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तीन मार्च को गैरसैंण में विधानभवन घेरेगी उक्रांद

Dehradun Bureau देहरादून ब्यूरो
Updated Sun, 23 Feb 2020 10:09 PM IST
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श्रीनगर में पत्रकारों से वार्ता करते उक्रांद के केंद्रीय संरक्षक त्रिवेन्द्र सिंह पंवार।
श्रीनगर में पत्रकारों से वार्ता करते उक्रांद के केंद्रीय संरक्षक त्रिवेन्द्र सिंह पंवार। - फोटो : SHRINAGAR

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प्रदेश की पूर्णकालिक राजधानी गैरसैंण को घोषित करने की मांग के लिए उक्रांद तीन मार्च को विधानसभा भवन गैरसैंण का घेराव करेगा। उक्रांद आंदोलन के जरिए सरकार पर इस संबंध में बजट सत्र के दौरान सदन में प्रस्ताव पारित करने का दबाव बनाएगा।
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गैंरसैंण आंदोलन व विधानसभा क्षेत्रों के परिसीमन सहित अन्य मुद्दों पर उक्रांद के गढ़वाल मंडल के पदाधिकारियों और केंद्रीय कार्यकारिणी के पदाधिकारियों का यहां दो दिवसीय सम्मेलन आयोजित किया गया, जिसमें 16 प्रस्ताव पारित किए गए। सम्मेलन के पश्चात पत्रकारों से वार्ता करते हुए उक्रांद के केंद्रीय संरक्षक त्रिवेंद्र पंवार ने गैरसैंण को ग्रीष्मकालीन राजधानी बनाने की वकालत करने वालों की भर्त्सना की। उन्होंने कहा कि गैरसैंण को राजधानी के बजाय पिकनिट स्पॉट बनाया जा रहा है। इसके अलावा उन्होंने फॉरेस्ट गार्ड भर्ती परीक्षा में आए गड़बड़ी के मामले में भी रोष जताते हुए रिटायर्ड जज के नेतृत्व में गठित कमेटी से जांच कराए जाने की मांग की। शराब सस्ती किए जाने पर भी पंवार ने आक्रोश जताया। उन्होंने बताया कि 26 फरवरी को ब्लॉक, तहसील व जिला स्तर पर स्थायी राजधानी की मांग के लिए धरना-प्रदर्शन किया जाएंगे। इस अवसर पर केंद्रीय संरक्षक लताफत हुसैन, एपी जुयाल, महामंत्री किशोरीनंदन डोभाल, देवेंद्र चमोली, जयप्रकाश उपाध्याय, अरुण शाह, राजेेंद्र नौटियाल, सूरत सिंह झिंक्वाण व राजेश्वरी रावत आदि मौजूद थे। अध्यक्षता मनमोहन पंत व संचालन गणेश भट्ट ने किया।

---यह प्रस्ताव हुए पारित
पदोन्नति में आरक्षण का प्रावधान खत्म किया जाए।
जनसंख्या के बजाय भौगोलिक आधार पर हो विधान सभा क्षेत्र का परिसीमन।
संविदा नियुक्ति की व्यवस्था खत्म कर दी जाए नियमित नियुक्ति।
उत्तराखंड में पानी और बिजली की निशुल्क आपूर्ति की जाए।
जिला विकास प्राधिकरण समाप्त किया जाए।
देवस्थानम् अधिनियम को समाप्त किया जाए।
वक्फ की परिसंपत्तियों को अतिक्रमण से मुक्त किया जाए।
केंद्र व राज्य सरकार की परियोजनाओं में स्थानीय लोगों को 70 प्रतिशत रोजगार दिया जाए।
वर्ष 2018 में स्थायी राजधानी की मांग के लिए धरना प्रदर्शन कर रहे आंदोलनकारियों पर दर्ज मुकदमें वापस हो।
जमीनों की खरीद-फरोख्त पर अंकुश लगाने के लिए अनुच्छेद 371 लागू किया जाए।

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