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बारिश और ओलावृष्टि से बढ़ी सांसत

siddharthnagar Updated Fri, 08 Feb 2019 11:26 PM IST
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पुरानी नौगढ़ में गिरे ओले।
पुरानी नौगढ़ में गिरे ओले। - फोटो : अमर उजाला
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सिद्धार्थनगर। बुधवार से शुरू हुई बूंदाबांदी ने बृहस्पतिवार देर रात तेज बारिश का रूप ले लिया। ओलावृष्टि भी हुई। शुक्रवार सुबह करीब आठ से नौ बजे के बीच फिर तेज बारिश हुई और ओले भी पड़े। दोपहर में भी यह सिलसिला चला। इससे किसान परेशान हो उठे। हालांकि ओलों के आकार छोटे होने के कारण सिर्फ आलू, मटर, सरसों की फसल कुछ हद तक प्रभावित होने की आशंका है। वहीं गेहूं की फसल के बारिश लाभप्रद मानी जा रही है। दूसरी ओर, दिनभर बारिश का सिलसिला चलता रहा। इससे खजुुरिया, भीमापार, थरौली, शिवपुर कॉलोनी, बेलसड़ आदि मोहल्लों में, सड़कों पर पानी जमा हो गया। इस कारण लोगों आने जाने में दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। हाइवे पर कार्य होने के कारण सड़क उखाड़ दी गई है। ऐसे में एनएच से भी चलना आसान नहीं रहा। जोगिया क्षेत्र के सिसवा गांव निवासी किसान रुद्रनरायन तिवारी, सूर्य प्रकाश, दूधनाथ, देवरा बाजार गांव निवासी रामदेव लाल, सदर तहसील के पुरानी नौगढ़ निवासी रामबरन ने बताया कि बारिश फसल के लिए काफी लाभदायक है। इस बार ठंड कम पड़ने के कारण गेहूं की फसल में नमी कम होने लगी थी। किसानों को दोबारा सिंचाई करनी पड़ती। अब ऐसा नहीं करना होगा। बारिश से केवल आलू की फसल पर कुछ हद तक बुरा प्रभाव पड़ा है। वह भी उन्हीं खेतों में हैं, जहां पानी रुका हुआ है। वहीं ओले पड़ने अगेती प्रजाति की पक चुकी सरसों को नुकसान हुआ है।
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पैदल चलना भी जोखिम भरा
परसा। बढ़नी ब्लॉक के औदही खुर्द, खरिकौरा, बेनीनगर, बसंतपुर गांव का संपर्क क्षेत्र से कट गया है। गांवों में आने-जाने के लिए तीन मार्ग मुख्य हैं। पहला मार्ग एनएच -730 से औदही कलां होते हुए है। यहां औदही कला औदही खुर्द के मध्य रेलवे लाइन के पास अंडरपास बनने कारण सड़क पर मिट्टी पटी हुई है। ऐसे में इधर से पैदल जाना भी जोखिम भरा है। दूसरा मार्ग रेड़वरिया-औदही खुर्द होते हुए है। मार्ग का पुल के लगभग दो वर्ष से क्षतिग्रस्त है, ऐसे में यहां आवागमन बाधित है। तीसरा मार्ग एनएच 730 से सिसवा- लोहटी पीएमजीएसवाई मार्ग है। इस समपार फाटक को रेलवे द्वारा बंद कर दिया गया है। पंकज तिवारी, लल्लू मिश्र, विजय यादव, रमजान, अब्दुल कलाम, रामानंद, हारुन आदि ने डीएम से रास्ता सही करवाने की अपील किया है।
सड़क के गड्ढों में जलजमाव
बांसी प्रतिनिधि के अनुसार, बारिश से नगर क्षेत्र में एनएच-233 का हाल बुरा है। हाईवे के बड़े- बड़े गड्ढों में जल जमाव हो गया है। इससे गुजरना आसान नहीं है। बस्ती रोड स्थित माधव पार्क से निकल कर डुमरियागंज सड़क को जोड़ने वाला रास्ता पूरी तरह कीचड़ युक्त हो गया है। देवेन्द्र धर, धनंजय, राजू, रमेश का कहना है कि प्रशासन का भी ध्यान इस मार्ग के तरफ नहीं जा रहा है। दरअसल, करीब दो वर्ष पूर्व सड़क बनने के तुरंत बाद जल निगम ने पाइप के खुदाई कर पाइप तो डाल दिया गया लेकिन सड़क ऐसे टूटी- फूूटी पड़ी रही हल्के बरसात से पूरी सड़क कीचड़ में तब्दील हो जाती है।
वहीं मिश्रौलिया प्रतिनिधि के अनुसार, मधवापुर कला बांध से शोहरतगढ़ जाने वाला मार्ग दो दिन की बारिश में गड्ढों में तब्दील हो गया है। मधवापुर के ग्राम प्रधान अब्दुल अलीम, होरिलापुर ग्राम प्रधान अताउल्लाह, रतनपुर ग्राम प्रधान सुबास जयसवाल, अब्दुल रसीद, महबूब, हरिवंश, अफजल हुसेन, बाल गोबिंद, कुतबुल्लाह, शाह आलम, राजेन्द्र कुमार, राम मिलन आदि लोगों ने इस सड़क को ठीक कराए जाने की मांग की है।
डुमरियागंज प्रतिनिधि के अनुसार, बैदौला चौराहे से औसानपुर, भारतभारी के मुख्य मार्ग सड़क के गड्ढों में पानी जमा हो गया है। डुमरियागंज-भड़रिया मार्ग, शाहपुर-मन्नीजोत मार्ग का भी कुछ ऐसा ही हाल है। सच्चिदानन्द मिश्रा, विशाल, सूरज, सरवर मेंहदी, सनोज, बब्लू, महेन्द्र कुमार, नवीन कुमार, संदीप कुमार गौतम, सचिन भास्कर, अभिषेक कुमार आदि लोगों ने टूटी हुई सड़कों के मरम्मत कराए जाने की मांग की है।



बच्चों-बुजुर्गों का रखें ख्याल
बदले मौसम के कारण ठंड बढ़ गई। शुक्रवार शाम को पारा और गिर गए। ऐसे में बच्चों और बुजुुर्गों का विशेष ख्याल रखने की जरूरत है। बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. संजय चौधरी ने बताया कि यह मौसम बच्चों के लिए सबसे खतरनाक है। चूंकि बारिश के कारण अचानक ठंड बढ़ी है। ऐसे में बच्चों को गर्म कपड़े पहनाएं और बाहर न घूमने दें। वहीं बुजुर्गों का भी ऐसे मौसम में ध्यान देने की जरूरत है।

बारिश से सभी फसलों को लाभ हुआ है। हालांकि ओला गिरने से आलू की फसल कुछ हद तक प्रभावित हुई है। इसके साथ ही अगेती प्रजाति की सरसों को भी नुकसान होने का अनुमान है।
चंद्रप्रकाश सिंह, जिला कृषि अधिकारी

आलू, मटर, सरसों, दलहन की फसलें ओला गिरने के कारण प्रभावित होने का अनुमान है। हालांकि गेहूं बड़ा होेने जाने और ओलों का आकार छोटा होने से नुकसान की संभावना कम है। बारिश सूरजमुखी, उड़द, मूंग और गन्ने की बुवाई के लिए सही है। जो खेत खाली हो गए हैं। उनमें किसान इन फसलों की बुवाई कर सकते हैं।
डॉ मार्कंडेय सिंह, कृषि वैज्ञानिक सोहना
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