चीन के लिए भारत की कूटनीतिक पहल बनी बेचैनी का सबब, पीएम मोदी के हर कदम पर

वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, बीजिंग Updated Sat, 22 Aug 2020 07:55 PM IST
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नरेंद्र मोदी-शी जिनपिंग
नरेंद्र मोदी-शी जिनपिंग - फोटो : File Photo

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सार

  • चीनी जानकारों की नजर भारत-जापान की बातचीत समेत मोदी के हर कदम पर
  • मोबाइल एप्स पर रोक, चीनी सामानों के बहिष्कार और सुरक्षा के कड़े उपाय से परेशान चीन

विस्तार

पूर्वी लद्दाख सीमा पर तनाव के बीच चीन को इस बात की खासी चिंता है कि आखिर भारत उसके खिलाफ और क्या क्या कदम उठाने जा रहा है। 59 चीनी मोबाइल एप्स पर रोक लगाने के अलावा चीनी सामानों के प्रति भारत का नकारात्मक रवैया भी चीन को परेशान कर रहा है और अब सितंबर में होने वाली जापान के साथ प्रस्तावित बातचीत को भी चीन बेहद गंभीरता से ले रहा है। चीनी मीडिया में छपने वाले जानकारों के लेखों और विश्लेषणों में इस बात की झलक साफ दिखाई देती है।
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्वतंत्रता दिवस के मौके पर लालकिले से जो भाषण दिया और सीमा विवाद के अलावा पड़ोसी मुल्कों को लेकर जो बातें कहीं, उसे चीनी जानकार बेहद गंभीरता से ले रहे हैं। ग्लोबल टाइम्स के एक लेख में ये कहा गया है कि अभी तक भारत ने जो किया, उससे ज्यादा अहम है कि भविष्य में और क्या कर सकता है।
शंघाई इंस्टीट्यूट फॉर इंटरनेशनल स्टडीज के विशेषज्ञ शाओ गेनशेन का मानते हैं कि मोदी ने किसी देश का नाम लिए बिना जिस तरह देश की संप्रभुता और आसपास के देशों की हरकतों की बात की, उसका सीधा मतलब चीन को समझना चाहिए और भारत के सख्त होते रुख को गंभीरता से लेना चाहिए।
दूसरी तरफ एक अन्य लेख में प्रधानमंत्री मोदी और जापान के प्रधानमंत्री शिंजो आबे के बीच सितंबर में होने वाली बातचीत के बारे में भी कई तरह से विश्लेषण किया गया है। लेख के मुताबिक जिस तरह भारत और चीन के बीच सीमा विवाद बढ़ा है, उसी तरह जापान और चीन के बीच भी सीमा को लेकर तनाव बढ़ गया है। ऐसे में भारत और जापान एक होकर चीन के खिलाफ रणनीति बनाने की कोशिश में लगे हैं।

शिंगुआ विश्वविद्यालय के नेशनल स्ट्रेटेजी इंस्टीट्यूट के निदेशक क्यीयान फेंग ने लिखा है कि भारत और जापान का चीन के खिलाफ एक मंच पर आना आसान नहीं होगा। हालांकि दोनों ही देश इन दिनों चीन के साथ सीमा विवाद और कोविड काल के दौरान चीन की विस्तारवादी कोशिशों के शिकार हैं। फिर भी चीनी सामानों के बहिष्कार और अपनी तमाम दूसरी कोशिशों से चीन पर दबाव बनाने की कोशिशों में जुटा भारत जापान को ऐसी ही कार्रवाई करने के लिए मजबूर करे, शायद ये मुमकिन नहीं।

उधर अन्य चीनी जानकारों का मानना है कि भारत कितनी भी कोशिश कर ले, उसके लिए चीन का बहिष्कार और चीनी सामानों पर रोक लगाना उल्टे भारत के लिए नुकसानदेह साबित होगा। भारत की मौजूदा अर्थव्यवस्था और अंदरूनी हालात ऐसे नहीं हैं कि वह खुद सारा कुछ कर सकता है और बगैर चीन की मदद के हर क्षेत्र में आत्मनिर्भर हो सकता है।

जाहिर है चीन के भीतर जिस तरह भारत की हर गतिविधि, हर कदम और हर रणनीति को गंभीरता से देखा जा रहा है, उससे ये भी साफ है कि चीन भारत को लेकर कुछ सहमा हुआ भी है और प्रधानमंत्री मोदी के संभावित कदमों को लेकर भी आशंकित है।
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