के किनारे-किनारे दिल्ली से बाराबंकी का पैदल सफर

तीन दिन में बरेली पहुंचा भूखा-प्यासा दस मजदूरों का जत्था, अभी इससे भी ज्यादा सफर बाकी
बाराबंकी के सफदरगंज इलाके के धौरागांव में रहने वाला दस मजदूरों का जत्था दिल्ली से बुधवार को पैदल घर की ओर निकला था। इस जत्थे में शामिल रामबाबू, शिवांश और संदीप ने बताया कि उनमें से कोई दिल्ली में रिक्शा चलाता था तो कोई फैक्टरी में काम करता था। जनता कर्फ्यू के दिन से ही खाने के लाले पड़ गए और हवा फैलने लगी कि लॉक डाउन तीन महीने से पहले खत्म नहीं होगा। इसके बाद घर लौटना बेहतर समझा। काफी कोशिश की लेकिन किसी सवारी का इंतजाम नहीं हुआ। सड़क पर निकलने पर जगह-जगह पुलिस पीट रही थी। लिहाजा बुधवार रात सभी लोग अपने बैग लेकर अलग-अलग निकले और स्टेशन से अलग हटकर एक जगह इकट्ठे होने के बाद रेलवे ट्रैक के किनारे-किनारे सफर शुरू कर दिया। रेलवे ट्रैक पर सफर करने से पुलिस का खतरा नहीं था। जहां मौका मिला वहां सड़क पर आ गए। रामहजारे के पैर से खून निकल रहा था। शिवांश और उसके साथियों के पैर सूज गए थे। रामबाबू की हालत सबसे ज्यादा खराब थी जिनकी आंत का बमुश्किल 15 दिन पहले ही ऑपरेशन हुआ था।

शुक्रवार को चली बसें मगर दिल्ली नोएडा से बरेली लाकर छोड़ दिया

दिल्ली-नोएडा और गाजियाबाद से मजदूरों को लाने के लिए बरेली रीजन की करीब सवा सौ बसें शुक्रवार को चलनी शुरू हुईं तो हजारों लोगों को राहत भी मिली। इसके अलावा दिल्ली की भी तमाम बसें उन्हें यूपी के तमाम शहरों तक छोड़ रही हैं। लेकिन फिर भी हजारों की तादाद ऐसे लोगों की भी हैं जो बसें शुरू होने से पहले ही दिल्ली छोड़कर चल पड़े थे। खचाखच भरी बसों में उन्हें रास्ते में जगह नहीं मिली लिहाजा उन्हें परिवार के साथ पूरा सफर पैदल तय करना पड़ा।

साइकिल पर लादी पत्नी-बेटी के साथ पूरी गृहस्थी फिर रुद्रपुर से बरेली की यात्रा

पीलीभीत के बीसलपुर के गांव अखौली में रहने वाले नीरज रुद्रपुर की कंपनी में काम करते हैं। नीरज ने बताया कि रुद्रपुर में दस दिन पहले ही काम पूरी तरह बंद हो गया था। उनका पूरा परिवार कमरे में ही पूरा वक्त गुजार रहा था। ज्यादा दिक्कत तब शुरू हुई जब बाहर निकलने पर पाबंदी के बीच घर में रखा राशन खत्म हो गया और राशन, सब्जी-दूध जैसी चीजें खरीदने को पैसे भी नहीं बचे। कई बार बस और टेंपो स्टैंड गए ताकि गांव जाने के लिए कोई साधन मिल जाए लेकिन सब सुनसान पड़ा हुआ था। आखिर में साइकिल पर ही घर का जरूरी सामान लेकर लौटने का फैसला किया। पत्नी कुसुमा और दो साल की बेटी आकांक्षा के साथ रात में दो बजे चल दिए। नीरज ने उम्मीद जताई कि शाम तक घर पहुंच जाएंगे। रास्ते में पुलिसवालों ने कई जगह रोका पर परेशानी सुनकर जाने दिया।

पैर उठते नहीं, मां-बहनों का हाल देखकर दिल भी बैठा जा रहा है

शाहजहांपुर के सिंधौली कस्बे में रहने वाले तालिब अपने परिवार के साथ रुद्रपुर में रहते हैं जहां उनके पिता रिक्शा चलाते हैं और वह खुद फैक्टरी में काम करते हैं। तालिब विलयधाम पर अपनी मां, तीन बहनों और परिवार के और लोगों के साथ गाड़ी का इंतजार कर रहे थे। उसने बताया कि शुक्रवार रात तीन बजे वे सभी पैदल ही घर के लिए चल दिए थे। रास्ते में टेंपो, डनलप. तांगा जो भी मिला, उस पर कुछ दूर के लिए बैठ लिए। कुछ नहीं मिला तो पैदल चलते रहे। बरेली आकर उनकी हिम्मत जवाब दे गई है। मां और बहनों की हालत देखकर दिल भी बैठा जा रहा है। बोले, काफी इंतजार के बाद यहां भी कोई गाड़ी नहीं मिल रही है। किसी तरह शाहजहांपुर पहुंच जाएं तो घर जाने की भी कोई जुगाड़ हो ही जाएगी।

 

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दाम तय फिर भी नहीं रुकी सब्जी की कालाबाजारी

