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नवरात्र में कराएं कामाख्या बगलामुखी कवच का पाठ व हवन, पाएं कर्ज मुक्ति एवं शत्रुओं से छुटकारा
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सीतापुर

सोमवार, 30 मार्च 2020

मुंबई और केरल से लौटे 27 यात्रियों की स्क्रीनिंग, होम आइसोलेट

जहांगीराबाद (सीतापुर)। कोरोना वायरस के बढ़ते प्रकोप के बीच बाहर से आने वालों का सिलसिला जारी है। सकरन ब्लॉक के एक गांव में मुंबई और केरल से 27 यात्रियों के आने की सूचना पर पहुंची स्वास्थ्य विभाग की टीम ने सभी की जांच की और 14 दिन के लिए होम आइसोलेट कर दिया।
सकरन इलाके के एक गांव में पिछले दिनों मुंबई और केरल से 27 लोग लौटे थे। इसकी सूचना ग्रामीणों को हुई। यात्रियों में कोरोना वायरस की शंका हुई। इसकी सूचना स्वास्थ्य विभाग को दी गई। सूचना पार सांडा सीएचसी की टीम गुरुवार को गांव पहुंची और सभी की जांच की।
टीम ने बताया कि किसी में कोरोना के लक्षण नहीं मिले हैं। टीम में शामिल डॉ. अदिअंत कृष्ण वर्मा ने बताया कि जांच में सभी ठीक पाए गए हैं। किसी में महामारी का कोई लक्षण नहीं मिला है। हालांकि एहतियात के तौर पर सभी को 14 दिनों के लिए क्वारंटीन कर दिया गया है। परिवार के लोगों से दूरी बनाकर रहने के लिए बताया गया है ताकि आगे कोई समस्या न हो।
शहर कोतवाली इलाके के नारायणनगर हेमपुरवा में गुरुवार को पहुुंची स्वास्थ्य विभाग की टीम ने गैर जिले से लौटे दो युवकों में कोरोना वायरस के लक्षणों की जांच की लेकिन दोनों सही मिले। टीम ने बताया कि मोहल्ले के लोगों ने सूचना दी थी कि उन लोगों को बाहर से आए युवकों में कोरोना की आशंका है। उसी सूचना पर जांच कर लोगों को आश्वासत किया गया है।
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छह यात्री ट्रेस, 19 की अब भी जारी है तलाश

सीतापुर। विदेश से लौटने के बाद गुम चल रहे 25 यात्रियों में से गुरुवार को स्वास्थ्य विभाग की टीम ने छह को ट्रेस कर लिया है। टीमों ने यात्रियों के घर पहुुंचकर उनके स्वास्थ्य का परीक्षण किया। सभी ठीक बताए जा रहे हैं। हालांकि अन्य की तलाश जारी है।
कोरोना वायरस के बढ़ते कहर के बीच अब तक जिले में विदेश से 114 लोगों के आने की सूची एयरपोर्ट से स्वास्थ्य विभाग को मिल चुकी है। विभाग ने 89 यात्रियों का पता लगा लिया था लेकिन तमाम कोशिशों के बाद विदेश से लौटे 25 यात्रियों के बारे में कोई सुराग नहीं लग सका था।
इस मामले से डीएम को अवगत कराने के बाद उन्होंने स्वास्थ्य विभाग की मदद के लिए एसडीएम, सीओ, कोतवाल, सीएचसी अधीक्षक, थानेदारों को लगाया था। हालांकि इस काम में लगाए अन्य विभाग अभी किसी नतीजे पर नहीं पहुंच सके हैं लेकिन यात्रियों की तलाश में जुटी सेहत महकमे की टीमों ने गुरुवार को छह को ट्रेस कर लिया है।
सूत्रों ने बताया कि ट्रेस हुए यात्रियों में 2 बिसवां, 1 महमूदाबाद, 1 खैराबाद, 1 कसमंडा और 1 रामपुर मथुरा का पाया गया है। टीमों ने इनके घर पहुंचकर कोरोना वायरस के लक्षणों की जांच की है। किसी में कोई लक्षण नहीं मिला है। फिलहाल सभी को 14 दिन के लिए होम आइसोलेट किया गया है। टीम गुम 19 अन्य की तलाश में जुटी है।
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दुबई से लौटे यात्री में कोरोना की आशंका, आइसोलेट

