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बसंती की आवाज और सुष्मिता के नृत्य ने बढ़ाई सरस मेले की मिठास

Dehradun Bureauदेहरादून ब्यूरो Updated Tue, 25 Feb 2020 10:06 PM IST
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श्रीनगर सरस मेले मे कथक की प्रस्तुति देते कलाकार                                                         फोटो---- संवाद
श्रीनगर सरस मेले मे कथक की प्रस्तुति देते कलाकार फोटो---- संवाद - फोटो : SHRINAGAR
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सरस मेले में लोकगायिका बसंती बिष्ट के जागरों ने जहां मेले में पहाड़ी संस्कृति का रंग घोला वहीं कत्थक नृत्यांगना सुष्मिता घोष ने अपनी प्रस्तुति से लोगों को आनंदित किया। सरस मेले में दोनों ही कलाकारों ने अपनी प्रस्तुति से लोगों को बांधे रखा।
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सरस मेले की पहली सांस्कृतिक संध्या का पद्मश्री बसंती बिष्ट और साथी कलाकारों ने जागर गायन शैली में पंडवानी के साथ शुरुआत की। सांस्कृतिक दल गढ़ सृष्टि लोक कला समिति ने नंदादेवी जात की झांकी और थड़िया व चौंफला नृत्य प्रस्तुत किए। इसके बाद कत्थक नृत्यांगना सुष्मिता घोष एवं साथी कलाकारों ने कथा गति की प्रस्तुति दी। कथागति में कत्थक नृत्य के साथ कथा वाचन प्रस्तुतिकरण की मीमांसा करते हुए बेहतरीन ढंग से कत्थक नृत्य की कई विधाओं का प्रस्तुतीकरण किया गया। कत्थक की इस यात्रा में फिल्मों के प्रभाव को भी नृत्य में परोसा गया। इस अवसर पर बताया गया कि कथा गति कथावाचन के विकास को कहा जाता है। मुगल ए आजम से लेकर बाजीराव मस्तानी जैसी फिल्मों में इस शैली को प्रस्तुत किया गया है। इसके अलावा विकासखंड कल्जीखाल के महिला मंगल दलों ने मांगल गान प्रस्तुत किए।
सरस मेले में काश्तकारों को सिखाए खेती के गुर
श्रीनगर। दस दिवसीय सरस मेले के दूसरे दिन उद्यान विभाग की ओर से गोष्ठी का भी आयोजन किया गया, जिसका शुभारंभ मुख्य विकास अधिकारी हिमांशु खुराना ने किया। जीआईएंडटीआई मैदान में मंगलवार शाम आयोजित गोष्ठी में जिला उद्यान अधिकारी नरेंद्र कुमार ने बताया कि पौड़ी जिले में भौगोलिक एवं जलवायु विविधता की वजह से औद्यौनिक फसलों की असीम संभावनाएं हैं। काश्तकार बेमौसमी सब्जी व फलों का अधिक से अधिक उत्पादन कर अधिक लाभ प्राप्त कर सकते हैं। उन्होंने बताया कि पॉली हाउस में सब्जियों की खेती का उत्पादन कर दो से पांच गुना फसल उगा सकते हैं। उद्यान विशेषज्ञ कोटद्वार डा. शंभूनाथ मिश्रा ने सेब की पौध को नर्सरी में तैयारी करने, सेब प्रजाति और उत्पादन की जानकारी दी। फल संरक्षण केंद्र के प्रभारी मंशाराम छिमटवाल ने प्री हार्वेस्ट व पोस्ट हार्वेस्ट के माध्यम से लंबे समय तक फलों के संरक्षण का सुझाव दिया। उन्होंने कहा कि जो फल उच्च गुणवत्ता में कम हो, उनका प्रसंस्करण बाजार में अच्छी कीमत मिल सकती है। मौन पालन प्रशिक्षक नागेंद्र चौधरी ने पहाड़ी व घाटी वाले क्षेत्रों की मधुमक्खियों की प्रजातियों के बारे में बताया। गोष्ठी में पीएल आर्य व शैलेंद्र थपलियाल ने भी जानकारी दी।
---मेले में आज
पूर्वाह्न 11 बजे विकास खंड कोट के महिला मंगल दलों की प्रस्तुति
अपराह्न 2 बजे कृषि विभाग की गोष्ठी
शाम 6 बजे पंजाब के कलाकारों की नृत्य प्रस्तुति
शाम 7 बजे इंदिरा नायक की ओर से सूफी संगीत की प्रस्तुति
श्रीनगर सरस मेले मे कथक की प्रस्तुति देते कलाकार                                                         फोटो---- संवाद
श्रीनगर सरस मेले मे कथक की प्रस्तुति देते कलाकार फोटो---- संवाद- फोटो : SHRINAGAR
श्रीनगर सरस मेले मे कथक की प्रस्तुति देते कलाकार                                                         फोटो---- संवाद
श्रीनगर सरस मेले मे कथक की प्रस्तुति देते कलाकार फोटो---- संवाद- फोटो : SHRINAGAR
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