कश्मीर में विवाद पैदा करने में पाकिस्तान का हाथ, कश्मीरियों को बनाया था ढाल

एजेंसी, इस्लामाबाद Updated Sat, 17 Oct 2020 02:44 AM IST
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सांकेतिक तस्वीर - फोटो : iStock

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पाकिस्तान के एक पूर्व मेजर जनरल ने अपनी किताब में माना है कि कश्मीर में विवाद पैदा करने के पीछे पाकिस्तान का हाथ है। इसके लिए पाकिस्तान ने कश्मीरियों को ही ढाल बनाया है।
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भारत की आजादी के बाद कश्मीर हथियाने के मंसूबे को लेकर अभियान की कमान संभालने वाले तत्कालीन पाकिस्तान के मेजर जनरल अकबर खान ने अपनी किताब ‘रेडर्स इन कश्मीर’ में यह खुलासा किया है।
उन्होंने लिखा 26 अक्तूबर, 1947 को पाकिस्तानी सुरक्षाबलों ने बारामूला पर कब्जा किया, जहां 14,000 के मुकाबले सिर्फ 3,000 लोग जिंदा बचे थे। जब पाकिस्तानी सेना श्रीनगर से 35 किमी दूर रह गई, तब महाराजा हरि सिंह ने भारत सरकार से कश्मीर के अधिग्रहण के लिए पत्र लिखा।

किताब में बताया गया है कि पाकिस्तान ने कश्मीर हथियाने के लिए एड़ी चोटी का जोर लगा दिया, मगर भारतीय सैनिकों ने वक्त रहते पाकिस्तानी सेना के मंसूबों पर पानी फेर दिया।

अकबर खान ने लिखा है कि 1947 में सितंबर की शुरुआत में तत्कालीन मुस्लिम लीग के नेता मियां इफ्तिखारुद्दीन ने उनसे कहा था कि वह कश्मीर अपने कब्जे में लेने की योजना बनाएं।

आखिरकार, मैंने योजना बनाई, जिसका नाम ‘कश्मीर में सैन्य विद्रोह’ रखा गया। हमारा मकसद था आंतरिक तौर पर कश्मीरियों को मजबूत करना, जो भारतीय सेना के खिलाफ विद्रोह कर सकें। यह ध्यान में रखा गया कि कश्मीर में भारत की ओर से किसी तरह की कोई सैन्य मदद नहीं मिल सके।

घाटी में घुसपैठ की योजना बनाने में पाकिस्तानी पीएम भी
अकबर खान ने लिखा, मुझे लाहौर में तत्कालीन प्रधानमंत्री लियाकत खान से मिलने को कहा गया। मैं वहां पहुंचा, मगर पहले मैं प्रांतीय सरकार के सचिवालय में एक सम्मेलन में गया। आयोजन पंजाब सरकार में मंत्री रहे सरदार शौकत हयात खान के दफ्तर में हुआ।

मैंने देखा कि मेरी प्रस्तावित योजना की प्रति किसी के हाथ में थी। 22 अक्तूबर को पाकिस्तानी सेना ने सीमा पार की और 24 अक्तूबर को मुजफ्फराबाद और डोमेल पर हमला किया, जहां डोगरा सैनिकों को पीछे हटना पड़ा। अगले दिन हम श्रीनगर रोड पर निकले और फिर उरी में डोगराओें को पीछे हटाया। 27 अक्तूबर को भारत ने कश्मीर में सेना भेज दी।

सैनिकों के बजाय आदिवासियों से कराई जाए घुसपैठ
पाकिस्तान के पीएम ने 27 अक्तूबर की शाम हालात के मद्देनजर लाहौर में बैठक बुलाई। इसमें तत्कालीन रक्षा सचिव और बाद में पाकिस्तान के गवर्नर जनरल रहे कर्नल इसकदर मिर्जा, महासचिव चौधरी मोहम्मद अली, फ्रंटियर प्रांत के मुख्यमंत्री अब्दुल कयूम खान, पंजाब के सीएम नवाब मामदोत, ब्रिगेडियर स्लायर खान और मैं था।

बैठक में मैंने प्रस्ताव दिया कि कश्मीर में घुसपैठ के लिए सेना को इस मकसद के लिए इस्तेमाल नहीं करना चाहिए। सिर्फ आदिवासियों को वहां भेजा जाए। अकबर खान ने लिखा है कि पाकिस्तानी सेना ने कश्मीर में घुसपैठ के लिए आदिवासियों की मदद ली। 28 अक्तूबर, 1947 को अकबर खान को पाकिस्तान के पीएम का सैन्य सलाहकार बना दिया गया।
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