सीतापुर। स्वास्थ्य विभाग को रामपुर मथुरा इलाके में दुबई से लौटे एक यात्री के कोरोना से संक्रमित होने की आशंका है। एहतियात के तौर पर उसको जिला अस्पताल में आइसोलेट किया गया है। हालांकि शुरुआती जांच में युवक में कोई लक्षण नहीं मिला है।
रामपुर मथुरा क्षेत्र के एक गांव निवासी युवक कुछ दिन पहले ही दुबई से लौटकर आया है। उसे खांसी, जुकाम व बुखार की समस्या थी। कोरोना वायरस के बढ़ते खौफ के बीच यह समस्या होने की जानकारी लोगों को हुई तो वे घबरा गए। इसकी सूचना स्वास्थ्य विभाग को दी गई। सूचना पाकर मौके पर पहुंची टीम युवक को रामपुर मथुरा सीएचसी ले गई जहां डॉक्टरों ने उसके लक्षणों को देखने के बाद जिला अस्पताल रेफर कर दिया।
जिला अस्पताल के सीएमएस डॉ. अनिल अग्रवाल ने बताया कि युवक कुछ दिन पूर्व दुबई से लौटकर आया है। उसे कुछ दिक्कत महसूस हुई है। उसे आइसोलेशन वार्ड में भर्ती कर लिया गया है। शुरुआती जांच में युवक में कोई लक्षण नहीं पाया गया है फिर भी एहतियात के तौर पर उसे भर्ती किया गया है।
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लॉकडाउन : गरीबों की मदद को बढ़ाया हाथ

सीतापुर। लॉकडाउन के दौरान किसी गरीब को भूखे सोना न पड़े, इसके लिए तमाम सामाजिक संगठन सामने आए है। रविवार को गैर प्रांतों से सड़क मार्ग से गुजर रहे लोगों को पूड़ी-सब्जी के पैकेट वितरित किए। वही गरीब कॉलोनियों में जाकर उनको भोजन दिया।
जिलाधिकारी की अपील के बाद मुस्कान फाउंडेशन ने लोगों की मदद के लिए आवश्यक वस्तुओं के 140 पैकेट जिलाधिकारी को सौंपे। पैकेट में आटा, चावल, अरहर दाल, गुड़, नमक, लैय्या-चना, माचिस शामिल है।
जिलाधिकारी ने सभी पैकेट आरआई के माध्यम से डायल 112 पुलिस को सौंपते हुए जरूरतमंदों को वितरित कराए जाने के निर्देश दिए। शहर में हरदोई रोड गौशाला निवासी देवेद्र नाथ मिश्र, रामचंद मिश्र, बाल विनोद चतुर्वेदी, गोपाल शुक्ला, सत्यम शुक्ला, वीरेंद्र राठौर आदि लोगों ने जिला प्रशासन से अनुमति लेकर करीब 1200 लंच पैकेट रोडवेज बस स्टॉप, बहुगुणा चौराहा, नवीन चौक, कैप्टन मनोज पांडेय चौक से गुजर रहे राहगीरों को दिए।
बाल विनोद ने बताया यह व्यवस्था लॉकडाउन तक जारी रहेगी। वही इंडियन रेडक्रास सोसाइटी के सदस्यों द्वारा जागरूकता एवं राहत अभियान चलाया गया। आकस्मिक कार्य से बाहर निकले लोगो को 250 मास्क बांटे। किराना स्टोर्स आदि पर लोगों को एक-दूसरे से दूरी बनाये रखने और घरों में रहने के लिए जागरूक किया गया। इस अवसर पर रेडक्रास सचिव संजीव मेहरोत्रा, कोआर्डिनेटर रियाज अहमद, सदस्य जाहिद अली अंसारी आदि रहे।
महमूदाबाद में विधायक नरेंद्र सिंह वर्मा, भाजपा प्रदेश परिषद सदस्य अंबरीश गुप्ता, पूर्व विधानसभा भाजपा प्रत्याशी आशा मौर्या, आरके बाजपेई आदि ने बाहर से आने वालों को लंच पैकेट, आटा, दाल, चावल, साबुन, बिस्कुट, मास्क पानी आदि खाद्य सामग्री उपलब्ध कराई। वही सिधौली में सिख सेवा सोसायटी द्वारा लंच पैकेट, पानी पैकेट और बिस्कुट आदि वितरित किया गया।
सरदार कमलदीप सिंह ने बताया की करोना वायरस की महामारी से कोई भी राहगीर और गरीब असहाय व्यक्ति भूखा नहीं रहेगा। इसके अलावा गुड्डू जायसवाल, सिधौली मेडिकल स्टोर, ज्ञान मेडिकल स्टोर, चिंटू कनोडिया, मनीष किराना स्टोर ने सहायता की।
सुंदरकांड का हुआ पाठ
रेउसा (सीतापुर)। विकासखंड रेउसा की ग्राम पंचायत अकसोहा में स्थित प्राचीन देवी स्थान पर कोरोना महामारी से बचाव के लिए ग्रामीणों द्वारा एक सामूहिक सुंदरकांड पाठ का अनुष्ठान पंडित तन्नू लाल अवस्थी की अगुवाई में किया गया। चल रहे चैत्र नवरात्र के चतुर्थ कूष्माण्डा देवी की विधि विधान से वैदिक मंत्रों साथ पूजा-अर्चना की गई। इस अवसर पर अवधराम तिवारी, बुद्धि सागर अवस्थी, प्रदीप मिश्र, सतीश, राम सहारे मिश्र आदि शामिल रहे।
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कोरोना : लोगों ने ठाना, घर के बाहर नहीं जाना