शाहजहांपुर। प्रशासन ने भले ही हर सब्जी के अधिकतम दाम तय कर दिए हों, लेकिन जनता को ज्यादा कीमत चुकानी पड़ रही है। प्रशासन की दरों का हवाला देने पर ठेलेवाले भी उस दाम में सब्जी देने से इनकार कर आगे बढ़ जाते हैं। उनका कहना है कि इस दर पर सब्जियां उन्हें भी नहीं मिल रही हैं तो वे कैसे बेचें। प्रशासन भी इसकी कोई मॉनिटरिंग नहीं कर रहा है कि तय दामों पर लोगों को सब्जी उपलब्ध हो पा रही है या नहीं।
कोरोना वायरस का संक्रमण फैलने की आशंका के चलते शनिवार को लॉकडाउन का चौथा दिन था। 25 मार्च को शुरू हुआ लॉकडाउन 14 अप्रैल तक जारी रहेगा। इस बीच लोगों को आवश्यक वस्तुएं उपलब्ध कराने के लिए प्रशासन की ओर से इंतजाम करने के साथ ही उनके दाम भी निर्धारित कर दिए गए हैं। इसके अनुसार आलू 22-25, प्याज 25-28, टमाटर 25-29, आटा 25-28, चावल 26-30, अरहर दाल 85-95, चना दाल 60-65, मूंग दाल 105-110 और मसूर दाल 75-80 रुपये किलो निर्धारित की गई है। इसके बाद भी बाजार और मोहल्लों में सब्जी समेत अन्य आवश्यक वस्तुओं को महंगे दामों पर बेचा जा रहा है। शहर के मोहल्ला इंद्रानगर कॉलोनी में ठेले पर सब्जी बेचने पहुंचे विक्रेता अजय ने बताया कि उन्हें मंडी से ही सब्जी महंगी दी जा रही है। प्रशासन की ओर से निर्धारित रेटों पर सब्जी बेचना संभव नहीं हैं।
आवश्यक वस्तुओं के दाम निर्धारित कर दिए गए हैं, इसके बाद भी कोई अधिक रुपये मांग रहा है, उसकी शिकायत कंट्रोल रूम के नंबर पर की जा सकती है। अभी तक ऐसी कोई भी सूचना कंट्रोल रूम में नहीं आई है। - आशुतोष कुमार दुबे, अपर नगर आयुक्त
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कोरोना के खतरे को कुछ लोग समझे पर कुछ अब भी अनजान

साशाहजहांपुर। कोरोना की भयावहता को नजरअंदाज कर कुछ लोग अभी भी लॉकडाउन का पालन करने के बजाय बेवजह सड़कों पर निकल रहे हैं। ऐसे ही लोगों से पुलिस सख्ती से निपट रही है। शनिवार को कई इलाकों में बेवजह सड़कों पर लोग इसी तरह घूमते दिखे, जिन्हें ट्रैफिक पुलिस और होमगार्ड ने सख्त हिदायत देकर लौटाया। चूंकि पुलिस इस समय अन्य प्रदेशों से आए लोगों की सेवा में लगी है तो चौराहों पर फोर्स कुछ कम हो गया है, जिसका लोग नाजायज फायदा उठा रहे हैं। मगर इसी बीच एक साइकिल सवार को पुलिस ने अच्छा सबक सिखाया, उसे साइकिल कंधे पर रखवाकर घर की ओर रवाना किया।
दिखाओ कागज.. अभी चालान करता हूं
लालइमली चौराहा, जहां कई बार जाम के हालात बन जाते थे लेकिन शनिवार को लॉकडाउन के चलते इक्का-दुक्का लोग निकल रहे थे। हालांकि इन्हें भी मना किया जा रहा था लेकिन हर किसी के पास अपना एक बहाना था। एक बाइक सवार बहानेबाजी पर उतरा तो ट्रैफिक पुलिस कर्मी सख्त हो गया। बोला, दिखाओ बाइक के कागज कहां हैं, अभी चालान करता हूं। हालांकि बाद में उसे हिदायत देकर छोड़ दिया।
कोरोना से लड़ना है तो घर में ही रहना होगा
लाल इमली चौराहे पर ही 15 मिनट बाद फिर कुछ लोग आते दिखे तो इस बार होमगार्ड डंडा लेकर आगे बढ़ गया। पहले ठेली पर सामान लेकर जा रहे बूढ़े को हड़काया। फिर पीछे से आए एक साइकिल सवार की जमकर क्लास लगाई। सीधे हिदायत दी कि दोबारा सड़क पर घूमते मिले तो रिपोर्ट दर्ज हो जाएगी। कोरोना से लड़ना है तो घर में ही बैठना पड़ेगा। इसके बाद वह चुपचाप चला गया।
सर, अस्पताल जा रहे हैं.. मत रोको
खिरनी बाग चौराहे पर भी इक्का-दुक्का लोगों का आवागमन जारी था। यहां से गुजरने वाले ज्यादातर लोग एक ही बात कह रहे थे कि उन्हें अस्पताल जाना है। स्कूटी पर सवार दो लोगों को रोका तो वे अस्पताल जाने की बात कहकर निकल गए। वहीं एक कार सवार लोगों को रोका तो वह भी अस्पताल जाने की बात कहने लगे। उन्होंने पर्चा दिखाया। इसके बाद उन्हें आगे जाने की अनुमति दे दी गई।
कंधे पर साइकिल टांगकर लौटाया
खिरनीबाग चौराहे पर एक युवक साइकिल लेकर बाहर निकला तो यहां ट्रैफिक पुलिस के हत्थे चढ़ गया। पूछा कहां जा रहे तो, जवाब आया कि बस यूं ही घूमने निकल पड़ा। इस पर पुलिस सख्त हो गई और उसे साइकिल से उतारा। कहा अब बेवजह बाहर घूमने की सजा केवल यही है कि अब साइकिल पर तुम नहीं, बल्कि साइकिल को कंधे पर टांगकर जाओगे। कुछ दूर चलने के बाद वह साइकिल पर बैठकर भाग गया।
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जिले के बार्डर सील, बाहर से आए 70 लोग क्वारंटीन

