इंसानों की तरह ट्वीट-कविता लिख रही 'कृत्रिम बुद्धिमत्ता'

न्यूयॉर्क टाइम्स न्यूज सर्विस Updated Mon, 30 Nov 2020 09:04 AM IST
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छोटी मोटी तकनीकी सहायता के काम आने वाली कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) अब इंसानों की तरह रचनात्मक हो रही हैं किस्से कहानियां भी लिखने लगी हैं। इसी कड़ी में नए एआई सिस्टम जीपीटी-3 ने एक विशेषज्ञ की तरह सटीक पैराग्राफ लिखकर इंसानों के सामने नई चुनौती पेश की हैं। इसने अलग-अलग विषयों पर ऐसे ऐसे सटीक जवाब दिए हैं जिन्हें पढ़कर विशेषज्ञ भी अचंभित रह गए हैं।
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विशेषज्ञों की तरह लिखने में सक्षम
जीपीटी-3 इंसानों की तरह नया सिर्फ खुद ट्वीट, ईमेल और कविता लिख लेता है। बल्कि भाषा अनुवाद से लेकर कंप्यूटर प्रोग्रामों की कोडिंग तक कर देता है। इसमें यह काम कई महीनों तक डिजिटल किताबों, विकिपीडिया, ब्लॉक, सोशल मीडिया और इंटरनेट पर मौजूद अरबों खरबों शब्दों के विश्लेषण के जरिए अपनी प्राकृतिक भाषा तैयार करके सीखा है।


सैन फ्रांसिस्को स्थित एआई प्रयोगशाला में ओपनएआई कंपनी द्वारा बनाए इस सिस्टम पर जानकारों का कहना है कि यह प्रभावी मशीनों के आगाज की ओर बड़ा कदम हो सकता है।

नया एआई सिस्टम 'जीपीटी-3' : रचनात्मक पर लेख पढ़कर विशेषज्ञ भी हैरान
नए सिस्टम को अधिक दक्ष बनाने के लिए एक दफा कुछ चुनिंदा लोगों को आमंत्रित किया गया इनमें से 23 वर्षीय कंप्यूटर प्रोग्रामर मैक रिगले भी शुमार थे। उन्होंने अपना ध्यान इस बात पर रखा कि क्या यह सिस्टर अपने क्षेत्र के विशेषज्ञों की तरह लिख सकता है या नहीं। इसके लिए अगले ने इसे एक नामी मनोवैज्ञानिक स्कॉट बैरीका ऑफ मैन का नाम बता कर रचनात्मकता पर चर्चा करने के लिए कहा सवाल पूछा गया कि हम ज्यादा रचनात्मक कैसे हो सकते हैं।

इस पर जीपीटी-3 ने फॉरेन कॉफमैन की शैली में ही एक पैराग्राफ लंबा जवाब दिया। यह पैराग्राफ ट्विटर के जरिए खुद को कॉफमैन तक पहुंच गया। इसे पढ़कर वह बहुत चक्के रह गए और उन्होंने लिखा कि जीपीटी-3 ने बेहतर और सटीक जवाब दिया है।

लिख दिया स्मार्टफोन एप का कोड
सिलिकॉन वैली की एक डिजाइनर जॉर्डन सिंगर ने जीटीपी-3 को साधारण अंग्रेजी में स्मार्टफोन ऐप की परिभाषा बता कर, उसे बनाने का तरीका बताया। कुछ समय के दौरान के बाद जीटीपी-3 ने खुद इस कोड लिख दिया। एआई का यह व्यवहार बिल्कुल नया है। इसने खुद जीपीटी-3 के डिजाइनरों को भी हैरान कर दिया। अपने प्रशिक्षण के दौरान जीटीपी-3 ने 175 अरब पैरामीटरों को पहचाना है।

इंसानी दिमाग की तरह न्यूरॉन के जाल से तैयार
जीपीटी-3 न्यूरल नेटवर्क पर आधारित है। यह नेटवर्क इंसान ही मस्तिष्क में न्यूरॉन का जाल की तर्ज पर ही तैयार किया गया है। न्यूरल नेटवर्क बड़े पैमाने पर मौजूद डाटा के पैटर्न का सही पता लगाकर मस्तिष्क जैसा कौशल सीखता है।

बड़े पैमाने पर त्रुटिरहित
मानवीय भाषा की अनियमितता को समझने और मानव कौशल संभालने की दिशा में जीटीपी-3 बड़ा कदम है। यह बड़े पैमाने पर त्रुटि रहित सिस्टम है और पक्षपाती द्वेष फैलाने वाली भाषा भी हटा देता है।

10 में से 5 पैराग्राफ में संतुष्टिजनक जवाब देता है।

पर अभी सुधार की काफी गुंजाइश
एआई को इंटेलिजेंस लैब और ओपनएआई में वर्षों की मेहनत के बाद तैयार किया है। ओपनएआई को माइक्रोसॉफ्ट, गूगल और फेसबुक एक अरब डॉलर की फंडिंग दे रहे हैं। ओपनएआई के उपाध्यक्ष अमोदेई का कहना है कि इस तकनीक में अभी काफी सुधार की गुंजाइश है।

और चिंता भी: कहीं बन न जाए खतरा
फेसबुक एआई लैब का नेतृत्व करने वाली जेरोम पेसेंटी जीपीटी-3 को असुरक्षित बताया है। इस सिस्टम में महिला अश्वेतो, यहूदियों और होलोकास्ट पर नस्लीय और द्वेषपूर्ण भाषा में जवाब दिया था।

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