सीतापुर। जिले में लॉकडाउन के पांचवें दिन रविवार को शहर से लेकर गांवों तक सन्नाटा पसरा रहा। रविवार का अवकाश होने से जरूरी सेवाओं से जुड़े अधिकतर लोगों ने भी घर में रहकर ही दिन बिताया।
सड़कों व गलियों का सूनापन देख लगा मानों नागरिकों ने अब बिना किसी जरूरी काम के बाहर नहीं निकलने की ठान ली है। जरूरत पर बाहर निकलकर इक्का-दुक्का लोग काम निपटाकर घर वापस लौटते नजर आए। पुलिस व प्रशासन ड्यूटी पर मुस्तैद रहा।
जिला प्रशासन व पुलिस की सख्ती कहें या रविवार के अवकाश का असर कि अधिकतर लोग घरों में ही कैद रहे। पिछले दिनों के मुकाबले शहर से लेकर कस्बों तक कम लोग ही सड़कों पर दिखाई दिए। शहर की सब्जी मंडी में आम लोगों के बजाए फुटकर विक्रेताओं को ही सामग्री दी गई।
कार्य दिवसों में जरूरी सेवाओं से जुड़े लोगों के निकलने पर कुछ चहल-कदमी सड़कों पर नजर भी आती थी, रविवार का अवकाश होने से उनके घर में रहने का असर सड़कों पर पसरे सन्नाटे के तौर पर दिखाई दिया। जिले भर में लॉकडाउन के पांचवें दिन सड़कें पूरी तरह से वीरान रहीं।
जिले व शहर की सीमाओं समेत सार्वजनिक स्थानों व चौराहों पर रोज की तरह पुलिस के जवान मुस्तैद रहे। बेहद जरूरी काम होने पर इक्का-दुक्का लोग घरों से निकले मगर काम निपटाकर वापस लौट जाने से पुलिस को ज्यादा टोका टोकी नहीं करनी पड़ी।
घरों की ओर जाने वाले कुछ लोग सड़कों पर भी पैदल गुजरते नजर आए। इन्हें कई जगहों पर स्थानीय नागरिकों व सामाजिक संगठनों से भोजन व नाश्ता कराया। डीएम अखिलेश तिवारी व एसपी एलआर कुमार ने शहर के बाद महोली तहसील क्षेत्र में भ्रमण कर हालात परखते हुए नागरिकों से लॉकडाउन में सहयोग मांगा। अफसरों ने लोगों को आश्वस्त कराते हुए कहा घबराएं नहीं जरूरी चीजें पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध हैं।
खुले पैसे तक वापस नहीं ले रहे
कोरोना वायरस के संक्रमण को लेकर अधिकतर लोग जागरूक होने लगे हैं। इसे दहशत कहें या सतर्कता दुकानों पर सामग्री खरीदने के बाद 10 रुपये या इससे कम छुट्टे पैसे कई लोग वापस लेने से मना करते नजर आए।
शहर के खूबपुर निवासी ओपी मिश्र पतंजलि स्टोर पर कुछ सामग्री लेने आए थे। स्टोर संचालक ने 200 रुपये लेकर अपने 190 काटते हुए 10 रुपये वापस करने चाहे तो उन्होंने मना करते हुए बिस्किट देने को कह दिया। इसी तरह रवि कुमार सब्जी लेने के बाद दुकानदार के देने पर 10 रुपये लिए बगैर ही चले गए।
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फंसे यात्री पहुंचे घर, चलाई गईं 70 बसें