मीरानपुर कटरा। कोरोना से जंग जीतने का सबसे प्रमुख माध्यम आपस में दूरी बनाए रखना है लेकिन लॉकडाउन के बाद हाईवे पर उमड़ी पलायन करने वालों की भीड़ से इस नियम की धज्जियां उड़ गईं। हालात बिगड़ते देख केंद्र सरकार के निर्देश पर सोमवार से सभी प्रदेश और जिलों के बॉर्डर सील कर दिए गए। इससे तमाम लोग दूसरे शहरों में फंस गए हैं। सोमवार को नेशनल हाईवे स्थित शाहजहांपुर के बार्डर पर भी करीब 500 से ज्यादा लोगों भीड़ रोक दी गई। इसके बाद जिला प्रशासन ने जिले में रहने वाले 70 लोगों को अपनी सीमा में लेने के बाद बाकी भीड़ को जिले में घुसने नहीं दिया। जिले की सीमा में लिए गए इन 70 लोगों को एक स्कूल में बनाए क्वारंटीन वार्ड में ठहराया गया है।
शासन की ओर से जिले की सीमा को सील करने का फरमान मिलते ही एएसपी ग्रामीण अपर्णा गौतम और एसडीएम सौरभ गंगवार पुलिस फोर्स के साथ जिले की सीमा हुलासनगरा रेलवे फाटक के पास खड़ी हो गए। इसके बाद बरेली की ओर से आ रहे लोगों से पूछताछ के साथ ही रोकने का सिलसिला शुरू हो गया। पांच सौ से ज्यादा लोगों की भीड़, जिसमें महिलाएं, बच्चे, पुरुष सभी शामिल थे। उनसे एक-एक कर पूछा गया कि कहां जाना है। बस उन्हीं लोगों को अंदर लिया गया, जो जिले के रहने वाले थे। ऐसे 70 लोगों को जिले की सीमा में लेकर उनका चेकअप कराया गया। जब वे गांव जाने की कोशिश करने लगे तो उन्हें नगर के राममुरारी पब्लिक स्कूल में बनाए गए क्वारंटीन वार्ड में पहुंचा दिया गया। कहा गया कि कोरोना वायरस के संक्रमण से उन्हें और उनके अपनों को बचाने के लिए 14 दिन तक आइसोलेशन में रहना होगा। एसडीएम सौरभ गंगवार ने बताया कि इन लोगों को 14 दिन आइसोलेट रखा जाएगा। इनके खाने पीने की संपूर्ण व्यवस्था की गई है। वहीं, हाईवे पर अधिकारियों, सरकारी सेवाओं और आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति में लगी गाड़ियों को छोड़कर बाकी सारे वाहनों कर आवाजाही रोक दी गई।
इन क्षेत्रों के लोग रखे गए क्वारंटीन वार्ड में
जिले की सीमा में प्रवेश करने वाले मीरानपुर कटरा, तिलहर, मदनापुर, कांट, पुवायां, सेहरामऊ दक्षिणी, निगोही क्षेत्र के लोग हैं। यह लोग दिल्ली, हरियाणा, नोएडा से तो आ गए हैं लेकिन इन्हें अभी 14 दिन तक घर नहीं जाने दिया जाएगा।
मुसीबत में फंसी जान
जिले के बॉर्डर पर फतेहगंज पूर्वी की ओर रोके गए लोगों में ज्यादातर कानपुर, लखनऊ, फैजाबाद, बिहार आदि से हैं। इन्हें न तो शाहजहांपुर का जिला प्रशासन सीमा में घुसने दे रहा है और न ही बरेली का प्रशासन फतेहगंज पूर्वी में ठहरने की अनुमति दे रहा है। सुबह से लेकर शाम तक महिलाएं पुरुष परेशान रहे। हालांकि कुछ लोगों ने उनके खाने-पीने की व्यवस्था की, जिससे उन्हें राहत मिली।
हाईवे पर पसरा सन्नाटा, छंट गई भीड़
जिस नेशनल हाईवे पर कल तक प्रवासी मजदूरों की भीड़ नजर आती थी, सोमवार को जिले की सीमा सील होने के साथ ही वह छंट गई। अब हाईवे पर सन्नाटा नजर आ रहा है। बस इक्का-दुक्का लोग जरूरी काम से निकल रहे हैं। इसके अलावा कुछ ऐसे लोग भी हैं, जो बीच में कहीं फंस गए थे।
परौर पीएचसी पर हुआ स्वास्थ्य परीक्षण
परौर। प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में दिल्ली, नोएडा, हरियाणा, गाजियाबाद से आए लोगों का डॉ. हरेंद्र कुमार ने टीम के साथ परीक्षण किया। इन लोगों को आपस में दो मीटर की दूरी बनाकर रखने और 14 दिन तक खुद को घरों में आइसोलेट करने की सलाह दी गई। थाना परौर में तैनात कर्मचारियों का भी परीक्षण किया गया। स्वास्थ्य विभाग की टीम में दिनेश प्रताप, मोहित मिश्रा, नरेंद्र सिंह, फार्मेसिस्ट जगजीवन राम, एएनएम शशि मिश्रा आदि मौजूद रहीं। संवाद
सीमाएं सील, फिर भी गुजरते रहे लोग
अल्हागंज। भले ही जिले की सीमा सील कर दी गई हो लेकिन अल्हागंज-हुल्लापुर के बीच ट्रकों और पैदल यात्रियों का आवागमन सोमवार को भी जारी रहा। पैदल चले लोग जो भी वाहन मिल रहा था, उसमें बैठकर अपने घरों को जा रहे थे। संवाद
लखीमपुर, पीलीभीत और बदायूं से लगी सीमाएं भी सील
खुटार/कलान। एसपी के निर्देश पर खुटार पुलिस ने सीओ और एसडीएम की मौजूदगी में खुटार से लगती लखीमपुर और पीलीभीत की सीमाएं सील कर दीं। केवल किसानों और पैदल जाने वाले लोगों को आने जाने दिया जा रहा है। थाना प्रभारी जयशंकर सिंह ने बताया कि अन्य प्रांतों से आने वाले लोगों का मेडिकल परीक्षण करने के बाद उन्हें जाने दिया जाएगा। वहीं, कलान क्षेत्र में बदायूं और फर्रुखाबाद जिले की सीमाओं को भी सील कर दिया गया है। यहां से सिर्फ जिले के ही लोगों को अंदर जाने दिया जा रहा है। संवाद
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आइसोलेशन में भर्ती दस लोगों का लखनऊ भेजा गया सैंपल

