बीजिंग अपनी दक्षिण चीन सागर नीति को हिमालय की ओर बढ़ा रहा, टॉर्सा नदी के किनारे बसाया गांव

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बीजिंग Updated Mon, 30 Nov 2020 12:58 AM IST
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चीन का झंडा
चीन का झंडा - फोटो : Social media

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चीन लगातार विस्तारवादी नीति पर चल रहा है। चीन ने जो दक्षिण चीन सागर में किया है, वही हिमालयी क्षेत्र में करने की रणनीति पर काम कर रहा है। चीन ने अक्तूबर में अपने राष्ट्रीय दिवस के समय टॉर्सा नदी के किनारे पहाड़ों पर एक नए गांव का निर्माण कार्य पूरा किया, जहां दो दर्जन नए घरों में करीब सौ लोगों ने चीन का झंडा उठाकर राष्ट्रगान गाकर राष्ट्रीय दिवस मनाया। यह गांव चीन-भूटान सीमा के पास बसाया गया है। 
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तिब्बत की एक आधिकारिक समाचार एजेंसी ने चाइना तिब्बती न्यूज के हवाले से बताया कि हम सभी ने यहां अपनी मातृभूमि का झंडा उठाया। यह निर्माण करीब एक मील भूटान क्षेत्र के अंदर हुआ है। उपग्रह तस्वीरों में इस गांव के निर्माण की तस्वीरें देखने को मिलीं।



बता दें कि जब अमेरिका समेत पूरी दुनिया कोरोना महामारी से जूझ रही है, चीन ने पड़ोसी देशों के साथ कई सैन्य मोर्चे खोल दिए हैं। वह पड़ोसियों के साथ सीमा का अतिक्रमण कर रहा है। इस अतिक्रमण में बीजिंग अपने सैन्य ताकत का इस्तेमाल कर रहा है। चीन के इस इरादे ने पूरे एशिया और वाशिंगटन में एक नए संकट की घंटी बजा दी है। चीन ने पूर्वी लद्दाख में भारतीय सैनिकों के साथ बढ़ रहे विवाद के एक हफ्ते के भीतर जापान के निकट अपनी पनडुब्बी तैनात कर दी। इसी बीच चीन के बमवर्षक विमान ताइवान के क्षेत्रीय हवाई क्षेत्र में गरज रहे थे। चीन ने एक साथ तीन मोर्चें पर अपनी सैन्य मोर्चों को खोल दिया। ऐसा करके चीन ने अपना इरादा साफ कर दिया।
 
दक्षिण चीन सागर में अमेरिकी हचचल बढ़ी 
खास बात यह है कि दक्षिण चीन सागर में चीन का मुकाबला करने के लिए अमेरिका ने भी इस क्षेत्र में अपनी सैन्य गतिविधियां बढ़ा दी हैं। अमेरिका ने दक्षिण चीन सागर के माध्यम से अमेरिकी युद्धपोतों को ताइवान की ओर रवाना किया है। अमेरिकी विदेश मंत्री माइक पोम्पिओ की  चीन ने शीर्ष राजनयिक यांग जीची से मिलने के बाद अमेरिका ने ताइवान को सैन्य मुद्दों के लिए समर्थन बढ़ाया है। उधर, चीन ने इस क्षेत्र में तनाव के लिए संयुक्त राज्य को दोषी ठहराया है। चीन ने अमेरिकी सेना पर नियमित रूप से उस क्षेत्र में हस्तक्षेप करने का आरोप लगाया, जहां उसके कोई क्षेत्रीय दावे नहीं हैं।

उधर, ताइवान के पास अपनी सैन्य गतिविधि को आगे बढ़ाते हुए बीजिंग ने दक्षिण चीन सागर में अपने दावों का विस्तार किया है। इस क्रम में वह ह दो नए प्रशासनिक क्षेत्रों को विकसित कर रहा है, जो यहां के द्वीपों और अन्य पड़ोसियों को नियंत्रित करने में सहायक होगा। 

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