सीतापुर। लॉकडाउन में फंसे यात्रियों के लिए रोडवेज की बसें सहारा बनी। निगम ने रविवार शाम तीन बजे के बाद आने-जाने वाले सभी यात्रियों के लिए किराया माफ कर दिया। सभी को फ्री में ठिकानों तक पहुंचाया गया। रोडवेज में फ्री सफर की सुविधा पाकर लोग गदगद नजर आए।
दरअसल, लॉकडाउन के बाद फंसे लोगों के लिए अपने घरों तक पहुंचना बड़ी चुनौती बनी हुई थी। रेल और बस सेवा ठप होने से लोग काफी परेशान थे। ऐसे में वे लोग घर पहुंचने के लिए पैदल ही चल पड़े थे। लोगों की इन दुश्वारियों को देखते हुए योगी सरकार ने शनिवार से बस चलाने का आदेश दिया था। शनिवार को सीतापुर डिपो से करीब 65 बसें चलाई गई थी। रविवार को भी करीब 70 बसें चलाई गई। दिल्ली में फंसे लोगों के लिए डिपो से 50 से भेजी गई। इसके अलावा 20 बसों से सीतापुर में फंसे लोगों को लखनऊ, लखीमपुर, बहराइच आदि जिलों को भेजा गया। इस बीच एमडी डॉ. राजशेखर ने फ्री में यात्रियों को उनके घरों को पहुंचाने का आदेश जारी किया।
एआरएम विमल राजन ने बताया कि रविवार को भी मुसाफिरों को निगम की बसें चलाई। 50 बसें दिल्ली और 20 बसों को लखनऊ, सीतापुर, बहराइच भेजा गया। शाम तीन बजे के बाद जाने वाले सभी यात्रियों को बिना किराया लिए ही मंजिल तक पहुंचाया गया। ये सुविधा सभी यात्रियों को उनके ठिकानों तक पहुंचाने के बाद ही बंद की जाएगी।
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हजारों के हुजूम से संक्रमण का खतरा

सीतापुर। सैकड़ों लोगों को बाहर से जिले में आना व गुजरना हो रहा है। कोई सरकारी बस तो कोई प्राइवेट वाहनों से आ रहा है। कई लोग साइकिल, ठेलिया से भी सफर करते देखे गए। देश की राजधानी दिल्ली सहित अन्य राज्यों से लोगों का आना जारी है। काफी लोग पैदल चलकर भी पहुंच रहे हैं। ये सभी कोरोना वायरस से बचने के लिए सामाजिक दूरी का ख्याल नहीं रख रहे हैं। ऐसे में कोरोना से युद्ध कैसे जीता जाए... इस पर भी सवाल उठ रहा है। अमर उजाला ने रविवार को पड़ताल की तो ग्राउंड पर कुछ ऐसा नजारा सामने आया।
शहर के कांशीराम कालोनी के पास एक कतार में छह बोझा ढोने वाली ठेलियां खड़ी थीं। उन पर कुछ लोग बैठे थे तो कुछ पड़ोस में ही खड़े बिस्किट, गन्ना आदि खा-पी रहे थे। पूछा गया तो उनमें से अशोक कुमार ने बताया कि वह लोग दिल्ली से ठेलियों पर ही सवार होकर आए हैं। उनके काफिले में 29 लोग हैं। सभी लोग बिहार के खगरिया जिले के हैं। वे सभी दिल्ली में वर्षों से पल्लेदारी का काम करते थे। कोरोना वायरस के कारण हुए लॉकडाउन में उन्हें दिल्ली छोड़ बिहार का रुख करना पड़ा। वह लोग गुरुवार को दिल्ली से चले थे। चार दिन में ठेलिया से सीतापुर पहुंचे हैं। अभी उन्हें सैकड़ों किलोमीटर का लंबा सफर तय करना है।
कुछ ऐसा ही आलम लखनऊ के मोहनलालगंज निवासी रोहित, अभिलास, सर्वेश गौतम, अजय व उमेश का भी था। नौ लोग शनिवार शाम दिल्ली से रोडवेज पर सवार हुए थे। बस ने उन्हें बरेली में उतार दिया था। उसके बाद आठ किलोमीटर पैदल चले। तब उन्हें ट्रक की सवारी मिली। ट्रक पर सवार होकर आए तो उसने सीतापुर में उतार दिया। सीतापुर नवीन चौक पर यह लोग भूखे, प्यासे घंटों सवारी का इंतजार करते रहे। बमुश्किल उन्हें फिर ट्रक मिल गया।
जिसके बाद वह लखनऊ के लिए रवाना हुए। इन लोगों का दावा था कि रोडवेज बस चालक ने उनसे किराया भी ज्यादा लिया था। कुछ ऐसा ही हाल दिल्ली के वजीरनगर से यूपी के सुल्तानपुर जिले के लिए निकले राजेश, दीपक व सुनील का भी था। इसमें सुनील को फैजाबाद जाना था। यह लोग किसी तरह पैदल, ट्रक व अन्य सवारियों से सीतापुर पहुंचे गए थे, लेकिन यहां उन्हें सवारी नहीं मिले। सुबह नौ बजे तक यह लोग सवारी का इंतजार कर रहे थे।
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सीतापुर के इस गांव का नाम ही है कोरोना, सुनते ही लोग ग्रामीणों से बना लेते हैं दूरी