शाहजहांपुर। कोरोना संदिग्ध होने पर क्वारंटीन वार्ड में भर्ती कराए गए दस लोगों का सैंपल जांच के लिए लखनऊ भेजा गया है। वहीं क्वारंटीन वार्ड में भर्ती लोगों की देखरेख डॉक्टरों की टीम कर रही है। उधर, निगोही, तिलहर में भी बाहर से लौटे लोगों का स्वास्थ्य परीक्षण किया गया।
दरअसल नेशनल हाईवे पर प्रवासी मजदूरों की उमड़ी भीड़ के बीच रविवार को जब लोगों का चेकअप किया तो सेहरामऊ दक्षिणी, रोजा के कुछ लोगों का स्वास्थ्य कमजोर पाया गया। उनमें खांसी-जुकाम के लक्षण दिखाई दिए तो उन्हें संभावित कोरोना संक्रमित मानकर स्वास्थ्य विभाग ने अपनी निगरानी में ले लिया और सभी को एंबुलेंस से जिला अस्पताल में बनाए गए क्वारंटीन वार्ड में भर्ती करा दिया गया। जहां उनका विधिवत चेकअप के बाद सोमवार को सैंपल लेकर लखनऊ भेज दिया गया। वहीं मिर्जापुर से भी कुछ लोगों को क्वारंटीन में रखा गया था। उनका भी सैंपल भेजा गया है। कुल दस लोगों का सैंपल जांच के लिए भेजा गया है। इन लोगों की जांच रिपोर्ट मंगलवार को आने की संभावना है। इसके बाद ही स्थिति स्पष्ट हो पाएगी। उधर, निगोही सीएचसी पर 18 सौ लोगों का और मीरानपुर कटरा में तीन सौ लोगों का व तिलहर सीएचसी पर चार दिन में पांच लोगों का स्वास्थ्य परीक्षण किया गया।
5878 बाहर से आए जिले के लोगों को किया क्वारंटीन
- कोरोना आपदा कोर कमेटी ने विद्यालय किए अधिकृत
शाहजहांपुर। जिले मेें अभी तक बाहर से 5878 लोग यहां आ चुके हैं। कोरोना आपदा कोर कमेटी की सोमवार को हुई बैठक में डीएम इंद्र विक्रम सिंह ने इन सभी को क्वारंटीन करने के लिए महानगर समेत गांवों के स्कूल भवन और पंचायत घर अधिकृत किए हैं।
बाहर से आए लोगों में अन्य प्रदेशों से आए लोगों की संख्या 4712 है जबकि प्रदेश के विभिन्न जनपदों से 1112 और विदेश से 54 लोग आए हैं। इनमें 5653 लोग पूर्ण स्वस्थ, 211 मामूली रूप से अस्वस्थ और 14 लोग गंभीर रूप से अस्वस्थ पाए गए, लेकिन कोई भी कोरोना संदिग्ध व्यक्ति नहीं पाया गया। इन सभी को अलग रखने के लिए आदर्श इंटर कालेज कटरा, एलपीजेपी इंटर कालेज लितलहर, चन्दनलाल उमा विद्यालय कपसेड़ा, संसारवती उमा विद्यालय कपसेड़ा, जैपुरिया स्कूल और रॉयन इंटरनेशनल स्कूल अधिकृत किया गया है। अन्य जनपदों के जो लोग जिले में फंसे हैं, उन्हें इन स्कूलों में क्वारंटाइन में रखा जाएगा। बैठक में सीडीओ महेंद्र सिंह तंवर, एसपी डॉ. एस चनप्पा, एएसपी सिटी दिनेश त्रिपाठी आदि अधिकारी मौजूद रहे।
आर्थिक सहायता देने को खुला बैंक खाता
डीएम ने कहा कि कोरोना आपदा में किसी व्यकिक्त अथवा संस्था से नकद सहायता स्वीकार नहीं की जाएगी। इसके लिए धनराशि बैंक आफ बड़ौदा की विकास भवन शाखा (आईएफएससी कोड बीएआरबी जीरो वीआईकेबीएचए) के खाता संख्या 35930100012671 में जमा कराई जा सकती है। इस खाते मेें सतनाम बिक्र फील्ड, डॉ. आशीष मैसी, एनके सिंघल, गोपाल अग्निहोत्री आदि ने 234567 रुपये जमा कराए हैं।
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लॉकडाउन में गरीबों की मदद के लिए आगे आए लोग

पुवायां। कोरोना के कारण किए गए लॉकडाउन को देखते हुए पुवायां कोतवाली के पुलिसकर्मियों ने अपने पास से गरीबों की मदद के लिए भोजन देने के लिए एक लाख रुपये की राशि एकत्र की है। इसके अलावा भी तमाम लोग गरीबों की मदद कर रहे हैं। पुवायां के कोतवाली प्रभारी जसवीर सिंह की ओर से छह दिन से भोजन का वितरण किया जा रहा है।
नगर पालिका अध्यक्ष अध्यक्ष संजय गुप्ता, गुरुद्वारा नानक बाग की ओर से दो-दो दिन भोजन वितरित किया गया। कैंब्रिज कॉन्वेंट स्कूल के सह डॉयरेक्टर विनायक अग्रवाल ने कोरोना के प्रकोप को देखते हुए सेवा परमो धर्म के नाम से व्हाटसएप ग्रुप बनाया है। विनायक अग्रवाल ने अब तक खाद्यान्न के 70 पैकेट वितरित किए हैं। ग्रुप में जुड़े 65 लोगों में नितेश गुप्ता ने 15, रामजी गुप्ता ने 11, गुंजन बाथम ने 11, सचिन ने 11, कपिल गुप्ता ने 21, महाकालेश्वर मंदिर की ओर से 11, मां ज्वाला जी जागरण सेवा समिति की ओर से राशन आदि के 51 पैकेट और प्रशांत ब्रदर्स की ओर से 51 सौ रुपये, पुष्कर गुप्ता की ओर से 10 हजार, दीपू किराना की ओर से 11 हजार रुपये की मदद दी गई है। ग्रुप के सदस्य रोजाना सामग्री का वितरण कर रहे हैं।
पुवायां की ब्लॉक प्रमुख शोभा यादव और उनके पति जिला पंचायत सदस्य राकेश यादव ने गांव आयूं, भूड़ा मैनारी, महुआ पाठक, जड़ौली, बलरामपुर, अनावा, पहाड़पुर, बनियानी, बेला छेदा, कटका आदि गांवों को सेनेटाइज कराया।
खुटार। खुटार में खालासा फेडरेशन के लोग कई दिन से जरूरतमंदों को भोजन, नाश्ता उपलब्ध करा रहे हैं। नगर पंचायत अध्यक्ष अनुपम शुक्ला ने बताया कि मोहल्लों में लगातार दवा का छिड़काव कराया जा रहा है। भाजयुमो के जिला महामंत्री प्रवीण मिश्रा ने 10,500 रुपये प्रधानमंत्री कोष में दान दिए हैं।
बंडा। बंडा की प्रधान साबरी बेगम के पति मोहम्म्द इसहाक ने लोगों को मास्क वितरित किए, वहीं गांव नटिउरा के प्रधान सुरजीत सिंह ने गांव में दवा का छिड़काव कराया।
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टेंडर घोटाला: हरदुआ के ग्राम पंचायत अधिकारी को कारण बताओ नोटिस

