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महाशिवरात्रि विशेषः नूर फातिमा शिव मंदिर का निर्माण कराकर पेश कर रहीं गंगा-जमुनी तहजीब की मिसाल

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी Published by: स्‍वाधीन तिवारी Updated Fri, 21 Feb 2020 11:50 AM IST
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भोले-भंडारी को जलाभिषेक करतीं नूर फातिमा
भोले-भंडारी को जलाभिषेक करतीं नूर फातिमा - फोटो : अमर उजाला।

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न नमाज आती है मुझको न वजू आता है, सजदा कर लेता हूं जब सामने तू आता है...। शिव की नगरी काशी को यूं ही नहीं गंगा-जमुनी तहजीब का शहर कहा जाता है। कबीर, रैदास और तुलसी की नगरी में अल्लाह और शिव की साथ-साथ आराधना की जाती है। हम बात कर रहे हैं डीरेका के गणेशपुर की रहने वाली नूर फातिमा की।
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सुबह की नमाज के साथ ही भोलेनाथ का जलाभिषेक करना नूर फातिमा के जीवन का हिस्सा बन चुका है। जहां हर दिन वह शिव के धाम में शीश नवाती हैं वहीं हर दिन अल्लाह को याद करना नहीं भूलती हैं।
महाशिवरात्रि पर महादेव की पूजा का अवसर भी उनके लिए बेहद खास होता है। काशी में शिव हैं तो कण-कण में ईश्वर की मान्यता को नूर फातिमा ने कुबूल कर लिया है। उनकी हर सुबह की शुरुआत नमाज के साथ हर-हर महादेव के साथ होती है।

गणेशपुर कालोनी में एक मुस्लिम के घर में मंदिर बाहर के लोगों के लिए अनोखा होगा, लेकिन कालोनी के लोगों के लिए आस्था का केंद्र है। पेशे से वकील नूर फातिमा का कहना है कि 2004 में संयोग से भगवान शिव के पूजा की शुरुआत हुई जो आज जीवन का हिस्सा बन चुकी है। लखनऊ की रहने वाली नूर फातिमा के पति रेलवे में पोस्टेड थे और वह शादी के बाद वाराणसी आ गईं।
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