सीतापुर हाइवे पर बस की छत पर बैठ कर यात्रा करते लोग।
कोरोना वायरस पूरी दुनिया में एक आतंक का पर्याय बन चुका है। चीन से निकले इस वायरस से इटली व स्पेन जैसे विकसित देशों में सैकड़ों मौतें हो चुकी हैं। वहीं भारत में भी करीब 25 मौतें हो चुकी हैं।

इस वायरस के कारण सीतापुर के एक गांव के लोगों को भेदभाव का सामना करना पड़ता है क्योंकि गांव का नाम भी कोरोना ही है। कोरोना के एक ग्रामीण राजन कहते हैं कि जब हम किसी को बताते हैं कि हम कोरोना गांव के रहने वाले हैं तो वह हम लोगों से भेदभाव करते हैं। वो ये नहीं समझते हैं कि यह एक गांव का नाम है न  कि किसी कोरोना संक्रमित व्यक्ति का।



कोरोना वायरस के कारण जिले में गांव का नाम चर्चा में रहता है। जिसके कारण ग्रामीणों को मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है। कोरोना गांव नैमिषारण्य की 84 कोसीय परिक्रमा मार्ग पर पड़ता है।

वहीं, ये भी बता दें कि भारत में अब तक 1029 लोग कोरोना से संक्रमित पाए गए हैं। जिनमें से 85 मरीज रिकवर हो चुके हैं जबकि 25 से ज्यादा मौतें हो चुकी हैं।
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लॉकडाउन : बेवजह घर से निकलने वालों का चालान