शाहजहांपुर। विकास खंड पुवायां की कई ग्राम पंचायतों में निविदा खुलने से पहले कार्य कराने के मामले का खुलासा होने के बाद प्रभारी डीडीओ ने हरदुआ गांव के ग्राम पंचायत अधिकारी को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है।
हरदुआ गांव में 54.53 लाख रुपये की लागत पंचायत भवन, प्राथमिक एवं पूर्व माध्यमिक विद्यालय की चारदीवारी बनाने सहित 15 विकास कार्य कराने के लिए लखनऊ से प्रकाशित एक समाचार पत्र में गत 14 मार्च को निविदा सूचना छपवाई गई थी। विज्ञापन में टेंडर जमा करने की अंतिम तिथि 16 मार्च को दोपहर 12 बजे तक नियत की गई और टेंडर खोलने की तिथि भी 16 मार्च को दोपहर दो बजे नियत की गई। निविदा सूचना के क्रमांक तीन पर साधु बाबा के स्थान से मलखान के मकान तक खड़ंजा मरम्मत की लागत 2.49 लाख रुपये दर्शायी गई, लेकिन टेंडर खुलने से पहले ही खड़ंजा मरम्मत का काम शुरू करा दिया गया। 17 मार्च को अमर उजाला ने यह समाचार प्रमुखता से प्रकाशित किया तो मुख्य विकास अधिकारी महेंद्र सिंह तंवर ने संज्ञान लेते हुए प्रभारी डीडीओ/डीआरडीए के परियोजना निदेशक धर्मेंद्र प्रताप सिंह को जांच के आदेश दिए थे। प्रभारी डीडीओ ने जांच की शुरुआत कर पंचायत सचिव विश्वास शुक्ला को कारण बताओ नोटिस जारी किया है।
विकास खंड पुवायां की ग्राम पंचायत मदारपुर बैवहा, रसूलपुर बुजुर्ग और बिलंदापुर में भी इसी तरह के घपले संज्ञान मेें आए हैं, लेकिन इन दिनों कोरोना बचाव अभियान पर ध्यान केंद्रित होने के कारण इन गांवों के विकास कार्यों में हुई गड़बड़ी की जांच कुछ समय बाद होगी और दोषी पाए गए किसी भी व्यक्ति को छोड़ा नहीं जाएगा।
- धर्मेंद्र प्रताप सिंह, प्रभारी डीडीओ/परियोजना निदेशक (डीआरडीए)
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महामारी से जंग को मजरूरी है दूरी, मंडी बाजारों में उमड़ रही भीड़

शाहजहांपुर। कोरोना वायरस को फैलने से रोकने के लिए सामाजिक दूरी बहुत जरूरी है। इसके लिए लोगों को जागरूक भी किया जा रहा है, लेकिन सब्जी और गल्ला मंडी में भीड़ कम होने का नाम नहीं ले रही, जो भविष्य में संक्रमण की वजह बन सकती है। प्रशासन की ओर से घरों में राशन और जरूरी सामान होम डिलीवरी करने की व्यवस्था के बाद भी सोमवार को गल्ला मंडी मेें भीड़ लगी रही। यही हाल रोजा स्थित मंडी का रहा। मगर अफसर इससे अनजान बने हुए हैं।
लॉकडाउन के बीच प्रशासन ने सुबह नौ बजे से पूर्वान्ह 11 बजे से मंडियों को खुलने की छूट दी है। सोमवार को शहर की गल्ला मंडी में दुकानें खुली तो कुछ ही देर में लोगों की भीड़ जमा हो गई। अपनी जरूरत का सामान लेने के लिए लोगों में होड़ मच गई। दुकानदार की चेतावनी दरकिनार कर बड़ी सब्जीमंडी में लोग एक-दूसरे को धक्का देकर सामान पाने की होड़ में लगे थे। भीड़ को अनियंत्रित होते देख मंडी में तैनात पुलिस कर्मियों को मोर्चा संभालना पड़ा। दुकानों के बाहर लगी भीड़ को इधर-उधर करने के लिए डंडा फटकारा और सामाजिक दूरी के हिसाब से लाइन लगाकर ही सामान लेने के निर्देश दिए। पुलिस की सख्ती पर लोग लाइन में खड़े हुए।
आटा, चावल, दाल की जमाखोरी में जुटे लोग
लॉक डाउन के चलते लोगों पर घर से निकलने की पाबंदी है। यह सीमा और आगे बढ़ने की अफवाह फैलने से लोगों में अफरा-तफरी का माहौल देखा जा रहा है। लोग सुबह मंडी खुलने पर सबसे पहले पहुंचकर अधिक से अधिक जरूरत का सामान खरीदने की कोशिश कर रहे हैं। गल्ला मंडी स्थित एक थोक व फुटकर विक्रेता दुकानदार ने बताया कि पांच से 10 किलो आटा ले जाने वाले ग्राहक 50 किलो की बोरी मांग रहे हैं, चावल और दालों की मांग भी अधिक है।
समय पूरा होने पर पुलिसकर्मियों ने बंद कराई दुकानें
मंडी में दुकानदारों को 11 बजे तक ही दुकानें खोलने की अनुमति है, इसके बाद भी कई दुकानदार अपनी दुकानें खोले बैठे रहे। जिनको खुला देख पुलिसकर्मियों ने फटकार लगाते हुए बंद कराया। देखते-देखते बड़ी सब्जी मंडी से लेकर गल्ला मंडी तक सभी दुकानें बंद हो गई। इसके बाद मंडी की ओर वाले लोगों को भी घर लौटा दिया गया।
रोजा मंडी में पासधारकों ही प्रवेश की अनुमति
फल और सब्जी खरीदने के लिए रोजा मंडी में केवल पासधारकों को ही प्रवेश की अनुमति दी जा रही है। दरअसल, प्रशासन की ओर से बाजार में फल व सब्जी की बिक्री पर रोक लगा दी है। मोहल्लों में सब्जी व फल विक्रेताओं को भेजा रहा है, जिनसे लोग घर के बाहर ही जरूरत के हिसाब से सब्जी और फल खरीद सकें। इसलिए सब्जी व फल विक्रेताओं को पास जारी कर दिए गए हैं, जोकि मंडी से खरीदकर मोहल्लों में जाकर बेचने का काम कर रहे हैं।
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हेल्पलाइन पर फोन कर बोली पत्नी- पति कोरोना संक्रमित है इसे ले जाओ, सच्चाई जानकर हैरान रह गई पुलिस

