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प्यार मिले मेरे जीवन को

Anonymous UserAnonymous User Updated Thu, 11 Apr 2019 10:55 PM IST

बहुत हुआ कुंठा में जीना प्यार मिले मेरे मन को
तड़प रहा हूँ विरह अग्नि में उर मिल जाये चंदन को
सावन को बादल मिल बैठे चातक स्वाति बूंद मिले
उसी तरह इस सूने पन में चैन मिले मेरे जीवन को

विरह अग्नि का मारा ये दिल मिल जाये निज सावन को
प्रेम यज्ञ में आहुति खातिर बच जाये कुछ तर्पन को
गुलशन को पतझड़ के पीछे ऋतुपति जैसे मिलता है
उसी तरह इस सूनेपन में खुशी मिले मेरे जीवन को

सारी चाह लुटाई तुझ पर बचा नही कुछ अर्पन को
सारी आकांक्षा मिट बैठी बची नही अंतर्मन को
जिस तरह खुश्बू चंदन से पल पल आकर मिलती है
उसी तरह इस सूने पन से आश मिले मेरे जीवन को

तेरे लिये मीरा हो जाऊँ तू मिल जाये वंदन को
तुझसे बढ़के क्या होगा तब जीवन मेरे नंदन को
बनकर सूफ़ी गली गली में दर्द में चाहत हँसके गाऊँ
उसी तरह इस सूने पन में गीत मिले मेरे जीवन को

रांझा अपनी हीर को पाये मीरा अपने मोहन को
धन की आशा लगाने वाले पा जाये सब कुंदन को
धरती हरियाली को पाये प्रातः चकवा चकवी को
उसी तरह इस सूने पन में प्यार मिले मेरे जीवन को

- ऋषभ तोमर

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