सीतापुर। लॉकडाउन के चौथे दिन शनिवार को जिलेभर में सार्वजनिक स्थानों और चौराहों पर पुलिस का सख्त पहरा रहा। हर आने-जाने वाले को रोककर पुलिसकर्मी पूछताछ करते रहे। वाजिब कारण बताने वालों को ही जाने दिया गया। बेवजह घर से निकलने वाले वाहन सवारों का पुलिस ने चालान काटा। निगरानी के लिए डीएम, एसपी व अन्य अधिकारियों के वाहन सड़कों पर दौड़ते रहे।
उन्होंने नागरिकों से बेवजह घर से बाहर नहीं निकलकर सहयोग की अपील की। शहर से लेकर कस्बों तक सड़कों पर पुलिस व प्रशासनिक अमले के अलावा जरूरी सेवाओं से जुड़े लोग ही नजर आ रहे थे। कोरोना की जंग में प्रधानमंत्री द्वारा देश भर में लॉकडाउन करने के बाद भी कुछ लोगों की लापरवाही देख पुलिस ने सख्ती बरतनी शुरू कर दी है।
जिले में लॉकडाउन के चौथे दिन शनिवार को शहर समेत सभी थाना क्षेत्रों की सीमा व लिंक मार्गो पर बैरियर लगाकर सघन चेकिंग की जाती रही। शहर का आलम यह रहा कि छोटे-छोटे चौराहों पर भी बैरियर लगा दिए गए। पुरुषों के साथ ही महिलाओं से भी बाहर निकलने की वजह पूछी गई। वाजिब कारण बताने वालों को ही आगे जाने दिया गया। बेवजह निकलने वालों को फटकार लगाते हुए वापस घर भेज दिया गया।
बाइकों से बिना किसी जरूरी काम के निकलने वालों पर चालान करने की कार्रवाई हुई। शहर के अंदर आने वाले सभी रास्तों पर बैरीकेडिंग लगाकर चेकिंग की गई। जरूरी सेवाओं से जुड़े लोगों को ही अंदर प्रवेश दिया गया। सभी थाना क्षेत्रों में सुबह से ही पुलिस भ्रमण कर माइक के जरिए लॉकडाउन का पालन करने तथा लापरवाही करते पाए जाने वालों के विरुद्ध सख्त कार्रवाई की चेतावनी देती रही।
हिमाचल में फंसे रेउसा के 40 मजदूर
जिले के ब्लॉक रेउसा क्षेत्र में रहने वाले 40 लोग हिमाचल प्रदेश के जिला सोलन में फंस गए हैं। सेवता विधायक ज्ञान तिवारी ने प्रधानमंत्री व मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर उनकी मदद करने का अनुरोध किया है। विधायक के मुताबिक, यह सभी लोग रोजगार के लिए गए थे। लॉकडाउन होने से फंस गए हैं। इनके सामने खाने-पीने, रहने व स्वास्थ्य की गंभीर समस्या उत्पन्न हो गई है।
स्वास्थ्य कर्मियों के पास नहीं सुरक्षा किट
कमलापुर। सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र कसमंडा व पीएचसी कमलापुर के चिकित्सक व स्वास्थ्य कर्मचारी इन दिनों विभिन्न गांवों में जाकर बाहर से आने वाले लोगों की जांच कर रहे हैं। लेकिन स्वास्थ्य कर्मियों के पास सुरक्षा का कोई इंतजाम नहीं है। बिना सुरक्षा किट के वह अपनी जिम्मेदारी निभा रहे हैं। इससे स्वास्थ्य कर्मियों पर भी खतरा मंडरा रहा है। उच्चाधिकारियों से सुरक्षा के लिहाज से जरूरी चीजें उपलब्ध कराने की गुहार लगाई है।
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जिला अस्पताल में सिर्फ इमरजेंसी के मरीजों को ही प्रवेश

सीतापुर। कोरोना वायरस के बढ़ते प्रकोप से बचाव के लिए सामाजिक दूरी बनाने को लेकर जिला अस्पताल प्रशासन ने शुक्रवार से नई व्यवस्था लागू कर दी है। अस्पताल गेट पर बैरियर लगाकर बेधड़क प्रवेश करने वालों पर रोक लगा दी गई है। इमरजेंसी के मरीजों और स्वास्थ्य कर्मियों को ही अस्पताल के अंदर प्रवेश दिया जा रहा है। गेट पर प्राइवेट कर्मियों की ड्यूटी लगाई गई है।
कोरोना महामारी से बचने के लिए सामाजिक दूरी जरूरी है। जिला अस्पताल में पहले मरीजों की संख्या 3200 के करीब थी, लेकिन अब ओपीडी में दो से तीन सौ ही मरीज आ रहे हैं। पहले प्रशासन ओपीडी बंद करने का फैसला लिया था, लेकिन बाद में लोगों की असुविधा को देखते हुए समय में बदलाव कर ओपीडी चालू कर दी गई है। अब सुबह 8 से 11 बजे तक ही ओपीडी चलती है।
मरीजों की संख्या कम होती है, लेकिन बेवजह लोगों की आवाजाही जारी है, इससे भीड़-भाड़ बनी रहने कोरोना वायरस का खतरा बना हुआ था। इसी को लेकर स्वास्थ्य विभाग ने शुक्रवार से यहां पर नई व्यवस्था लागू कर दी है। सीएमओ डॉ. आलोक वर्मा ने बताया कि अस्पताल गेट पर बैरियर लगाकर दो प्राइवेट कर्मियों की तैनाती कर दी गई है। अस्पताल चौकी के होमगार्ड भी मदद करेंगे।
बैरियर लगाकर अस्पताल परिसर में बेवजह आने-जाने वालों की इंट्री बैन कर दी गई है। ओपीडी में जाने वाले मरीजों और इमरजेंसी मरीजों को जाने दिया जाएगा, लेकिन सभी को वाहन बाहर ही खड़े करने होंगे। अस्पताल के अंदर वाहनों के प्रवेश पर रोक रहेगी। एंबुलेंस और जिला अस्पताल के स्वास्थ्यकर्मियों के वाहनों पर छूट रहेगी। प्राइवेट कर्मियों को आईडी बनाकर दी गई है, ताकि कोई दिक्कत न हो। अंदर जाने की वजह पूछने के बाद इंट्री दी जाएगी।
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आज बंद हो जाएगी किसान सहकारी चीनी मिल