लॉकडाउन के दौरान व्यवस्था का दुरुपयोग कर गलत खबरें फैलाने वालों की भी कमी नहीं है। उत्तर प्रदेश के रोजा क्षेत्र में पति-पत्नी के बीच विवाद का ऐसा मामला सामने आया है कि सभी हैरान रह गए। रोजा क्षेत्र के एक गांव में झगड़ालू पति से तंग आकर पत्नी ने यूपी 112 पुलिस को फोन कर कह दिया कि उसका पति कोरोना संक्रमित है। 

पुलिस आनन-फानन में मौके पर पहुंची और एंबुलेंस को बुलाया। एंबुलेंस के साथ पहुंचे स्वास्थ्य कर्मियों ने जांच की तो युवक में कोरोना के लक्षण नहीं मिले। इस पर पुलिस ने पत्नी से कड़ाई से पूछताछ की तो सारा भेद खुल गया।

पड़ोसियों ने बताया कि पति-पत्नी में आए दिन झगड़ा होता था। शनिवार रात भी दोनों में जमकर नोकझोंक हुई। पत्नी को गुस्सा आया तो उसने पति को खरीखोटी सुनाते हुए यूपी 112 नंबर डायल कर दिया। कुछ ही देर में पुलिस मौके पर पहुंच गई। महिला ने पुलिस को बताया कि पति दो दिन पहले दिल्ली से लौटे हैं। वह कोरोना वायरस से संक्रमित हैं। 

उसे डर है कि परिवार के अन्य लोगों में भी यह फैल जाएगा। फिर क्या था, पुलिस ने तुरंत कॉल कर एंबुलेंस बुला ली। स्वास्थ्य टीम ने पति की जांच की तो वह सामान्य मिला। कोरोना के लक्षण न मिलने पर पुलिस ने पत्नी से कड़ाई से पूछताछ की तो महिला ने हकीकत बयां कर दीं। 

महिला बोली कि पति रोज उससे झगड़ता है, इसलिए सोचा कुछ दिन आइसोलेशन वार्ड में रहेगा तो दिमाग ठीक हो जाएगा। महिला की इस हरकत पर पुलिस माथा पीटकर लौट गई।
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रहने की दिक्कत थी न खाने के लाले, मगर घर की याद ने ठहरने नहीं दिए कदम

