स्कूटी पर मां को बिठाकर गुरुग्राम से प. बंगाल चली बहादुर बिटिया, रास्ते में मदद न मिलने पर निराश श्रीलेखा को भाया बनारसी अंदाज

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी Updated Fri, 29 May 2020 02:41 PM IST
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अखरी बाईपास पर रुकी पश्चिम बंगाल की श्रीलेखा
अखरी बाईपास पर रुकी पश्चिम बंगाल की श्रीलेखा - फोटो : amar ujala

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लॉकडाउन में गुरुग्राम में फंसे परिवार की बिटिया अपनी मां को लेकर पश्चिमी बंगाल का सफर स्कूटी से तय करने को ठान ली। परिवार को ऑटो पर बैठाकर और खुद मां को अपनी स्कूटी पर बैठाकर चल दी। रास्ते में लोगों से मदद न मिलने पर निराश श्रीलेखा को जब बनारस के लोगों का प्रेम भाव मिला, तो उसकी आंखे भर आईं। 
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वाराणसी के अखरी बाईपास पर पहुंची सोलह वर्षीय श्रीलेखा ने बताया कि उसने बताया कि 25 मई की शाम स्कूटी पर अपनी मां काजल को बैठाकर घर के कुछ सामान के साथ रवाना हुई। तीन दिन में बनारस पहुंचीं हूं।
बताया कि इन तीन दिनों के सफर में काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ा। खाने की समस्या तो थी ही साथ सबसे ज्यादा रात में ठहरने की दिक्कत हो रही है। लोग अपने घरों के सामने रुकने नहीं देते थे। उसने बताया कि काशी के लोगों को देखकर लगा कि अभी भी कुछ लोग हैं जो लोगों का दुख-दर्द समझते हैं। बताया कि आगे का सफर तीन दिन में पूरा हो जाएगा।
श्रीलेखा मूल रूप से सुंदरवन चौबीस परगना पश्चिम बंगाल की निवासी हैं। लॉकडाउन की वजह से पूरा परिवार गुरुग्राम में फंसा था। गुरुग्राम में बच्चों के केयर टेकर का कार्य करती हैं और उनकी मां लोगों के घर में घर काम करती थी। इधर लॉकडाउन में काम मिलना बंद हो गया। पास में रखे पैसे भी खत्म होने लगे। ऐसे में किसी तरह घर पहुंचने की ठान ली।
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