महमूदाबाद (सीतापुर)। दि किसान सहकारी चीनी मिल्स लिमिटेड के पेराई सत्र का समापन 29 मार्च को होगा। मिल के प्रधान प्रबंधक ने किसानों को 29 मार्च तक गन्ना मिल में आपूर्ति करने की अपील की है। मिल का कहना है कि इसके बाद यदि किसान गन्ना लाते है तो मिल का कोई दायित्व नहीं होगा।
चीनी मिल जीएम केपी शुक्ल ने बताया कि 29 मार्च को मिल का पेराई सत्र समाप्त हो रहा है। कैलेंडर की सभी पर्चियां जारी करते हुए मिल गेट एवं क्रय केन्द्रों पर 24 मार्च से मुक्त खरीद की जा रही है फिर भी मिल को पर्याप्त मात्रा में गन्ना उपलब्ध नहीं हो पा रहा है। इससे मिल को प्रतिदिन 12 से 14 घंटे बंद कर चलाना पड़ रहा है। मिल को आर्थिक क्षति भी हो रही है। ऐसे में सभी किसान, जिनका पेराई योग्य गन्ना शेष है, वह 29 मार्च तक मिल में पहुंचा सकते हैं।
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लॉकडाउन के दौरान सिंघानिया इंस्टीट्यूट ने नौ शिक्षकों को निकाला

सीतापुर। लॉकडाउन के दौरान एक स्कूल की संवेदनहीनता देखने को सामने आई है। शहर के प्रतिष्ठित सिंघानिया एजुकेशनल इंस्टीट्यूट ने नौ शिक्षकों को फोन से सूचना देकर बाहर का रास्ता दिखा दिया। उन्हें कोई नोटिस भी नहीं दिया गया। स्कूल की तरफ से फोन के जरिए उनकी सेवाएं रोकने की सूचना दी गई है। इससे परेशान सभी शिक्षकों ने मुख्यमंत्री से लिखित शिकायत की है।
सिंघानिया एजुकेशनल इंस्टीट्यूट शहर का एक प्रतिष्ठित कॉलेज है। इसके कई बच्चे सीबीएसई में टॉप टेन सूची में आ चुके है। इधर, कोरोना वायरस की चपेट में पूरा विश्व जूझ रहा है। प्रधानमंत्री ने सुरक्षा की दृष्टि से पूरे देश को लॉकडाउन कर दिया है। इस दौरान सभी संस्थाओं को अपने कर्मचारी न निकालने की बात कही थी। लेकिन इसके इतर स्कूल ने अपनी संवेदनहीनता की सारी हदें पार करते हुए शिक्षकों को बाहर निकाल दिया है।
नौ शिक्षकों को कॉलेज की तरफ से फोन करके जानकारी दी गई कि आपकी सेवा रोक दी गई है। आप कॉलेज आकर अपना हिसाब कर लीजिए। इससे शिक्षकों में खलबली मच गई। शिक्षकों का कहना है कि इस समय आर्थिक स्थिति कमजोर हो रही है। मदद की जरूरत है, तब कॉलेज शिक्षकों को मदद करने के बजाए उनकी नौकरी से बाहर कर रहा है। शिक्षक अनुराग त्रिवेदी, यशी सक्सेना, कशिश अनेजा, शैलजा तिवारी, नुपुर सिंह, सोनिया चावला, ऋषभ दीक्षित, रोबिन सिंह, शिवांश सिंह ने मुख्यमंत्री से शिकायत दर्ज कराई है।
प्रबंधक आशीष सिंघानिया ने बताया कि हर साल शैक्षिक सत्र समाप्त होने के बाद शिक्षकों की परफॉर्मेंस देखी जाती है। इस परफॉर्मेंस में शिक्षक फेल साबित हुए हैं। यह निर्णय लॉकडाउन से पहले लिया गया था। कॉलेज में करीब 125 लोगों का स्टॉफ है। किसी अन्य को नहीं निकाला गया है। इन शिक्षकों को शैक्षिक रिकार्ड अच्छा नहीं था।इनकी सेवाएं समाप्त की गई है। शिकायत करना हर शिक्षक का अधिकार है।
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हिंद अस्पताल में कोरोना मरीजों के लिए 200 बेड की होगी व्यवस्था