शाहजहांपुर। नोएडा से बिहार के जिला सहरसा जा रहे प्रवासी मजदूरों को न वहां रहने की दिक्कत थी, न खाने के लाले क्योंकि मकान मालिक ने उनसे कह दिया था कि जब तक देश इस संकट से नहीं निकल पाता वे यहां आराम से रहें और किराया देने की भी जरूरत नहीं है। जिस ठेकेदार के यहां काम करते थे उसने उन्हें पूरा भुगतान किया और खाने-पीने का सामान खरीदने के लिए पांच हजार रुपये अलग से दिए। मगर जमा पूंजी खर्च होने का डर और घर की याद सताई तो उनके कदम नहीं ठहर सके। यही वजह रही कि बाइक के पीछे रस्सी से रिक्शा बांधकर बिहार जाने को निकले पड़े। अमूमन यही हाल अन्य मजदूरों का भी था, जो दिल्ली नोएडा, गाजियाबाद और हरियाणा से दूरदराज स्थित अपने घरों को जा रहे थे और शाहजहांपुर में हरदोई बाईपास पर खड़े वाहन का इंतजार कर रहे थे।
बिहार के जिला सहरसा के थाना राजासोनवर्षा के गांव तीनधारा निवासी राहुल गुप्ता और उनके साथ नोएडा में बतौर मजदूर काम कर रहे अजय, पंकज, अनोज, नितीश को भी लॉकडाउन के चलते घर लौटना पड़ रहा है। उनके साथ जिले के 12 लोग निकले। तमाम लोग पीछे आ रहे थे। उन्हें घर भी पहुंचना है और कोरोना के संक्रमण का डर भी सता रहा है। राहुल बोले- वह और उनके साथी एक ठेकेदार के यहां नोएडा सेक्टर-दो में पेंटिंग का काम करते थे। पेंटिंग का जब काम नहीं होता था तो रिक्शा चलाकर गुजारा करते थे। पहले एक दिन का जनता कर्फ्यू लगा, तब तो कोई बात नहीं, लेकिन जब पता चला कि 21 दिन का लॉकडाउन हो गया है और यह तीन महीने तक रहेगा तो चिंता सताने लगी। बस यही सोचकर चल दिए। हालांकि ठेकेदार ने पांच हजार रुपये खाने-पीने को भी दिए थे और मकान मालिक ने बोला कि किराया भी नहीं लेंगे, लेकिन इसके बाद भी लंबे समय तक काम न मिला तो क्या करेंगे। बस यही डर घर जाने के लिए मजबूर कर रहा है। राहुल बोले, कोरोना का डर भी है। इसलिए घर पहुंचने से पहले स्वास्थ्य परीक्षण कराएंगे। इसके बाद ही गांव और घर में घुसेंगे।
15 घंटे में तय किया साढ़े तीन सौ किमी. का सफर
शनिवार रात 10 बजे नोएडा से चले बिहार के लिए
राहुल गुप्ता ने बताया कि वह नोएडा से रात करीब दस बजे चले थे। बिहार के मुजफ्फरपुर के रहने वाले ठेकेदार हरवन ने अपनी बाइक दे दी थी। बाइक में पीछे रस्सी से रिक्शा बांधकर चल दिए। नोएडा से लगभग साढ़े तीन सौ किलोमीटर का सफर तय कर शाहजहांपुर 12:49 बजे पहुंचे हैं। रात में कहीं रुकना भी नहीं हुआ। अब लगभग 160 किलोमीटर का सफर तय कर लखनऊ में आराम करेंगे।
लॉकडाउन में काम बंद, गांव में करेंगे गेहूं की कटाई
बिहार के ही जिला जमशेदपुर के रहने वाले एक शख्स परिवार के साथ बरेली मोड़ पर वाहन के इंतजार में बैठे थे। पुलिस ने उन्हें खाने के पैकेट दिए थे। बताया कि दिल्ली में एक फैक्टरी में मजदूरी करते थे, लॉकडाउन होने से काम बंद हो गया इसलिए घर जा रहे हैं। रहने-खाने की दिक्कत के बारे में पूछने पर बताया कि ऐसी कोई दिक्कत नहीं थी, लेकिन तीन महीने तक खाली बैठकर क्या करते। इस समय गेहूं की कटाई चल रही है। गांव जाकर गेहूं की कटाई करेंगे तो कुछ पैसे पैदा हो जाएंगे इसलिए घर जा रहे हैं। बातचीत करने पर इनमें भी कोरोना का जरा भी खौफ नहीं दिखा, बस जल्दी थी तो घर पहुंचने की।
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कोरोना संदिग्ध दस मरीज क्वारंटीन वार्ड में भर्ती

शाहजहांपुर। दिल्ली नोएडा और गाजियाबाद से लौटकर अपने घरों को जा रहे कोरोना संदिग्ध 10 लोगों को जिला अस्पताल के क्वारंटाइन वार्ड में भर्ती कराया गया है। यह सभी लोग जिले के रहने वाले हैं। इन लोगों का सैंपल लेकर जांच के लिए सोमवार को लखनऊ भेजा जाएगा। थाना मिर्जापुर क्षेत्र के कुछ लोग दिल्ली से लौटे थे। उनमें सर्दी जुकाम की को शिकायत हुई तो सूचना स्वास्थ्य विभाग की टीम को दी गई। रविवार देर रात उन्हें जिला अस्पताल के क्वारंटीन वार्ड में भर्ती कराया गया।वहीं नेशनल हाईवे पर जांच के दौरान सेहरामऊ दक्षिणी और रोजा के लोगों का भी परीक्षण हुआ। जिसमें उन्हें भी जुकाम बुखार की शिकायत महसूस हुई तो उन लोगों को भी क्वारंटीन वार्ड में भर्ती करा दिया गया। ... और पढ़ें

