रामायण में इस नदी का जिक्र, अयोध्या में प्रवेश से पहले भगवान राम ने इस नदी को किया था पार, अब अस्तित्व बचाने को जूझ रही

अमर उजाला नेटवर्क, जौनपुर Updated Tue, 16 Jun 2020 11:06 AM IST
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सई नदी में कम हो रहा पानी।
सई नदी में कम हो रहा पानी। - फोटो : अमर उजाला।

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उत्तर प्रदेश के जौनपुर जिले में ऐतिहासिक और पौराणिक महत्व के कई स्थल हैं, जिनसे लोगों की आस्था जुड़ी है। सई नदी भी इनमें से एक है। वनवास से लौटते समय श्रीराम ने अयोध्या में प्रवेश से पहले सई नदी को पार कर गोमती में स्नान किया था, गोस्वामी तुलसीदास ने रामचरित मानस में भी इसका उल्लेख किया है कि सई उतर गोमती नहाए, चौथे दिवस अवधपुर आए...।
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सई-गोमती का यह संगम तट जिले के सिरकोनी ब्लॉक में राजेपुर के पास है, जहां हर वर्ष भव्य मेला भी लगता है। रामायणकालीन सई नदी उपेक्षा की शिकार है। सफाई और सरंक्षण के अभाव में सिसकती नदी एक नाले में तब्दील होती जा रही है। वर्तमान में उसमें नाम मात्र का ही पानी शेष है, जो काला पड़ता जा रहा है।
हरदोई जिले से निकलने वाली सई नदी प्रतापगढ़ की सीमा से लगे बालामऊ गांव से जिले में प्रवेश करती है। वहां से सुजानगंज, बक्शा, सिकरारा, सिरकोनी और जलालपुर के मनहन, बिबनमऊ, जलालपुर कस्बा, लालपुर, तालामझवारा, उदपुर गांव को पार करते हुए सिरकोनी ब्लाक के राजेपुर त्रिमुहानी के पास गोमती नदी में जाकर रामेश्वरम मंदिर के पास मिल जाती है। जिले में यह नदी करीब 70 किलोमीटर की दूरी तय करती है।
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