सीतापुर। जिले में कोरोना वायरस से निपटने के लिए स्वास्थ्य विभाग की तैयारियां जारी हैं। मरीजों की संख्या बढ़ने या संदिग्धों के पाए जाने पर उन्हें आइसोलेट करने के लिए हिंद अस्पताल फिलहाल विभाग के तहत रहेगा। मेडिकल अफसर की तैनाती कर इसकी निगरानी की जाएगी। अस्पताल में बेड से लेकर वेंटीलेटर तक बढ़ाए जाएंगे। सीएमओ ने अस्पताल पहुंचकर तैयारियों पर अस्पताल प्रशासन से चर्चा की।
जिले में अभी तक कोरोना पॉजिटिव का एक भी मरीज नहीं मिला है। ये सभी के लिए अच्छी बात है, लेकिन आने वाले दिनों में अगर मरीजों की संख्या बढ़ती है, कोरोना संदिग्ध मरीज पाए जाते हैं तो ऐसे हालात में जिला अस्पताल में भर्ती करने के लिए बेड कम पड़ जाएंगे। इसी को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग ने पहले ही तैयारियां मुकम्मल करनी शुरू कर दी है।
शुक्रवार को सीएमओ डॉ. आलोक वर्मा अटरिया स्थित हिंद मेडिकल कॉलेज पहुंचे, जहां पर प्रशासन से सुविधाएं बढ़ाने पर मंत्रणा की। सीएमओ ने बताया कि अभी अस्पताल में 30-30 बेड के दो आइसोलेशन वार्ड बना रखे हैं। पांच वेंटीलेटरों की व्यवस्था है, लेकिन अब कोरोना मरीजों को भर्ती करने के लिए 200 बेड बनाए जाएंगे। 100 बेडों की जल्द ही व्यवस्था होने वाली है।
पांच वेंटीलेटर की जगह 20 किए जाएंगे, लेकिन 100 और बेड बनाने के लिए मेडिकल कॉलेज में भवन की तलाश की जाएगी। जगह चिन्हित होने के बाद 100 बेड के अलग-अलग आइसोलेशन वार्ड बनाए जाएंगे। सरकार के आदेश के बाद फिलहाल स्वास्थ्य विभाग ने हिंद अस्पताल को अधिग्रहण कर लिया है। कोरोना महामारी का अंत न होने तक विभाग केे अंडर में रहेगा।
सुविधाओं और अन्य व्यवस्थाओं की निगरानी के लिए अस्पताल में स्वास्थ्य विभाग की ओर से एक मेडिकल अफसर की तैनाती की जाएगी। जल्द ही काम शुरू होने जा रहा है।
अस्पताल में ही रोका जाएगा स्टाफ
कोरोना मरीजों के लिए बेड और वेंटीलेटरों को बढ़ाने के साथ हिंद अस्पताल के स्टाफ को मरीजों की देखरेख के लिए दिन और रात में ही रोकने की व्यवस्था की जाएगी। इसके लिए स्टाफ की रहने, खाने का इंतजाम भी विभाग की ओर से होगा।
सीएमओ ने इलाज के साथ बचाव की दी ट्रेनिंग
शुक्रवार को हिंद अस्पताल पहुंचे सीएमओ ने यहां के स्टाफ में शामिल डॉक्टर, नर्सों को कोरोना मरीजों के इलाज की बारीकियां समझाईं। बताया कि मरीज का कैसे इलाज करना है, इसके साथ ही खुद को संक्रमण से बचाने के लिए क्या-क्या सावधानियां बरतनी हैं।
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