15 लाख रुपये से तहसील मुख्यालयों पर बनेंगे स्क्रीनिंग राहत कैंप

शाहजहांपुर। बाहर से लौट रहे कामगारों को आश्रय देने और उनके स्वास्थ्य की जांच के लिए प्रदेश सरकार ने जनपद को 15 लाख रुपये की धनराशि अवमुक्त कर दी है। मुख्यमंत्री की घोषणा के अनुरूप इस धनराशि से श्रमिक परिवारों के लिए स्क्रीनिंग राहत कैंप बनाए जाएंगे। डीएम इंद्र विक्रम सिंह केे निर्देश पर सभी एसडीएम राहत कैंप के लिए उपयुक्त ठिकानों की तलाश में जुट गए है।
अभी तक अन्य राज्यों और शहरों से यहां लौटने वालों के स्वास्थ्य जांच की कोई व्यवस्था नहीं हो सकी है। माना जा रहा है कि इनमेें तमाम लोग कोरोना वायरस के कैरियर हो सकते हैं। ऐसे लोगें के घरों तक पहुंचने पर पड़ोसी ऐतराज कर उन्हें रुकने नहीं दे रहे हैं और उन्हें कोरोना संदिग्ध मानकर सामाजिक बहिष्कार हो रहा है। इसे देखते मुख्यमंत्री ने ऐसे लोगों को वहीं पर रोकने के निर्देश दिए, जहां तक वह पहुंचे हैं। इन लोगों को ठहराने और उनके स्वास्थ्य की जांच के लिए अपर मुख्य सचिव राजस्व रेणुका कुमार ने बड़े जनपदों को 30 लाख रुपये और छोटे जनपदों को 15 लाख रुपये स्वीकृत किए हैं।
एडीएम फाइनेेंस गिरिजेश कुमार चौधरी ने बताया कि स्क्रीनिंग कैंप के लिए 15 लाख रुपये की धनराशि प्राप्त हो गई है। महानगर समेत चारों तहसीलों में कैंप बनाने के लिए स्कूल-कालेज, होटल, हॉस्टल, धर्मशाला आदि ऐसे स्थान खोजे जा रहे हैं, जहां लोगों को ठहराने के लिए पर्याप्त स्थान हो और आपस में दूरी भी बनी रहे।
14 हजार जन-धन खातों मेें जाएगी राहत राशि
प्रधानमंत्री की घोषणा के अनुसार जिले मेें करीब 14 हजार गरीब परिवारों की महिलाओं के जनधन खातों मेें तीन माह तक पांच-पांच सौ रुपये की धनराशि शीघ्र भेजी जाएगी। अग्रणी बैंक प्रबंधक चंद्रशेखर जोशी ने बताया कि 30 लाख की आबादी वाले जिले मेें करीब 25 लाख जन-धन खाते हैं, लेकिन जांच करने पर पता चला कि तमाम लोगों ने अपने नाम से कई बैंकों में ऐसे खाते खुलवा रखे हैं। ऐसे लोग चिह्नित किए जा रहे हैं।
लॉकडाउन के चलते दिहाड़ी नहीं मिलने से परेशान गरीब मजदूर परिवारों का पेट भरने के लिए उद्योग व्यापार मंडल कंछल गुट ने रविवार से राशन के पैकेट तैयार कराने का काम शुरू करा दिया। पैकेट में दो किलो आटा, दो किलो चावल, एक किलो दाल, नमक एवं मसाले के पैकेट और अचार रखा जा रहा है। इससे पूर्व, संगठन की महानगर इकाई के पदाधिकारियों खिरनीबाग कैंप कार्यालय पर सचिन बाथम की अध्यक्षता में हुई बैठक में पहले चरण में पांच हजार राशन पैकेट तैयार कराने का निर्णय किया गया। तय किया गया कि रोजाना एक हजार राशन के पैकेट पुलिस अधिकारियों के माध्यम से जरूरतमंद परिवारों तक पहुंचाए जाएंगे। बैठक मेें अमित गर्ग, राकेश अनेजा, घनश्याम गुप्ता, शिवम गोयल, कंचन गुप्ता, पंकज गुप्ता, मोहित गुप्ता, पंकज टंडन आदि मौजूद रहे।
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शहर में लॉकडाउन.. हाईवे पर जनसैलाब

शाहजहांपुर। शहर के अंदर लोग लॉकडाउन का पालन कर रहे हैं, लेकिन हाईवे पर दिल्ली और नोएडा गाजियाबाद से लौटने वालों का सैलाब उमड़ पड़ा है। ऐसे में कोरोना वायरस से बचने के लिए दूरी बनाने की सीख दूर-दूर तक नजर नहीं आ रही है। दूर दराज क्षेत्रों से लौटने वाले लोग एक मीटर की दूरी का पालन करना तो दूर की बात है, उनके पास मास्क तक नहीं हैं। भीड़ की इस स्थिति में जागरूकता के सारे दावे फेल हो गए हैं और यह अनदेखी लोगों पर भारी पड़ सकती है।
रविवार को नेशनल हाईवे स्थित बरेली मोड़ पर सैकड़ों की संख्या में लोगों की भीड़ खड़ी हुई थी। इन लोगों को खाना खिलाने के लिए सामाजिक संगठनों के लोग आवभगत में लगे हुए थे। पुलिस हर किसी को उनके गंतव्य तक पहुंचाने के लिए वाहनों की व्यवस्था में जुटी हुई थी। एंबुलेंस को भी यहां पर खड़ा किया गया था। हर जाने-जाने वाले की इंफ्रारेड थर्मामीटर से जांच हो रही थी। बरेली की ओर से आने वाली बसों, ट्रकों, डीसीएम आदि वाहनों में लोग अंदर और छतों पर सवार थे। जिन्हें वाहन नहीं मिल पा रहे थे, वे टेंपो से आगे का सफर तय कर रहे थे या फिर पैदल। जिसे जो वाहन मिल रहा है, वह पर लटक जा रहा था। यही हाल हरदोई बाईपास का था। यहां प्रवासियों का रेला नजर आ रहा था। यहां मोहम्मदी रोड, सीतापुर और हरदोई की ओर जाने वालों की भीड़ लगी हुई थीं। सामाजिक संगठन से जुड़े लोग यहां भी खाना खिलाने में लगे हुए थे। दूर दराज से लौट रहे लोगों की भीड़ देखकर कहीं भी लॉकडाउन का अहसास नहीं हो रहा था।
बैरिकेडिंग कर नगर में प्रवेश करने वालों को रोका
जलालाबाद। लॉकडाउन व सोशल डिस्टेंसिग को लेकर कई लोग गंभीर नही हैं। विभिन्न जरूरतों की आड़ में सुबह होते ही सड़कों पर बड़ी तादाद में निकलने वालों पर अंकुश लगाने के लिए पुलिस ने रविवार को मुख्य सड़कों पर चौकसी बढ़ाने के साथ सीमाओं पर बैरिकेडिंग कर आसपास के लोगों का प्रवेश सख्ती से रोक दिया। बजरंग दल के कार्यकर्ताओं ने प्रशासन की देखरेख में याकूबपुर तिराहे पर बाहर से आने वालों को भोजन के पैकेट वितरित कराए। इस दौरान मुनिराज सिंह, विपिन सिंह, अर्पित गुप्ता, क्षितिज गुप्ता, राहुल शर्मा आदि मौजूद रहे। संवाद
100 लोगों को बस मंगाकर भेजा लखनऊ
मीरानपुर कटरा। दिल्ली से चलकर दोपहर करीब एक बजे मीरानपुर कटरा के मेन चौराहे पहुंचे 100 से ज्यादा लोगों को एसडीएम सौरभ गंगवार और सीओ मंगल सिंह रावत ने जिले के अफसरों से वार्ता कर रोडवेज की बस की व्यवस्था कराकर लखनऊ भिजवाया। ब्लॉक प्रमुख नरेंद्र गुप्ता ने चौराहे पर खाने के पैकेट वितरित किए। संवाद
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